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                <title>सरदारपुरा हिंसा : दोषियों को धार्मिक कार्य करने की शर्त के साथ जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[सीजेआई सहित तीन जजों की पीठ का फैसला नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को 2002 के गुजरात दंगे के दौरान Sardarpura Violence के 17 दोषियों को राहत दी। कोर्ट ने कुछ अलग तरह की शर्तों के साथ इन्हें जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/sardarpura-violence-bail-to-convicts-with-condition-of-doing-religious-work/article-12770"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/powers-of-speaker2.jpg" alt=""></a><br /><h2>सीजेआई सहित तीन जजों की पीठ का फैसला</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को 2002 के गुजरात दंगे के दौरान Sardarpura Violence के 17 दोषियों को राहत दी। कोर्ट ने कुछ अलग तरह की शर्तों के साथ इन्हें जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने यह फैसला सुनाया। जिसमें दोषियों को धार्मिक और सामाजिक कार्य करने का निर्देश दिया। खंडपीठ की जमानत की शर्तों के मुताबिक कुछ दोषी इंदौर और कुछ जबलपुर में रहकर धार्मिक और सामाजिक कार्य करेंगे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>न्यायालय ने Sardarpura Violence के इन दोषियों को दो समूह में बांट दिया है।<br />
</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इंदौर और जबलपुर के जिला विधि अधिकारी इनकी निगरानी करेंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>वे यह सुनिश्चित करेंगे कि ये दोषी धार्मिक और सामाजिक कार्य कर रहे हों। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>न्यायालय ने अधिकारियों को उनकी आजीविका की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खंडपीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भी आदेश दिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिसमें अमल संबंधी रिपोर्ट और उनके व्यवहार के बारे में रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया।</strong></li>
</ul>
<h3>क्या है मामला:</h3>
<p style="text-align:justify;">27 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन में आग लगने की घटना में 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। जिसमें ज्यादातर कारसेवक थे। इससे पूरे राज्य में दंगा भड़क उठा था। जिसकी चपेट में वीजापुर तालुका का सरदारपुरा कस्बा भी आ गया था। एक विशाल भीड़ ने 28 फरवरी और एक मार्च 2002 को ‘शेख वास’ गली को घेर लिया था। जहां गांव के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते थे। किसी अनहोनी के डर से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने इब्राहिम शेख के घर में शरण ली थी। इस बीच भीड़ ने पेट्रोल डालकर उनके घर को जला दिया। जिससे 22 महिलाओं समेत 33 लोगों की जलकर मौत हो गई थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 13:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशे की हालत में मिली महिला, नशा मुक्ति केंद्र भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी (Woman, Drunken, Condition) मोगा (सच कहूँ न्यूज)। नशे के लिए राज्यभर में बदनाम गांव दौलेवाला के पास स्थित एक ढाबे पर नशे की ओवरडोज के कारण एक महिला बेहोश मिली है। इलाके के सामाजिक संगठनों के लोगों ने उसे देखा तो उसे एसएसपी राजजीत सिंह के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/woman-in-drunken-condition/article-4615"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/woman-drunken-condition.jpg" alt=""></a><br /><h1>पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी</h1>
<p><strong>(Woman, Drunken, Condition)</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोगा (सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नशे के लिए राज्यभर में बदनाम गांव दौलेवाला के पास स्थित एक ढाबे पर नशे की ओवरडोज के कारण एक महिला बेहोश मिली है। इलाके के सामाजिक संगठनों के लोगों ने उसे देखा तो उसे एसएसपी राजजीत सिंह के सामने पेश कर किया। एसएसपी ने महिला को तुरंत नशा मुक्त केंद्र में भेज पुलिस को इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश जारी कर दिए। नशे की हालत में मिली 29 वर्षीय महिला गांव गलौटी की रहने वाली है। महिला ने बताया कि उसका एक बेटा था, लेकिन जब बेटा डेढ़ वर्ष का था तो उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसने दिमागी परेशानी दूर करने के लिए चिट्टे का स्वाद चखा तो उसकी आदी बन गई।</p>
