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                <title>मकर सक्रांति के पर्व पर सुबह से ही पतंगबाजी रही परवान पर</title>
                                    <description><![CDATA[दिन में धूप कम खिली ओर तेज हवा के कारण मौसम में ठंडक बरकरार रही। तेज हवा के कारण पतंगबाजी में भी परेशानी हुई। मकर सक्रांति को लेकर मंगलवार सुबह से ही बच्चे, युवा, युवतियां घरों की छतों पर पतंग और चरखी लेकर डट गए। इस अवसर पर दीपिका, पूजा, मोनिका, गायत्री, ज्योति, हिना, पायल ने जमकर पतंगबाजी का लुप्त उठाया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/kite-flying-is-also-done-on-the-occasion-of-makar-sankranti/article-12491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/makar-sankranti.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> स्कूलों व कॉलेजों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> युवाओं की टोलियां पहुंची छतों पर पतंगबाजी का उठाया लुत्फ</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरदारशहर, सच कहूँ न्यूज</strong>। मकर सक्रांति (Makar Sankranti) के पर्व पर मंगलवार को शहर में खूब पतंगबाजी हुई। सुबह से ही लोग छत पर नजर आए। पतंगबाजी परवान पर रही। सप्ताह भर से जारी सर्दी का असर मकर सक्रांति पर होने वाली पतंगबाजी में कम नहीं हुआ। दिन में धूप कम खिली ओर तेज हवा के कारण मौसम में ठंडक बरकरार रही। तेज हवा के कारण पतंगबाजी में भी परेशानी हुई। मकर सक्रांति को लेकर मंगलवार सुबह से ही बच्चे, युवा, युवतियां घरों की छतों पर पतंग और चरखी लेकर डट गए। इस अवसर पर दीपिका, पूजा, मोनिका, गायत्री, ज्योति, हिना, पायल ने जमकर पतंगबाजी का लुप्त उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अनूपगढ़।</strong> सेठ बिहारीलाल छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय अनूपगढ़ में छात्र संघ अध्यक्ष विकास ऐचरा के नेतृत्व में आज लोहड़ी व मकर सक्रांति का सभी छात्र-छात्राओं के समक्ष कार्यक्रम का आयोजन रखा गया, जिसमें ए.बी.वी.पी. के जिला संयोजक पवन ऐचरा ने सभी छात्र-छात्राओं को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में मकर सक्रांति से पहले की शाम को लोहड़ी का त्यौहार नई फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजकुमार गोयल, महाविद्यालय स्टाफ बालकृष्ण लढ़ा, डॉ. मंगला शर्मा, वंदना देवी, उग्रसेन टाडा, यज्ञदत शर्मा व छात्र नेता अरुण दायमा, रवि जोशी, सौरभ सैन, सौरभ चुघ, शुभम चौधरी, लाजवंती, रमनदीप कौर, किरण तथा अंशिका वर्मा सहित अन्य छात्र छात्राएं उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सादुलशहर।</strong> फ्यूचर चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल में मकर सक्रांति व लोहड़ी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल आशा कटारिया ने की।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस दौरान बच्चों ने डीजे की धुन पर खूब धमाल मचाया।</li>
<li style="text-align:justify;">विद्यालय स्टाफ ने बच्चों को लोहड़ी व मकर सक्रांति पर्व के बारे में जानकारी दी।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्चों की पीले रंग की ड्रेस अत्यंत आकर्षक लग रही थी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">मकर सक्रांति पर पतंग बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरदारशहर, सच कहूँ न्यूज।</strong> शहर के निजि शिक्षण संस्थान एसवीपी इंग्लिश एकेडमी में मंगलवार को मकर संक्रांति का उत्सव पतंग बनाओ प्रतियोगिता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों को चाइनीज मांझे के प्रयोग न करने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम प्रभारी आलोक सिंह एवं विद्यालय परिवार के अध्यापक अध्यापिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने पतंग प्रतियोगिता में भाग लेकर आनन्द लिया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मौसम खुशवार एवं हवा चलने से बच्चों में अति उत्साह देखा गया।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रतियोगिता में नन्हें मुन्ने विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रंग बिरंगी पतंगें बनाई।</li>
