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                <title>Ayodhya Dispute - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Ayodhya Dispute RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अयोध्या विवाद : सुरक्षा के मद्देनजर सोशल मीडिया पर कड़ी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या फैसले से पहले सुरक्षा कड़ी अदालती फैसले को सभी स्वीकारें : रजा खान नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने से पहले देश भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसी के मद्देनजर आरएसएस चीफ मोहन भागवत से लेकर पीएम मोदी ने अयोध्या मामले पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ayodhya-dispute-2/article-11059"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/ayodhya-dispute.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">अयोध्या फैसले से पहले सुरक्षा कड़ी</h1>
<ul>
<li><strong>अदालती फैसले को सभी स्वीकारें : रजा खान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने से पहले देश भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसी के मद्देनजर आरएसएस चीफ मोहन भागवत से लेकर पीएम मोदी ने अयोध्या मामले पर अपने नेताओं को नसीहद दी है कि अयोध्या मामले पर बोलने पर परहेज रखे। उधर बरेली के सज्जादा नशीन दरगाह के प्रमुख तौसीफ रजा खान ने कहा है कि अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर उच्चतम न्यायालय का जो भी फैसला आए उसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। खान ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा अयोध्या-बाबरी मस्जिद पर उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर से पहले सुनाए जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश की शीर्ष अदालत इस पर जो भी निर्णय उसका सभी को आदर करते हुए स्वीकार करना चाहिए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">कानपुर के संवेदनशील इलाकों में कड़ी सुरक्षा</h1>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय का जल्द फैसला आने वाला है और राज्य के बेहद संवेदनशील जिले कानपुर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनंत देव तिवारी से यूनीवार्ता संवाददाता से गुरूवार को कहा कि शहर का अमन चैन बनाए रखने के लिए 204 संवेदनशील ,अति संवेदनशील स्थान चयनित किए गए हैं जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अयोध्या में पंच कोसी परिक्रमा शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या में बुधवार को चौदह कोसी परिक्रमा खत्म होने के बाद गुरूवार से पंचकोसी परिक्रमा शुरू हो गई। परिक्रमा का दायरा चौदह कोसी की अपेक्षा कम होने की वजह से अधिक भीड़ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है । इसी के चलते सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैैं। परिक्रमा की भीड़ के नियंत्रण के लिए जगह-जगह बैरियर लगा दिए गए हैं, जिनकी संख्या 60 से अधिक है। जोन व सेक्टर में बांटकर परिक्रमा पथ की निगरानी हो रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अयोध्या पर फैसले का सभी सम्मान करें: मायावती</h2>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की पूर्व मूुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने गुरूवार को कहा कि अयोध्या की विवादित जमीन पर उच्चतम न्यायालय के आने वाले फैसले का समाज के सभी वर्ग सम्मान करें और सरकार लोगों जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित करे। बसपा प्रमुख ने आज लगातार दो टवीट किए जिसमें उन्होंने कहा कि अयोध्या पर एक दो दिन में फैसला आने वाला है। फैसले को लेकर सभी उत्सुक हैं। देश हित में उच्चतम न्यायालय के फैसले का सभी लोगों को सम्मान करना चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/ayodhya-dispute-2/article-11059</link>
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                <pubDate>Thu, 07 Nov 2019 16:54:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या विवाद : हिन्&amp;#x200d;दुओं का विश्&amp;#x200d;वास- राम अयोध्या में जन्मे थे, कोर्ट इससे आगे न जाए: रामलला के वकील</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या मामले में सुनवाई के छठे दिन हिंदू पक्ष के वकील एस वैद्यनाथन ने दलीलें पेश कीं वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अयोध्या से जुड़ा पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक पक्ष रखा उन्होंने मंगलवार को कहा- गवाह हाशिम अंसारी ने अयोध्या को हिंदुओं के लिए मक्का जैसा पवित्र बताया था नई दिल्ली अयोध्या भूमि विवाद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ayodhya-dispute-hindus-believe-that-ram-was-born-in-ayodhya-the-court-should-not-go-further-than-this-ramlalas-lawyer/article-10239"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/358813-ayodhya-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अयोध्या मामले में सुनवाई के छठे दिन हिंदू पक्ष के वकील एस वैद्यनाथन ने दलीलें पेश कीं</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अयोध्या से जुड़ा पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक पक्ष रखा</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने मंगलवार को कहा- गवाह हाशिम अंसारी ने अयोध्या को हिंदुओं के लिए मक्का जैसा पवित्र बताया था</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong> अयोध्या भूमि विवाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को छठे दिन की सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष के वकील एस वैद्यनाथन ने बेंच के सामने स्कंद पुराण का उदाहरण देते हुए अपनी दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि लोगों में भगवान राम के प्रति विश्वास और आस्था के परे कोर्ट इस तथ्य पर नहीं जा सकती