<h1 style="text-align:justify;">पुलिस सख्ती के बाद भी तेजी से बढ़ा रहा नशा</h1>
<p style="text-align:justify;">डीजीपी सुरेश अरोड़ा मीडिया के सामने बयान जारी कर चुके हैं कि राज्यभर में जिस थाना प्रभारी के इलाके में नशे का कारोबार हो रहा होगा उस अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई का होना तय है। नशे की हालत में एक ढाबे से बेहोशी की हालत में बरामद उक्त महिला पुलिस के सामने साफतौर पर बता रही है कि वह लंबे समय से दौलेवाल के किसी व्यक्ति से नशा खरीदकर आगे ट्रक चालकों को बेचने का काम करती आ रही है, लेकिन पुलिस इस मामले से अंजान क्यों रही, इसका जवाब खुद एसएसपी राजजीत सिंह ने भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि गांव दौलेवाल में अनेकों बार पुलिस दबिश देकर हरेक घर की तलाशी ले चुकी है, लेकिन वहां के लोग नशा तस्करी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।</p>
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<p>Woman, Drunken, Condition</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 12:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विवेकहीनता के कारण नशे में डूब रहा है युवा</title>
                                    <description><![CDATA[युवा अवस्था सपनों को उड़ान देने की होती है। युवा मंजिल तलाश को लेकर कितनी सुनहरी यादें संजोता है, लेकिन इसे विडम्बना कहिये या विवेकहीनता आज का युवा किसी न किसी नशे में अपने आपको घेर कर अपनी युवा अवस्था के हसीन सपनो को घरौंदे की तरह दिन-प्रतिदिन तोड़ता जा रहा है। यकीन मानिये युवा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/youth-is-drunk-due-to-discretion/article-3091"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/drugs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">युवा अवस्था सपनों को उड़ान देने की होती है। युवा मंजिल तलाश को लेकर कितनी सुनहरी यादें संजोता है, लेकिन इसे विडम्बना कहिये या विवेकहीनता आज का युवा किसी न किसी नशे में अपने आपको घेर कर अपनी युवा अवस्था के हसीन सपनो को घरौंदे की तरह दिन-प्रतिदिन तोड़ता जा रहा है। यकीन मानिये युवा अवस्था में बढ़ रही नशे की लत आज न केवल युवाओं के लिए, बल्कि समाज के लिए खतरा बन गई है। देखा जाय तो युवा भी इस बात से कम बेखबर नहीं कि उनका किशोरावस्था किस कदर गर्दिशों में खो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के युवा विवेकहीनता के वशीभूत धूम्रपान से मद्यपान और मद्यपान से ड्रग्स की ओर निरन्तर तेजी से बढ़ते चले जा रहे हैं। जो निश्चित रूप से उन्हें अन्धकारमय जीवन की ओर ले जायेगा, जहां से वापसी का रास्ता अत्यन्त कठिन है। आज का युवा असफलता को बर्दाश्त करने वाला नहीं है, वह असफलता फिर चाहे परीक्षा की हो, घर-आंगन में अपनों से कलह की हो। युवा अपनी बेचैनी को छुपाने के लिए किसी न किसी नशे का दिन प्रतिदिन सहारा लेता जा रहा है। युवावस्था में व्यक्ति होश से कम जोश से ज्यादा काम लेता है। इसी कारण उसे आगे जाकर पछताना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी तन्हाई से अपने आपको मुक्त करने के लिए वह वक्त बेवक्त नशीले द्रव्य का किसी ना किसी रूप में सेवन करता रहता है, चाहे वह हेरोईन हो, चरस हो कोकीन, शराब, अफीम, पोस्त हो चाहे धूम्रपान ही क्यों ना हो। आज का युवा कहीं शौक के रूप में, तो कहीं बुरी संगति के रूप में नशे के अंधकार में अपने आपको खोता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज का युवा अपने आपको कही संगति के दबाव में, कहीं फैशन के रूप में, तो कहीं स्टेटस को मध्य नजर रखते हुए धूम्रपान-मद्यपान की शुरूआत करते हैं और बाद में शुरूआत ही उनकी आदत बन जाती है। नशे की हालत में व्यक्ति होश-हवाश खो बैठता है और काल्पनिक दुनिया में जीने की कोशिश करता है। वर्तमान में युवा पीढ़ी का झुकाव क्षणिक सुख की ओर ज्यादा हो रहा है अपने लक्ष्यों से भटककर वे ऐसा जीवन जी रहे हैं, जो उद्देश्यहीन है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 10 लाख से भी अधिक लोग अकेले भारत में तम्बाकू का प्रयोग करते हैं। वहीं सम्पूर्ण विश्व में प्रति 50 