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                <title>बरनाला : गांव ढिल्लवां में फैला चेचक , स्वास्थ्य अधिकारी बेखबर</title>
                                    <description><![CDATA[पीड़ितों ने सरकारी अस्पताल की ओर से की गई कार्रवाई के सवाल के जबाव में बताया।
सरकारी अस्पताल का कोई भी डाक्टर या कर्मचारी उनके पास हालचाल भी जानने नहीं आया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/smallpox-spread-in-village-dhillwan/article-12591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/smallpox-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">स्वास्थ्य विभाग बीमारी को रोकने और जागरूकता के लिए उठाए उचित कदम : पीड़ित | Smallpox</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला/तपा मंडी(सुरिन्दर मित्तल )।</strong> भारत सरकार, राज्यों की सरकारें और सेहत विभाग की ओर से लोगों को बीमारियों से दूर रखने के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं, जिन पर लोगों की ओर से भरे जाते टैक्सों का अरबों-खरबों रूपये खर्च हो जाते हैं। इसी के अंतर्गत चेचक, टीबी, कैंसर पोलियो आदि की रोकथाम के लिए हर साल लाखों सरकारी कर्मचारियों व सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से घर-घर जाकर ऐसे अभियानों को सफल बनाने के लिए प्रचार प्रसार और वैक्सीन, दवाएं आदि देकर कोशिशें की जातीं हैं परन्तु फिर भी सरकार लोगों को इन बीमारियों से बचाने के लिए पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही। इस तरह का ही गंभीर मामला गांव ढिल्लवां में सामने आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव लालू विहड़े में कई घरों के बच्चों और जवानों को चिकन पौकस मतलब <strong>(Smallpox)</strong> चेचक, जिसे आम ग्रामीण भाषा में छोटी माता की बीमारी के नाम के साथ जाना जाता है ने घेर रखा है परंतु सरकार के सेहत विभाग को इस संबंधी न ही गांव स्तर पर और न ही तहसील स्तर के अस्पताल में जानकारी है। इस संबंधी लाळू वेहड़े के निवासियों जगसीर सिंह, गुरमेल सिंह, राज सिंह आदि ने पत्रकार को बुलाकर जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से उनके परिवार में इस बीमारी के साथ घर के सदस्य पीड़ित हैं, जिनका निजी अस्पतालों में से इलाज करवाया जा रहा है और उनकी कमाई इस बीमारी पर ही खर्च हो रही है। गुरमेल सिंह ने बताया कि उनके बच्चे गुरअंश, प्रिंसदीप, सुखमण, और उनके पड़ोसी जगसीर सिंह ने अपने बेटे बलजीत सिंह, युवा लड़की गुरप्रीत कौर बेटी राज सिंह भी कई दिनों से इस बीमारी के साथ पीड़ित है, जिनका इलाज भी निजी तौर पर करवाया जा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रारंभिक केन्द्र में नहीं है मेडीकल अधिकारी | Smallpox</h2>
<p style="text-align:justify;">जब गांव ढिल्लवां के प्रारंभिक सेहत केंद्र में गांव में चेचक फैलने संबंधी पत्रकार की ओर से जानकारी लेने के लिए दौरा किया तो वहां उपस्थित स्टाफ ने बताया कि प्रारंभिक केंद्र में पिछले एक दो महीनों से कोई भी मैडीकल अधिकारी नहीं है परंतु वह खुद गांव के घरों में जाकर किसी भी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति संबंधी पता कर रहे हैं और उनका बनता इलाज करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। गांव में चेचक की बीमारी फैलने संबंधी उनको कोई जानकारी देने नहीं आया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीमारी के फैलने और सेहत विभाग को जानकारी हो या न हो संबंधी जब सब डिविजनल अस्पताल तपा के एसएमओ डॉक्टर जसवीर सिंह औलख के साथ उनके