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                <title>Breaking - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>BREAKING: फतेहाबाद में कोरोना से मौत, सच कहूँ की अपील-घर से बाहर निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं</title>
                                    <description><![CDATA[देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 29 मरीजों की मौत फतेहाबाद (विनोद शर्मा)। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 29 मरीजों की मौत हुई है और कोरोना संक्रमण के 1,724 सक्रिय मामले बढ़े हैं। इस बीच देश में कोरोना टीकाकरण भी जारी है और इसी क्रम में पिछले 24 घंटों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/death-due-to-corona-in-fatehabad/article-46444"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/covid191.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 29 मरीजों की मौत</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (विनोद शर्मा)।</strong> देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 29 मरीजों की मौत हुई है और कोरोना संक्रमण के 1,724 सक्रिय मामले बढ़े हैं। इस बीच देश में कोरोना टीकाकरण भी जारी है और इसी क्रम में पिछले 24 घंटों में 574 लोगों को टीका लगाया गया है और अब तक देश में 2.20,66,28,332 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं हरियाणा के फतेहाबाद में कोरोना की चौथी लहर में आज पहली मौत हुई। फतेहाबाद निवासी एक बुजुर्ग ने निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी थी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नगर परिषद को इस बारे में सूचित कर दिया है। इसके बाद अब कोरोना प्रोटोकॉल के तहत मृतक का अंतिम संस्कार किया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा में 333 आए नए केस</h3>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 65,286 हो गयी है। देश में कुल संक्रमितों की संख्या 4,48,57,992 हो गयी है। वहीं मृतकों की संख्या बढ़कर 5,31,230 हो गयी है। इसी अवधि में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वालों का आंकड़ा 10,827 बढ़कर 4,42,61,476 पर पहुंच गया है। देश में पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान में सक्रिय मामलों की संख्या में सर्वाधिक 343 की वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, हरियाणा में 333, दिल्ली में 332, छत्तीसगढ़ में 292, उत्तर प्रदेश में 290, ओडिशा में 202, पंजाब में 196, पश्चिम बंगाल में 122, तमिलनाडु में 108, आन्ध्र प्रदेश में 49, बिहार में 57, झारखंड में 38, उत्तराखंड में 19, चंडीगढ़ और तेलंगाना में 11-11, मध्य प्रदेश में नौ, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में चार, लद्दाख में दो एक मामला बढ़ा है। वहीं दिल्ली में छह, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चार-चार, हरियाणा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में दो-दो, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुड्डुचेरी, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में क्रमश: एक-एक व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हो गयी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 20 Apr 2023 17:06:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रिकॉर्ड तोड़ सर्दी से ठिठुरी दिल्ली, लोग बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[1901 के बाद सबसे ठंडा दिसंबर | Record breaking नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शीतलहर और ठिठुरन शनिवार को और बढ़ गई और न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने से लोगों का ठंड से बुरा हाल है। दिल्ली में 14 दिसम्बर से शीतलहर का प्रकोप शुरू हुआ था और अभी अगले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/record-breaking-winter-in-delhi-people-suffering/article-12068"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/record-winter-in-delhi.jpg" alt=""></a><br /><h2>1901 के बाद सबसे ठंडा दिसंबर | Record breaking</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शीतलहर और ठिठुरन शनिवार को और बढ़ गई और न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने से लोगों का ठंड से बुरा हाल है। दिल्ली में 14 दिसम्बर से शीतलहर का प्रकोप शुरू हुआ था और अभी अगले तीन दिनों तक बने रहने की आशंका है। वर्ष 1901 के बाद यह दूसरी बार है जब राजधानी में इतने लंबे समय तक शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। इसने पिछले सालों के रिकॉर्ड (<strong>Record breaking)</strong> को पीछे छोड़ दिया है।</p>
