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                <title>Javed Akhtar - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जावेद अख्तर का पाकिस्तान को संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[बॉीवुड के प्रसिद्ध लेखक जावेद अख्तर ने लाहौर में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान को कई सलाहें दी। उन्होंने बहादुरी के साथ-साथ नरम तरीके से कई वास्तविक घटनाओं से पाकिस्तान को एहसास करवाया। मुंबई हमले का दर्द भी अख्तर के दिल में था और हमलावरों का अभी भी पाकिस्तान में सरेआम घूमने पर भी आपत्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/javed-akhtars-message-to-pakistan/article-43881"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/javed-akhtar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉीवुड के प्रसिद्ध लेखक जावेद अख्तर ने लाहौर में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान को कई सलाहें दी। उन्होंने बहादुरी के साथ-साथ नरम तरीके से कई वास्तविक घटनाओं से पाकिस्तान को एहसास करवाया। मुंबई हमले का दर्द भी अख्तर के दिल में था और हमलावरों का अभी भी पाकिस्तान में सरेआम घूमने पर भी आपत्ति जताई। अख्तर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुंबई हमले 26/11 के दोषी पाकिस्तान में आजाद घूम रहे हैं और इस संबंधी भारत की शिकायत भी उचित है। नरम शब्दों में ही अख्तर ने पाकिस्तान की गलतियों का पर्दाफाश किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही उन्होंने भारत-पाक संबंधों में खटास और पाकिस्तान शासकों और कई कट्टरपंथियों द्वारा बनाए गए माहौल का जिक्र बिना किसी का नाम लिए किया। नि:संदेह जावेद अख्तर ने एक लेखक की जिम्मेवारी निडरता, स्पष्टता व नेक भावना से निभाई है। सच्चा लेखक वही होता है जो किसी भी माहौल में सच को कहने से संकोच न करे, अपितु अधिकतर ऐसा होता है कि लेखक जिस देश में जाता है वहां के माहौल के दबाव में दब जाता है। भले ही जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की गलतियों से पर्दा हटाया फिर भी उनका लहजा अपने आप में एक संदेश देता है कि दोनों देशों में बेहतर संबंध स्थापित होने चाहिए। अख्तर ने यह एहसास करवाया है कि यदि भारत-पाक संबंधों में सुधार नहीं हुआ तब इसका दोषी पाकिस्तान ही है, जहां भारत विरोधी गतिविधियों और प्रॉपेगंडा जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में कलाकार स्वतंत्र सोच का मालिक होता है, उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए काम करना होता है। पाकिस्तान के कलाकार भी भारत आते हैं और भारत के साथ अच्छे संबंधों की बात करते हैं लेकिन अपने देश की गलत कार्रवाईयों और कूड़ प्रचार पर चुप्पी साध लेते हैं। वास्तव में कलाकार की आवाज आवाम की आवाज होती है, कलाकार की बात करोड़ों लोग सुनते हैं। इस बात पर भी गौर करनी चाहिए कि कलाकार का उद्देश्य नफरत पैदा नहीं करना होता है बल्कि भाईचारे व अमन विरोधी ताकतों की निंदा कर सद्भाव का संदेश देना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेहतर हो यदि पाकिस्तान के शासक आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने की अपनी जिम्मेवारी को निभाएं। पाकिस्तान के शासकों को यह भी समझना होगा कि देश की अर्थव्यवस्था का बदहाल स्थिति का कारण भी आतंकवाद ही है। आतंक को बढ़ावा देने के कारण ही पाकिस्तान विकास की राह भूल गया। अब वक्त है कि पाक कलाकारों की आवाज को सुने और समझे क्योंकि कलाकार की आवाज को पाक की आवाम सुन और समझ भी रही है।</p>