दफ़्तर जाकर बात की तो उन्होंने कहा कि विभाग के पास अभी तक चेचक के साथ एक भी पीड़ित मरीज नहीं पहुंचा और न ही किसी ने कोई जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि चेचक के साथ पीड़ित व्यक्ति यदि किसी निजी डॉक्टर से इलाज करवाता है तो वह डॉक्टर सरकारी अस्पताल को इस संबंधी जानकारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अधिकतर कर्मचारियों की ड्युटियां शुरू होने वाले पल्स पोलिया अभियान में लगाई गई हैं। इसके बाद गांव में जानकारी लेकर ईलाज के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पीड़ितों का कुशलक्षेम जानने नहीं पहुंची कोई सरकारी डॉक्टर | Smallpox</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पीड़ितों ने सरकारी अस्पताल की ओर से की गई कार्रवाई के सवाल के जबाव में बताया।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सरकारी अस्पताल का कोई भी डाक्टर या कर्मचारी उनके पास हालचाल भी जानने नहीं आया।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जब कि सरकार ने प्राईमरी हैल्थ वर्करों को घर-घर जाकर लोगों की सेहत बारे जानकारी रखने के लिए ही रखा है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकारी डॉक्टरों को भेज कर गांव में </strong><br />
<strong>बीमारी का शिकार हो रहे पीड़ितों सम्बन्धित जांच की जाये।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और इसके इलाज और बीमारी को रोकने के लिए सरकार की तरफ से उचित कदम उठाए जाएं।</strong></li>
</ul>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2020 20:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>योग की महिमा से महका विश्व</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभुनाथ शुक्ल भारत की समस्त सृष्टि और संस्कार में योग समाहित है। योग मानसिक और शारीरिक विकारों से मुक्ति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्ञान है। इसकी सार्थकता को दुनिया के कई धर्मों ने स्वीकार किया है। योग सिर्फ व्यायाम का नाम नहीं बल्कि इसके आठ आयामों के जरियए हम मन, मस्तिष्क और शारीरं को नियंत्रित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-fragrance-of-the-yoga-spread-across-the-world/article-4351"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/yoga-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रभुनाथ शुक्ल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारत की समस्त सृष्टि और संस्कार में योग समाहित है। योग मानसिक और शारीरिक विकारों से मुक्ति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्ञान है। इसकी सार्थकता को दुनिया के कई धर्मों ने स्वीकार किया है। योग सिर्फ व्यायाम का नाम नहीं बल्कि इसके आठ आयामों के जरियए हम मन, मस्तिष्क और शारीरं को नियंत्रित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक जीवन पद्धति में योग सेहत और स्वास्थ्य से जुड़ गया है। योग की परिभाषा को शब्द जाल में नहीं समेटा जा सकता। योग आध्यात्मिक प्रक्रिया है। जिसके माध्यम से हम शरीर, मन और आत्मा को एक साथ केंद्रीय बिंदु में स्थिर कर सकते हैं। योग को सार्वभौंमिक बना कर जहां हम लोगों की तंदुरुस्ती सुधार सकते हैं वहीं कई बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
