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                <title>Bring - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भारतीय अभयारण्यों के लिए अफ्रीकी चीते लाने की सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत</title>
                                    <description><![CDATA[अब केंद्र सरकार इस प्रजाति की पुनर्स्थापना की कोशिशों में लगी है।
 वर्ष 2010 में केंद्र ने मध्य प्रदेश सरकार से चीता के लिए अभयारण्य तैयार करने को कहा था।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-granted-permission-to-bring-african-cheetah/article-12774"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/supreme-court-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने भारतीय अभयारण्यों के लिए अफ्रीकी चीता लाने की मंगलवार को इजाजत दे दी। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने कहा कि वह अफ्रीकी चीतों को नामीबिया से भारत लाकर मध्यप्रदेश स्थित नौरादेही वन्य जीव अभयारण्य में बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ नहीं है। न्यायालय ने कहा कि बाघ-चीते के बीच टकराव के कोई सबूत रिकार्ड में नहीं हैं। गौरतलब है कि देश से अब चीते लगभग समाप्त हो चुके हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1948 में सरगुजा के जंगल में आखिरी बार चीता देखा गया था</h3>
<p style="text-align:justify;">अब केंद्र सरकार इस प्रजाति की पुनर्स्थापना की कोशिशों में लगी है। वर्ष 2010 में केंद्र ने मध्य प्रदेश सरकार से चीता के लिए अभयारण्य तैयार करने को कहा था। वन विभाग ने पहले चीता प्रोजेक्ट के लिए कुनो पालपुर अभयारण्य का प्रस्ताव दिया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसा करने से रोक दिया, क्योंकि कुनो पालपुर अभयारण्य को एशियाटिक लॉयन (बब्बर शेर) के लिए तैयार किया गया है। इसके बाद विभाग ने नौरादेही को चीता के लिए तैयार करना शुरू किया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 17:10:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>शिक्षा में नई चेतना लाएगा ‘आनंदवार’</title>
                                    <description><![CDATA[कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/education-will-bring-new-consciousness-happiness/article-6009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने का प्रशिक्षण? बचपन की मस्तियां, शैतानियां, नादानियां, किलकारियां, निश्छल हँसी, उन्मुक्तता, जिज्ञासा आदि अनेक बालसुलभ क्रियाओं को बस्ते के बोझ ने अपने वजन तले दबा दिया है। बचपन का सावन, कागज की कश्ती और बारिश के पानी के बालक केवल बातें ही सुनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का लगातार बढ़ता हुआ बोझ एक समस्या के रूप में समाज के सामने है। आजादी के बाद से ही इस पर लगातार चिंतन मनन होता रहा है और लगभग सभी शिक्षा आयोगों, समितियों ने इसकी चर्चा की है। शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का आधार है। ‘सा विद्या या विमुक्तये हो या विद्या ददाति विनयम’ मन बुद्धि और आत्मा के विकास की बात हो अथवा बालक की अंतर्निहित शक्तियों के प्रकटीकरण की बात। शिक्षा मूल रूप से जीवन का आधार है, शिक्षा के बारे में मूल भारतीय चिंतन यही है।<br />
एक शिक्षक के रूप में मैंने इस समस्या को निकट से अनुभव किया हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं पिछले 10 वर्षों से बस्ते के बोझ की समस्या को हल करने के लिए प्रयासरत हूं और इस अवधि में समाधान के रूप में दो विकल्प देश भर के शिक्षा प्रेमियों शिक्षाविदों , शिक्षकों और अभिभावकों के सामने रखे हैं। इन प्रयासों को एक बड़ा मुकाम मिला जब पिछले वर्ष दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं एनसीईआरटी के तत्वावधान में बस्ते की बोझ की समस्या के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में मुझे देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों और अधिकारियों के सामने अपने सुझाव रखने का अवसर मिला</p>
<p style="text-align:justify;">।समस्या ही नहीं समाधान की भी चर्चा होनी चाहिए इस बात का अनुसरण करते हुए मैंने अपने दो सुझाव प्रस्तुत किये। ये सुझाव देश भर में चर्चा का विषय बने। एक सुझाव को देश के विभिन्न राज्यो द्वारा लागू किया है। साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश भर में प्राथमिक कक्षाओं के लिए भी इस सुझाव को लागू किया है। अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने भी इस सुझाव को राज्य की स्कूल शिक्षा के लिए लागू किया है। यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा सुझाव है कि सप्ताह में एक दिन बस्ते की छुट्टी कर दी जाए। देश के विभिन्न भागों में कर्मचारियों के लिए “फाइव डे वीक” की योजना चलती है जिसमें सरकारी कार्यालय सप्ताह में 5 दिन ही खुलते हैं। यहां विद्यालय में शनिवार की छुट्टी भले न करें पर शनिवार को बस्ते की छुट्टी अवश्य कर देनी चाहिए अर्थात बच्चे एवं स्टाफ विद्यालय तो आएँ किंतु बस्ते के बोझ से मुक्त होकर व होमवर्क के दबाव के बिना। सहज प्रश्न खड़ा होता है कि यदि बच्चे बस्ता नहीं लाएँगे तो विद्यालय में करेंगे क्या? समाधान है सप्ताह में एक दिन बच्चे शरीर, मन, आत्मा का विकास करने वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे। अपनी प्रतिभा का विकास करेंगे। शिक्षा शब्द को सार्थकता देंगे। और इस शनिवार को नाम दिया “आनंदवार” अर्थात शनिवार की शिक्षा बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आनंद उल्लास और उमंग देने वाली भी हो। यह सुझाव एक प्रयास हैं बालक को तनाव मुक्त, आनंददायी, सृजनात्मक/ प्रयोगात्मक शिक्षा देने का।</p>