<h3>तापमान 1.7 डिग्री तक पहुंचा</h3>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग के अनुसार सुबह 8.30 बजे सबसे कम तापमान आया नगर में 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि सफदरजंग में तापमान 2.7 और पालम में 3.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्षिक आर्द्रता 97 फीसदी दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। एक और दो जनवरी को ओलावृष्टि के अनुमान के चलते नये वर्ष के जश्न में खलल भी पड़ सकता है विभाग का मानना है कि तीन जनवरी तक पहाड़ी क्षेत्रों में जोरदार हिमपात होगी।</p>
<h3>मौसम विभाग के अनुसार</h3>
<ul>
<li><strong>दिसंबर में इस साल औसत अधिकतम तापमान अब तक 19.85 डिग्री सेल्सियस रहा </strong></li>
<li><strong>वर्ष के आखिरी दिन यह 19.15 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है </strong></li>
<li><strong>यदि अधिकतम तापमान 19.15 तक गिरता है तो यह 1901 के बाद दूसरा मौका होगा, जब दिसंबर सबसे ठंडा होगा। </strong></li>
<li><strong>बाईस साल पहले दिसंबर 1997 में औसत अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था </strong></li>
<li><strong>1997 के बाद से दिसंबर माह में सबसे अधिक ठंडे दिन रहे हैं। </strong></li>
<li><strong>1997 में 17 दिनों तक लगातार लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा था। </strong></li>
<li><strong>2019 में 15 दिसंबर से ही दिल्ली के लोग कड़ाके की ठंड का अनुभव कर रहे हैं।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 11:10:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेमेंट डेटा /वीजा, मास्टरकार्ड जैसी कंपनियां विदेश में डेटा स्टोर कर भारतीय नियम तोड़ रहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई,एजेंसी। वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/companies-like-payment-data-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad/article-6293"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/companies-like-payment-data-_-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई,एजेंसी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी कार्ड कंपनियों ने ऐसा नहीं किया।<br />
<strong>जुर्माना लगा सकता है आरबीआईर</strong> : न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने चेतावनी दी थी कि तय समय सीमा तक निर्देशों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी। आरबीआई ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर कहा था कि जिन कंपनियों का सर्वर विदेश में है उन्हें पेमेंट सिस्टम से जुड़ा डेटा भारत में ही स्टोर करना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त मांगा : </strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त और मांगा है। कंपनियों की दलील है कि उनकी मशीनों का सिस्टम दुनियाभर में एक जैसा है। सिर्फ भारत के लिए सिस्टम को इतनी जल्दी नहीं बदला जा सकता। अमेरिका के डिप्टी ट्रे़ड रिप्रजेंटेटिव डेनिस शिया ने भी शुक्रवार को कहा कि इन्फॉर्मेशन का फ्री फ्लो सुनिश्चित करने के लिए हम डेटा का लोकलाइजेशन नहीं चाहते। शिया ने कहा कि ऐसा करने वाले देशों को फिर से सोचना चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की फाइनेंशियल कंपनियों की शिकायत के बाद वहां के अधिकारियों ने डेटा लोकलाइजेशन पर आपत्ति जताई। अमेरिकी कंपनियां डेटा लोकलाइजेशन के खिलाफ दुनियाभर में लॉबीइंग करती रही हैं। वॉट्सऐप ने नियम का पालन कियामोबाइल मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने पिछले दिनों कहा कि वह आरबीआई के निर्देश मानेगा। उसने पेमेंट संबंधी डेटा भारत में स्टोर करने का सिस्टम तैयार कर लिया है। अमेजन ने भी कहा था कि वह नियम पूरे करने के लिए काम कर रही है। जहां भी कंपनी का कारोबार है वहां के कानून का पालन करना प्राथमिकता है।</p>
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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:55:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तटबंधों को तोड़ती हिंदी भाषा</title>