21 जून हमारे लिए गौरव का विषय है। भारत की लाखों साल पुरानी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक व्यवस्था पर आधारित यह वैदिक ज्ञान अद्वितीय है। दुनिया ने अब इसकी उपलब्धि को स्वीकार किया है। दुनिया वालों को भारत ने अपनी यौगिग शक्ति और साधना के लाभ से परिचय कराया है। योग भारत के लिए आने वाले दिनों में बड़ा बाजार साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मेक इन इंडिया पालसी का भी हिस्सा हो सकता है। आयुर्वेद और हर्रबल के नाम से भागने वाली उत्पादन कंपनियां अब खुद अपने विज्ञापनों में आयुर्वेद निर्मित होने का दावा कर रही हैं। भारत के अलवा दुनिया के दूसरे देशों में भी भारत ने योग और आयुर्वेद के जरिये बाजारवाद का नजरिया बदलने में कामयाब हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व के लगभग 200 देश भारत की इस वैदिक परंपरा का अनुसरण करने लगे हैं। योग को अब वैश्विक मान्यता मिल गयी है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। दुनिया भर में योग की महत्वा स्थापित करने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योग और आयुर्वेद को उन्होंने वैश्विक स्वीकारोक्ति बना दी। महर्षि पतंजलि ने योग साधाना के आठ आयाम बतायें है जिसमें यम, नियम, आसन, प्रणायाम, प्रत्यहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">
भारतीय मिशन ने संयुक्तराष्ट संघ में 11 अक्टूबर 2014 को इसका प्रस्ताव दिया था। अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के 177 देशों ने भारत के पक्ष में वोट दिया। भारत अब दुनिया का विश्वगुरु बन गया है और वैश्विक स्तर पर 21 जून को अतंरराष्टीय योग दिवस घोषित कर दिया गया। आज भारत सहित दुनिया में 20 करोड़ से अधिक लोग योग साधना का लाभ उठा रहे हैं। काफी संख्या में मुस्लिम देश भी योग को अपना रहे हैं। आधुनिक युग की व्यस्त दिनचर्या में योग हमारे लिए अमृत है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी जिंदगी को खुशहाल और डिप्रेशन मुक्त बनाने के लिए योग हमें खुला आकाश देता हैं। भारत में योग की परंपरा 5000 हजार साल पुरानी है। भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं कहा है कि ‘योग: कर्मसु कौशलम’ यानी हमारे कर्मों में सर्वश्रेष्ठ योग है। योग यज्ञ है और यज्ञ कर्म है। योग जीवात्मा और परमेश्वर के मिलन का साधन मात्र ही नहीं ईश साधना का भी साध्य है। योगी भगवान कृष्ण ने योग को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने कहा है कि ह्ययोगस्थ: कुरु कर्माणिह्य इसका तात्पर्य है कि योग में स्थिर होकर ही सद्चित कर्म संभव है। गीता में तीन प्रकार के योग ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग का वर्णन है।</p>
<p style="text-align:justify;">सांख्ययोग में 25 तत्वों का उल्लेख है। गीता का छठवां अध्याय योग को समर्पित है। हमारा योगशास्त्र इस गौरवशाली उपलब्धि से अटा पड़ा है। इसके अलावा हमारे यहां लययोग, राजयोग का भी वर्णन है। चित्त की निरुद्ध अवस्था लयोग में आती है। राजयोग सभी योगों से श्रेष्ठ बताया गया है। महर्षि पतंजलि की योग परंपरा भारत में अधिक संवृद्धशाली है।</p>
<p style="text-align:justify;">
योग का इतिहास प्राचीन है। सिंधु घाटी सभ्यता का भी संबंध योग से है। प्राचीन काल की कई मूर्तियां योग मुद्रा में स्थापित हैं। भगवान शिव को योग मुद्रा में देखा जा सकता है। बुद्ध की मूर्तियां भी योग साधना में स्थापित हैं। बौद्ध और जैनधर्म में भी योग की महत्ता पर काफी कुछ है। बौद्ध और धर्म के अलावा ईसाई और इस्लाम में सूफी संगीत परंपरा में भी योग की बात आयी हैं। 21 जून विश्वयोग दिवस मनाया जाएगा। इसे लेकर पूरे देश और दुनिया में तैयारियां जोरों पर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">योग को धर्म विशेष से जोड़ कर इसकी उपलब्धि को कम करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। बदले दौर में योग का स्वरुप बदल गया है। योग को अपना कर अपनी जिंदगी को सुखी, शांत और निरोगी बना उन्नतशील जीवन जी कसते हैं। वहीं राष्ट निर्माण और विकास में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
