<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/parali/tag-9899" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Parali - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/9899/rss</link>
                <description>Parali RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>किसानों के लिए मिसाल बनी चाचा-भतीजा की जोड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[150 एकड़ की करते हैं खेती, 5 सालों से पराली को नहीं लगाई आग | Barnala News पराली को मिट्टी में मिलाकर करते हैं फसल की बिजाई, उत्पादन में हुआ इजाफा | Barnala News बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। Parali: बरनाला जिले के गांव भद्दलवड्ड निवासी चाचा-भतीजा की जोड़ी ने पराली प्रबंधन में सराहनीय उदाहरण पेश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-uncle-nephew-duo-became-an-example-for-farmers/article-62054"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/barnala-news-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">150 एकड़ की करते हैं खेती, 5 सालों से पराली को नहीं लगाई आग | Barnala News</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>पराली को मिट्टी में मिलाकर करते हैं फसल की बिजाई, उत्पादन में हुआ इजाफा | Barnala News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> Parali: बरनाला जिले के गांव भद्दलवड्ड निवासी चाचा-भतीजा की जोड़ी ने पराली प्रबंधन में सराहनीय उदाहरण पेश किया है। यह किसान 150 एकड़ से अधिक की खेती करत हैं और पिछले 5 सालों से पराली को आग लगाने की बजाय खेतों में ही मिला रहे हैं। Barnala News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार जतिन्द्र सिंह दयोल (आयु 43 साल) व उनका भतीजा भुपिन्दर सिंह (आयु 32 साल) निवासी गांव भद्दलवड्ड के पास करीब 15 एकड़ अपनी मालकी जमीन है और करीब 150 एकड़ ठेके पर लेकर खेती करते हैं। वह गेहूं, धान के अलावा आलू, मक्की आदि की बिजाई करते हैं। किसान जतिन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 5 सालों से गेहूं व धान की पराली को आग नहीं लगाई। उन्होंंने बताया कि उनको अपने जानकारों से पराली का प्रबंधन करने वाले यंत्रों संबंधी जानकारी मिली। उन्होंने साल 2020 में ग्रुप बनाके सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए जाते यंत्रों के तहत चौपर और सुपरसीडर सब्सिडी पर लिए। इस दौरान मलचर व पलटावां हल सब्सिडी पर लिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वह गेहूं, धान के अलावा फसली विभिन्नता के तहत मक्की और आलू आदि की भी काश्त कर रहे हैं। उन्होेंने बताया कि कम्बाईन पर एसएमएस लगाकर धान की कटाई करते हैं और इसके बाद मलचर चलाते हैं। फिर रोटावेटर और पलटावा हल चलाते हैं ताकि पराली नीचे तक जमीन में मिल जाए। इसके बाद दोबारा रोटावेटर चलाकर फसल की बिजाई करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उन्होंने पराली को खाद के तौर पर मिट्टी में मिलाना शुरू किया है, 2-3 सालों दौरान मिट्टी की सेहत में सुधार होने लगा है और उत्पादन बढ़ने लगा है। उन्होंने कहा कि इससे जहां मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में विस्तार हुआ है, वहीं फसल उत्पादन भी बढ़ा है और पर्यावरण भी दूषित होने से बच रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अन्य किसान भी लें प्रेरणा: डिप्टी कमिशनर | Barnala News</h3>
<p style="text-align:justify;">डिप्टी कमिशनर पूनमदीप कौर ने गांव भद्दलवड्ड के किसानों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह किसान जहां पर्यावरण व मानवीय सेहत की रक्षा कर रहे हैं, वहीं अच्छी आमदन भी हासिल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए यंत्रों पर सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने बताया कि किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी व कोआॅप्रेटिव सोसायटी या कसटम हाईरिंग सैंटर को 80 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने कहा कि किसान इन यंत्रों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं व पराली को आग लगाने की बजाय योग्य प्रबंध करें। Barnala News</p>
<div><strong><strong>यह भी पढ़ें:– </strong></strong><a style="font-family:Roboto;font-size:22px;" title="Traffic Rule: न ही टायर से हवा और न गाड़ी की चाबी, निकाल सकता है ट्रैफिक पुलिस! यहां जान लें अपने नियम" href="http://10.0.0.122:1245/neither-the-keys-to-the-car-nor-the-air-from-the-tyres-can-be-taken-out-by-the-traffic-police/">Traffic Rule: न ही टायर से हवा और न गाड़ी की चाबी, निकाल सकता है ट्रैफिक पुलिस! यहां जान लें अपने निय…</a></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-uncle-nephew-duo-became-an-example-for-farmers/article-62054</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-uncle-nephew-duo-became-an-example-for-farmers/article-62054</guid>
