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                <title>Vladimir Putin - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Vladimir Putin RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत पहुंचे, पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वीरवार को भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने पालम हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। मोदी और पुतिन एक ही गाड़ी में बैठकर एयरपोर्ट से रवाना हुए। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पुतिन का यह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/russian-president-putin-arrives-in-india-pm-modi-welcomes-him-at-the-airport/article-78918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/putin-india-visit-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वीरवार को भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने पालम हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। मोदी और पुतिन एक ही गाड़ी में बैठकर एयरपोर्ट से रवाना हुए। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 20:12:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Vladimir Putin: इस तारीख को आ रहे हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमेरिका हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Vladimir Putin: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चार दिसंबर को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं। पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत यात्रा पर आ रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रूसी राष्ट्रपति पुतिन का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/russian-president-vladimir-putin-is-arriving-on-a-two-day-visit-to-india-on-december-four/article-78678"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/russia-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Vladimir Putin: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चार दिसंबर को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं। पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत यात्रा पर आ रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रूसी राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करेंगी और उनके सम्मान में भोज देंगी। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि पुतिन चार से पांच दिसंबर तक भारत यात्रा पर आ रहे हैं जहां वह भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यात्रा के दौरान पुतिन मोदी के साथ बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु पुतिन की अगवानी करेंगर और उनके सम्मान में भोज का आयोजन भी किया जाएगा। पुतिन की यह यात्रा भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और विशेष तथा विशेषाधिकार रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का विजन तय करने और परस्पर महत्व के क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी। Vladimir Putin</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जियो, एयरटेल ने इस काम में सबको पीछे छोड़ दिया, जानिये…" href="http://10.0.0.122:1245/jio-airtel-left-everyone-behind-in-this-work-know/">जियो, एयरटेल ने इस काम में सबको पीछे छोड़ दिया, जानिये…</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 14:18:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Donald Trump Threaten Putin: ट्रम्प ने पुतिन को दी चेतावनी, युद्ध समाप्त नहीं किया तो रूस को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। Donald Trump Threaten Putin: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को अलास्का में दोनों नेताओं की बैठक के दौरान यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने पर सहमत नहीं हुए तो रूस को बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने वाशिंगटन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/donald-trump-has-said-that-if-russia-does-not-end-the-war-then-it-will-have-to-face-serious-consequences/article-74631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/washington-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> Donald Trump Threaten Putin: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को अलास्का में दोनों नेताओं की बैठक के दौरान यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने पर सहमत नहीं हुए तो रूस को बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने वाशिंगटन के कैनेडी सेंटर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या इसका मतलब नये प्रतिबंध या टैरिफ लगाना है तो श्री ट्रम्प ने आपत्ति व्यक्त की और कहा कि मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है लेकिन इसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है माजरा | Donald Trump Threaten Putin</h3>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने पहले यूक्रेन युद्ध के लिए दंड के रूप में मास्को पर नए प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी तथा पिछले शुक्रवार को समय सीमा निर्धारित की थी कि अगर पुतिन वार्ता की मेज पर नहीं आए तो प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। वह समय-सीमा बिना किसी नए प्रतिबंध के समाप्त हो गई जिसका अमेरिका और रूस के बीच व्यापार के निम्न स्तर को देखते हुए सीमित प्रभाव हो सकता था। ट्रम्प ने रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने रूसी तेल के दूसरे सबसे बड़े खरीदार भारत पर नए शुल्क तो लगाए लेकिन भारत के सबसे बड़े ग्राहक चीन पर नए शुल्क लगाने से परहेज किया। इस बीच, यूरोपीय नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रम्प से एकतरफा यूक्रेन शांति समझौता नहीं करने का आग्रह किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि श्री ट्रम्प ने उन्हें एक वर्चुअल बैठक के दौरान बताया कि क्षेत्रीय मुद्दों पर यूक्रेन के राष्ट्रपति के अलावा किसी और के द्वारा बातचीत नहीं की जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Delhi NCR Weather Update: दिल्ली-एनसीआर हुआ पानी पानी! आईएमडी ने जारी की आगे के लिए चेतावनी!" href="http://10.0.0.122:1245/delhi-ncr-is-flooded-imd-has-issued-a-warning-for-the-future/">Delhi NCR Weather Update: दिल्ली-एनसीआर हुआ पानी पानी! आईएमडी ने जारी की आगे के लिए चेतावनी!</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 14:49:10 +0530</pubDate>