                                    <description><![CDATA[कभी गोविंदवल्लभ पंत ने कहा था कि हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई रोक नहीं सकता। उनकी कही बातें आज अक्षरश: सच साबित हो रही है। भाषा के तौर पर हिंदी अपने सभी प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ लोकप्रियता का आसमान छू रही है और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/breaking-the-embankments-hindi-language/article-5914"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/breaking-the-embankments-hindi-language.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी गोविंदवल्लभ पंत ने कहा था कि हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई रोक नहीं सकता। उनकी कही बातें आज अक्षरश: सच साबित हो रही है। भाषा के तौर पर हिंदी अपने सभी प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ लोकप्रियता का आसमान छू रही है और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक स्तर पर यूजर्स के लिहाज से 1952 में हिंदी पांचवे पायदान पर थी, जो अस्सी के दशक में चीनी और अंग्रेजी भाषा के बाद तीसरे स्थान पर आ गयी। 1999 में मशीन ट्रांसलेशन शिखर बैठक में टोकियो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर होजुमि तनाका द्वारा पेश नए भाषायी आंकड़ों के मुताबिक अब चीनी भाषा के बाद हिंदी दूसरे स्थान पर है। गौर करें तो विगत कुछ दशकों में हिंदी का उत्तरोतर विकास हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आश्चर्य नहीं जब आने वाले दिनों में हिंदी चीनी भाषा को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंच जाए। एक आंकड़े के मुताबिक आज विश्व में 50 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं और इससे कहीं ज्यादा समझते हैं। आज दुनिया के 40 से अधिक देशों के 600 से अधिक विश्वविद्यालयों और स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई हो रही है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में हिंदी की धूम मची है। यहां 30 से अधिक विश्वविद्यालयों में भाषायी पाठ्यक्रम में हिंदी को महत्वपूर्ण दर्जा हासिल है। यही नहीं पिछले दिनों लैंग्वेज यूज इन यूनाइटेड स्टेट्स-2011 की हालिया रिपोर्ट से भी उद्घाटित हुआ कि अमेरिका में बोली जाने वाली टॉप दस भाषाओं में हिंदी भी है और इसे बोलने वालों की संख्या 6.5 लाख से उपर है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के अलावा यूरोपिय देशों में भी हिंदी का तेजी से विकास हो रहा है। इंग्लैण्ड के लंदन, कैम्ब्रिज और यार्क विश्वविद्यालयों में हिंदी को चाहने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। पहले से कहीं ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है। आज अगर प्रवासिनी, अमरदीप और भारत भवन पत्र-पत्रिकाएं अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं और उसके पाठकों की तादाद बढ़ रही है तो यह हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता और लोकप्रियता का ही कमाल है। जर्मनी के हीडलबर्ग, लोअर सेक्सोनी के लाइपजिंग, बर्लिन के हम्बोलडिट और बॉन विश्वविद्यालय में भी हिंदी भाषा को पाठ्यक्रम के रुप में शामिल किया गया है। एक दशक से रुस के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य पर शोध हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां हिंदी का बोलबाला बढ़ा है। अनेक रुसी विद्वानों ने हिंदी साहित्य का अनुवाद किया है। इनमें से एक तुलसीकृत रामचरित मानस भी है जिसका अनुवाद प्रसिद्ध विद्वान वारान्निकोव द्वारा किया गया है। यह तथ्य है कि रुस में हिंदी गं्रथों का जितना अनुवाद हुआ है उतना शायद ही विश्व में किसी भाषा का हुआ हो। जर्मन के लोग भी हिंदी को एशियाई आबादी के एक बड़े तबके से संपर्क साधने का सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। यहां जानना जरुरी है कि जर्मनी में भारतीय भाषा संस्कृत को भी गौरव हासिल है। कई संस्कृत ग्रंथों का जर्मन भाषा में अनुवाद हुआ है। हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता का ही आलम है कि वेस्टइंडीज के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ की स्थापना की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशियाई देश जापान में हिंदी भाषा का बहुत अधिक सम्मान है। मजेदार बात यह भी कि जापान की यात्रा पर जाने वाले भारतीय राजनेता जापान में हिंदी भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हैं। गत वर्ष जापान यात्रा पर गए भारतीय प्रधानमंत्री ने भी अपने विचार हिंदी में व्यक्त किए और उससे न सिर्फ जापान बल्कि विश्व बिरादरी भी प्रभावित दिखी। जापान की दो नेशनल यूनिवर्सिटी ओसाका और टोकियो में स्नातक और परास्नातक स्तर पर हिंदी की पढ़ाई की व्यवस्था है। प्रोफेसर दोई ने टोकियो विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की स्थापना की है। रुस की तरह जापान में भी हिंदी साहित्य का अनुवाद हुआ है। प्रोफेसर तोबियोतनाका ने भीष्म साहनी के उपन्यास तमस का जापानी में अनुवाद किया