                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 15:01:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-09/barnala-news-2.jpg"                         length="66838"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>16 सालों से पराली को नहीं लगाई आग</title>
                                    <description><![CDATA[ फसलों के अवशेष का कुत्तरा कर गौशाला में भेज देता है, जहां उसकी तूड़ी के रूप में पशुओं के लिए प्रयोग किया जाता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/parali-has-not-been-set-on-fire-for-16-years/article-18982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/parali.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"><strong>वातावरण का रक्षक बना किसान जगसीर (Parali )<br />
</strong></h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>दस सहायक धंधे अपनाकर किसान कर रहा अच्छी कमाई</strong></h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>धान के अवशेष की तूड़ी बनाकर भेज रहा गौशाला में</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला (सच कहूँ/जसवीर गहल)।</strong> गांव रुड़ेके कलां के प्रगतिशील किसान जगसीर सिंह ने पिछले 16 वर्षो से पराली को आग नहीं लगाई व पराली के अवशेष की संभाल कर उसको गोशाला में भेज देता है। वह दस प्रकार के सहायक धंधे कर खूब कमाई भी कर रहा है। गांव रुड़के कलां के जगसीर सिंह पांच एकड़ में धान लगाता है व बाकी जमीन सहायक धंधों के लिए प्रयोग करता है, जिससे उसकी कमाई भी होती है और वातावरण भी बचा रहा है। जगसीर सिंह ने 16 वर्षों से धान की पराली को आग नहीं लगाई, जिनकी प्रशंसा करनी बनती है। वह फसलों के अवशेष का कुत्तरा कर गौशाला में भेज देता है, जहां उसकी तूड़ी के रूप में पशुओं के लिए प्रयोग किया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषि विभिन्न बनी वरदान</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">किसान जगसीर सिंह ने बताया कि उसके द्वारा कृषि के साथ-साथ दस सहायक धंधों के साथ अच्छा पैसा कमा रहा है। जगसीर सिंह ने माडल फार्म बनाया हुआ है, जो पंद्रह एकड़ में है। इसमें वह दालों, गेहूं, धान व मक्की भी बीजता है। एक एकड़ में बेरी का बाग, बकरी पालन का धंधा, बतख पालन का धंधा, कड़कनाथ,चकौर पालन, खरगोश पालन, मक्खी पालन, फार्म बाउंडरी व फलदार वृक्ष का धंधा करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बना जगसीर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. बलदेव सिंह ने किसान जगसीर सिंह के फसल विभिन्नता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जिला में फसल विभिन्नता के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अन्य किसानों व विशेष रूप युवाओं को भी प्रगतिशील किसान जगसीर सिंह प्रेरणा लेनी चाहिए।</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/parali-has-not-been-set-on-fire-for-16-years/article-18982</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/parali-has-not-been-set-on-fire-for-16-years/article-18982</guid>
                <pubDate>Mon, 05 Oct 2020 16:02:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-10/parali.jpg"                         length="27729"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पराली पर पंजाब की सराहनीय पहल</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पंजाब सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को वित्तीय मदद देने की घोषणा करते हुए इस समस्या को सुलझाने की पहल की है। प्रदेश सरकार पांच एकड़ तक की जमीन के मालिक किसानों को 2500 रुपए देगी। भले ही यह रकम बहुत कम है फिर भी शुरूआत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-commendable-initiative-on-parali/article-11140"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/parali.jpg" alt=""></a><br /><p>आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पंजाब सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को वित्तीय मदद देने की घोषणा करते हुए इस समस्या को सुलझाने की पहल की है। प्रदेश सरकार पांच एकड़ तक की जमीन के मालिक किसानों को 2500 रुपए देगी। भले ही यह रकम बहुत कम है फिर भी शुरूआत अच्छी है। हालांकि पंजाब व हरियाणा की सरकार ने पराली को समेटने वाले कृषि यंत्रों पर सब्सिडी भी मुहैया करवाई थी, गांवों में जागरूकता रैलियां व कृषि विभाग ने जागरूकता कैंप लगाकर भी पराली समस्या से निपटने की पहल की थी।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने केंद्र से प्रति क्विंटल पराली 100 रुपए मांगे थे, यदि यह निर्णय धान की कटाई से दो माह पूर्व लिया जाता तब इसके अच्छे परिणाम आ सकते थे। पराली जलाने से दिल्ली सहित हरियाणा के चार पांच जिलों की हवा बहुत खतरनाक हो जाती है। हरियाणा के कई जिलों में स्कूलों में छुट्टियां भी करनी पड़ी हैं। यदि केंद्र सरकार राज्य की आर्थिक मदद करे तब कई अन्य राज्य भी पंजाब जैसी घोषणा कर सकते हैं। पंजाब सरकार की योजना के पीछे यह तर्क भी वाजिब है कि कि छोटे किसानों पर पराली को समेटने के लिए खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए। कोई भी समस्या ऐसी नहीं, जिसका समाधान नहीं हो सकता। नि:संदेह सही समय पर काम करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए।</p>