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                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Feb 2023 12:39:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>काश कुछ लोगों में नीरज चोपड़ा और बजरंग जैसी शिष्टता और आईक्यू होता : जावेद अख्तर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। मशहूर लेखक जावेद अख़्तर ने नीरज चोपड़ा पर मचे हालिया विवाद को लेकर अपनी बात रखी है। वहीं नीरज के समर्थन में आए पहलवान बजरंग पूनिया की भी जावेद अख्तर ने दिल खोलकर तारीफ की। जावेद अख्तर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘काश हमारे देश में कुछ लोगों के पास नीरज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wish-some-people-had-chivalry-and-iq-like-neeraj-chopra-and-bajrang/article-26354"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/javed-akhtar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> मशहूर लेखक जावेद अख़्तर ने नीरज चोपड़ा पर मचे हालिया विवाद को लेकर अपनी बात रखी है। वहीं नीरज के समर्थन में आए पहलवान बजरंग पूनिया की भी जावेद अख्तर ने दिल खोलकर तारीफ की। जावेद अख्तर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘काश हमारे देश में कुछ लोगों के पास नीरज चोपड़ा और बजरंग पूनिया जैसे हमारे खिलाड़ियों की क्लास, शालीनता, आईक्यू और खेल भावना होती। हालांकि जावेद अख्तर के इस ट्विट पर कुछ लोग भड़के भी नजर आए और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ये है पूरा मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जिस दिन उनका फाइनल मुकाबला था, वो अपना जैवलिन ढूंढ रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी अरशद नदीम उनकी जैवलिन लेकर टहल रहे हैं। उन्होंने जल्दी से उनसे जैवलिन लिया और जाकर अपना पहला थ्रो फेंका था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इसी बात पर मचा बवाल</h4>
<p style="text-align:justify;">नीरज के ये कहने के बाद कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रंग देना शुरू किया। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा कि खेल के मैदान में एक साजिश की गई ताकि नीरज जीत न सकें। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने इस पर कड़ी टिप्पणी देनी शुरू की, जिसके बाद नीरज सामने आए और उन्होंने कहा कि उनका सहारा लेकर इसे मुद्दा न बनाया जाए। स्पोर्ट्स सभी को मिलकर चलना सिखाता है। हम सभी खिलाड़ी प्यार से रहते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बजरंग पूनिया ने किया समर्थन</h4>
<p style="text-align:justify;">नीरज चोपड़ा का बयान सामने आने के बाद कई खिलाड़ियों ने उनके प्रति अपना समर्थन जताया, जिसमें बजरंग पूनिया भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि एथलीट चाहे पाकिस्तान का हो या किसी अन्य देश का, वो अपने राष्ट्र का प्रनिधित्व करता है। वो (नदीम) पहले एक खिलाड़ी हैं। हम उस व्यक्ति के खिलाफ कुछ कहें, सिर्फ इसलिए कि वो पाकिस्तान से हैं, ये बात ठीक नहीं है। बजरंग के अलावा टेबल टेनिस खिलाड़ी शरत कमल, रेसलर साक्षी मालिक, डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर ने भी नीरज के प्रति अपना समर्थन जताया है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Aug 2021 10:54:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Javed Akhtar 75 साल के हुए</title>
                                    <description><![CDATA[कलम से हर तरह के गीत निकले | Javed Akhtar मुंबई (एजेंसी)। गीतकार जावेद अख्तर ने शुक्रवार को 75वां जन्मदिन मनाया। बॉलीवुड में जावेद अख्तर (Javed Akhtar ) ने लेखक के तौर पर सलमान खान के पिता सलीम खान के साथ जोड़ी के तौर पर कदम रखा था। लेकिन गीतकार के तौर पर उन्होंने यश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/javed-akhtar-turns-75/article-12549"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/javed-akhtar.jpg" alt=""></a><br /><h2>कलम से हर तरह के गीत निकले | <span lang="en" xml:lang="en">Javed Akhtar </span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> गीतकार जावेद अख्तर ने शुक्रवार को 75वां जन्मदिन मनाया। बॉलीवुड में जावेद अख्तर (<span lang="en" xml:lang="en">Javed Akhtar </span>) ने लेखक के तौर पर सलमान खान के पिता सलीम खान के साथ जोड़ी के तौर पर कदम रखा था। लेकिन गीतकार के तौर पर उन्होंने यश चोपड़ा की सिलसिला के साथ बॉलीवुड में कदम रखा था। जावेद अख्तर की कलम से हर तरह के गीत निकले, कभी देशभक्ति से भरे तो कभी जोश से लबालब। और कभी जिदंगी की कुछ बेहतरीन सीख। बचपन में जावेद के माता-पिता उन्हें प्यार से जादू कहकर पुकारा करते थे। बाद में उन्हें जावेद नाम दिया गया। साल 1964 में काम की तलाश और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मुंबई आ गए। यहां शुरूआती दौर में जावेद ने बहुत कठिनाइयों में जीवन गुजारा। जावेद अख्तर ने अपने करियर की शुरूआत सरहदी लूटेरा की थी। इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे और जावेद क्लैपर बॉय।</p>