<li style="text-align:justify;">कक्षा प्रथम के नन्हे मुन्हे बच्चो ने कागज से रंग-बिरंगी पतंगे भी बनाकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाया।</li>
<li style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मनीषा स्वामी, मेघा सिंह, प्रेमप्रकाश नाई, रायचन्द आदि ने सहयोग कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">पतंगबाजी में घायल हुए सैकड़ों पक्षियों का उपचार कर बचाई जान</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> पशुपालन विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने मंगलवार को शहर में शिविर लगाकर मकर सक्रांति पर पतंगबाजी में घायल हुए सैकड़ों पक्षियों का उपचार कर जान बचाई। कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचन्द कटारिया ने यहां वैशाली नगर स्थित वशिष्ठ मार्ग पर नि:शुल्क पक्षी चिकित्सा शिविर का उद्घाटन किया। पशुपालन मंत्री कटारिया ने बेजुबान पक्षियों की जान बचाने के पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि घायल पक्षियों के उपचार के लिए सभी को आगे आना होगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">  पशुपालन विभाग ने शहर सहित प्रदेशभर में घायल पक्षियों के इलाज के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस पुण्य के काम में हर संभव सहयोग कर रही है, जो वाकई काबिले तारीफ है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस मौके पर उन्होंने लोगों से पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का उपयोग न करने अपील की।</li>
<li style="text-align:justify;">घायल पक्षी को तुरंत नजदीकी उपचार केंद्र पर पहुंचाने की अपील की।</li>
<li></li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 21:06:38 +0530</pubDate>
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                <title>फिजाओं में आज भी गूंजती है हेमंत कुमार के संगीत की खूशबू</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (वार्ता) फिल्म जगत को अपनी मधुर संगीत लहरियों से सजाने संवारने वाले महान संगीतकार और पार्श्वगायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिजां में गूंजते महसूस होते हैं। बनारस में 16 जून 1920 को जन्मे हेमंत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता के मित्रा इंस्टीच्यूट से पूरी की। इंटर की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/special-on-the-occasion-of-september-26-the-death-anniversary/article-6053"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/hemant-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (वार्ता)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म जगत को अपनी मधुर संगीत लहरियों से सजाने संवारने वाले महान संगीतकार और पार्श्वगायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिजां में गूंजते महसूस होते हैं। बनारस में 16 जून 1920 को जन्मे हेमंत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता के मित्रा इंस्टीच्यूट से पूरी की। इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हेमंत कुमार ने जादवपुर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया लेकिन कुछ समय बाद हेमंत कुमार ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उनका रूझान संगीत की ओर हो गया था और वह संगीतकार बनना चाहते थे । इस बीच हेमंत कुमार ने साहित्य जगत मे भी अपनी पहचान बनानी चाही और एक बंगाली पत्रिका ..देश ..