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                <title>Death Anniversary - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>किशोर कुमार: जिन्होंने दुनिया में अपनी आवाज का बिखेरा जादू</title>
                                    <description><![CDATA[आज हिन्दी सिनेमा जगत में शायद ही कोई ऐसा युवा गायक हो जो किशोर कुमार से प्रभावित ना हो। किशोर कुमार, एक ऐसी शख्सियत थे, जिसमें बहुमुखी प्रतिभा होने के साथ वह सब था जिसकी वजह से लोग उन्हें महान मानते थे। एक गायक और अभिनेता होने के साथ किशोर कुमार ने लेखक, निर्देशक, निर्माता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/kishore-kumar-who-spread-the-magic-of-his-voice-in-the-world/article-19180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/kishore-kumar-who-spread-the-magic-of-his-voice-in-the-world.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">आज हिन्दी सिनेमा जगत में शायद ही कोई ऐसा युवा गायक हो जो किशोर कुमार से प्रभावित ना हो। किशोर कुमार, एक ऐसी शख्सियत थे, जिसमें बहुमुखी प्रतिभा होने के साथ वह सब था जिसकी वजह से लोग उन्हें महान मानते थे। एक गायक और अभिनेता होने के साथ किशोर कुमार ने लेखक, निर्देशक, निर्माता और संवाद लेखक तक की भूमिका निभाई। सिर्फ हिन्दी ही नहीं बंगाली, मराठी, गुजराती, कन्नड़ जैसी कई फिल्मों में भी उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। एक बेहतरीन गायक होने के साथ किशोर कुमार को उनकी कॉमेडियन अदाकारी के लिए आज भी याद किया जाता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">किशोर कुमार का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हुआ था। उनका बचपन का नाम आभास कुमार गांगुली था। 4 अगस्त, 1929 को जन्मे आभास कुमार ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान किशोर कुमार के नाम से बनाई। फिल्म बॉम्बे टॉकीज से किशोर कुमार ने अपने गायन कॅरियर की शुरूआत की। इस फिल्म में उन्होंने पार्श्व गायक की भूमिका निभाई। 1946 में आई फिल्म शिकारी उनकी पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें उन्होंने अभिनेता की भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1948 में फिल्म जिद्दी में उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया था। फिल्म में किशोर कुमार के काम की बहुत प्रशंसा हुई और उनको कई अन्य कार्य भी मिले। संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन ने किशोर कुमार के कॅरियर को बनाने में बहुत मदद की थी। आरडी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने मुनीम जी, टैक्सी ड्राइवर, फंटूश, नो दो ग्यारह, पेइंग गेस्ट, गाइड, ज्वेल थीफ, प्रेमपुजारी, तेरे मेरे सपने जैसी फिल्मों में अपनी जादुई आवाज से फिल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">एक अनुमान के अनुसार किशोर कुमार ने वर्ष 1940 से वर्ष 1980 के बीच के अपने कॅरियर के दौरान करीब 574 से अधिक फिल्मों में गाने गाए। वह अक्सर कहा करते थे कि दूध जलेबी खायेंगे खंडवा में बस जाएंगे। लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया। 13 अक्टूबर, 1987 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनकी मौत हो गई। किशोर की जिंदगी में कई ऐसे अहम मोड़ और वाकए हैं जिन्हें एक ब्लॉग में समेट पाना नामुमकिन है फिर भी यह कोशिश आवाज के मस्तमौला किशोर को एक श्रद्धांजलि है।</h6>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Oct 2020 21:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>फिजाओं में आज भी गूंजती है हेमंत कुमार के संगीत की खूशबू</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (वार्ता) फिल्म जगत को अपनी मधुर संगीत लहरियों से सजाने संवारने वाले महान संगीतकार और पार्श्वगायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिजां में गूंजते महसूस होते हैं। बनारस में 16 जून 1920 को जन्मे हेमंत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता के मित्रा इंस्टीच्यूट से पूरी की। इंटर की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/special-on-the-occasion-of-september-26-the-death-anniversary/article-6053"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/hemant-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (वार्ता)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म जगत को अपनी मधुर संगीत लहरियों से सजाने संवारने वाले महान संगीतकार और पार्श्वगायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिजां में गूंजते महसूस होते हैं। बनारस में 16 जून 1920 को जन्मे हेमंत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता के मित्रा इंस्टीच्यूट से पूरी की। इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हेमंत कुमार ने जादवपुर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया लेकिन कुछ समय बाद हेमंत कुमार ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उनका रूझान संगीत की ओर हो गया था और वह संगीतकार बनना चाहते थे । इस बीच हेमंत कुमार ने साहित्य जगत मे भी अपनी पहचान बनानी चाही और एक बंगाली पत्रिका ..