<ul>
<li><strong>बता दें कि जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। </strong></li>
<li><strong>उनके पिता जान निसार अखतर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अखतर मशहूर उर्दु लेखिका तथा शिक्षिका थीं। </strong></li>
<li><strong>उनकी माँ का इंतकाल तब हो गया था, जब वे बेहद ही छोटे थे।</strong></li>
</ul>
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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 13:59:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>सामाजिक जीवन जीने का आंनद कुछ और ही होता है</title>
                                    <description><![CDATA[इंटरव्यू: जावेद अख्तर जावेद अख्तर साहब का अब परिचय देना खुद में बेमानी सा लगता है। कला क्षेत्र के प्रत्येक विधाओं में उन्होंने जिस तरह से छाप छोड़ी है वहां तक पहुंचना किसी के लिए सपना मात्र होता है। कवि, हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार, पटकथा लेखक, डायलॉग राइटर, सामाजिक कार्यकर्ता के अलावा भी कई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/interview-javed-akhtar/article-6107"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/javed-akhtar.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong> इंटरव्यू: जावेद अख्तर</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">जावेद अख्तर साहब का अब परिचय देना खुद में बेमानी सा लगता है। कला क्षेत्र के प्रत्येक विधाओं में उन्होंने जिस तरह से छाप छोड़ी है वहां तक पहुंचना किसी के लिए सपना मात्र होता है। कवि, हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार, पटकथा लेखक, डायलॉग राइटर, सामाजिक कार्यकर्ता के अलावा भी कई ऐसी खूबियां इस प्रचंड शख्सियत में व्याप्त हैं जिसे लोग कम ही जानते हैं। राजनीति के क्षेत्र में भी विगत सालों से सक्रिय हैं। जावेद अख्तर साहब को पिछले दिनों दिल्ली सरकार की ओर से शलाका सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर रमेश ठाकुर ने उनसे बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पिछले कुछ समय से आपकी सक्रियता सार्वजनिक मंचों पर ज्यादा देखी जा रही है, कुछ खास वजह?</h2>
<p style="text-align:justify;">शख्सियत बड़ी हो या छोटी। उसकी निमार्ता जनमानस होती है। मुल्क की आवाम ने मुझे जो प्यार-सम्मान दिया है, बस उसी को ध्यान में रखकर उनकी बेहतरी के लिए हर संभव कुछ अच्छा करने का प्रयास करता हूं। वैसे अब चाहत किसी चीज की नहीं हैं खुदा ने उम्मीद से ज्यादा दे रखा है। सार्वजनिक मंचों पर जाने के संबंध में मैं आपको बस इतना ही कह सकता हूं। ये मंच ही इंसान को बुनियादी एहसासों से रूबरू कराते हैं। क्योंकि पूरा जीवन तो हमारा रंगमंच से ही जुड़ा रहा है। जिस कारण इन मंचों से हमारी दूरी रही। खास जीवन के इतर अब आम जीवन जीने में मजा आ रहा है। विगत कुछ सालों से मुझे एहसास भी हुआ है कि सामाजिक जीवन जीने का आनंद ही कुछ और है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार ने इस वर्ष आपको शलाका पुरस्कार से नवाजा है, लेकिन मंच पर बोलने नहीं दिया, ऐसा क्यों?</h2>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कुछ गलतफहमियों के कारण ऐसा हुआ। मेरा सम्मान करने के तुरंत बाद किसी दूसरे का नाम बोल दिया गया। मैं हक्का-बक्का रह गया। कुछ क्ष़्ाण मंच पर रूका भी, लेकिन किसी ने माइक पर बोलने को नहीं कहा। थोड़ा गुस्सा भी आया, जिस कारण मैं मंच छोड़कर बाहर निकल आया। तभी पीछे से कई लोग भागकर मेरे पास आए। और बोलने लगे कि सर कुछ गलतियों के कारण आपको बोलने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। खैर, बाद में मैं दोबारा से मंच पर गया और अपने विचार रखे। सम्मान के लिए मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को धन्यवाद देना चाहूंगा। उनके उज्जवल भविष्य की मैं कामना करता हूं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और उप-राज्यपाल के बीच टकराव को आप कैसे देखते हैं?</h2>