में उनकी एक कहानी भी प्रकाशित हुई लेकिन वर्ष 1930 के अंत तक उन्हाेंने अपना पूरा ध्यान संगीत की ओर लगाना शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने बचपन के मित्र सुभाष की सहायता से वर्ष 1930 में हेमंत कुमार को आकाशवाणी के लिये अपना पहला बंगला गीत गाने का मौका मिला। उन्हाेंने संगीत की अपनी प्रारंभिक शिक्षा बंगला संगीतकार शैलेश दत्त गुप्ता से ली। हेमंत कुमार ने उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा भी ली। वर्ष 1937 मे शैलेश दत्त गुप्ता के संगीत निर्देशन में एक विदेशी संगीत कंपनी कोलंबिया लेबल के लिये उन्हाेंने गैर फिल्मी गीत गाये। इसके बाद हेमंत कुमार ने लगभग हर वर्ष ग्रामोफोनिक कंपनी ऑफ इंडिया के लिये अपनी आवाज दी। ग्रामोफाेनिक कंपनी के लिये ही 1940 कमल दास गुप्ता के संगीत निर्देशन में उन्हें अपना पहला हिन्दी गाना ..कितना दुख भुलाया तुमने .. गाने का मौका मिला जबकि वर्ष 1941 में प्रदर्शित एक बंगला फिल्म के लिये उन्होंने अपनी आवाज दी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1944 मे एक गैर फिल्मी बंगला गीत के लिये हेमंत कुमार ने संगीत दिया। इसी वर्ष पंडित अमर नाथ के संगीत निर्देशन में उन्हें अपनी पहली हिन्दी फिल्म ..इरादा ..में गाने का मौका मिला। इसके साथ ही वर्ष 1944 में रवीन्द्र नाथ ठाकुर के ..रवीन्द्र संगीत .. के लिये हेमंत कुमार ने गाने रिकाॅर्ड किये। वर्ष 1947 में बंगला फिल्म ..अभियात्री .. के लिये बतौर संगीतकार काम किया। इस बीच हेमंत कुमार भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के सक्रिय सदस्य के रूप में काम करने लगे । धीरे-धीरे वह बंगला फिल्मों में बतौर संगीतकार अपनी पहचान बनाते चले गये। इस दौरान उन्हाेंने कई बंगला फिल्मों के लिये संगीत दिया जिनमें हेमेन गुप्ता निर्देशित कई फिल्में शामिल है ।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमेन गुप्ता कुछ समय बाद मुंबई आ गये और उन्होंने हेमंत कुमार को भी मुंबई आने का न्यौता दिया। वर्ष 1951 मे फिल्मीस्तान के बैनर तले बनने वाली अपनी पहली हिन्दी फिल्म ..आनंद मठ .. के लिये हेमेन गुप्ता ने हेमंत कुमार से संगीत देने की पेशकश की। फिल्म आनंदमठ की सफलता के बाद हेमंत कुमार बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गये । फिल्म आनंदमठ में लता मंगेश्कर की आवाज में गाया हुआ ..वंदे मातरम .. आज भी श्रोताओं को भावावेश में ला देता है। वर्ष 1954 में हेमंत कुमार के संगीत से सजी फिल्म ..नागिन .. की सफलता के बाद वह सफलता के शिखर पर पहुंच गये। फिल्म नागिन का एक गीत .. मन डोले मेरा तन डोले .. आज भी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय है।इस फिल्म के लिये वह सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1959 में हेमंत कुमार ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र मे भी कदम रखा और ..हेमंता बेला प्रोडक्शन .. नाम की फिल्म कंपनी की स्थापना की जिसके बैनर तले मृणाल सेन के निर्देशन में एक बंगला फिल्म ..नील आकाशेर नीचे .. का निर्माण किया । इस फिल्म को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल दिया गया। इसके बाद हेमंत कुमार ने अपने बैनर तले बीस साल बाद .कोहरा, बीबी और मकान .फरार . राहगीर और खामोशी जैसी कई हिन्दी फिल्मों का भी निर्माण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1971 में हेमंत कुमार ने एक बंगला फिल्म ..आनंदिता .. का निर्देशन भी किया लेकिन यह फिल्म बॉक्स आफिस पर बुरी तरह से नकार दी गयी। वर्ष 1979 में हेमंत कुमार ने चालीस और पचास के दशक में सलिल चौधरी के संगीत निर्देशन मे गाये गानों को दोबारा रिकार्ड कराया और उसे ..लीजेंड ऑफ ग्लोरी -2 .. के रूप में जारी किया और यह एलबम काफी सफल भी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1989 में हेमंत कुमार बंगलादेश के ढाका शहर में ..माइकल मधुसूधन अवार्ड लेने गये जहां उन्होंने एक संगीत समारोह मे हिस्सा भी लिया । समारोह की समाप्ति के बाद भारत लौटने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 26 सिंतबर 1989 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गये।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 25 Sep 2018 14:07:28 +0530</pubDate>
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