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                <title>Russia Jet Crash: रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ बगावत करने वाले वैगनर प्रमुख प्रिगोझिन की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[Yevgeny Prigozhin: रूस में निजी सेना वैगनर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की मॉस्को के पास टवर क्षेत्र में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। रुस की हवाई परिवहन संघीय एजेंसी ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। एजेंसी द्वारा अपने टेलीग्राम अकाउंट पर जारी सूची के अनुसार, प्रिगोझिन उन दस लोगों में शामिल थे, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wagner-chief-prigozhin-killed-in-rebellion-against-russian-president-putin/article-51549"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/russia-jet-crash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Yevgeny Prigozhin: रूस में निजी सेना वैगनर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की मॉस्को के पास टवर क्षेत्र में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई है। रुस की हवाई परिवहन संघीय एजेंसी ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। एजेंसी द्वारा अपने टेलीग्राम अकाउंट पर जारी सूची के अनुसार, प्रिगोझिन उन दस लोगों में शामिल थे, जिनकी बुधवार को विमान दुर्घटना में मौत हो गयी थी। एजेंसी ने पहले कहा था कि टवर क्षेत्र में विमान दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यात्रियों में येवगेनी प्रिगोझिन भी शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को से सेंट पीटर्सबर्ग जा रहा एक निजी एम्ब्रेयर विमान बुधवार को टवर क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में विमान में सवार सभी दस लोगों की मौत हो गई। व्हाइट हाउस प्रेस पूल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को इसके बारे में जानकारी दी गई। दुर्घटना के बारे में पूछे जाने पर बाइडेन ने कहा, ‘मैं वास्तव में नहीं जानता कि क्या हुआ लेकिन मैं आश्चर्यचकित नहीं हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन ने सोशल मीडिया साइट एक्स, पर अपने अकाउंट के माध्यम से कहा, ‘हमने रिपोर्ट देखी है। अगर पुष्टि हो जाती है, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।’</p>
]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 17:59:57 +0530</pubDate>
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                <title>Vladimir Putin: बढ़ सकती हैं खाद्य पदार्थों की कीमतें व खाद्य संकट</title>
                                    <description><![CDATA[Vladimir Putin: रूस ने यूक्रेनी अनाज को काला सागर के जरिये दुनिया के बाजारों में सुरक्षित पहुंच को मंजूरी देने वाले ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव (बीएसजीआई) अर्थात काला सागर अनाज समझौते से खुद को अलग कर लिया है। रूस के इस फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/putins-heart-also-has-to-be-understood/article-50550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/president-bladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Vladimir Putin: रूस ने यूक्रेनी अनाज को काला सागर के जरिये दुनिया के बाजारों में सुरक्षित पहुंच को मंजूरी देने वाले ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव (बीएसजीआई) अर्थात काला सागर अनाज समझौते से खुद को अलग कर लिया है। रूस के इस फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने व खाद्य संकट उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, समझौते में बड़ी भूमिका निभाने वाले तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब आर्दोआन का विश्वास है कि रूस को समझौते में वापस लौटने के लिए राजी किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अहम सवाल यह है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया को भुखमरी की ओर धकेलने वाला यह फैसला क्यों लिया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि पुतिन यूक्रेन युद्ध में अनाज को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मूड में हो। या फिर पुतिन बीएसजीआई की आड़ में पश्चिमी देशों पर सौदेबाजी के लिए दबाव बना रहे हों। पुतिन के वक्तव्य से तो यही लग रहा है। वे बार-बार कह रहे हंै कि मास्को के हितों की अनदेखी की जा रही है। इस समझौते से रूस को वो फायदा नहीं हुआ जिसका वादा किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">काला सागर दक्षिणपूर्वी यूरोप और एशिया के बीच एक रणनीतिक क्षेत्र है, जिसके जरिए समुद्री, महाद्वीपीय, भू-रणनीतिक और आर्थिक हितों को एक साथ साधा जा सकता है। यूक्रेन जिसे यूरोप की ‘बे्रडबास्केट’ कहा जाता है, दुनिया के सबसे बड़े अनाज आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। वह वैश्विक बाजार में सालाना 45 मिलियन टन से अधिक अनाज उपलब्ध कराता है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार यूक्रेनी अनाज दुनिया भर में 400 मिलियन लोगों का पेट भरता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूसी नौसैनिक जहाजों ने यूक्रेन के बंदरगाहों की नाकेबंदी की तो 20 मिलियन टन से अधिक अनाज बंदरगाहों पर खड़े कंटेनरों में अटक कर रह गया।