कि वे तर्कसंगत हैं या नहीं। रिवाज है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद राम जन्मभूमि के दर्शन का लाभ मिलता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ये पुराण कब लिखा गया था? वैद्यनाथन ने जवाब दिया- यह पुराण वेद व्यास द्वारा महाभारत काल में लिखा गया, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह कितना पुराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- जो आप कह रहे है उसमें राम जन्मभूमि के दर्शन के बारे में कहा गया है, देवता के बारे में नहीं? वैधनाथन ने कहा- वह इसलिए क्योंकि जन्मस्थान खुद में ही एक देवता है। फ्रेंच ट्रेवलर विलियम फिंच 1608 से 1611 तक अयोध्या में रहे और उन्होंने एक किताब लिखी थी, जिसमें राम जन्मभूमि का अस्तित्व स्पष्ट है। दूसरे यात्री जोसफ टाइपन बैरल थे, जो अयोध्या आए और उन्होंने किताब में राम जन्मभूमि का जिक्र किया था। लेखक विलियम फोस्टर ने ‘अर्ली ट्रैवल्स इन इंडिया’ बुक में उन सात अंग्रेज यात्रियों के बारे में बताया है, जो अयोध्या के बारे में लिख चुके हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अयोध्या मामले में अब तक क्या हुआ?</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए मार्च में मध्यस्थता पैनल बनाया था। इससे हल नहीं निकलने पर कोर्ट 6 अगस्त से सुनवाई कर रहा है। यह नियमित सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पहली सुनवाई:</strong> 6 अगस्त को सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया। कहा था कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दूसरी सुनवाई:</strong> 7 अगस्त को बेंच ने पक्षकार निर्मोही अखाड़े से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा था। इस पर अखाड़े ने कहा था कि 1982 में वहां डकैती हुई, जिसमें सभी दस्तावेज खो गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तीसरी सुनवाई:</strong> 8 अगस्त को बेंच ने पूछा कि एक देवता के जन्मस्थल को न्याय पाने का इच्छुक कैसे माना जाए, जो इस केस में पक्षकार भी हो। इस पर वकील ने कहा कि हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और पूजा करने के लिए मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है। नदियों और सूर्य की भी पूजा की जाती है और उनके उद्गम स्थलों को इसी तरह से देखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चौथी सुनवाई:</strong> 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा था- हमें जानकारी नहीं है। बाद में जयपुर राजघराने की दीयाकुमारी ने खुद को श्री राम के बड़े बेटे कुश के वंशज होने का दावा किया था। मुस्लिम पक्ष ने हफ्ते में पांच दिन सुनवाई पर आपत्ति जताई थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पांचवी सुनवाई:</strong> 13 अगस्त को हिंदू पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मंदिर के अस्तित्व को लेकर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा- इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में विवादित जगह पर मंदिर होने का जिक्र है। हाईकोर्ट के जस्टिस एसयू खान ने कहा था कि यह मस्जिद मंदिर के टूटे-फूटे हिस्से पर बनाई गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था</h2>
<p style="text-align:justify;">2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2019 15:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या विवाद : केंद्र की मांग का निमोर्ही अखाड़ा ने किया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत से विवादित भूमि पर फैसला करने के लिए कहा नई दिल्ली (एजेंसी)। अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के एक पक्षकार निमोर्ही अखाड़ा ने उच्चतम न्यायालय में (Ayodhya dispute) क नयी अर्जी दायर करके गैर-विवादित भूमि लौटाने की केंद्र सरकार की मांग का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में अर्जी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>अदालत से विवादित भूमि पर फैसला करने के लिए कहा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के एक पक्षकार निमोर्ही अखाड़ा ने उच्चतम न्यायालय में <strong>(Ayodhya dispute)</strong> क नयी अर्जी दायर करके गैर-विवादित भूमि लौटाने की केंद्र सरकार की मांग का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में अर्जी दाखिल करके अयोध्या में 1993 में अधिगृहित की गयी 67.703 एकड़ जमीन में से 0.313 एकड़ विवादित भूमि छोड़कर बाकी की जमीन राम जन्मभूमि न्यास एवं अन्य भू-मालिकों को वापस करने की इजाजत मांगी थी। निमोर्ही अखाड़ा का कहना है कि सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण करने से कई मंदिर नष्ट हो जायेंगे, जिनका संचालन अखाड़ा करता है, इसलिए उसने अदालत से विवादित भूमि पर फैसला करने के लिए कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने न्यायालय से इस मामले में यथास्थिति कायम रखने का 31 मार्च 2003 का आदेश रद्द करने या संशोधित करने की गुहार लगायी है, ताकि वह अयोध्या भूमि अधिग्रहण को सही ठहराने वाले संविधान पीठ के इस्माइल फारुकी फैसले के मुताबिक अपने दायित्व का निर्वाह कर सके। केंद्र सरकार ने यह अर्जी 16 साल पुराने मोहम्मद असलम भूरे मामले में दाखिल की है, क्योंकि शीर्ष अदालत ने उसी मामले में 31 मार्च 2003 को विवादित जमीन के साथ ही पूरी अधिगृहित जमीन पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये थे।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2019 13:11:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 26 फरवरी को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[छुट्टी से लौटे जस्टिस बोबडे अयोध्या। अयोध्या विवाद पर सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबडे छुट्टी से लौट आए हैं। ऐसे में अब (Ayodhya dispute: hearing will be held on 26th February in Supreme Court) इस केस की सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की गई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">छुट्टी से लौटे जस्टिस बोबडे</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या।