<p>केंद्र व राज्य सरकारें लोगों के स्वास्थ्य के लिए अरबों रुपए का बजट आरक्षित रखती हैं। यदि बजट का छोटा सा हिस्सा किसानों पर खर्च किया जाए तब यह ‘एक पंथ-दो काज’ वाली बात होगी। दरअसल कृषि पहले ही घाटे का सौदा बन चुकी है और विशेष तौर पर छोटे किसान पराली समेटने के लिए महंगी मशीनरी खरीदने में असमर्थ हैं। किसानों को वित्तीय मदद देना ही पराली की समस्या का एकमात्र समाधान है। कुछ प्राईवेट संस्थाएं भी पराली का समाधान निकालने के लिए प्रयत्नशील हैं। सरकार इन संस्थाओं के साथ मिलकर समस्या का का स्थायी समाधान निकाल सकती हैं। बेहतर हो यदि केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय मदद देकर किसानों के बोझ को हलका करे। मुकदमे दर्ज करने से समस्या का समाधान संभव नहीं, बल्कि यह किसानों पर अत्याचार होगा। कृषि की स्थिति सरकारों से छिपी हुई नहीं। खाद, बीज व कीटनाशकों की कीमतों में वृद्धि होने से किसानों पर बोझ बढ़ा है। यही बेहतर पहल होगी यदि वातावरण की शुद्धता में पूरा देश अपनी जिम्मेदारी निभाए और अपना आर्थिक योगदान दे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-commendable-initiative-on-parali/article-11140</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-commendable-initiative-on-parali/article-11140</guid>
                <pubDate>Fri, 15 Nov 2019 15:08:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-11/parali.jpg"                         length="165484"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पराली की गठड़ियों को लगी आग, लाखों का नुक्सान</title>
                                    <description><![CDATA[शिरोमणी अकाली दल के हलका इंचार्ज गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना ने लिया घटना का जायजा पटियाला/अमलोह(अनिल लुटावा)। पंजाब की कांग्रेस सरकार की ओर से जहां किसानों को पराली न जलाने व प्रदूषण न फैलाने के लिए जहां उत्साहित किया जा रहा है वहीं एक हलका अमलोह के गांव माजरी किशने वाली के प्रगतिशील किसान बलदेव […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fire-in-parali-belt-loss-of-millions/article-6520"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/fire-in-parali-belt-loss-of-millions-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">शिरोमणी अकाली दल के हलका इंचार्ज गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना ने लिया घटना का जायजा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला/अमलोह(अनिल लुटावा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब की कांग्रेस सरकार की ओर से जहां किसानों को पराली न जलाने व प्रदूषण न फैलाने के लिए जहां उत्साहित किया जा रहा है वहीं एक हलका अमलोह के गांव माजरी किशने वाली के प्रगतिशील किसान बलदेव सिंह पुत्र प्रीतम सिंह की ओर से धान के अवशेष की मुफ़्त में गठड़ियां बना कर एक फैक्ट्री को भेजने के लिए गांव खुंमना के खेतों में बड़े स्तर पर पराली की गठड़ियां एकत्रित की गई थी जो कोई कि बीती देर रात आग लगने के कारण जल कर राख हो गई व बलदेव सिंह किसान का 12 लाख रुपये से ले कर 15 लाख रुपये तक का बड़ा नुक्सान हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मौके पर खेतों में पराली से बनी आग के साथ जली गठड़ियों का जायजा लेने के लिए शिरोमणी अकाली दल के हलका अमलोह से हलका इंचार्ज गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना पहुंचे। इस मौके पर किसान बलदेव सिंह माजरी के परिवार के साथ हुए इस भारी नुक्सान पर हमदर्दी प्रकट करते हुए राजू खन्ना ने कहा कि चाहे पंजाब की कैप्टन सरकार किसानों को पराली न जलाने की बात कर रही है परंतु इस प्रगतिशील किसान की ओर से सरकार के आदेशों पर पहरा देते हुए हलके किसानों के खेतों में जाकर अपनी मशीनरी के द्वारा पराली की मुफ़्त में गठड़ियां बनाई जा रही थीं जिनको इस किसान की ओर से एक खेत में एकत्रित किया गया था परंतु बीती देर रात कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से शरारत करते हुए इन बड़ी संख्या में पड़ी पराली की गठड़ियों को आग लगा दी गई, जिसके साथ बलदेव सिंह किसान का 12 से 15 लाख रुपये का नुक्सान हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजू खन्ना ने कहा कि पहले ही टूट चुकी कृषि को आज और अधिक सहायता देने की जरूरत है, जिससे आत्महत्याआें को रोकें जा सके। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से इस किसान के नुक्सान की पहल के आधार पर पूर्ति करनी चाहिए, जिससे ऐसे किसान आगे से भी राज्य को प्रदूषण रहित करने के लिए पहलकदमी करते रहें। इस मौके पर उन के साथ मलकीत सिंह, हरविन्दर सिंह बिन्दा, गुरदीप सिंह, गुरबखश सिंह, छज्जा सिंह, करनैल सिंह लंबी, धरमिन्दर सिंह, सरदूल सिंह, रजिन्दर सिंह, मनजीत सिंह, गुरजीत सिंह आदि विशेष तौर पर उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fire-in-parali-belt-loss-of-millions/article-6520</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fire-in-parali-belt-loss-of-millions/article-6520</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Oct 2018 12:51:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-10/fire-in-parali-belt-loss-of-millions-copy.jpg"                         length="198385"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पराली से प्रदूषण : तर्क, हठ व हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[बीते दिनों पंजाब के बरनाला में किसानों के भारी जनसमूह ने आर्थिक सहायता न मिलने तक पराली जलाने का निर्णय लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय के खिलाफ बरनाला में हुआ। सम्मेलन पराली के मामले में सबसे भारी इक ट्ठ था। यह बात महत्वपूर्ण है कि किसानों ने इस धारणा को तोड़ा है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/parali-pollution-argument-persistence-and-reality/article-6263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/parali.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीते दिनों पंजाब के बरनाला में किसानों के भारी जनसमूह ने आर्थिक सहायता न मिलने तक पराली जलाने का निर्णय लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय के खिलाफ बरनाला में हुआ। सम्मेलन पराली के मामले में सबसे भारी इक ट्ठ था। यह बात महत्वपूर्ण है कि किसानों ने इस धारणा को तोड़ा है कि वे केवल अपनी जिद के कारण पराली जला रहे हैं। सम्मेलन के दौरान किसानों ने कृषि, कृषि-मशीनरी व देश के कुल प्रदूषण संबंधी तर्क व आंकड़े देकर यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि सिर्फ पराली ही प्रदूषण की एकमात्र वजह नहीं है।</p>
<p><span style="text-align:justify;">किसानों ने पराली जलाने को अपनी मजबूरी बताया है। दरअसल किसानों के दर्द को समझने की भी जरूरत है। पंजाब की अमेरन्द्र सरकार स्पष्ट तौर पर इस बात की घोषणा कर चुकी है कि पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई धक्केशाही है वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की रिर्पोटों के साथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पराली न जलाने के निर्देशों के कारण केंद्र व राज्य सरकारों दरमियान टकराव के हालात पैदा हो सकते हैं। अगले वर्ष लोक सभा चुनावों व हरियाणा सहित पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों के कारण राज्य सरकारें किसानों पर मामले दर्ज करने से गुरेज करेंगी परंतु प्रशासनिक स्तर पर खींचातानी का माहौल जरूर बन सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल बात किसी न किसी तरह इस सीजन को निकालने की नहीं बल्कि कृषि जैसे अहम मुद्दे का सफल व सर्व सहमति वाला हल निकालने की जरूरत है। केवल किसानों के वोट बैंक पर नजर रखने की नीति छोड़ कर वातावरण व कृषि की बेहतरी के लिए कोई सकारात्मक कदम उठाना होगा। इसके विपरीत केंद्र व राज्य सरकारें हाथ पर हाथ रख कर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में शपथ पत्र देने तक सीमित हो गई हैं। पराली की खपत के लिए कोई तकनीक विकसित करने व प्रॉजैक्ट लाने की दिशा में सरकारें कागजी कार्रवाईयों से आगे नहीं बढ़ रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब व हरियाणा कृषि प्रधान राज्य हैं, जिनके अपने,विश्वविद्यालय हैं परंतु पराली के लिए इन संस्थानों ने कोई कारगर हल नहीं निकाला। उधर मध्य प्रदेश में एक रिसर्च संस्था ने पराली से दरवाजे, टाईलें, पेपर वेट व छतों का सामान जैसी वस्तुएं बनाकर आशा की किरण जगाई है। राज्य सरकार केवल केंद्र आगे हाथ फैलाने की बजाय खुद भी प्रॉजैक्ट लाने की पहल करे। किसानों को ढील देना या सख्ती करने की पैंतरेबाजी से निकल कर किसानों को पराली के लाभ देने का प्रयास करना चाहिए। इच्छा शक्ति के साथ काम किया जाये तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो<strong>।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/parali-pollution-argument-persistence-and-reality/article-6263</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/parali-pollution-argument-persistence-and-reality/article-6263</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 09:24:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-10/parali.jpg"                         length="146785"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        