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की इस कार्रवाई से अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में खाद्यान्न संकट पैदा हो गया। खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान को छूने लगी। ऐसे में अनाज और अन्य उर्वरकों की सस्ती पहुंच के लिए पिछले साल जुलाई में रूस, तुर्किए, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र ने काला सागर अनाज पहल या ब्लैक सी र्ग्रेन इनिशिएटिव के रूप में यह समझौता किया था। समझौते के तहत यूक्रेन के तीन बंदरगाहों ओडेसा, चोनोर्माेर्स्क और पिवडेनी से जहाजों को सुरक्षित मार्ग की गारंटी दी गई थी । समझौते की पालना के लिए तुर्किए के इस्तांबुल में एक संयुक्त समन्वय केन्द्र (जेसीसी) स्थापित किया गया। समझौते को वैश्विक अनाज संकट को हल करने की दिशा में एक कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन पर रूसी हमलों के बाद जहां एक और खाद्य पदार्थो की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो गई थी वहीं समझौते के बाद कीमतें गिरना शुरू हो गई। लगभग एक वर्ष के दौरान इसमें 23 फीसदी की कमी आई है। समझौते की बदौलत मई 2023 तक यूक्रेन द्वारा 32 मिलियन टन से अधिक अनाज (मक्का और गेहंू) का निर्यात किया गया है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद गेहंू और मक्के की कीमतों में क्रमश: 17 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की गिरावट आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर कहा जाए तो समझौते के बाद यूक्रेन से होेने वाले खाद्यन निर्यात के कारण वैश्विक अनाज बाजारों ने राहत की सांस ली। इस समझौते की बदौलत ही संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के खाद्य मूल्य सूचकांक में गुजरे एक साल के दौरान हर महीने कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। मार्च 2022 के अपने सर्वाधिक उच्च स्तर के बाद से जुलाई 2023 तक इसमें 23 प्रतिशत गिरावट दर्ज की जा चुकी हैं। रूस ने 17 जुलाई को जैसे ही डील खत्म करने का ऐलान किया इंटरनेशनल मार्केट में खाद्य प्रदार्थो की कीमते 3 गुना तक बढ़ गई। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि बीएसजीआई वैश्विक अनाज बाजार के लिए किस कदर जरूरी था। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मामले में पुतिन के पक्ष को भी देखा जाना चाहिए। पुतिन लंबे समय से यह शिकायत कर रहे थे कि पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से रूस को अपने खाद्य पदार्थो और फटीर्लाइजर निर्यात करने की अनुमति देने वाले समझौते के हिस्से का पालन नहीं किया जा रहा है। पुतिन ने गरीब देशों तक अनाज नहीं पहुंचने की बात भी कही। पुतिन का आरोप बेजा नहीं है। समझौते के पक्ष में दलील तो यही दी जा रही थी कि इसके जरिये अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों को खाद्यन संकट से बचाने में मदद मिलेगी। लेकिन वास्तविकता यह थी कि यूक्रेनी बंदरगाहों से जाने वाले अनाज का एक बड़ा हिस्सा यूरोप के अमीर देशों के बाजारों में बिक रहा था। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि इन्हीं देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर रूस की अर्थव्यस्था का गला घोंटने के लिए उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। सच तो यह है कि समझौते की पूरी अंतर्कथा में रूस को खोने के लिए सब कुछ था पाने के लिए कुछ भी नहीं। लेकिन इसके बावजूद पुतिन ने सद्भावना दिखाई। मॉस्कों के हितों की अनदेखी होने के बावजूद वे समझौते के नवीनीकरण के लिए राजी हुए। लेकिन जब कीव ने क्रीमिया प्रायद्धीप को रूस से जोड़ने वाले केर्च ब्रिज पर हमला कर पुतिन को ललकारने का दुस्साहस किया तो गुस्साएं पुतिन ने समझौते से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया। हमले में दो लोगों की मौत हो गयी थी। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले पिछले अक्टूबर में भी पुतिन उस वक्त समझौते से हट गए थे जब काला सागर में रूसी जहाजों के बेड़े पर यूक्रेन ने ड्रोन हमला किया था। इसके बाद जब यूक्रेन ने संयुक्त समन्वय केन्द्र में इस बात की लिखित गांरटी दी कि सैन्य अभियानों के लिए मानवीय गलियारे का उपयोग नहीं किया जाएगा तब रूस दोबारा समझौते में शामिल हुआ। कोई दो राय नहीं कि समझौते से बाहर आना रूसी रणनीति का हिस्सा है। रूस अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में राहत चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब पुतिन के समझौते से बाहर निकलने के फैंसले के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन दुनिया को अनाज भेजना जारी रखेगा। हालांकि जेलेंस्की कह रहे हैं कि यूक्रेन डेन्यूब नदी के रास्ते निर्यात जारी रखेगा। एक बारगी जेलेंस्की के इस दावे को स्वीकार भी कर लिया जाए तो इससे यूरोप को तो सस्ता अनाज मिल सकता है, लेकिन चीन, यमन, मिस्र और अफगानिस्तान जैसे देशों तक डेन्यूबी नदी के रास्ते अनाज पहुंचाना संभव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा, पुतिन पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन की खाद्य निर्यात सुविधाओं पर हमला कर रहे हैं। ऐसे में रूसी द्वारा सुरक्षा गांरटी न दिये जाने तक शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को युद्ध क्षेत्र में भेजने के लिए क्यों तैयार होगी। निसंदेह रूस के इस फैसले का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल सकता है। दुनिया की हालत बदतर होगी और बड़ी संख्या में लोग भुखमरी के शिकार होंगे। लेकिन राहत की बात यह है कि पुतिन ने मांगे पूरी होने पर समझौते के नवीनीकरण के संकेत जरूर दिए हैं। इसलिए बेहतर यही है कि रूस के पक्ष को भी समझ लिया जाना चाहिए। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. एन.के सोमानी, अंतर्राष्टÑीय मामलों के जानकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चीन के फ़ुज़ियान में डोक्सुरी तूफ़ान के कारण भारी बारिश , परिवहन निलंबित" href="http://10.0.0.122:1245/doxuri-storm-causes-heavy-rain-in-fujian-china-transportation-suspended/">चीन के फ़ुज़ियान में डोक्सुरी तूफ़ान के कारण भारी बारिश , परिवहन निलंबित</a></p>
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                                                            <category>लेख</category>
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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 12:33:20 +0530</pubDate>
