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                <title>आतंकवाद के विरूद्ध समन्वय जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र में दो पाकिस्तान से भेजे गए ड्रोन बरामद होने के बाद सुरक्षा व खूफिया एजेंसियों में खलबली मची हुई है। अभी कुछ दिन पूर्व पांच आतंकवादी एके-47 व अन्य विस्फोटकों सहित गिरफ्तार किए गए थे। जिला तरनतारन के गांव में बम बनाते वक्त हुए धमाके की घटना भी आतंकी गतिविधियों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/coordination-against-terrorism-is-necessary/article-10545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/coordination-against-terrorism-is-necessary.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र में दो पाकिस्तान से भेजे गए ड्रोन बरामद होने के बाद सुरक्षा व खूफिया एजेंसियों में खलबली मची हुई है। अभी कुछ दिन पूर्व पांच आतंकवादी एके-47 व अन्य विस्फोटकों सहित गिरफ्तार किए गए थे। जिला तरनतारन के गांव में बम बनाते वक्त हुए धमाके की घटना भी आतंकी गतिविधियों की एक कड़ी नजर रही है। यदि इन सभी कड़ियों को जोड़ा जाए तब आतंकी नेटवर्क पंजाब में फिर से सक्रिय होता नजर आएगा। भले ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्द्र सिंह ने ट्वीट कर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इन घटनाओं से अवगत करवाकर इन्हें गंभीरता से जांच करने की अपील की है लेकिन मुख्यमंत्री का यह ट्वीट इस बात का भी संकेत है कि हर राजनीतिक पार्टी अपना-अपना दामन बचाने का प्रयास करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने सुरक्षा मुद्दे पर ट्वीट कर जनता व मीडिया में यह साबित कर दिया है कि उन्होंने केंद्र को परिस्थितियों से अवगत करवाकर अपनी जिम्मेवारी को पूरी तरह निभाया है। विगत समय में केंद्र व राज्य सरकारों में किसी घटना के घटने पर विवाद हो रहा है। केंद्र व राज्य सरकारें एक दूसरे पर जानकारी न देने के आरोप लगाती रही हैं। ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह ने पिछले विवादों को कम करने का प्रयास भी किया है। फिर भी मामला केवल अपना बचाव करने का नहीं बल्कि राज्य व केंद्र सरकार के एकजुट होकर कार्यवाही करने का है। समन्वय अत्यावश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद पाकिस्तान, भारत को निरंतर युद्ध की धमकियां दे रहा है। संयुक्त राष्टÑ में भारत द्वारा दिए गए अमन शांति के संदेश के बावजूद इमरान आखिरी सांस तक युद्ध लड़ने की धमकियां दे गए। लेकिन परिस्थितियों से ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान सीधा युद्ध करने की बजाए अपने पंसदीदा तरीके आतंकवाद का ही इस्तेमाल करेगा। पंजाब सीमावर्ती राज्य होने के चलते पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को यहां से ज्यादा अंजाम देता है। पंजाब में हथियारों की बरामदगी व आतंकवादियों की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान ने अपनी पुरानी करतूतें फिर से दिखाना शुरू कर दी हैं। अब राज्य सरकार व केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाएं व सुरक्षा कार्यवाही में किसी भी प्रकार की कोई ढ़ील नहीं बरती जाए क्योंकि यहां किसी भी प्रकार की कोई भी तकनीकी भूल किसी बड़े नुक्सान का कारण बन सकती है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Sep 2019 21:24:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कश्मीर: धारा 35-ए की गुत्थी ठीक करना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और अधिकतम स्वायत्तता देने वाले अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिकता पर उठे प्रश्न की गुत्थी सुलझने की घड़ी निकट दिख रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय में गैर-सरकारी संगठन बी द सिटीजन्स द्वारा दायर जनहित याचिका के क्रम में यह सुनवाई न्यायालय की 3 सदस्यीय खंडपीठ ने शुरू की है। याचिका दायर करने वाली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/kashmir-it-is-necessary-to-fix-the-clutter-of-section-35-a/article-5197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/kashmir-section-35a.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और अधिकतम स्वायत्तता देने वाले अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिकता पर उठे प्रश्न की गुत्थी सुलझने की घड़ी निकट दिख रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय में गैर-सरकारी संगठन बी द सिटीजन्स द्वारा दायर जनहित याचिका के क्रम में यह सुनवाई न्यायालय की 3 सदस्यीय खंडपीठ ने शुरू की है। याचिका दायर करने वाली संस्था को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबंधित बताया जा रहा है। संस्था किसी भी दल या संगठन से जुड़ी हो यदि उसने जिन तथ्यों के साथ इस अनुच्छेद की संवैधानिकता पर सवाल उठाए हैं, तो इसकी वैधता पर फैसला होना ही चाहिए? याचिका में दावा किया गया है कि यह प्रावधान तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा 14 मई 1954 को एक आदेश जारी करके भारतीय संविधान का हिस्सा बनाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जो जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के दुरुपयोग का कारण बन रहा है। जबकि संविधान में कोई भी बदलाव केवल संसद को बहुमत से करने का अधिकार है। गौया यहां सवाल यह भी उठता है कि वाकई अनुच्छेद-35-ए अंसवैधानिक है, तो बीते 65 साल कांग्रेस समेत अन्य दलों की सरकारें भी केंद्रीय सत्ता में रहीं तो फिर उन्होंने इस धारा की व्याख्या को चुनौती क्यों नहीं दी? क्या ऐसा सांप्रदायिक तुष्टिकरण की दृष्टि से किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके उलट कांग्रेस व अन्य दलों के नेता कश्तीरियों को इस धारा के अंतर्गत और अधिक स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता देने की पैरवी करते रहे। इस प्रोत्साहन ने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया, नतीजतन पिछले 38 साल से यह राज आतंकी हिंसा का पर्याय बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अनुच्छेद पर सुनवाई की शुरूआत होने से पहले ही सुनवाई टालने की दृष्टि से घाटी में अलगाववादियों ने बंद का ऐलान कर दिया। पिछले साल जब इस धारा पर सुनवाई शुरू हुई थी तो तत्कालीन महबूबा मुफ्ती सरकार ने राज्य में कानून व्यस्था का हवाला देकर सुनवाई टलवा दी थी। किंतु अब राष्ट्रपति शासन के चलते सुनवाई टालना मुश्किल है। राज्य के दो प्रमुख दल महबूबा मुफ्ती की पीडीपी और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस 35-ए हटाए जाने के विरुद्ध हैं। जबकि भाजपा हटाने की प्रबल पक्षधर है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने तुष्टिकरण के चलते दो टूक मत देने की बजाय इस मुद्दे को न्यायालय के फैसले पर छोड़ दिया है। दरअसल यही वह धारा है, जिसके चलते एनसी और पीडीपी इस राज्य में आजादी के बाद से ही शासन करती चली आ रही है। कश्मीर की यही वह सियासत है, जो सरकारी धन से इन दलों को गुलछर्रे उड़ाने की वजह और अलगाववादियों के पोषण व सरंक्षण का आधार बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">महबूबा ने तो हाल ही में कहा भी है कि यदि 370 के साथ छेड़छाड़ की गई तो कश्मीर में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। दरअसल इस तरह की धमकियां महज इन्हीं के सत्ता में बने रहने का कारण है। भारत की आजादी के समय ही 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्य अंग बन गया था। यह ब्रिटिश और भारतीय संसद के विभिन्न कानूनों के दायरे में था। इस पर अंतरराष्ट्रीय कानून की सहमति भी बन गई थी, जो इस रियासत को पूर्ण रूप से भारत में विलय की श्रेणी में रखता है। हालांकि 15 अगस्त 1947 को जिस तरह से भारतीय संघ में अन्य रियासतों का विलय हुआ था, उस तरह से जम्मू-कश्मीर का विलय नहीं हो पाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल यहां के राजा हरिसिंह ने पाकिस्तान और भारत दोनों सरकारों के समक्ष 6 सूत्री मांगें रखकर पेचीदा स्थिति उत्पन्न कर दी थी। यह स्थिति इस कारण और जटिल हो गई, क्योंकि यहां के राजा हरिसिंह तो हिंदू थे, लेकिन बहुसंख्यक आबादी मुसलमानों की थी। इसी समय शेख अब्दुल्ला ने महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर भारत से आंग्रेजी राज और रियासत से राजशाही को समाप्त करने की दोहरी जंग छेड़ दी थी। शेख ने जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत को भी नकारते हुए भारतीय संघ में जम्मू-कश्मीर के विलय का अभियान चला दिया था। इस कारण हरिसिंह दुविधा में पड़ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल हरिसिंह कांग्रेस और महात्मा गांधी के आंदोलन से प्रभावित नहीं थे। इसलिए कश्मीर का भारत में विलय करना नहीं चाहते थे। दूसरी तरफ पाकिस्तान में विलय का मतलब, हिंदू राजवंश की अस्मिता को खत्म करना था। इस दुविधा से मुक्ति के लिए उनका इरादा कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पूरब का स्विट्रलेंड बनाने का था। किंतु उनके अरमानों को पंख मिलते इससे पहले ही 20 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी कबाइलियों ने कश्मीर पर हमला बोल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 19:28:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पंचायती चुनाव में उम्मीदवार का डोप टैस्ट जरूरी या नहीं, निर्णय आज</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के अनुराग अग्रवाल और चुनाव कमिशनर जग्पाल संधू करेंगे तय चंडीगढ़(अश्वनी चावला)। सितम्बर माह में होने वाली पंचायती चुनाव में उम्मीदवार का डोप टैस्ट जरूरी होगा या फिर नहीं इस संबंधी आज निर्णय हो सकता है। पंजाब सरकार सिर्फ एक नोटिफिकेशन करते हुए काम चला सकती है या फिर सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/whether-the-candidates-dope-test-is-necessary-in-the-panchayat-elections-the-decision-today/article-5079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/dope-test-news.jpg" alt=""></a><br /><blockquote>
<h1 style="text-align:center;">ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के अनुराग अग्रवाल और चुनाव<br />
कमिशनर जग्पाल संधू करेंगे तय</h1>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अश्वनी चावला)।</strong> सितम्बर माह में होने वाली पंचायती चुनाव में उम्मीदवार का डोप टैस्ट जरूरी होगा या फिर नहीं इस संबंधी आज निर्णय हो सकता है। पंजाब सरकार सिर्फ एक नोटिफिकेशन करते हुए काम चला सकती है या फिर सरकार को इस संबंधी एक्ट में संशोधन करना पडेÞगा, इस सवाल को लेकर ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के प्रिंसीपल सचिव अनुराग अग्रवाल और ्नराज्य चुनाव कमिशनर जग्पाल संधू बैठक करने जा रहे हैं, जिसके बाद पंजाब सरकार यह तय करेगी कि वह पंचायती चुनाव में डोप टैस्ट जरूरी करने जा रही है या फिर इस से कदम पीछे कर लिए जाएंगे।</p>
<h1 style="text-align:center;">देश के संविधान अनुसार हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार</h1>
<p style="text-align:justify;">पंचायती विभाग के मंत्री तृप्त राजिन्दर बाजवा ने पंचायती चुनाव में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए डोप टैस्ट जरूरी करने का घोषणा की गई थी, जिससे नशेड़ी चुनाव में जीत कर पंचायत व ब्लाक समितियों में न आ सकें। तृप्त राजिन्दर बाजवा द्वारा यह घोषणा करने के बाद अब इस मामले में कानूनी हल ढूंढने की कोशिश कर रही है, जिससे डोप टैस्ट को जरूरी किया जा सके।<br />