</strong> अयोध्या विवाद पर सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबडे छुट्टी से लौट आए हैं। ऐसे में अब (Ayodhya dispute: hearing will be held on 26th February in Supreme Court) इस केस की सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की गई है। यह सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर होनी है। इससे पहले 10 जनवरी को पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की थी। इसमें जस्टिस यूयू ललित के अलावा, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे। लेकिन, कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने पांच जजों की बेंच में जस्टिस यूयू ललित के होने पर सवाल उठाया। इसके बाद जस्टिस ललित खुद ही बेंच से अलग हो गए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">25 जनवरी को नई बेंच बनाई गई थी</h2>
<p style="text-align:justify;">विवाद के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 25 जनवरी को अयोध्या विवाद की सुनवाई के लिए बेंच का पुनर्गठन किया। इसमें जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर को शामिल किया गया। नई बेंच में चीफ जस्टिस ने जस्टिस एनवी रमण को शामिल नहीं किया। अब नई बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला?</h2>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए। इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस पिछले आठ साल से लंबित है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Feb 2019 16:10:14 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अयोध्या विवाद : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 जनवरी तक टली</title>
                                    <description><![CDATA[चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 2 सदस्यीय बेंच तय करेगी नई बेंच नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर अगली सुनवाई 10 जनवरी को नई बेंच करेगी। तीन जजों की इस (Ayodhya dispute Hearing Supreme Court January 10) बेंच का गठन 10 जनवरी से पहले कर दिया जाएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 2 सदस्यीय बेंच तय करेगी नई बेंच</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर अगली सुनवाई 10 जनवरी को नई बेंच करेगी। तीन जजों की इस (Ayodhya dispute Hearing Supreme Court January 10) बेंच का गठन 10 जनवरी से पहले कर दिया जाएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई की तारीख महज 30 सेकंड में दोनों पक्षों की दलीलें सुने बगैर आगे बढ़ा दी। दो जजों की इस बेंच को जल्द सुनवाई करने और केस नई बेंच के पास भेजने का फैसला करना था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नई बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में पहले पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही थी। ऐसे में दो सदस्यीय (Ayodhya dispute Hearing Supreme Court January 10) बेंच विस्तृत सुनवाई नहीं कर सकती। इस पर तीन या उससे अधिक जजों की बेंच ही सुनवाई करेगी। नई बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी। दो सदस्यीय बेंच के सामने वकील हरिनाथ राम ने नवंबर में जनहित याचिका लगाकर जल्द से जल्द और हर दिन सुनवाई करने की मांग की थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jan 2019 13:49:08 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अयोध्या विवाद :  विशेष जज की याचिका पर उप्र सरकार को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के विवादित ढांचे को ढहाए जाने के मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव की याचिका Ayodhya dispute पर सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई पूरी किये जाने तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ayodhya-dispute-notice-to-the-u-p-government-on-petition-of-special-judge/article-5860"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/ayodhya.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के विवादित ढांचे को ढहाए जाने के मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव की याचिका<strong> Ayodhya dispute</strong> पर सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई पूरी किये जाने तक संबंधित जज का स्थानांतरण नहीं किये जाने का शीर्ष अदालत का आदेश उनकी पदोन्नति में आड़े आ रहा है।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने न्यायालय से अपने आदेश में बदलाव करने और इलाहाबाद उच्च न्यायालय को उन्हें जिला जज पद पर पदोन्नत करने के आदेश की मांग की है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पूछा कि वह किस तरीके से सुनवाई दो साल के तय वक्त में पूरी करेंगे।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने यादव की अर्जी पर योगी सरकार के अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को भी नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सीलबंद लिफाफे में जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है।</p>
<h2>क्या था मामला Ayodhya dispute :</h2>
<p>गौरतलब है कि गत एक जून को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जजों के स्थानांतरण और पदोन्नति की अधिसूचना निकाली थी। इसमें यादव का पदोन्नति के साथ-साथ स्थानांतरण किया गया था। उन्हें बदायूं का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, लेकिन उसी दिन एक और अधिसूचना निकाली गयी और उसमें उनका स्थानांतरण और प्रमोशन अगले आदेश तक निरस्त कर दी गई।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Sep 2018 15:15:20 +0530</pubDate>
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