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                <title>Wagner Group का साहस और पुतिन की जिद्द</title>
                                    <description><![CDATA[Wagner Group : जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/wagner-groups-courage-and-putins-stubbornness/article-49408"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/wagner-group.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Wagner Group : जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की ओर से मोर्चा संभालने वाली निजी सैन्य कंपनी वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने बगावत का फैसला वापस लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बड़ी राहत प्रदान की है। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वैगनर ग्रुप (Wagner Group) ने अपने आका पुतिन को जिस तरह आंखें दिखाईं उससे दुनिया भर को यह संदेश गया है कि आतंक को पालना और निजी सैन्य समूहों को बढ़ावा देना कितना खतरनाक हो सकता है। भले कोई देश या राष्ट्राध्यक्ष दूसरों के खिलाफ उपयोग करने के लिए आतंक को पाले लेकिन एक दिन वही आतंक या निजी सैन्य समूह उसके लिए भस्मासुर साबित होता है। इसके अलावा, वैगनर ग्रुप की बगावत के बाद जिस तरह बेलारूस के राष्ट्रपति ने बीच बचाव करवा कर रूस को कुछ मांगों को मानने के लिए मनाया, वह यह भी दर्शाता है कि अपने लगभग ढाई दशक के कार्यकाल में पुतिन पहली बार कमजोर पड़े हैं। Vladimir Putin</p>
<h3>पुतिन के खिलाफ रूसियों के मन में बगावत की आग | Wagner Group</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, जिस तरह रोस्तोव में येवगेनी प्रिगोझिन के साथ सेल्फी लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए रूसियों में होड़ लगी हुई थी उससे यह भी प्रदर्शित होता है कि पुतिन को आंख दिखाने और पुतिन शासन को चुनौती देने की हिम्मत दिखाने वाले को जनता सराह रही है। जनता ने जिस तरह वैगनर ग्रुप के मुखिया को सराहा वह यह भी संकेत देता है कि पुतिन के खिलाफ रूसियों के मन में बगावत की आग भभक रही है। दरअसल रूसी जनता पहले दिन से नहीं चाहती थी कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ा जाए। पुतिन ने अपनी सनक में आकर जो युद्ध छेड़ा है उसकी बड़ी कीमत रूसी जनता भी चुका रही है और इस युद्ध के लंबे खिंचते चले जाने से वह आजिज भी आ चुकी है। यही नहीं, रूसी सेना का एक बड़ा धड़ा भी बेहद नाराज बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि राष्ट्रपति पुतिन ने वैगनर ग्रुप की बगावत को लेकर अपने रक्षा मंत्री या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई की तो बगावत का झंडा बुलंद किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक वैगनर ग्रुप जैसे निजी सैन्य समूहों को बढ़ावा देने की बात है तो इतिहास गवाह है कि आतंक को प्रश्रय देने वाले खुद उसके सबसे बड़े शिकार बने हैं। जरा याद कीजिए कैसे अमेरिका ने ही एक समय ओसामा बिन लादेन को आगे बढ़ाया और एक समय ऐसा आया कि इस आतंक की चोट 9/11 के रूप में अमेरिका को ही झेलनी पड़ी थी। एक सशक्त उदाहरण अपने पड़ोस पाकिस्तान में भी है। पाकिस्तान ने तमाम आतंकी संगठनों को भारत में आतंक फैलाने के लिए तैयार किया लेकिन आज तहरीक-ए-तालिबान और उस जैसे तमाम आतंकी संगठन खुद पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने तालिबान को भी प्रश्रय देकर उसे अफगानिस्तान की सत्ता तक पहुँचाने में मदद की थी लेकिन आज वही तालिबान उसके सिर पर चढ़कर बोल रहा है। वैगनर ग्रुप भी एक तरह से पुतिन की ओर से निर्मित किया गया निजी सैन्य समूह है जिसने अब धमकी देकर अपने आका के माथे पर पसीना ला दिया। यही नहीं, चीन अक्सर संयुक्त राष्ट्र में किसी पाकिस्तानी आतंकवादी को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के प्रयासों में बाधा डालता है तो उसे लगता है कि उसने मुंबई में हुए 26/11 के हमलावरों को बचाकर भारत को झटका दिया है। लेकिन चीन को पाकिस्तान में कार्यरत चीनियों पर बढ़ते आतंकी हमलों को देखकर यह समझ आ जाना चाहिए कि आतंकवाद अपने जन्मदाता या प्रश्रयदाता को भी नहीं बख्शता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैगनर ग्रुप ने भले 2014 में पुतिन की ओर से क्रीमिया पर और 2023 में यूक्रेन के बखमुत पर कब्जा किया लेकिन अब वह सिर्फ भाड़े के टट्टू के रूप में काम करने को राजी नहीं है। येवगेनी प्रिगोझिन अब अपने लिए बड़ी भूमिका चाहते हैं। भले फिलहाल वह बेलारूस के मनाने पर मान गए हों लेकिन उन्होंने जो तेवर दिखाए हैं वह आने वाले समय में भी पुतिन के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकते हैं। यदि येवगेनी प्रिगोझिन को पश्चिमी या नाटो देशों का साथ मिल गया तो यह पुतिन के लिए बड़ी मुश्किलों का सबब बन सकता है क्योंकि वैगनर ग्रुप रूस की सैन्य क्षमताओं के बारे में बहुत कुछ जानकारी रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकरण ने यह भी दर्शाया है कि रूस की सैन्य शक्ति को जितना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता था, हकीकत वैसी नहीं है। यदि खुद को महाशक्ति कहलाने वाला देश युद्ध के समय लड़ने के लिए लड़ाके निजी कंपनी से आउटसोर्स करे तो सवाल उठेगा ही कि परेड के दौरान जिस सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था कहीं वह फैन्सी ड्रेस शो तो नहीं था? वैगनर ग्रुप की बगावत से रूस का जो सच दुनिया के सामने आया है और उससे जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं, उसका फायदा उठाने में अमेरिका और नाटो देश कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए यह मान कर चलना चाहिए कि वैगनर ग्रुप के टैंक और लड़ाके भले रोस्तोव से बाहर चले गए हों लेकिन असल पिक्चर अभी बाकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह भी दर्शाया है कि रूस की सैन्य रणनीति पूरी तरह कामयाब नहीं रही है। युद्ध में अब तक जानमाल का सर्वाधिक नुकसान भले ही यूक्रेन को हुआ हो लेकिन प्रतिष्ठा का नुकसान सर्वाधिक रूस को हुआ है। रूसी सेना के हाथ से कई जीते हुए इलाके निकल गए, रूसी सेना की रणनीतियां