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का तर्क है कि इस मामले को कैबिनेट में लेकर जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि विभाग चाहे तो एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए डोप टैस्ट जरूरी किया जा सकता है परन्तु यहां राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि इस संबंधी एक्ट में संशोधन करना जरूरी है, जिससे इस मामले को लेकर कोई उम्मीदवार उच्च अदालतों में अपील न कर दे। जिससे चुनावी प्रक्रिया में देरी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि देश के संविधान अनुसार हर व्यक्ति का अधिकार है कि वह चुनाव लड़ सकता है, इस लिए किसी तरह का नशा करने वाले व्यक्ति से यह लोक संगीतकार अधिकार छीनने से पहले सरकार को जरूरी कानूनी प्रक्रि या अपनानी होगी, नहीं तो उच्च अदालतों में सरकार का एक नोटिफिकेशन टिक नहीं सकता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">नोटिफिकेशन द्वारा चल सकता है काम या फिर करनी पड़ेगी एक्ट में संशोधन, बेठक में होगा तय</h1>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में पिछले 2 सप्ताह से चर्चा के दौर में कई ओर सवाल भी बाहर आए हैं, इस लिए आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के प्रिंसीपल अनुराग अग्रवाल और राज्य चुनाव कमिशनर जग्पाल संधू बैठक करने जा रहे हैं। जहां कि इस मामले पर विचार करने के बाद आखिरी निर्णय लिया जाएगा कि पंचायती चुनाव में डोप टैस्ट जरूरी होगा या नहीं। यदि जरूरी किया जा रहा है तो उसके लिए एक्ट में संशोधन होगा या फिर सिर्फ एक विभागीय नोटिफिकेशन के साथ ही काम चलाया जा सकता है।</p>
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                <pubDate>Wed, 01 Aug 2018 04:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जरूरी था गठबंधन का विखंडन</title>
                                    <description><![CDATA[विष्णुगुप्त भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/it-was-necessary-to-break-the-coalition/article-4350"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kasmir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विष्णुगुप्त</strong></p>
<p>भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह से विफल साबित हुई थी।</p>
<p>भाजपा की यह सोच पूरी तरह से कमजोर साबित हुई कि पीडीपी के साथ गटजोड कर एक मजबूत और टिकाउ सरकार देकर कश्मीर में पार्टी का जनाधार विकसित किया जाये और खासकर पाकिस्तान को एक करारा जवाब दिया जाये। दुनिया मे यह स्थापित किया जाये कि कश्मीर में मजबूत लोकतंत्र कायम है, हमारा लोकतंत्र जन उम्मीदो को आधार देने के लिए कामयाब है।</p>
<p>यह सही है कि दुनिया को यह अहसास दिलाया गया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और आतंकवाद की हिंसा के बावजूद हम मानवाधिकार को सर्वश्रेष्ठ प्राथमिकता में शामिल कर रखे है पर आतंरिक तौर पर यह गठबंधन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था, पीडीपी और महबूबा मुफ्ती तो अपनी छवि चमकाने में लगी हुई थी, समय-समय पर उसके विधायाकों और पार्टी नेताओं के राष्ट्र विरोधी बोल सनसनी पैदा करते थे और भाजपा के जनाधार को ललकार कर उसे कमजोर भी करते थे।</p>
<p>महबूबा मुफ्ती की प्राथमिकता आतंकवाद को रोकने में कतई नही थी, कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण लगाने का काम करने का अर्थ, अपने जनाधार में आग लगाने जैसा है, कश्मीर में जो दल जितना देश को गाली देगा और जितना पाकिस्तान के पक्ष में दंडवत होगा वह उतना ही जनाधार विकसित करता है। इसीलिए कभी पीडीपी तो कभी नेशनल कांन्फ्रेंस भारत की एकता और अखंडता विरोधी बयान देकर सनसनी फैलाते हैं।</p>
<p>अब यहां प्रश्न उठता है कि अचानक गठबंधन तोडने के लिए भाजपा तैयार क्यों हुई? क्या मुफ्ती महबूबा सईद मनमानी पर उतर आयी थी? क्या मुफ्ती मोहम्मद सईद भाजपा की सभी बातें और भाजपा की सभी नीतियों को अनसुनी करती थी? क्या मुफ्ती महबूबा आतंकवाद को बढावा दे रही थी? रमजान के दौरान एक तरफा युद्ध विराम के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने विशेष दबाव बनाया?</p>
<p>कांग्रेस अपने आप को इस संकट की कसौटी पर किस तरह से नियंत्रित करेगी? राष्ट्रपति शासन के दौरान भाजपा अपने जमीदोंज हुए विचार और जनाधार को किस र्प्रकार से वापस लायेगी? आतंकवादी संगठन इस राजनीतिक परिस्थिति में किस प्रकार से हिंसक राजनीति को अंजाम देंगे, क्या आतंकवादी हिंसा कमजोर होगी? सबसे बडी बात पाकिस्तान की है, पाकिस्तान अपनी आतंकवादी मानसिकता का किस प्रकार से विस्फोट करता है? पाकिस्तान दुष्प्रचार की कूटनीतिक खेल-खेल सकता है, जिसका मुकाबला भारत सरकार को करना पडेगा।<br />
यह सीधे तौर पर भाजपा की विफलता है, भाजपा की राजनीतिक सोच की विफलता है।</p>
<p>गठबंधन की कोई सुखद परिणाम की उम्मीद थी नही। उम्मीद क्यों नहीं थी? उम्मीद इसलिए नही थी कि दोनो के विचार और चरित्र में कोई दूर-दूर तक समानता नहीं था। पीडीपी की सोच जहां अलगववादी के प्रति नरम थी वहीं आतंकवाद विरोध की है, धारा 370 विरोधी की है, समान नागरिक संहिता की पक्षधर है। ऐसे दो ध्रुव पर केन्द्रित पार्टियों के बीच गठबधन कोई मधुर कैसे हो सकता है?</p>
<p>सबसे बडी बात यह है कि भाजपा ने गलत सोच विकसित कर ली थी। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जो मिली थी वह स्वर्णिम सफलता पीडीपी के साथ गठबंधन करने के लिए नहीं मिली थी, भाजपा को स्वर्णिम सफलता पीडीपी के आतंकवादी समर्थक नीति को जमींदोज करने के लिए मिली थी, नेशनल कांन्फ्रेंस की बिगडैल बोल को जमींदोज करने के लिए मिली थी, आतंकवादियों का उसके मांद में जाकर सबक सिखाने के लिए मिली थी, पाकिस्तान को जैसे को तैसे स्थिति में जवाब देने के मिली थी। रमजान के अवसर पर एक तरफा युद्ध विराम का नाटक भाजपा के लिए भारी पड़ गया, आतंकवादियों ने अपनी शक्ति बढाई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि और उनके पराक्रम पर भी प्रश्न चिन्ह खडा हुआ था। नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे और प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें उनकी पाटी ने प्रस्तावित किया था तब उनकी अवधारणा क्या थी, उनके तेवर क्या थे, वे पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ किस प्रकार से दहाडते थे। वे कहते थे कि आतंकवादियों और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए देश को 56 इंच का सीना चाहिए, मनमोहन सिंह के पास 56 इंच का सीना नहीं है। नरेन्द्र मोदी यह भी कहते थे कि जब वे सत्ता मे आयेंगे तब आतंकवादियों और पाकिस्तान को सबक सिखायेंगे और पाकिस्तान भारत की ओर मुंह करने के पीछे सौ बार सोचेगा।</p>
