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                <title>About - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कांग्रेस सिद्धू के बारे में करे रुख स्पष्ट: शाह</title>
                                    <description><![CDATA[बुलंदशहर कांट की जांच एसआईटी कर रही है जयपुर (एजेंसी)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि (Congress Stance Clear About Sidhu Shah) कांग्रेस को पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान जाने के मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। शाह बुधवार को पत्रकारों से कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/congress-stance-clear-about-sidhu-shah/article-6829"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/congress-stance-clear-about-sidhu-shah.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">बुलंदशहर कांट की जांच एसआईटी कर रही है</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि (Congress Stance Clear About Sidhu Shah) कांग्रेस को पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान जाने के मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। शाह बुधवार को पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस को स्प्ष्ट करना चाहिए कि सिद्धू पाकिस्तान राहुल गांधी की सूचना पर गये या नहीं। उन्होंने कहा कि सिद्धू ने कहा है कि वह अपना कप्तान राहुल गांधी को मानते हैं और उनकी सूचना पर पाकिस्तान गये हैं, इस बारे में कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए।</p>
<h2>कांग्रेस को स्प्ष्ट करना चाहिए कि सिद्धू पाकिस्तान राहुल गांधी की सूचना पर गये या नहीं</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सिद्धू की सभा में पाकिस्तान के नारे के (Congress Stance Clear About Sidhu Shah) सवाल पर कहा कि जब सिद्धू पाकिस्तान जाकर उनके सेना अध्यक्ष को गले लगायेंगे तो उनकी सभा में ऐसे ही नारे लगेंगे। बुलंदशहर कांड के सवाल पर शाह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि इस मामले में एसआईटी जांच कर रही हैं और इसकी रिपोर्ट आने के बाद दूध का दूध और पानी पानी हो जायेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले को राजनीतिक रुप नहीं देना चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Dec 2018 16:25:00 +0530</pubDate>
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                <title>भाषा को लेकर संवेदनशील हो सरकारें</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/governments-are-sensitive-about-language/article-5935"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/kgjgfjf-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज संसार में 6809 से अधिक भाषाएं और अनगिनत बोलियां है। जिसमें से एक भाषा हिन्दी भी है। हिन्दी संसार की दूसरी बड़ी भाषा है जिसका उपयोग सर्वाधिक युवा आबादी करती है। हिन्दी का व्यक्तित्व इसकी वर्णमाला के कारण विराट है। निस्संदेह, हिन्दी में सामर्थ्य की सुगंध है। उदाहरणार्थ, हम ‘कोण’ बोलेंगे तो हिन्दी में लिखेंगे भी ‘कोण’ ही। ‘ण’ को हम ‘ण’ ही लिखेंगे, ‘न’ नहीं। परंतु उर्दू, अरबी, फ्रेंच और अंग्रेजी भाषा में ‘ण’ को ‘न’ ही लिखा जाएगा। इस प्रकार हिन्दी भाषा का ‘कोण’ अन्य भाषाओं में ‘कोन’ हो जाएगा। परिणामस्वरूप अर्थ में ही अंतर आ जाएगा। इससे सिद्ध है कि सामर्थ्य की जो सुगंध हिन्दी के पास है वह अन्य भाषाओं के पास नहीं। मातृभाषा जब मात्र कुछ लोगों की भाषा बनकर रह जाए तो उसका कैसा और कितना विकास होगा यह सहज चिंतनीय है। हिन्दी भाषा मादक भी है, आकर्षक भी है, मोहक भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि रूस के वरान्निकोव और बेल्जियम के बुल्के भारत आकर हिन्दी को समर्पित हो गये। जाहिर-सी बात है कि गुलाम देश के पास अपनी कोई राज या राष्ट्रभाषा नहीं होती। परतंत्र राष्ट्र बिन भाषा के गूंगे अपाहिज की तरह ही होता है, जो अपनी आंखों के सामने सबकुछ देखता है, पर बोल नहीं सकता। समय की करवट के साथ हिन्दी का आकाश सूना होता गया। लोग अंग्रेजी को भूलाने के बजाय ओर भी इसके दीवाने होते गए। मां के जगह मम्मी और पिता की जगह डैड हो गया। बस, इसी में सब बैड हो गया ! ओर फिर हिन्दी को एक दिन की भाषा बनाकर ऐसे याद किया जाने लगा कि जैसी किसी की पुण्यतिथि हो। दरअसल, हमें अपनी भाषा का गौरव नहीं पता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसका मूल्य हम भूल चुके है। हालात यह है कि आज हिन्दवासियों को अंग्रेजी की गाली भी प्रिय लगने लगी है। वस्तुत: सौंदर्य और सुगंध से परिपूर्ण हिन्दी का यश मिटता जा रहा है। आलम है कि हम हिन्दी को कुलियों की और अंग्रेजी को कुलीनों की भाषा मानते हैं। देश स्वाधीन है परंतु वैचारिक और मानसिक दृष्टि से हम आज भी दास हैं। इसी कारण हिन्दी को कूड़े-करकट का ढेर और अंग्रेजी को अमृत-सागर समझने की हमारी मान्यता आज भी नहीं बदली है। सवाल है कि हिन्दी के प्रति हीनता का बोध राष्ट्र को क्या उन्नति के शिखर पर ले जायेगा? स्मरण रहे कि कोई राष्ट्र अपनी भाषा का आदर किये बगैर विकसित एवं समृद्धशाली नही हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारत ही नहीं विदेश भी हिन्दी भाषा को अपना रहे हैं तो फिर हम देश में रहकर भी अपनी भाषा को बढ़ावा देने के बजाय उसको खत्म करने पर तुले हैं? आज भाषा को लेकर संवेदनशील और गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। इस सवाल पर भी सोचना चाहिए कि क्या अंग्रेजी का कद कम करके ही हिन्दी का गौरव बढ़ाया जा सकता है? और आज आजाद भारत में हिन्दी कर्क रोग पीड़ित से क्यों है? लेकिन, अफसोस इस बात का भी है कि हम हिन्दी का यश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध तो है पर नवभारत नहीं न्यू इंडिया में। यदि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का वास्तविक कायाकल्प करना चाहते हैं, तो हिन्दी को उसकी गरिमा पुन: लौटाये। डिजिटल इंडिया के इस युग में चरमराती हिन्दी को चमकाना होगा। तकनीकि और वैज्ञानिक दौर में हिन्दी के लिए अप्रत्यक्ष रुप से बाध्यता अनिवार्य करनी होगी।</p>
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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 20:21:17 +0530</pubDate>
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