विभिन्न मोर्चों पर नाकामयाब रहीं, रूसी सेना के बड़े-बड़े कमांडर युद्ध में मारे गए, युद्ध के बीच में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सैन्य नेतृत्व में बदलाव तक करने पड़ गए, जो रूस दुनिया के कई देशों को हथियार देता है उसे ईरान और चीन से हथियार और ड्रोन तक लेने पड़ गए। यकीनन इस सबसे रूस के महाशक्ति होने के दावे पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसके अलावा जिस तरह रूस में सैन्य नेतृत्व के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तेजी से परिणाम हासिल करने का दबाव बढ़ रहा है, उसके बारे में इस तरह की खबरें हैं कि यह पुतिन के खिलाफ जल्द ही विद्रोह की शक्ल अख्तियार कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, गलती पर गलती करते चले जाने के चलते पुतिन एकदम अकेले पड़ गए हैं। रूस ने एक छोटा सैन्य अभियान समझ कर जो युद्ध शुरू किया था वह अब अंतहीन होता दिख रहा है। यह संघर्ष जिस तरह दिन पर दिन लंबा और महंगा होता जा रहा है उससे रूस में पुतिन के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ रहा है। 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद से ही रूस पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए तमाम प्रतिबंधों का सामना कर रहा था। ऐसे में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध और बढ़ गए जिससे रूस की अर्थव्यवस्था भारी दबाव में आ गई है। इसके साथ ही युद्ध का बढ़ता खर्च और साख बचाने की कोशिशों में जो अनाप-शनाप खर्च पुतिन कर रहे हैं वह रूस को पतन की ओर ही ले जा रहा है। कहा जा सकता है कि बगावत का सीजन रूस में शुरू हो चुका है। वैगनर ग्रुप ने जो साहस दिखाया है उसने जनता को भी ऊर्जा दे दी है। Vladimir Putin</p>
<p style="text-align:right;"><strong>नीरज कुमार दुबे, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 13:00:59 +0530</pubDate>
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                <title>मातृभूमि की रक्षा के लिए हर जरूरी उपाय करेगा रूस, धोखे में न रहे पश्चिम: पुतिन</title>
                                    <description><![CDATA[मास्को(एजेंसी)। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन (Vladimir Putin) ने रूस को परमाणु हथियार की धमकी देने वाले पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश देते हुए बुधवार को कहा कि जो ऐसी धमकियां दे रहे हैं वे यह बात ध्यान में रखें कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए रूस वह सब कुछ करेगा जो जरूरी है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>मास्को(एजेंसी)।</strong> रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन (Vladimir Putin) ने रूस को परमाणु हथियार की धमकी देने वाले पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश देते हुए बुधवार को कहा कि जो ऐसी धमकियां दे रहे हैं वे यह बात ध्यान में रखें कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए रूस वह सब कुछ करेगा जो जरूरी है । पश्चिमी देश किसी धोखे में न रहें। सरकारी एजेंसी ‘तास’ ने यह जानकारी दी। देश के नाम टेलीविजन पर दिये संदेश में रूसी राष्ट्रपति (Vladimir Putin) ने कहा ‘ जो हमें परमाणु हथियारों की धमकी दे रहें हैं उन्हें पता होना चाहिए कि हवा का रूख कभी भी मुड़ सकता है। अपनी मातृभूमि और लोगों की रक्षा के लिए हम वह सब कुछ करेंगे जो जरूरी होगा। अपनी आजादी की रक्षा के लिए मैं दोहराता हूं कि हम वह सब कुछ करेंगे जो जरूरी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से पश्चिमी देश ऐसा दिखा रहे हैं कि वे रूस को बरबाद करना चाहते हैं और इसके लिए वह यूक्रेन के लोगों को युद्ध में बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा,‘हमारा उद्देश्य डोनबास क्षेत्र को आजाद कराना है। इसके लिए यूक्रेन के आजाद इलाकों में अपने लोगों की सुरक्षा के लिए और सेना भेजे जाने को लेकर मैंने रक्षा विभाग से भी बात की है। इसके लिए डिक्री पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं और बुधवार से सेना को भेजना शुरू कर दिया जायेगा। पुतिन ने अपने संबोधन में कहा ‘मैं आपके समर्थन पर भरोसा रखता हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन में जो हिस्से रूस के कब्जे में हैं वहां के निवासी नये नाजीवाद के शिकंजे में नहीं फंसना चाहते हैं,ऐसी रिपोर्ट तमाम अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हैं। इन इलाकों जैसे लुहांस्क, दोनेत्स्क , खोरसां और जेपोरिजिया में जनमतसंग्रह कराया जायेगा और हम उन लोगों के साथ हैं जो यूक्रेन के साथ नहीं रहना चाहते हैं। इन क्षेत्रों के प्रशासन ने कहा है कि जनमतसंग्रह शुक्रवार को शुरू किया जायेगा। दूसरी ओर पश्चिमी देशों अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस आदि ने साफ किया है कि अगर ऐसा कुछ रूस की ओर से कराया भी जाता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जायेगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 22 Sep 2022 08:03:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रिपोर्ट में दावा : रूसी राष्ट्रपति पुतिन ब्लड कैंसर से पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध के बीच एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। हालांकि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि उनका कैंसर किस स्टेज पर पहुंचा है। ये दावा पुतिन के करीबी एक कारोबारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/report-claims-russian-president-vladimir-putin-suffering-from-blood-cancer/article-33462"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/vladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मास्को।</strong> रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध के बीच एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। हालांकि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि उनका कैंसर किस स्टेज पर पहुंचा है। ये दावा पुतिन के करीबी एक कारोबारी के आॅडियो टेप के हवाले से किया गया है। इसमें कहा गया है कि ब्लादिमीर पुतिन के पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। वहीं दूसरी ओर पुतिन के कुछ फोटो भी सामने आए हैं, जिनमें वे कमजोर और बीमार लग रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 10:31:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व ताइक्वांडो ने पुतिन से वापस ली ब्लैक बेल्ट की उपाधि</title>