<p>नरेन्द्र मोदी सत्ता में आये, प्रधानमंत्री की कुर्सी उन्हें मिल गयी। पर उनका 56 इंच का सीना कभी दिखा नहीं। आतंवादियों को जवाब देने में उनकी वीरता कहीं झलकी नहीं। पाकिस्तान पहले से भी अराजक और बेखौफ गया। पाकिस्तान आतंकवादियों को नियंत्रित करने, आईएसआई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नहीं दिखायी। सबसे बडी बात यह है कि नरेन्द्र मोदी बिन बुलाये पाकिस्तान चले गये। नवाज शरीफ के दावत खाने से उनकी छवि खराब हुई। जनता के बीच संदेश गया कि नरेन्द्र मोदी भी कांग्रेस की भूमिका में कैद हो गये हैं, कश्मीर और पाकिस्तान की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मोदी के पास भी कोई वीरतापूर्ण आत्म बल नही है। इतिहास भी यही कहता है कि जब-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ उदारता दिखायी है, तब-तब भारत की पीठ में पाकिस्तान ने छूरा भोका है। पाकिस्तान कोई वार्ता नहीं बल्कि शक्ति और हिंसा की भाषा ही समझता है।</p>
<p>भाजपा गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को कितना नुकसान होता? भाजपा अगर गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को अतुलनीय नुकसान होता, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की दिन-प्रतिदिन बढती धटना से देशभर में गुस्सा और आक्रोश था। विरोधी विचार धारा वाले लोग मोदी पर तो आतंकवाद के सामने घुटने टेकने और पाकिस्तान के सामने सर्मपण करने के आरोप तो लगाते ही थे पर राष्ट्रवादी खेमा जो नरेन्द्र मोदी और भाजपा की शक्ति के केन्द्र में है, भी कम आक्रोशित नहीं था। राष्ट्रवादी खेमे का आक्रोश ही भाजपा के लिए चिंता की बात थी। सबसे बडी भूमिका जम्मू संभाग ने निभायी है।</p>
<p>जम्मू संभाग ही भाजपा की शक्ति के केन्द्र मे है। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जम्मू संभाग की ही देन है। भाजपा की सभी सीटें जम्मू संभाग से मिली हुई है। लोकसभा की छह में से जो तीन सीटें भाजपा को मिली थी वह तीनों सीटे जम्मू संभाग की हैं। अगर भाजपा ने पीडीपी का गठबंधन समाप्त नहीं होता तो फिर जम्मू संभाग की राजनीति शक्ति भाजपा से दूर हो जाती। राष्ट्रपति शासन के दौरान आतंकवाद और पाकिस्तान परस्त राजनीति के पंख को मरोडना होगा, पाकिस्तान की आतंकवादी मानसिकता का भी सैनिक हल ढुढना होगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर भाजपा और मोदी को और भी नुकसान होगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 09:08:45 +0530</pubDate>
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                <title>आत्मविश्वास के लिए आत्म-चिंतन जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में जीव सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसके लिए इन्सान के अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, कपड़े-लत्ते, मां-बाप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/self-confidence-is-necessary-for-self-reflection-saint-dr-msg/article-3460"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/pita-ji-blessing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में जीव सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसके लिए इन्सान के अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, कपड़े-लत्ते, मां-बाप या टीचर-मास्टर, लेक्चरार की शिक्षा से हासिल नहीं हो सकता। इस आत्मबल को हासिल करने के लिए आत्मिक चिंतन जरूरी है और यह आत्मिक चिंतन केवल उस अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की भक्ति इबादत से हो सकता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो इन्सान मालिक का नाम जपा करते हैं, वही आत्मबल को हासिल कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मिक चिंतन केवल सुमिरन के द्वारा ही संभव है, सुमिरन करने से ही आत्मबल में वृद्धि हो सकती है और जब जीव में आत्मबल आ जाता है तो उसकी सहनशक्ति स्वयं ही बढ़ जाती है। आत्मबल से जीव का मन फिजूल की बातों में आना बंद कर देता है और आत्मा का मालिक से प्रेम बढ़ने लगता है। आत्मविश्वास के…ज्यों-ज्यों इन्सान सुमिरन करता जाता है आत्मा को खुराक मिलती जाती है और वो और अधिक बलवान होती जाती है। आप जी फरमाते हैं कि एक दिन आत्मा व परमात्मा का मेल जरुर होता है। इसलिए सुमिरन के पक्के बनो।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही आपमें कोई भी गुण है, आप किसी भी प्रकार की सेवा करते हो, मन का कोई भरोसा नहीं कि वह कब डावांडोल हो जाए। मन से लड़ने का एकमात्र उपाय केवल सुमिरन ही है, लेकिन इसके साथ अगर आप सेवा भी करते हो तो बहुत बड़ी बात है। सेवा से सुमिरन में मन जल्दी लगता है व उस मालिक की धुन को आपका मन जल्दी पकड़ने लग जाएगा। वह बुराइयों की तरफ जाना बंद कर देगा। जब उसकी आत्मा राम नाम की धुन को पकड़ते हुए मालिक के नजारे लूटेगी तो मन भी उसके साथ होगा। इसके बाद मन बुराई की तरफ नहीं, बल्कि अच्छाई की तरफ चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मन स्वाद का आशिक है। उसे जहां अधिक स्वाद मिलता है वह वहां दौड़ कर चला जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि राम नाम में जो लज्जत व स्वाद है वह दुनिया में कहीं पर भी नहीं है। इसलिए मालिक के नाम का सुमिरन, भक्ति, इबादत किया करो ताकि आप मालिक की खुशियों के काबिल बन सको।आप जी फरमाते हैं कि जब तक इन्सान को अंदर की खुशियां प्राप्त नहीं होती, इन्सान के चेहरे पर तब तक नूर नहीं आता। उसके गम, दु:ख, चिंता व परेशानियां दूर नहीं होती और वह मालिक की कृपादृष्टि के काबिल नहीं बन सकता। इसलिए भजन-सुमिरन-सेवा किया करो, सबके भले के लिए दुआ मांगो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2017 03:27:24 +0530</pubDate>