देश ..में उनकी एक कहानी भी प्रकाशित हुई लेकिन वर्ष 1930 के अंत तक उन्हाेंने अपना पूरा ध्यान संगीत की ओर लगाना शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने बचपन के मित्र सुभाष की सहायता से वर्ष 1930 में हेमंत कुमार को आकाशवाणी के लिये अपना पहला बंगला गीत गाने का मौका मिला। उन्हाेंने संगीत की अपनी प्रारंभिक शिक्षा बंगला संगीतकार शैलेश दत्त गुप्ता से ली। हेमंत कुमार ने उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा भी ली। वर्ष 1937 मे शैलेश दत्त गुप्ता के संगीत निर्देशन में एक विदेशी संगीत कंपनी कोलंबिया लेबल के लिये उन्हाेंने गैर फिल्मी गीत गाये। इसके बाद हेमंत कुमार ने लगभग हर वर्ष ग्रामोफोनिक कंपनी ऑफ इंडिया के लिये अपनी आवाज दी। ग्रामोफाेनिक कंपनी के लिये ही 1940 कमल दास गुप्ता के संगीत निर्देशन में उन्हें अपना पहला हिन्दी गाना ..कितना दुख भुलाया तुमने .. गाने का मौका मिला जबकि वर्ष 1941 में प्रदर्शित एक बंगला फिल्म के लिये उन्होंने अपनी आवाज दी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1944 मे एक गैर फिल्मी बंगला गीत के लिये हेमंत कुमार ने संगीत दिया। इसी वर्ष पंडित अमर नाथ के संगीत निर्देशन में उन्हें अपनी पहली हिन्दी फिल्म ..इरादा ..में गाने का मौका मिला। इसके साथ ही वर्ष 1944 में रवीन्द्र नाथ ठाकुर के ..रवीन्द्र संगीत .. के लिये हेमंत कुमार ने गाने रिकाॅर्ड किये। वर्ष 1947 में बंगला फिल्म ..अभियात्री .. के लिये बतौर संगीतकार काम किया। इस बीच हेमंत कुमार भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के सक्रिय सदस्य के रूप में काम करने लगे । धीरे-धीरे वह बंगला फिल्मों में बतौर संगीतकार अपनी पहचान बनाते चले गये। इस दौरान उन्हाेंने कई बंगला फिल्मों के लिये संगीत दिया जिनमें हेमेन गुप्ता निर्देशित कई फिल्में शामिल है ।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमेन गुप्ता कुछ समय बाद मुंबई आ गये और उन्होंने हेमंत कुमार को भी मुंबई आने का न्यौता दिया। वर्ष 1951 मे फिल्मीस्तान के बैनर तले बनने वाली अपनी पहली हिन्दी फिल्म ..आनंद मठ .. के लिये हेमेन गुप्ता ने हेमंत कुमार से संगीत देने की पेशकश की। फिल्म आनंदमठ की सफलता के बाद हेमंत कुमार बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गये । फिल्म आनंदमठ में लता मंगेश्कर की आवाज में गाया हुआ ..वंदे मातरम .. आज भी श्रोताओं को भावावेश में ला देता है। वर्ष 1954 में हेमंत कुमार के संगीत से सजी फिल्म ..नागिन .. की सफलता के बाद वह सफलता के शिखर पर पहुंच गये। फिल्म नागिन का एक गीत .. मन डोले मेरा तन डोले .. आज भी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय है।इस फिल्म के लिये वह सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1959 में हेमंत कुमार ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र मे भी कदम रखा और ..हेमंता बेला प्रोडक्शन .. नाम की फिल्म कंपनी की स्थापना की जिसके बैनर तले मृणाल सेन के निर्देशन में एक बंगला फिल्म ..नील आकाशेर नीचे .. का निर्माण किया । इस फिल्म को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल दिया गया। इसके बाद हेमंत कुमार ने अपने बैनर तले बीस साल बाद .कोहरा, बीबी और मकान .फरार . राहगीर और खामोशी जैसी कई हिन्दी फिल्मों का भी निर्माण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1971 में हेमंत कुमार ने एक बंगला फिल्म ..आनंदिता .. का निर्देशन भी किया लेकिन यह फिल्म बॉक्स आफिस पर बुरी तरह से नकार दी गयी। वर्ष 1979 में हेमंत कुमार ने चालीस और पचास के दशक में सलिल चौधरी के संगीत निर्देशन मे गाये गानों को दोबारा रिकार्ड कराया और उसे ..लीजेंड ऑफ ग्लोरी -2 .. के रूप में जारी किया और यह एलबम काफी सफल भी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1989 में हेमंत कुमार बंगलादेश के ढाका शहर में ..माइकल मधुसूधन अवार्ड लेने गये जहां उन्होंने एक संगीत समारोह मे हिस्सा भी लिया । समारोह की समाप्ति के बाद भारत लौटने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 26 सिंतबर 1989 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गये।</p>
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                <pubDate>Tue, 25 Sep 2018 14:07:28 +0530</pubDate>
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