                                    <description><![CDATA[सियोल (एजेंसी)। विश्व ताइक्वांडो (World Taekwondo) ने यूक्रेन पर रूस के लगातार हमलों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मानद ताइक्वांडो ब्लैक बेल्ट की उपाधि वापस ले ली है। विश्व ताइक्वांडो ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर विरोध जताया है और इसकी कड़ी निंदा की है तथा इसे विश्व शांति के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/world-taekwondo-withdraws-black-belt-title-from-putin/article-31209"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/world-taekwondo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सियोल (एजेंसी)।</strong> विश्व ताइक्वांडो (World Taekwondo) ने यूक्रेन पर रूस के लगातार हमलों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मानद ताइक्वांडो ब्लैक बेल्ट की उपाधि वापस ले ली है। विश्व ताइक्वांडो ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर विरोध जताया है और इसकी कड़ी निंदा की है तथा इसे विश्व शांति के लिए एक गंभीर संकट बताया है। उल्लेखनीय है कि पुतिन को साल 2013 में ब्लैक बेल्ट की उपाधि दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व ताइक्वांडो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘विश्व ताइक्वांडो यूक्रेन पर रूस के हमले की कड़ी निंदा करता है, जिस तरह से वहां आम लोगों की जान जा रही है, वो एक क्रूरता है। विश्व ताइक्वांडो का उद्देश्य हमेशा ही शांति और सहिष्णुता को बढ़ावा देना रहा है। विश्व ताइक्वांडो को लगता है कि जो यूक्रेन में हो रहा है, वो उसके मूल्यों के खिलाफ जाता है। ऐसे में हमने व्लादिमीर पुतिन को दी गई ब्लैक बेल्ट वापस लेने का फैसला लिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं विश्व ताइक्वांडो (World Taekwondo) ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा कि विश्व ताइक्वांडो इवेंट्स में किसी भी रूसी या बेलारूसी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित नहीं कि या जाएगा और न ही राष्ट्रगान बजाय जाएगा। वहीं विश्व ताइक्वांडो और यूरोपीय ताइक्वांडो संघ रूस और बेलारूस में ताइक्वांडो टूनार्मेंटों के आयोजन को मान्यता नहीं देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ(आईजेएफ) ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आईजेएफ के मानद अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था। आईजेएफ ने रविवार को पुतिन को मानद अध्यक पद के साथ-साथ आईजेएफ के एंबेसडर पद से भी हटा दिया था। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति भी रूस के खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा चुकी है। वहीं फीफा और यूईएफए ने भी अगले आदेश तक रूस के फुटबॉल क्लबों और राष्ट्रीय फुटबॉल टीमों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। फीफा ने रूस को 2022 फुटबॉल विश्व कप से भी बाहर कर दिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आईएसएसएफ ने रूस, बेलारूस के निशानेबाजों पर लगाया प्रतिबंध</h4>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (आईएसएसएफ) ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच रूस और बेलारूस के निशानेबाजों पर सभी स्पधार्ओं में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आईएसएसएफ ने मिस्र के काहिरा में चल रहे निशानेबाजी विश्व कप के दौरान यह फैसला लिया है, जहां रूसी निशानेबाज प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। आईएसएसएफ का बयान का मतलब है कि रूसी निशानेबाज अब इस इवेंट में आगे प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आईएसएसएफ ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘आईओसी कार्यकारी बोर्ड के इस संबंध में लिए गए निर्णय और आईओसी अध्यक्ष के साथ बैठक के बाद आईएसएसएफ ने फैसला किया है कि रूसी संघ और बेलारूस के एथलीटों को आईएसएसएफ चैंपियनशिप में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय एक मार्च 2022 से लागू हुआ है और अगली सूचना तक मान्य रहेगा।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 12:06:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल आएंगे देश में रूसी राष्ट्रपति पुतिन , वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को यहां भारत-रूस 21 वीं वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेंगे तथा इसी दिन दोनों देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों की प्रथम टू प्लस टू बैठक भी आयोजित की जाएगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव एवं रक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/russian-president-putin-will-come-india-tomorrow-will-participate-in-the-annual-summit/article-28902"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/vladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को यहां भारत-रूस 21 वीं वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेंगे तथा इसी दिन दोनों देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों की प्रथम टू प्लस टू बैठक भी आयोजित की जाएगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव एवं रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगु रविवार देर रात नयी दिल्ली पहुंचेंगे। लावरोव सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे विदेश मंत्री एस जयशंकर से सुषमा स्वराज भवन में मुलाकात करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सर्गेई शोयगु से भेंट करेंगे। साढ़े 11 बजे प्रथम भारत रूस टू प्लस टू बैठक सुषमा स्वराज भवन में होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पुतिन छह दिसंबर को राजधानी पहुंचेंग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार रूस के राष्ट्रपति पुतिन छह दिसंबर को राजधानी पहुंचेंगे। टू प्लस टू बैठक संपन्न होने के बाद वह शाम साढ़े पांच बजे हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। वार्षिक शिखर बैठक में दोनों देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों के मौजूद रहने की संभावना है। दोनों बैठकों से भारत एवं रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझीदारी को नया बल मिलेगा। रूसी राष्ट्रपति और वहां के विदेश एवं रक्षा मंत्री सोमवार रात को ही स्वदेश लौट जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत एवं रूस के बीच टू प्लस टू बैठक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार सोमवार का दिन भारत एवं रूस के विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझीदारी के खास होगा जब रूस के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री एवं रक्षा मंत्री नयी दिल्ली में होंगे। सूत्रों के मुताबिक टू प्लस टू बैठक में समान हितों के राजनीतिक एवं रक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बैठक में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी विशेष रूप से चर्चा होने की संभावना है। भारत एवं रूस के बीच टू प्लस टू बैठक शुरू करने के बारे में प्रधानमंत्री मोदी एवं पुतिन के बीच अप्रैल में हुई वर्चुअल बैठक में सहमति बनी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक सितंबर 2019 में व्लाडीवोस्टक में हुई थी जब प्रधानमंत्री मोदी रूस में पांचवीं ईस्टर्न इकॉनोमिक समिट में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल होने गये थे। पिछले वर्ष कोविड महामारी के कारण वार्षिक शिखर बैठक नहीं हो पायी थी। इस बीच दोनों नेताओं के बीच छह मौकों पर बहुपक्षीय मंचों की वर्चुअल बैठकों में संवाद हो चुका है। नवंबर 2019 में ब्राजीलिया में ब्रिक्स शिखर बैठक में मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने सामने की मुलाकात होगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Dec 2021 13:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुतिन और मैक्रों ने बेलारूस की स्थिति पर की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[मास्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बेलारूस की स्थिति को लेकर फोन पर चर्चा की। इस दौरान पुतिन ने बेलारूस के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की वचनबद्धता दोहराई। यह जानकारी रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने दी है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा, “दोनों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/vladimir-putin-and-macron-discuss-the-situation-in-belarus/article-18869"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/vladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मास्को।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बेलारूस की स्थिति को लेकर फोन पर चर्चा की। इस दौरान पुतिन ने बेलारूस के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की वचनबद्धता दोहराई। यह जानकारी रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने दी है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा, “दोनों नेताओं ने बेलारूस में राष्ट्रपति चुनाव के बाद की स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान पुतिन ने एक संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की अपनी वचनबद्ध दोहराई।”</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बताया गया कि दोनों नेताओं ने बातचीत को जारी करने पर सहमति व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि बेलारूस में नौ अगस्त को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में अलेक्जेंडर लुकाशेंको को 80.1 प्रतिशत मतों से विजयी घोषित किया गया था, लेकिन विपक्ष के नेता स्वेतलाना तिखानोव्सकाया ने मतदान में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि अलेक्जेंड विजयी नहीं हुए थे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/vladimir-putin-and-macron-discuss-the-situation-in-belarus/article-18869</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Oct 2020 13:41:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महंगा पड़ा पुतिन का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी व प्रमुख विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को जहर दिये जाने का मामला सामने आया है। एलेक्सी को पिछले दिनों बेहोशी की हालात में साइबेरिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस वक्त वो कोमा में है। कहा जा रहा है कि मास्को से टॉम्स्क लौटते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/protest-against-putin/article-18010"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/protest-against-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी व प्रमुख विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को जहर दिये जाने का मामला सामने आया है। एलेक्सी को पिछले दिनों बेहोशी की हालात में साइबेरिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस वक्त वो कोमा में है। कहा जा रहा है कि मास्को से टॉम्स्क लौटते वक्त हवाई अड्डे के एक कैफे में उन्होंने चाय पी थी । चाय पीने के कुछ समय बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसी चाय में उनकों जहर दिये जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। गंभीर हालात में उनको इलाज के लिए जर्मनी लाया गया था। जर्मनी में एलेक्सी का इलाज करने वाले डाक्टरों ने कहा है कि जांच में उन्हें जहर दिये जाने के संकेत मिले हैं। इस वक्त वो कोमा में है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। दूसरी ओर रूसी डॉक्टर एलेक्सी को जहर दिये जाने की संभावना से इंकार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">44 वर्षीय एलेक्सी राष्ट्रपति पुतिन के कट्टर आलोचक और मुखर विरोधी माने जाते हैं। वे पुतिन सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध करते रहे हैं। सरकार की कमियों और उसके भ्रष्ट