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                <title>कलियुग में सेवा व भक्ति करना बेमिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में सेवा करना, भक्ति-इबादत करना अपने आप में बेमिसाल है। हर इन्सान यह नहीं कर पाता। कभी मन हावी हो जाता है, मन शांत होता है तो कहीं न कहीं मनमते लोगों की सोहब्बत हो जाती है और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/meditation-is-necessary-in-todays-world/article-3429"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/dr.-pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में सेवा करना, भक्ति-इबादत करना अपने आप में बेमिसाल है। हर इन्सान यह नहीं कर पाता। कभी मन हावी हो जाता है, मन शांत होता है तो कहीं न कहीं मनमते लोगों की सोहब्बत हो जाती है और फिर से मन इन्सान को दबा देता है। जो इन्सान सत्संगी हो और अल्लाह, वाहेगुरु की चर्चा करे तो उसकी ही सोहब्बत करो। इस संसार में दिखने में बहुत से लोग अल्लाह, वाहेगुरु को याद करते हैं। उन्हें देखकर यूं लगता है कि इनके अलावा मालिक से अधिक प्यार करने वाला और कोई नहीं है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि जो दिखता है वही होता है। आज के युग में अधिकतर लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। लोगों को बुद्धू बना देते हैं, धीरे-धीरे बातों ही बातों में इन्सान को गुमराह कर देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तो ऐसे लोगों से बचो, सेवा करो व सुमिरन करो। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि किसी भी जीव को अपनी गलतियां, अपनी कमियां नजर नहीं आती बल्कि अधिकतर लोग अपनी कमियों को नजरअंदाज करके अल्लाह, वाहेगुरु, राम में कमी निकालते रहते हैं और एक न एक दिन उनका हश्र बुरा होना ही होता है। इन्सान अपनी कमियां नहीं निकालता। हमने बहुतों को देखा है, उनको अपनी कमी नजर नहीं आती। वह केवल उस मालिक की बुराइयां करने में लगा रहता है। मालिक ने ऐसा क्यों किया, मालिक ने वैसा क्यों किया इत्यादि। अरे भाई, मालिक के भक्त, मालिक के संत, पीर-फकीर तो बताते रहते हैं कि ऐसा करो, वैसा करो लेकिन इन्सान वैसा न करे तो फकीरों का इसमें क्या कसूर।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका काम तो सबको सच्ची शिक्षा देना व अल्लाह, वाहेगुरु के रास्ते पर चलाना है, लेकिन अगर इन्सान ही उनके दिखाए रास्ते पर न चले, मनमते करता रहे व अपनी मनमर्जी करता रहे तो आने वाले समय में दु:ख या परेशानियां आए व आपको बोझ उठाने पड़े तो दोष संतों पर लगाता है। संतों ने कुछ कहना थोड़े ही है। पता नहीं कितने ही लोग ऐसे हैं जिन्होंने खुद कुछ नहीं करना और अपना आरोप मालिक पर लगा देता है। लोग अपने आप में कोई सुधार करते नहीं लेकिन उस अल्लाह, वाहेगुरु, संत, पीर-फकीर को दोष देते रहते हैं। तो इन्सान कैसे भक्ति में अव्वल होगा, उस पर कैसे मालिक की कृपा होगी। इसलिए भाई, अपने अंदर की कमियों को निकालो। तभी आप मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बनोगे व तभी आप पर मालिक का रहमो-करम बरसेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Oct 2017 03:55:48 +0530</pubDate>
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                <title>प्रभु को पाने के लिए भक्ति जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा। </strong>पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान के अनेक नाम हंै, लेकिन वो सुप्रीम पॉवर यानी सबसे बड़ी ताकत एक ही है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानी जनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है। कोई भी जगह उससे खाली नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">हर जगह, कण-कण, जर्रे-जर्रे में उसकी मौजूदगी का अहसास होता है। जहां तक हमारी निगाह जाती है वहां तक वो मालिक, परमात्मा है और जहां तक निगाह नहीं जाती वो वहां तक भी है। दोनों जहानों यानी त्रिलोकी, जहां आत्मा जाती है और जहां शरीर नहीं जाता है, वहां भी वो है। ऐसा मालिक, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा, सुप्रीम पावर जो सारी सृष्टि को बनाने वाला है।  उसे देखा, महसूस किया जा सकता है लेकिन उसके लिए भक्ति करनी अति आवश्यक है। आप जी फरमाते हैं कि आप कोई भी काम-धन्धा करते हैं तो उसके लिए मेहनत भी जरूर करते हैं, क्योंकि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती। प्रभु को पाने के …किसान भाई अपने खेत में अच्छी फसल पैदा करने के लिए जमीन को साफ-सुथरा करते हैं, बुआई, निराई, गुड़ाई, बिजाई, खाद, स्प्रे हर तरह से उसे संभालते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीज डालते समय भी संभाल जरूरी है, क्योंकि ऐसी बीमारियां हैं जो धरती में ही लग जाती हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि पेड़-पौधे की अच्छी तरह से संभाल की जाए तो वो बहुत जल्दी लहलहाने लगता है। इसी तरह इन्सान को मनुष्य शरीर रूपी धरती तो मिल चुकी है, लेकिन  इसमें पाप-कर्म, ठगी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, नशों रूपी खरपतवार भी बहुत उगे हुए हैं। इस तरह यह धरती उपजाऊ होते हुए भी झाड़, फूस से भर गई है। धरती को साफ करने के लिए हल चलाना पड़ता है, उसी तरह इस शरीर रूपी धरती में भी जो घास-फूस, बुराई पैदा हो गई है उसे राम-नाम रूपी हल से साफ करना होगा। जैसे-जैसे घास-फूस साफ होता जायेगा, वैसे-वैसे राम-नाम का बीज फलता-फूलता जायेगा। जिस धरती रूपी शरीर में पहले से पाप-कर्म कम होते हैं या होते ही नहीं, उस धरती में बीज पड़ते ही पौधा जल्दी ही फलने-फूलने लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि बहुत-सी सत्संगों में ऐसा हुआ कि जिन लोगों ने नाम लिया उन्होंने बाद में बताया कि उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे उनकी आत्मा उड़ारी मार रही हो। ऐसा लगता है कि वो जहां बैठे हैं वहां नहीं, बल्कि आसमान में उड़ रहे हों। उनकी तरंगें उनसे उड़ते हुए बहुत दूर तक जा रही हों। वो लोग दुनियावी छल-कपट और विषय-विकार से बहुत दूर होते हैं। ऐसे लोगों पर राम-नाम का बीज जल्दी