है। प्रोफेसर कोगा ने ‘जापानी-हिंदी कोष’ की रचना की है। उन्होंने गांधी जी की आत्मकथा का भी जापानी में अनुवाद किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर मोजोकामी हर वर्ष हिंदी का एक नाटक तैयार करते हैं और उसका मंचन भारत में करते हैं। महात्मा गांधी और टैगोर के अनन्य भक्तों में से एक साइजी माकिनो जब भारत आए तो हिंदी के रंग में रंग गए। उन्होंने गांधी जी के सेवाग्राम में रहकर हिंदी सीखी। गौर करने वाली बात यह कि जापान और भारत का लोकसाहित्य समान है। मणिपुर और राजस्थान की लोककथाएं जापान की लोककथाओं जैसी है। गुयाना और मॉरिशस में भी भारतीय मूल के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। यहां प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातक स्तर पर हिंदी के पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था है। मारीशस में अंग्रेजी राजभाषा है। फ्रेंच बोलने वालों की तादात अच्छी है। लेकिन हिंदी की लोकप्रियता में कमी नहीं है। यहां बहुत पहले ही हिंदी सचिवालय की स्थापना हो चुकी है और ढेरों हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है। इसी तरह फिजी, नेपाल, भूटान, मालदीव और श्रीलंका में भी हिंदी का जलवा कायम है। विगत वर्षों में खाड़ी देशों में हिंदी का तेजी से प्रचार-प्रसार हुआ है। वहां के सोशल मीडिया में हिंदी का दखल बढ़ा है और कई पत्र-पत्रिकाओं को आॅनलाइन पढ़ा जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात में हिंदी एफएम चैनल लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नए-पुराने हिंदी गीतों को चाव से सुना जा रहा है। हिंदी फिल्मों ने भी यहां धूम मचा रखी है। बॉलीवुड स्टार अपनी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के लिए अकसर इन देशों में शो आयोजित करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से दुबई में लगातार हिंदी कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है जो अपने-आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हिंदी भाषा की यह असाधारण उपलब्धि कही जाएगी कि जिन देशों में भाषा को विचारों की पोषाक और राष्ट्र का जीवन समझा जाता है वहां भी हिंदी तेजी से अपना पांव पसार रही है। गौरतलब है कि हंगरी, बुल्गारिया, रोमानिया स्विटजरलैंड, स्वीडन, फ्रांस, नार्वे, जापान, इटली, मिस्र, कजाकिस्तान, तुकेर्मेनिस्तान, कतर और अफगानिस्तान, रुस और जर्मनी अपनी भाषा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे इसे अपनी सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इन देशों में हिंदी को भरपूर स्नेह और सम्मान मिल रहा है। यह हिंदी भाषा के लिए बड़ी उपलब्धि है। आज दुनिया का कोई ऐसा कोना नहीं जहां भारतीयों की उपस्थिति न हो और वहां हिंदी का तेजी विस्तार न हो रहा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">एक आंकड़ें के मुताबिक दुनिया भर में ढ़ाई करोड़ से अधिक अप्रवासी भारतीय 160 से अधिक देशों में रहते हैं। यह सुखद है कि वह अपनी भाषा व संस्कृति से जुड़े हैं और हिंदी के फैलाव में योगदान कर रहे हैं। गौर करें तो बहुराष्ट्रीय देशों की कंपनियां भी अपने-अपने देशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सरकारों पर दबाव बना रही हैं। दरअसल उनका मकसद हिंदी के जरिए एशियाई देशों में अपनी व्यपारिक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह स्वीकारने में हिचक नहीं कि बाजार ने भी हिंदी की स्वीकार्यता को नई उंचाई दी है। यह सार्वभौमिक सच है कि जो भाषाएं रोजगार और संवादपरक नहीं बन पाती उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में तकरीबन 6900 मातृभाषाएं बोली जाती हैं। इनमें से तकरीबन 2500 मातृभाषाएं अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही हैं। इनमें से कुछ को भाषाओं की चिंताजनक स्थिति वाली भाषाओं की सूची में रख दिया गया है। दुनिया भर में तकरीबन दो सैकड़ा ऐसी मातृभाषाएं हैं जिनके बोलने वालों की तादाद महज दस-बारह है। आज अगर मैक्सिकों की अयापनेको, उक्रेन की कैरेम, ओकलाहामा की विचिता, इंडोनेशिया की लेंगिलू भाषा अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही हैं तो इसका मूलकारण यही है कि वह रोजगारपरक तथा संवाद की भाषा नहीं बन सकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की चमक प्रमाणित करती है कि संसार में उसकी प्रतिष्ठा और उपादेयता बढ़ी है और वह तेजी से वैश्विक भाषा बन रही है। <em>अरविंद जयतिलक</em></p>
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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 13:18:31 +0530</pubDate>
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