<p style="text-align:justify;">देखिए मैं कोई राजनैतिक बयान देकर बखेड़ा खड़ा नहीं करना चाहता। लेकिन मुझे लगता इन सभी के बीच कुछ तालमेल की कमी दिखती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अरविंद केजरीवाल अपने स्तर पर दिल्ली के लिए अच्छा न कर रहे हों। हां, वह अलग बात है उनकी केंद्र सरकार से पटरी न खा रही हो। लेकिन जनता की भलाई के लिए दोनों सरकारों को मधरु संबंध स्थापित कर आपसी तालमेल में मिठास घोलने की दरकार है। अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली की जनता के अलावा दूसरे राज्यों की आवाम को भी बहुत भरोसा और उम्मीदें हैं। मैं उम्मीद करूंगा कि वह उनकी आकांक्षाओं पर खरा उतरेंगे। दिल्ली को लेकर उनका काम कैसा है इसकी समीक्षा आप पत्रकार लोग करोगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सदन में आने के बाद आपकी कलात्मक क्षेत्रों से कुछ दूरी बनी है?</h2>
<p style="text-align:justify;">किस क्षेत्र को कितना और कब समय देना है, उसको मैं ठीक से मैंनेज कर लेता हूं। बेटा फरहान अख्तर भी कुछ ऐसे ही सवाल अक्सर करता रहता है। देखिए, ये आपकी उर्जा पर निर्भर करता है कि आप कितना वर्क उठा सकते हो। सदन के जरिए मुझे अपने पूरे मुल्क की समस्याओं पर बोलने का मौका मिला था। जिसे मैंने स्वभाग्य समझा। संसद में देश की जनता का प्रतिनिधित्व बनकर आवाज उठाना सभी का सपना होता है। मैं एहसानमंद हूं कला क्षेत्र का जिसके जरिए मुझे ये मौका मिला। रही बात कला क्षेत्र से दूरी बनाने की, वो नहीं हो सकता। यही वो क्षेत्र है जिसने मुझे जावेद अख्तर बनाया। जिंदगी के आखिरी लम्हों तक पटकथा लेखन से जुड़ा रहूंगा। इसके बिना जिंदगी अधूरी सी लगती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">फिल्मों की पटकथा का स्वरूप अब पहले से काफी जुदा है, आपको असहजता तो नहीं होती?</h2>
<p style="text-align:justify;">मैं बूढा हो गया हूं इसलिए ये सवाल कर रहे हो न! देखिए, आज की फिल्मों में आधुनिकता का तड़गा लग चुका है। जो लेखन हम पहले करते थे उसी को मिक्स किया जा रहा है। लगान, तेजाब, 1942 लव स्टोरी और बॉर्डर जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए लिखे गीतों को लोग आज भी गुनगुनाते हैं। इन गीत लेखनों के चलते मुझे कई फिल्मफेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म भूषण भी मिला। इसके अलावा पुराने जमाने की सीता और गीता, जंजीर, दीवार और शोले की कहानी, पटकथा और संवाद में मेरी और सलीम की जोड़ी को लोग आज भी पसंद करते हैं। देखिए, हर चीज का एक दौर और समय होता है। जैसे प्रकृति का नियम बदलाव है तो उसी के साथ हम सबों को भी ढलते रहना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बेटी जोया और बेटा फरहान भी आपसे टिप्स लेते होंगे?</h2>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के लिए पिता बरगद के पेड़ की तरह होते हैं। बिना उनकी छाया के भला वह कैसे महरूम रहेंगे। भाग मिल्खा भाग में फरहान ने महीनों जिस कठिनाई से परिश्रम किया था उसके पीछे मैं भी खड़ा था। फरहान बिना पापा के कोई बड़ा फैसला आज भी नहीं करता। उसके हर निर्णय में मेरी परस्पर भूमिका रहती है। एक पिता अपने औलाद को आगे बढ़ाने के लिए जो किरदार निभाता है मैं भी वही करता हूं। बाकि आज उसने जो नाम कमाया है उसे देखकर और सुनकर अच्छा लगता है। फरहान मुख्यता: फिल्म निमार्ता, निर्देशक्, अभिनेता और गायक हैं। जोया भी निर्देशक के रूप में अच्छा कर रही हैं। हालांकि बच्चे अब मुझे ज्यादा काम करने की इजाजत नहीं देते।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक: रमेश ठाकुर</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 10:16:20 +0530</pubDate>
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