असर करता है, लेकिन आज इन्सान बहुत छली-कपटी हो चुका है। बेशक वह दूसरों के सामने कुछ भी जाहिर नहीं होने देता लेकिन उसे खुद तो पता ही होता है कि वह क्या है? इन्सान जब एकांत में बैठकर सोचता है तो उसे पता चलता है कि उसकी धरती में कितने पाप-कर्म के कांटे हैं। तो इसके लिए राम-नाम का स्प्रे करो तो सारे पाप-कर्म दूर हो जाएंगे और शरीर रूपी धरती पाक-पवित्र हो जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Oct 2017 05:21:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राम-नाम लेकर जाप करना अति जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सत्संग में आने से जहां जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाते हैं सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इन्सान अपने जीवन में यह धार ले कि मैंने घंटा-घंटा सुबह-शाम सुमिरन करना ही करना है, तो उसके आने वाले दुख, रोग, परेशानियां सब चुटकियों में खत्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/meditation-is-very-important-for-good-life/article-2243"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gurmeet-ram-rahim-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सत्संग में आने से जहां जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इन्सान अपने जीवन में यह धार ले कि मैंने घंटा-घंटा सुबह-शाम सुमिरन करना ही करना है, तो उसके आने वाले दुख, रोग, परेशानियां सब चुटकियों में खत्म हो जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान और-और कामों में दिन-रात लगा रहता है, रिश्तेदारी में, विवाह-शादी में जाना हो तो पांच-पांच दिन लगा देता है, कहीं बिजनेस-व्यापार के लिए जाना हो तो कई-कई दिन लग जाते हैं, लेकिन अगर इन्सान को सत्संग में आना हो तो एक दिन भी बहुत ज्यादा लगता है और कहता है कि मेरे पास समय नहीं है।</p>
<h1 style="text-align:center;">राम-नाम कैसे आपके दुखों को दूर करेगा?</h1>
<p style="text-align:justify;">इन्सान के पास सभी कामों के लिए समय होता है, लेकिन सत्संग में आने से जहां जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाते हैं, जीते-जी गम, दुख, दर्द, चिंता, टेंशन से मुक्ति मिल जाती है, उसके लिए इन्सान के पास टाईम नहीं है। इसी वजह से आज का इन्सान दुखी, परेशान है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब आपने राम का नाम लिया है, तो आप बहुत भागों वाले हैं, लेकिन राम-नाम लेकर उसका जाप करना भी जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप जाप नहीं करते, भक्ति नहीं करते, तो जैसे आपके पास घी, दूध, मक्खन, बादाम हों और आप उन्हें खाएं ही नहीं तो क्या आपमें ताकत आएगी? नहीं आएगी।</p>
<h1 style="text-align:center;">आदमी अंदर-बाहर से खुशियों से मालामाल हो जाता है</h1>
<p style="text-align:justify;">उसी तरह राम का नाम आपने ले तो लिया, लेकिन क्या कभी टाईम से भक्ति करते हो? चलते, बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए नाम का सुमिरन करो, सुबह-शाम आधा-आधा घंटा जाप किया करो, लेकिन अगर आप जाप नहीं करते, तो राम-नाम कैसे आपके दुखों को दूर करेगा? इसलिए राम-नाम लेकर उसका जाप करो, तो जन्मो-जन्मो के पापकर्म कट जाते हैं, जीते-जी गम, चिंता, परेशानियां नहीं सताती और रोगों का खात्मा होता है, शरीर तंदरूस्त होता है और आदमी अंदर-बाहर से खुशियों से मालामाल हो जाता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 23:22:36 +0530</pubDate>
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                <title>जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वैश्विक एकजुटता जरुरी</title>
                                    <description><![CDATA[2015 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में संपन्न जलवायु शिखर सम्मेलन में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा था कि वह कार्बन उत्सर्जन की समस्या को पैदा करने में अपनी भूमिका को स्वीकार करते हैं और इससे निपटने के लिए अपनी जिम्मेदारी को लेकर वह सजग भी है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/global-solidarity-is-necessary-on-the-issue-of-climate-change/article-854"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2015 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में संपन्न जलवायु शिखर सम्मेलन में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा था कि वह कार्बन उत्सर्जन की समस्या को पैदा करने में अपनी भूमिका को स्वीकार करते हैं और इससे निपटने के लिए अपनी जिम्मेदारी को लेकर वह सजग भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्चर्यजनक रूप से पेरिस जलवायु समझौते से हटने का ऐलान कर दिया है। उनका मानना है कि 2015 में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुआ यह वैश्विक समझौता अमेरिका के साथ न्याय नहीं करता। उनका विश्वास है कि पेरिस समझौता चीन तथा भारत जैसे देशों को फायदा पहुंचाता है। लिहाजा, उन्होंने पेरिस समझौते से हटने का फैसला किया है। ट्रंप के इस अनोखे रवैये की वजह से विश्वभर में उनकी आलोचना हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यह पहली दफा नहीं है, जब जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अमेरिका का रवैया एकपक्षीय व हतप्रभ भरा रहा है। इससे पहले भी, अमेरिका क्योटो प्रोटोकॉल (1997) पर अपनी भूमिका से मुकर चुका है। गौरतलब है कि तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने क्योटो संधि पर हस्ताक्षर किए थे मगर, क्लिंटन के बाद राष्ट्रपति बने जॉर्ज बुश ने इसे मंजूरी देने से मना कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार फिर, मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की पर्यावरणीय नीतियों को दरकिनार कर अमेरिका की दादागिरी तथा ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाली मानसिकता को उजागर करने की कोशिश की है। जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए, वैश्विक