आचरण को उजागर करने का शायद ही कोई मौका उन्होंने छोड़ा हो। कुल मिलाकर कहा जाए तो एलेक्सी और पुतिन के बीच एक तरह से छत्तीस का आकंड़ा रहा है। उन्होंने पुतिन सरकार के विरूद्ध बार-बार भ्रष्टाचार के कैंपेन चलाए। पिछले दिनों ही एलेक्सी ने पुतिन की यूनाइटेड रूस पार्टी को बदमाशों और चोरों की पार्टी कहकर पुतिन के विरूद्ध सीधा मोर्चा लिया था। यही वजह है कि रूस के सबसे शक्तिशाली नेता होने के बावजूद पुतिन भी एलेक्सी से भय खाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">साम्यवादी शासन व्यवस्था वाले देशों में सरकार विरोधी नेताओं व आलोचकों को जहर देकर मारना या अन्य तरीकों से हत्याएं करना नयी बात नहीं है। रूस, चीन और उत्तर कोरिया में ऐेसे अनेक उदाहरण है, जहां सरकार विरोधी नेताओं को रास्ते से हटाने के लिए उनकी हत्या कर दी गई। इससे पहले भी रूस में पुतिन और उनकी सरकार पर सियासी विद्रोहियों को मौत के घाट उतार दिये जाने के आरोप लग चुके हैं। रूसी खुफिया एजेंसी (एफएसबी) के पूर्व एजेंट कर्नल एलेक्सजेंडर लितविनें को भी जहर देकर मारने का मामला भी सुर्खियां में रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">1917 में व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में पूंजीवाद की धुर विरोधी मानसिकता की सरकार बनते ही रूस में जो खूनी खेल प्रारंभ हुआ था कालांतर में रूस की सत्ता में आने वाले शासकों ने उसे किसी न किसी रूप में दोहराया है। छल और बल से विरोधियों को हटाने की जो परम्परा लेनिन के शासनकाल में शुरू हुई वो आज भी कम या अधिक रूसी साम्यवादी व्यवस्था का हिस्सा बनी हुई है। 1920 के दशक में लेनिन के शासन काल में राजनीतिक विरोधियों का सामूहिक नरसंहार और जहर देकर हत्याएं कर देना आम बात थी। लेनिन के बाद जोसेफ स्टालिन ने भी इस पंरपरा को आगे बढाया। सोवियत रूस से बाहर पूर्वी यूरोप, चीन, कोरिया, कंबोडिया आदि देशों का इतिहास भी राजनीतिक विरोधियों की षडयंत्र पूर्वक हत्याओं से भरा पड़ा है। 1975-1979 का कंबोडियाई नरसंहार आज भी इस बात की तस्दीक करता है कि राजनीतिक विरोधियों को रास्ते से हटाने के लिए साम्यवादी शासक किस हद तक क्रूर से क्रूरतम हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, एलेक्सी को जहर दिए जाने का मामला उस समय सुर्खियों में आया जब सोशल मीडिया पर कुछ विडियो वायरल हुए। वायरल विडियो में एलेक्सी को टॉम्स्क हवाई अड्डे के कैफे में एक कप से कुछ पीते हुए दिखाया गया है। एक अन्य विडियो में उन्हें उड़ान शुरू होने से पहले टॉयलेट में जाते भी दिखाया गया । जब उन्हें टॉयलेट से बाहर लाया गया तो वो दर्द से चिल्ला रहे थे। एलेक्सी का इलाज करने वाले डाक्टरों के बयान भी संदेह को बढ़ा रहे हैं। शुरू में डॉक्टर एलेक्सी के स्वास्थय से जुड़ी हर तरह की जानकारी उपलब्ध करवाने की बात कर रहे थे। लेकिन अब किसी भी तरह की जानकारी दिये जाने से बच रहे हैं। एलेक्सी के स्वास्थ्य परीक्षण और टेस्ट में की जा रही देरी से भी पूरे मामले में संदेह बढ़ रहा है। एलेक्सी के समर्थकों का आरोप है कि डॉक्टर जान-बूझकर समय लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार के विरूद्ध लगातार मोर्चा लेते रहने के कारण एलेक्सी रूस के जनमानस में तो लोकप्रिय हो गये लेकिन सरकार व पुतिन की आंख की किरकिरी बन गए। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें समय-समय पर सरकार के कोप का शिकार होना पड़ा तथा कई बार जेल भी जाना पड़ा। संसदीय चुनाव के दौरान उन्होंने पुतिन की पार्टी पर वोटों में धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इससे पहले साल 2011 और 2013 में भी उन्हें सरकार विरोधी आंदोलनों के कारण जेल जाना पड़ा था। साल 2017 में भी उन पर एंटिसेप्टिक डाई से हमला होने का समाचार आया था। कहा जाता है कि इस हमले में उनकी दाहिनी आंख खराब हो गयी थी। सरकार ने उनके एंटी करप्शन फाउंडेशन पर शिंकजा कसने की भी कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को संदेह है कि एलेक्सी अपने फाउंडेशन के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। वे साल 2018 का राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ना चाहते थे लेकिन धोखाधड़ी के आरोपों के कारण उन पर रोक लगा दी गई थी। जुलाई 2019 में अनाधिकृत रूप से विरोध प्रदर्शन का आहवान करने के कारण उन्हें 30 दिन की जेल हुई थी। जेल में उनकी तबीयत बिगड गयी थी उस समय भी उन्हें जहर दिए जाने की खबरे मीडिया में आयी थी। अभी हाल ही में जून माह में संविधान में जरूरी संशोधनों पर जब जनमतसंग्रह हुआ तब उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन बताया था। जनमत संग्रह में जीत के बाद पुतिन अब दो कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एंटी करप्शन फाउंडेशन चलाने वाले एलेक्सी सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर करते रहने के कारण हमेशा से मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं। सरकार विरोधी आंदोलनों और अपने बगावती तेवरों के चलते रूसी जनता का एक बड़ा वर्ग उनका समर्थक भी माना जाता है। सोशल मीडिया पर एक बड़ा तबका उनका समर्थन करता है। यूटयूब पर उनके 3.79 मिलियन सब्सक्राइबर है। ट्विटर पर लगभग ढाई मिलियन फॉलोवर्स है। एलेक्सी अपने ब्लॉग, यूटयूब और ट्विटर पर लगातार वीडियों और दूसरी चीजे पोस्ट करते रहते है। जो सरकारी महकमों में करप्शन को दिखाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल एलेक्सी जर्मनी में जिन्दगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। उधर,एलेक्सी के सहयोगी इलया याशिन ने सोमवार को वीडियो मैसेज के जरिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने व राष्ट्रपति पुतिन की भूमिका का पता लगाने की मांग की है। जांच एजेंसियों की छानबीन या रिपोर्ट का परिणाम चाहे जो भी आए, पर साम्यवादी ताकतों द्वारा अपने विरूद्ध उठनेवाली आवाज को बल पूर्वक दबाते रहने का जो इतिहास है, वह एक बार फिर मुखर होता नजर आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                              <strong>-एन.के. सोमानी</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2020 09:51:01 +0530</pubDate>
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