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                <title>CPEC - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सीपीईसी भारत की जमीन पर, पाकिस्तान-चीन बंद करें काम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेताया कि वे देश के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करना बंद करें। दरअसल बीजिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और चीन के विदेश मंत्री वांग ई के बीच मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cpec-on-india-land-pakistan-china-stop-work/article-25596"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/china-pakistan-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेताया कि वे देश के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करना बंद करें। दरअसल बीजिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और चीन के विदेश मंत्री वांग ई के बीच मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू व कश्मीर का जिक्र था। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि चीन-पाकिस्तान गैरकानूनी तरीके से कब्जा की गई भारतीय जमीन पर आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का निर्माण भी बंद करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत हमेशा की तरह इन देशों के बयान में जम्मू व कश्मीर का जिक्र आने को सिरे से खारिज करता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इस संयुक्त बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का जिक्र किया गया है। हमने हमेशा पाकिस्तान व चीन को कहा है कि तथाकथित सीपीईसी का निर्माण पाकिस्तान की तरफ से गैर कानूनी तरीके से कब्जा की गई भारतीय जमीन पर किया जा रहा है। हम पाकिस्तान की तरफ से कब्जा की गई गैरकानूनी जमीन में यथास्थिति बदलने की कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं। हम सभी पक्षों से इस पर किसी भी तरह का काम रोकने की अपील करते हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jul 2021 10:52:04 +0530</pubDate>
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                <title>‘सीपीईसी’ बन गयी चीन-पाक के गले की हड्डी</title>
                                    <description><![CDATA[चीन और पाक के लिए सीपीईसी गले की हड्डी बन गई है। अब ये दोनों देश अपनी इस परियोजना पर पछता रहे हैं और इससे बाहर आने के लिए दिन-प्रतिदिन नये हथकंडे अपना रहे हैं, नये ख्वाब दिखाये जा रहे हैं, तीसरे देशों को लालच दिखाया जा रहा है, लाभ की परियोजना बताने के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/china-pakistan-bone-became-cpec/article-6231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/pak-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चीन और पाक के लिए सीपीईसी गले की हड्डी बन गई है। अब ये दोनों देश अपनी इस परियोजना पर पछता रहे हैं और इससे बाहर आने के लिए दिन-प्रतिदिन नये हथकंडे अपना रहे हैं, नये ख्वाब दिखाये जा रहे हैं, तीसरे देशों को लालच दिखाया जा रहा है, लाभ की परियोजना बताने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। पर स्थिति यह है कि सीपीईसी परियोजना को लेकर कोई तीसरा देश न तो रूचि दिखा रहा है और न ही चीन-पाकिस्तान की इस परियोजना को लाभ की परियोजना समझने के लिए तैयार है। तीसरे देशों की समझ यह है कि चीन का उपनिवेशवाद पाकिस्तान में ही दफन हो जाएगा,</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने अपने पड़ोसियों के धमकाने और पड़ोसियों की आर्थिक संसाधनों पर कब्जा जमाने की जो मानसिकताएं पाल रखी हैं वे सभी मानसिकताएं पाकिस्तान के अंदर में दफन होने वाली हैं। यह भी प्रश्न है जो परियोजना खुद विवादास्पद हो, जो परियोजना खुद अत्यंत खचीर्ली हो गयी हो, जो परियोजना खुद अलाभकारी परियोजना बन गयी हो, जिस परियोजना की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, जिस परियोजना को लेकर हिंसा की बड़ी-बड़ी घटनाएं घटती हैं, जिस परियोजना को लेकर जनविरोध की स्थिति उत्पन्न है, जिस परियोजना को लेकर राजनीतिक रार भी खडा है, उस परियोजना को तीसरे देश लाभकारी और हितकारी कैसे समझेंगे?</p>
<p style="text-align:justify;">नये प्रधानमंत्री इमरान खान की भी यह समझदारी बन गयी है कि सीपीईसी को लेकर आंतरिक विसंगतियां दूर नहीं की जायेंगी, बलूचिस्तान की आबादी की आशंकाए दूर नहीं की जा सकती है, बलूचिस्तान की आबादी को लाभ का हिस्सेदार नहीं बनाया जायेगा तो फिर यह परियोजना आत्मघाती साबित हो सकती है। बलूचिस्तान की आबादी को खुश करने के लिए नये सिरे ख्वाब दिखाये गये हैं, फिर भी बलूचिस्तान की आबादी का जनविरोध समाप्त नहीं हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन चाहता है कि पाकिस्तान की नयी सरकार परियोजना को लेकर आंतरिक विसंगतियों का समाधान करे और परियोजना में लगे चीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। परियोजना की सुरक्षा में पाकिस्तान सेना के 15000 हजार जवान लगे हुए हैं। इमरान खान सरकार ने एक बयान दिया था कि सीपीईसी से सउदी अरब को जोडा जायेगा पर सउदी अरब ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी। चीन चाहता था कि इस परियोजना के साथ ईरान भी जुड़े पर ईरान पाकिस्तान की आतंकवादी नीति के कारण जुड़ने से इनकार कर दिया। ईरान के अंदर में घटने वाली आतंकवादी घटनाओं में पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों की हिस्सेदारी से ईरान चिढा हुआ है। ईरान पाकिस्तान के साथ कोई भी विकासात्मक कूटनीति को हितकारी नहीं मानता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने सीपीईसी परियोजना को लेकर दुनिया को चकित कर दिया था, दुनिया भी भ्रमित हो गयी थी, दुनिया यह समझ बैठी थी कि यह परियोजना सही में दुनिया के लिए लाभकारी है, चीन एक ऐसा आर्थिक गलियारा बनाने जा रहा है जो अमेरिका और यूरोप को न केवल आईना दिखायेगा बल्कि चीन अमेरिका और यूरोप से भी बडी शक्ति बन जायेगी। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने 2013 में इस परियोजना की घोषणा की थी।परियोजना की घोषणा करते हुए चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा था कि पाकिस्तान के लिए यह परियोजना गेम चेंजर साबित होगी, दुनिया के लिए पाकिस्तान अब विकसित देश के रूप में सामने आयेगा,</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान की आर्थिक छवि बदल जायेगी, पाकिस्तान एशिया की सबसे बडी आर्थिक अर्थव्यवस्था वाला देश होगा। चीनी राष्ट्रपति की इस घोषणा को लेकर पाकिस्तान के शासक वर्ग बड़े खुश थे। पाकिस्तान में पहली बार कोई देश इतना बडा निवेश करने के लिए तैयार हुआ था। सीपीईसी परियोजना पर चीन ने 46 अरब डालर खर्च करने की घोषणा की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ सड़क मार्ग ही नहीं बल्कि विकास की कई अन्य योजनाओं को भी गति देने की बात थी। सड़क, रेल और बंदरगाहों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना था। चीन ने अपने व्यापारिक हितों के लिए पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह पहले से ही तैयार कर लिया था। ग्वादर बंदरगाह का उपयोग चीन अब अपने व्यापारिक हितों के लिए कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन को बदलते भारत की पहचान नहीं थी। चीन को जैसे के तैसे में जवाब देना शुरू कर दिया था। चीन की घेराबंदी के लिए भारत ने ईरान में बंदरगाह निर्माण का ठेका लिया जो चीन को स्वीकार नही हुआ। इसके साथ सी साथ भारत ने वियतनाम के साथ तेल उत्खनन की हिस्सेदारी बढायी। भारत ने दुनिया को यह बताया कि सीपीईसी परियोजना विवादित परियोजना है, यह भारतीय भूभाग का अतिक्रमण है, भारतीय भूभाग पर पाकिस्तान अवैध कब्जा कर रखा है, उस पर चीन आर्थिक गलियारे का निर्माण नहीं कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ इतना ही नहीं भारत ने बलूचिस्तान की राष्ट्रीयता का भी समर्थन कर दिया, दुनिया के सामने यह कह दिया कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान जन भावना को कूचल रहा है। चीन नागरिकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की सेना के 15000 हजार जवान लगे हुए हैं। ग्लोबल टाइम्स यह भी लिखता है कि भारत के विरोध के कारण और कोई देश इस परियोजना से जुड़ना नहीं चाहता है। इसलिए चीन को इस खतरे की घ्ांटी वाली परियोजना पर फिर से विचार करना होगा। चीन के सरकारी अखबार का आकलन एकदम सच है। जब पाकिस्तान का ही भविष्य तय नहीं है तो फिर सीपीईसी परियोनजा का भविष्य कैसे लाभकारी होगा?</p>
<p style="text-align:justify;">विष्णुगुप्त</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 12 Oct 2018 15:29:17 +0530</pubDate>
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                <title>सऊदी अरब सीपीईसी का हिस्सा नहीं : पाकिस्तान</title>
                                    <description><![CDATA[सऊदी अरब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा नहीं | CPEC इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से कहा कि सऊदी अरब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा नहीं है। पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री खुशरो बख्तियार ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सीपीईसी संरचना में सऊदी अरब जैसे किसी भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/saudi-arabia-is-not-part-of-cpec-pakistan/article-6116"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/cpec.jpg" alt=""></a><br /><h2>सऊदी अरब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा नहीं | CPEC</h2>
<p><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से कहा कि सऊदी अरब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा नहीं है। पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री खुशरो बख्तियार ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सीपीईसी संरचना में सऊदी अरब जैसे किसी भी तीसरे देश को शामिल करने का कोई फैसला नहीं किया गया है।</p>
<p>पिछले सप्ताह सऊदी अरब और पाकिस्तान ने तीन सड़क आधारभूत संरचना और सीपीईसी के ऊर्जा परियोजना की आर्थिक सहायता को लेकर तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किया। इसके बाद से अनुमान लगाया जा रहा था कि सऊदी अरब आर्थिक गलियारे में शामिल हो गया है। उन्होंने बताया,‘चीन और पाकिस्तान के बीच सीपीईसी द्विपक्षीय समझौता है और सऊदी अरब सीपीईसी में शामिल नहीं हो रहा है हालांकि वह तीसरे पक्ष के निवेशक के रूप में है, इससे सीपीईसी का आधार बढ़ जाएगा और इसकी गति तेज हो जाएगी।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 18:51:50 +0530</pubDate>
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