<p style="text-align:justify;">सुझाव स्वरूप यह कालांश योजना प्रस्तुत है जिनके आधार पर दिनभर की गतिविधिया सम्पन्न होगीं। प्रथम कालांश – योग, आसन, प्राणायाम – व्यायाम प्रार्थना सत्र के पश्चात पहला कालांश योग-आसन, प्राणायाम, व्यायाम का रहे। बालक का शरीर स्वस्थ रहेगा, मजबूत बनेगा तो निश्चित रूप से अधिगम भी प्रभावी होगा। जीवन-पर्यंत प्राणायाम-व्यायाम के संस्कार काम आएँगे। विश्व योग दिवस का जो प्रोटोकॉल है, वह भी लगभग 40 मिनिट का है, उसका अभ्यास हो सकता है। दूसरा कालांश – श्रमदान /स्वच्छता/ पर्यावरण संरक्षण इस कालांश में विद्यालय परिसर की स्वच्छता का कार्य, श्रमदान एवं पर्यावरण संबंधित कार्यों का निष्पादन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय में वृक्षारोपण, उनकी सार संभाल, सुरक्षा, पानी पिलाना, आवश्यकता होने पर कटाई-छंटाई, कचरा निष्पादन आदि कार्य। तीसरा कालांश – संगीत अभ्यास इस कालांश में गीत अभ्यास, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रतिज्ञा, प्रार्थना का अभ्यास हो। उपलब्ध हो तो वाद्ययंत्र का अभ्यास और डांस क्लास (नृत्य अभ्यास) भी हम कालांश में करवाया जा सकता है। चतुर्थ कालांश- खेलकूद कुछ खेल इनडोर हो सकते है कुछ आउटडोर हो सकते है। अत्यधिक धूप की स्थिति में कक्षा कक्ष में ही बौद्धिक खेल, छोटे समूह के खेल इत्यादि हो सकते है। आनदं वार बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करके शिक्षा को बहुआयामी बना सकता है। पांच दिन बिना भारी भरकम बस्ते के जमकर पढाई और छठे दिन शनिवार को व्यक्तित्व विकास, सजृनात्मकता अभिव्यक्ति। मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बिना बदलाव के, बिना किसी वित्तीय भार के इस उपाय से शिक्षा को आनंददायी और विद्यालय परिसर को जीवन निर्माण केन्द्र बनाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>संदीप जोशी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Sep 2018 09:05:41 +0530</pubDate>
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                <title>महिलाओं के लिए अलग घोषणा पत्र लाएगी कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[कल दिल्ली में होना है कांग्रेस का राष्ट्रीय महिला सम्मेलन भिवानी(सच कहूँ न्यूज)। इस बार कांग्रेस महिलाओं के लिए पार्टी का ना केवल झंडा व लोगो अलग से लांच करेगी, बल्कि पहली बार ही महिलाओं के लिए चुनावी घोषणा पत्र भी अलग से जारी किया जाएगा। भिवानी पहुंची महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष वंदना पोपली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/congress-will-bring-separate-manifesto-for-women/article-5173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/congress-will-bring-separate-manifesto-for-women-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">कल दिल्ली में होना है कांग्रेस का राष्ट्रीय महिला सम्मेलन</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी(सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस बार कांग्रेस महिलाओं के लिए पार्टी का ना केवल झंडा व लोगो अलग से लांच करेगी, बल्कि पहली बार ही महिलाओं के लिए चुनावी घोषणा पत्र भी अलग से जारी किया जाएगा। भिवानी पहुंची महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष वंदना पोपली रविवार को यहां भिवानी में जिला महिला अध्यक्ष प्रेमवती गोयत के आवास पर पहुंची और महिलाओं को सम्मेलन में पहुंचने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा किदेश व प्रदेश में भाजपा सरकार को नाकाम बताया और दावा किया कि इस बार कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी। बता दें कि 7 अगस्त को दिल्ली का ताल कटोरा स्टेडियम में कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन कर रही है। प्रदेश महिला उपाध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस पहली बार महिलाओं को लिए अगल से चुनावी घोषणा पत्र तैयार कर रही है, जिसके लिए 7 अगस्त को दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में पूरे देश से आई महिलाओं से विचार लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सम्मेलन में महिला कांग्रेस के लिए अगल से झंडा व लोगो भी लांच किया जाएगा।</p>
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</p><p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 12:17:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>आॅनलाइन सिस्टम पर लाया जाए योजनाआें को: राठौर</title>
                                    <description><![CDATA[JaiPur, SachKahoon News: राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं को आॅनलाइन सिस्टम पर लाकर व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं को पूरी गुणवत्ता के साथ लागू किया जाए। श्री राठौड़ यहां शासन सचिवालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर संचालित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/plans-to-bring-the-system-online-rathore/article-526"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/05-5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>JaiPur, SachKahoon News:</strong> राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं को आॅनलाइन सिस्टम पर लाकर व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं को पूरी गुणवत्ता के साथ लागू किया जाए। श्री राठौड़ यहां शासन सचिवालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर संचालित ग्रामीण विकास की योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए की योजनाओं को पूरी गुणवत्ता के साथ बेहतर ढंग से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि टीम भावना के साथ काम कर ग्रामीण विकास योजनाओं को धरातल पर लाने का प्रयास किया जाए तथा योजनाओं को आॅनलाइन सिस्टम से जोड़कर व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं को पूरी गुणवत्ता के साथ लागू किया जाए। राठौड़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में बने गौरव पथ सड़कों पर सोलर लाइट लगाने पर जोर देते हुए कहा कि सभी जगह पर एकरूपता रखें। उन्होंने योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं पंचायती राज प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Dec 2016 23:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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