सैकेण्ड में एक व्यक्ति की मौत मादक पदार्थों के सेवन से होती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">10 प्रतिशत मुख कैंसर का कारण भी केवल तम्बाकू है। भारत में भी अगर देखा जाये तो एक अनुमान के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक लोग बीड़ी-सिगरेट आदि का प्रतिदिन प्रयोग करते है, वहीं 30 प्रतिशत लोग मुंह से चबाने के साथ-साथ अन्य हानिकारक द्रव्यों का सेवन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हम यह भी नहीं कह सकते कि हमारा कानून कुछ नहीं कर रहा। देश में मादक पदार्थ दुरुपयोग अधिनियम 1985 बनाया जाकर मादक पदार्थों के सेवन से रोकथाम की काफी हद तक प्रयास भी किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मादक पदार्थ दुरुपयोग अधिनियम 1985 के तहत धारा 15 के तहत पोस्त डंठल के सम्बन्ध में उत्पादन करना, परिवहन करना या कब्जे में रखने पर दस से बीस वर्ष का दण्ड एवं एक लाख रुपये का जुर्माने का प्रावधान है, वहीं धारा 16-17 में अफीम जैसे मादक पदार्थ के उत्पादन और परिवहन की रोकथाम के लिए सजा के प्रावधान का उल्लेख किया गया है। फिर भी अगर नजर दौड़ायी जाये तो कड़वा सच हमारे सामने चौंकाने वाला यह आयेगा कि मादक पदार्थों के तहत किये जाने वाले अपराधों में 21-30 वर्ष का युवा अधिक शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज युवा वर्ग को आगे आकर अपने आपको बदलना होगा इस तरह अपने आपको नशे में डुबोने की बजाय एक योग्य नागरिक की भूमिका निभानी होगी। सुनहरे भविष्य की बागडोर आज के युवा पर है, अगर युवा बदलेगा तो निश्चित रूप से सम्पूर्ण जगत बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक: सुरेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 22:01:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो पाकिस्तान को फंड नहीं देगा अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। आतंकवादी संगठनों को फलने-फूलने में पूरी मदद देने वाला पाकिस्तान अब इस मोर्चे पर बुरी तरह घिरता हुआ नजर आ रहा है। यूएस की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग की शर्तों को और सख्त बनाने के लिए 3 विधायी संशोधनों पर वोट किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/america-will-not-give-fund-to-pakistan-if-it-does-not-take-action-against-terrorism/article-2311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/pakistan-us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन।</strong> आतंकवादी संगठनों को फलने-फूलने में पूरी मदद देने वाला पाकिस्तान अब इस मोर्चे पर बुरी तरह घिरता हुआ नजर आ रहा है। यूएस की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग की शर्तों को और सख्त बनाने के लिए 3 विधायी संशोधनों पर वोट किया है। इसमें शर्त रखी गई है कि वित्तीय मदद दिए जाने से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संतोषजनक प्रगति दिखानी होगी। साफ है कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवादियों को मदद देना बंद नहीं किया, तो न केवल उसे अमेरिका द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता से हाथ गंवाना पड़ेगा, बल्कि उसे अमेरिका की सख्त कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आतंकवादियों को दी जा रही मदद</h3>
<p style="text-align:justify;">ये सभी शर्तें पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को दी जा रही मदद से संबंधित हैं। इसे लेकर पहले भी कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और सांसद चिंता जताते रहे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस की निचली सदन ने 651 अरब डॉलर वाले नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन ऐक्ट 2018 के इन तीनों विधायी संशोधनों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने 81 के मुकाबले 344 मतों से इसे पारित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सदन द्वारा पारित एक संशोधन में इस बात का प्रस्ताव रखा गया है कि जब तक सेक्रटरी आॅफ स्टेट यह पुष्टि न कर सकें कि पाकिस्तान अमेरिका द्वारा घोषित किसी भी आतंकवादी को सैन्य, वित्तीय मदद या साजो-सामान उपलब्ध नहीं करा रहा, तब तक पाकिस्तान को दिया जाने वाला फंड जारी न किया जाए। एक संशोधन में यह भी कहा गया है कि शकील अफरीदी एक अंतरराष्ट्रीय नायक हैं और पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि वह तुरंत उन्हें जेल से रिहा कर दे। अफरीदी ने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का पता लगाने में अमेरिका की मदद की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong><br />