एकजुटता का होना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन, सवाल यह है कि अमेरिका, पेरिस जलवायु समझौते को स्वीकारने से मुकर क्यों रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि, विकसित देशों की सततपोषणीय विकास से इतर, एकाधिकारवादी औद्योगिक विकास की चाह ही जलवायु परिवर्तन के लिए प्रमुख रुप से जिम्मेवार रही है। दरअसल, ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए पेरिस सम्मेलन के अंतर्गत विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों की सहायतार्थ 2020 तक 100 बिलियन डॉलर का सलाना फंड बनाने की बात कही गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, अब विकसित देशों का कहना है कि केवल विकसित ही नहीं, अपितु विकासशील देशों को भी इसमें योगदान देना होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि पेरिस समझौता, अमेरिका की संपदा को दूसरे देशों में बांट रहा है। ट्रंप को डर है कि अमेरिका अगर इस समझौते को स्वीकार करता है तो, वहां 27 लाख नौकरियों का संकट उत्पन्न हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने, भारत के संबंध में यहां तक कह दिया कि भारत को उत्सर्जन कम करने के वास्ते करोड़ों रुपये बतौर सहायता मिलने वाले हैं। अगर, ट्रंप की आशंकाओं को कुछ क्षण के लिए अपनी जगह सही मान लिया जाए फिर भी, ट्रंप द्वारा ऐतिहासिक पेरिस समझौते को पूरी तरह नकार देना समझ से परे है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में पेरिस समझौते का विशिष्ट महत्व रहा है। इसमें, वैश्विक तापमान को कम करना, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन बनाकर सौर ऊर्जा पर बल देने तथा हर पांच साल में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करने जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य शामिल रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह, अमेरिका ने अपना रंग बदला है, उससे, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उद्देश्यों को आंशिक झटका जरुर लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन पर दो ध्रुवों पर बंटे विश्व को एक मंच पर लाने का एक बड़ा प्रयास 2015 के पेरिस सम्मेलन में किया गया। इस समझौते की प्रमुख बात यह रही थी कि इसमें जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने की जिम्मेदारी केवल विकसित या विकासशील नहीं अपितु, सभी देशों पर डाली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौते के बारे में उस वक्त कहा था कि ‘पेरिस समझौते में ना कोई विजेता है और ना ही किसी की हार हुई है, पर्यावरण को लेकर न्याय की जीत हुई है और हम सब एक हरे भरे भविष्य पर काम कर रहे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">पेरिस समझौते के तहत 190 से अधिक देशों ने वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का लक्ष्य रखा है। तापमान का यह स्तर इसलिए महत्व रखता है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2 डिग्री से ऊपर के तापमान से धरती की जलवायु में बड़ा बदलाव हो सकता है, जिसके असर से ग्लेशियर का पिघलना, समुद्र तल की ऊंचाई बढ़ना, सूखा, दावानल और बाढ़, भूस्खलन जैसी आपदाएं दस्तक दे सकती हैं। जलवायु परिवर्तन इस सदी की प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समस्या रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक के मुख्य अधिकारी रहे अर्थशास्त्री सर निकोलस स्टर्न ने जलवायु परिवर्तन के नतीजों की तुलना दो विश्व युद्धों के सामाजिक और आर्थिक परिणामों तथा बीसवीं सदी की आर्थिक मंदी के रुप में की थी। यह सच्चाई है कि वैश्विक ऊष्मण की वजह से, पृथ्वी पर उपस्थित सभी सजीवों का जीवन-यापन करना कठिन हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैश्विक ऊष्मण जैव-विविधता का सबसे बड़ा दुश्मन है। वैश्विक ऊष्मण की वजह से ही प्राकृतिक मौसम तथा जलवायु चक्र विच्छेद हो रहे हैं, जिस कारण पृथ्वी का कुछ हिस्सा, प्रतिदिन बाढ़, सूखा, भूस्खलन व अन्य जानलेवा आपदाओं से प्रभावित रहता है। इस वजह से, भौतिक तथा मानव संसाधन का बड़े पैमाने पर नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुखद यह है कि पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित तमाम सम्मेलनों तथा तरह-तरह के एक दिवसीय वार्षिक आयोजन के बावजूद, वायुमंडल के औसत तापमान में कमी आने की बजाय, बढ़ोतरी ही हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली सदी के दौरान, धरती का औसत तापमान 1.4 फारेनहाइट बढ़ चुका है। जबकि, अगले सौ साल के दौरान, इसके बढ़कर 2 से 11.5 फारेनहाइट होने के अनुमान हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकसित देशों का रवैया सदैव एकपक्षीय, ढुलमुल व स्वार्थ भरा रहा है। 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल के बाद से ही, कार्बन उत्सर्जन को लेकर विकसित देशों ने अपनी भूमिका से हटते हुए, विकासशील देशों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। जलवायु परिवर्तन एक ऐसा विषय है, जिससे पूरा विश्व समान रुप से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके, इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुटता की बजाय, वैश्विक स्तर पर राजनीति हो रही है। समझना होगा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं की विभीषिका का दंश कोई एक देश या महादेश नहीं, अपितु समस्त मानव समाज झेल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। भारत ने कार्बन उत्सर्जन में 2030 तक 33 से 35 फीसदी तक कटौती का एलान कर इस दिशा में पहल भी कर दी है। जरूरत इस बात की है कि पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपनी एकजुटता दिखाए। ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता की बजाय सौर, पवन, भूतापीय तथा जल ऊर्जा का विकास करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राहत योग्य बात होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, विभिन्न देशों को अपने नागरिकों के लिए एक साझा कार्यक्रम तैयार कर पर्यावरण संरक्षण के निमित्त अपनी प्रतिबद्धता दिखानी होगी। सकारात्मक पहल कर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटा जा सकता है। संसार की आठ अरब आबादी पूरी जिम्मेदारी के साथ छोटी-छोटी बातों पर अमल कर जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong>सुधीर कुमार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 21:55:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हरिरस से होती है आत्मा बलवान</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/meditation-is-necessary-to-meet-with-god/article-665"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/up-pita-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान कई बार अपने पिछले बुरे कर्मों की वजह से दु:खी रहता है। इन सब परेशानियों का जबाव सत्संग में आकर मिलता है। सत्संग में जब जीव चल कर आता है तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाया करते हैं। इन्सान जब सत्संग में मालिक का नाम लेता है और नाम लेकर उसका सुमिरन करता है। तो उसके अंदर का हरिरस आत्मा को मिलना शुरू होता है और जैसे जैसे हरिरस का पान लेना आत्मा शुरू करती है तो वह बलवान होना शुरू कर देती है। जैसे जरा-सा भी आत्मा को हरिरस मिलना शुरू होता है तो आत्मा मन को दबाना शुरू कर देती है। ज्यों-ज्यों आत्मा की शक्ति बढ़ती जाती है त्यों-त्यों सतगुरु के पे्रम में इन्सान आगे बढ़ता है। और मालिक की खुशियों का हकदार बनता चला जाता है। आप जी फरमाते हैं कि आत्मा की आवाज को सुनो आत्मबल पैदा करो, ताकि उस परमात्मा की खुशियों के लायक बन सको, उसकी तमाम बरकतों को हासिल कर सको। यह तभी संभव है यदि आप सुमिरन करो, सेवा करो, सत्संग सुन कर अमल करो। जब तक इन्सान सत्संग सुन कर अमल नहीं करता वह शातिर रहता है, उसका मन शातिराना चालें चलता रहता है। सत्संग सुना और अमल कर लिया तो मन की सारी चालेें नाकाम हो जाती हैं। इसलिए आत्मा की आवाज सुन कर अमल करो, संत पीर-फकीर आत्मबल बढ़ाने का तरीका, गुरूमंत्र जीव को बताते हैं। जो सुन कर अमल कर लिया करते हैं उन्हें अंदर बाहर किसी चीज की कोई कमी नहीं रहा करती।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2016 01:30:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मालिक को पाने के लिए आत्मविश्वास जगाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह होती है, जहां ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा होती हो, जहां पे इन्सान आकर बैठे तो उसे अपने मालिक, परमपिता, परमात्मा की याद आए, खुद में क्या गुण हैं, क्या अवगुण हैं, उनका पता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/confidence-is-necessary-to-meet-with-god/article-524"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह होती है, जहां ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा होती हो, जहां पे इन्सान आकर बैठे तो उसे अपने मालिक, परमपिता, परमात्मा की याद आए, खुद में क्या गुण हैं, क्या अवगुण हैं, उनका पता चले, भगवान के लिए रीत क्या है, सही रास्ता और कुरीत यानि गलत रास्ते कौन से हैं, इसका पता चले। सत् का मतलब है भगवान और उसकी चर्चा,<br />
जहां रीत-कुरीत का पता चले वो संग यानि साथ। मालिक को पाने के लिए इन्सान को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना चाहिए। सत्संग में मालिक के बारे में पता चलता है कि उसके अरबों नाम हैं, पर वो एक है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिस प्रकार पानी का नाम बदल देने से पानी का स्वाद या रंग नहीं बदलता।<br />
समाज में बहुत सी भाषाएं हैं, किसी भी वस्तु का नाम अलग भाषा में हो जाने से उस वस्तु के गुणों में परिवर्तन नहीं आता, तो सोचने वाली बात है कि भगवान का नाम बदल जाने से भगवान में अंतर कैसे आ जाएगा? वो एक है, एक था और एक ही रहेगा। आप जी फरमाते हैं कि मालिक को पाने के लिए इन्सान को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना चाहिए। जैसे-जैसे आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा, भगवान मिलेगा। बजाए फिजूल की बातों के क्यों न उन ख्यालों में मालिक के मूलमंत्र का अभ्यास करो, तो यकीनन आपके पाप-कर्म कटेंगे, आपके अंदर आत्मविश्वास आएगा और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। आप जी फरमाते हैं कि जिन लोगों का अंत:करण साफ हो जाता है, वो समाज के हर अच्छे-नेक क्षेत्र में तरक्की करते चले जाते हैं और वो कभी भी पीछे नहीं हटते। इसलिए आप भक्ति करो, सुमिरन करो। दुनियादारी के काम-धंधों में आपने सारी जिंदगी गुजार ली, क्या रिजल्ट निकला? बाल-बच्चे हो गए, बैंक-बैलेंस बन गया, लेकिन क्या पता वो बच्चे कब दुत्कार दें। हो सकता है कि आपकी बुजुर्ग अवस्था ऐसी हो कि आप चारपाई से न उठ पाओ, तब देखना कि कौन अपना और कौन पराया। अगर आपके खुद के नाम जमीन-जायदाद है, तो बच्चे आपके अपने बने रहेंगे, आपको लगेगा कि मेरा खून, मेरी बहुत सेवा कर रहा है। इसलिए अपने नाम जमीन-जायदाद जरूर रखो, क्योंकि आजकल सेवा के लिए मां-बाप नहीं बल्कि मायारानी चाहिए। अगर वो आपके नाम है, तो आपको अपने बच्चे बड़े अच्छे लगेंगे, क्योंकि उनको पता है कि बुजुर्ग जिसकी सेवा से खुश हो गए, उसको ही खजाना सौंप जाएंगे और अगर आपके पास कुछ भी नहीं है, तो उधर भी कुछ भी नहीं है। बीज नाश नहीं होता। आजकल अच्छे, नेक बच्चे भी होते हैं, जो बिना किसी गर्ज के सेवा करते हैं, लेकिन ज्यादातर गर्जी हैं। आप जी फरमाते हैं कि इस कलियुग में मेहनत करो, हिम्मत करो और मालिक का नाम जरूर जपो। क्योंकि भगवान एक ऐसा साथी है, जो कभी साथ नहीं छोड़ता। अपने-पराए सब पराए हो जाते हैं, लेकिन ईश्वर न इस दुनिया में और न ही अगले जहान में पराया होता है। एक बार जो उसे अपना बना लेता है, वो दोनों जहान में उसका हो जाता है और खुशियों से मालामाल करता रहता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Dec 2016 03:27:51 +0530</pubDate>
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