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 05:39:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चाहे ना हो फायदा, रोने का बन गया कायदा!</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों को रोने-झींकने की आदत पड़ गई है। हर बात पर लोगों की रूलाई फूट पड़ती है। किसी से बात शुरू होती है-क्या हाल है? उत्तर मिलता है-एकदम बढ़िया या बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया के बाद रोने का अनंत सिलसिला है। रूलाई आदत भी है और नियति भी। आजकल गर्मी पड़ी हुई है, तो लोग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-condition-of-india/article-1374"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/condition-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोगों को रोने-झींकने की आदत पड़ गई है। हर बात पर लोगों की रूलाई फूट पड़ती है। किसी से बात शुरू होती है-क्या हाल है? उत्तर मिलता है-एकदम बढ़िया या बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया के बाद रोने का अनंत सिलसिला है। रूलाई आदत भी है और नियति भी।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल गर्मी पड़ी हुई है, तो लोग गर्मी को रो रहे हैं। भई बहुत गर्मी है। पहले ऐसी गर्मी नहीं पड़ती थी। ओहो पसीना। घर में बैठना भी दूभर हो गया है। बाहर भी कहां जाएं। सूरज आग बरसा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊपर से बिजली नहीं है। बिजली नहीं है तो पानी भी कहां से आएगा। बस गर्मी की पूंछ पकड़ कर बिजली-पानी तक पहुंच गए। इसके बाद बारी सरकार की है। सत्ता में आने से पहले सत्ता वाली पार्टी ने 24घंटे बिजली-पानी देने का वादा किया था। अब मीटर बाहर निकलवाने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्ता के मजे लूटते हुए लोग बिजली चोरी नहीं करने के उपदेश दे रहे हैं। उसके बाद भी पूरी बिजली की कोई गारंटी नहीं है। राजनीति का भी कोई दीन-धर्म ही नहीं है। क्या यही आजादी है, जिसके लिए युवकों ने हंसते-हंसते अपनी शहादत दी थी। रोने का यह सिलसिला भईया रूकने वाला नहीं है। 24 घंटे बिजली-पानी आए या नहीं आए लेकिन आम भारतीय चौबीस घंटे रो जरूर सकता है। सरकार से लेकर प्रकृति तक की फजीहत कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब प्रकृति तो प्रकृति है। प्रकृति तो भगवान ही है। उस पर किसका बस है। लेकिन सरकार तो लोगों ने ही बनाई है। अपने सृजन को कोसने का यह अद्भुत उदाहरण है। अमेरिका की जनता ने पहले डोनाल्ड ट्रंप को जिताया और बाद में लगे उसके खिलाफ प्रदर्शन करने। यह रेत का घरौंदा नहीं है, जिसे बच्चा बनाकर पैर से गिरा दे। यह तो सरकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार बनाने के बाद पांच साल तक तो झेलनी ही पड़ेगी। अब सरकार चुन दी है तो उसकी नीतियों को भी देख लो। अब रोने-झींकने से क्या काम चलेगा। अब सरकार का बस है तो वह अपनी मर्जी करेगी। कभी जीएसटी और आधार का विरोध करने वाली पार्टी की सरकार अब इसे लागू कर रही है। उसकी मर्जी है। आखिर सरकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब जनता की बारी आएगी, वह अपने मन की कर लेगी। जैसे को तैसा। सत्ता में आने के बाद अपने आप को देवता मानने वाले लोगों की चुनावों में नींद टूटती है। उन्हें पता चलता है कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति तो जनता के पास ही है। लेकिन गर्मी-सर्दी का तो कुछ नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">मौसम का तो आनंद लेने में ही फायदा है। गर्मी में शरीर को कपड़ों का बोझ तो नहीं उठाना पड़ता। ना रजाई ना कंबल। ना जर्सी ना मफलर। हल्के-फुल्के कपड़े फंसाओ और चल पड़ो। जिस सर्दी में पानी से डर लगता है। गर्मी में उसी पानी में नहाने का मजा ही कुछ और है। यदि पानी है तो मजे से नहाईये नहीं है तो सर्दी को याद कीजिए जब नहाना किसी यातना जैसा लगता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वाह क्या गर्मी है। गर्मी नहीं है तो क्या हुआ। हाथ का पंखा लेकर हवा कीजिए और हाथ की एक्सरसाइजन करने का सुख भोगिये। पंजाबी में कहावत है कि ‘मन दा की समझौणा, ओधरों पुटणा, ऐधर लौणा।’ अपने मन को समझाने से समाधान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में तो भाग्यवाद की एक समृद्ध एवं गौरवशाली परंपरा है। कमाल है कि इसके बावजूद लोग रो क्यों रहे हैं। क्या भाग्य पर लोगों को भरोसा नहीं रहा। नहीं तो यही एक चीज है, जिसके सहारे काम चलाया जा सकता है। मनोकामना पूरी नहीं होने पर ग्रहदशा को आसानी से कोसा जा सकता है। किस्मत का सितारा डूबने की चर्चा की जा सकती है। सरकार का ऐतबार किया नहीं जा सकता। भले ही वह आपकी चुनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अरूण कैहरबा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2017 23:36:16 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी दरबार पहुंचा किसानों की हालत का मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[अमरेन्द्र ने प्रधानमंत्री समक्ष कर्जे का मुद्दा भी उठाया कृषि लोन को माफ करन का वायदा भी दोहराया ChandiGarh/NewDelhi, Ashwani Chawla: पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने कर्ज तेल दबे पंजाब के किसानों की बुरी आर्थिक हालत का मुद्दा शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक मीटिंग दौरान उठाया। इस कड़ी में कांग्रेस उपाध्यक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/issue-of-the-condition-of-farmers-reached-modis-door/article-542"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/amarinder-singh.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>अमरेन्द्र ने प्रधानमंत्री समक्ष कर्जे का मुद्दा भी उठाया</strong></li>
<li><strong>कृषि लोन को माफ करन का वायदा भी दोहराया</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh/NewDelhi, Ashwani Chawla:</strong> पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने कर्ज तेल दबे पंजाब के किसानों की बुरी आर्थिक हालत का मुद्दा शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक मीटिंग दौरान उठाया। इस कड़ी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी शिष्टमंडल के मैंबर रहे कैप्टन अमरेन्द्र ने कहा कि पंजाब सहित देश के अन्य हिस्सों में कर्ज के बोझ में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। संसद हाऊस में मीटिंग दौरान पत्रकारों से बातचीत दौरान कैप्टन अमरेन्द्र ने कहा कि फूड निगम आफ इंडिया (एफ.सी.आई) ने एमएसपी सहित अन्य कृषि मुद्दों पर जिस प्रकार काम किया जा रहा है, उससे किसानों की समस्याओं में विस्तार हो रहा है।<br />
मोदी से मांगा सहयोग: अमरेन्द्र ने कहा कि कांग्रेस ने कर्जे सहित किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रधानमंत्री से समर्थन मांग है, जिन्होंने उक्त मुद्दे पर विचार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि मीटिंग दौरान पंजाब के किसानों की बुरी हालत पर बात की, जबकि उत्तर प्रदेश के नेताओं ने अपने राजय के हालातों को प्रधानमंत्री समक्ष रखा।<br />
<strong><br />
नोटबंदी से किसान परेशान</strong><br />
पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कैप्टन अमरेन्द्र ने कहा कि नोटबन्दी ने किसानों की समस्याएं को बढ़ाया है। पंजाब में किसान अपनी नगदी संबंधी जरूरतों के लिए पूरी तरह सहकारी बैंकों पर निर्भर हैं, जहां के 12,700 गांवों में से 7000 में न तो कोई बैंक ब्रांच और न ही एटीएम हैं। उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया है कि ऐसे में किस तरह किसानों से उक्त स्थिति में अपना अस्तित्व बचाए रखने की उम्मीद की जा सकती है।</p>
<p><strong>एसवाईएल पर भी बोले</strong><br />
कैप्टन ने कहा कि एसवाईएल मुद्दे पर बादल सरकार के पंजाब विरोधी रवैये ने समस्या को विकराल रूप दिया है। इस दिशा में बादल पड़ौसी हरियाणा को पंजाब के पानी के अधिकार बेचने के लिए तुले हुए हैं, जिससे राज्य के दक्षिणी हिस्से किसानों के लिए मौत की घंटी बजा दी।</p>
<p><strong>कर्जा माफ करे केंद्र सरकार</strong><br />
कैप्टन ने कहा कि केंद्र सरकार को तेल पर सब्सिडी के तौर पर हुई बड़ी बचत के मद्देनजर, किसानों के कर्जे माफ करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सन्नतकारों के 110,000 करोड़ रुपए के लोन माफ कर सकती है, तो ऐसा ही गरीब किसानों खातिर भी किया जा सकता है, जिनके लिए यह जिंदगी और मौत का मामला है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Dec 2016 04:58:32 +0530</pubDate>
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