दुनिया भर में करोड़ों लोग योग को अपना नियमित जीवन बना लिया है। यह भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि की बात है। योग संपूर्ण जीवन और चिकित्सा पद्धिति है। दुनिया में शांति युद्ध से नहीं योग से आएगी। देश विदेश के करोड़ों लोग योग से सुखी जीवन जी रहे हैं। योग से संबंधित युनिवर्सिटी, शोध संस्थान, आयुर्वेद मेडिसिन उद्योग नयी उम्मीदें और आशाएं लेकर आ रहे हैं। यही कारण है कि भारत और दुनिया में योग बाजारबाद का ब्रांड बन गया है। कभी आयुर्वेद उत्पादन से जुड़ी कुछ कंपनियां होती थी लेकिन आज बाढ़ आ गयी है। योग को पर्यटन उद्योग के रुप में विकसित किया जा सकता है। लाखों विदेशी आज भी भारत में शांति की खोज के लिए आते हैं। प्राकृकि सुंदरता के दर्शन करने यहां लोग आते है। जिससे पर्यटन उद्योग को करोड़ों रुपये का मुनाफा होता है। अब इसे संयुक्तराष्ट संघ से मान्यता मिल गई है तो यह बड़ी उपलब्धि है।<br />
विज्ञान और विकास के बढ़ते कदम तनाव की जिंदगी दे रहा है। जिंदगी की गति अधिक तेज हो चली है। लोगों के जीने का नजरिया बदल रहा है। काम का अधिक दबाव बढ़ रहा हैं जिसकी वजह से हाईपर टेंशन, और दूसरी बीमारियां फैल रही हैं। तनाव का सबसे बेहतर इलाज योग विज्ञान में ही हैं। वहीं लोगों में सुंदर दिखने की बढ़ती ललक भी योग और आयुर्वेद विज्ञान को नया आयाम देगी। यह पूरे भारत और उद्योग जगत के लिए गर्व का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी हजारों साल की वैदिक परंपरा को तीन साल पूर्व 2015 में वैश्विक मंच मिला है। योग का प्रयोग अब दुनिया भर में चिकित्सा विज्ञान के रुप में भी हा रहा है। यह हेल्दी वर्ल्ड और स्वस्थ भारत की ओर बढ़ता पहला कदम है। दुनिया के साथ मिलकर हम योग के जरिए विश्व को स्वस्थ और शांति के मार्ग पर आगे ले जायें। भारत दुनिया में हमेंशा शांति का प्रतीक रहा है, योग के जरिये हम सेहत और तंदुरुस्ती के भी महागुरु बन गए हैं।]</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 09:18:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>डेंगू बुखार का फैलाव रोकें आप भी</title>
                                    <description><![CDATA[इन दिनों डेंगू का डंक कई जानें ले चुका है। राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य स्थानों पर सैकड़ों जानें डेंगू की वजह से जा चुकी हैं और हजारों लोग डेंगू की बीमारी से पीड़ित हैं। मरने वालों में बच्चे, जवान आदि सभी शामिल हैं। मच्छर सभी स्थानों पर पाये जाते हैं। आप यदि सावधान नहीं है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prevent-the-spread-of-dengue-fever/article-3441"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/dengu-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इन दिनों डेंगू का डंक कई जानें ले चुका है। राजधानी दिल्ली सहित कई अन्य स्थानों पर सैकड़ों जानें डेंगू की वजह से जा चुकी हैं और हजारों लोग डेंगू की बीमारी से पीड़ित हैं। मरने वालों में बच्चे, जवान आदि सभी शामिल हैं। मच्छर सभी स्थानों पर पाये जाते हैं। आप यदि सावधान नहीं है तो यह छोटा सा मच्छर कब आपको काटकर चला गया और डेंगू, चिकुनगुनिया, फेल्सीफेरम मलेरिया, जापानी बुखार जैसे खतरनाक रोगों के कीटाणु आपके शरीर में प्रवेश करा गया था या नहीं, आप तुरंत पता भी नहीं लगा सकते। मच्छर ने यदि काट लिया तो आप पूरी तरह भाग्य भरोसे हो जाते हैं कि मच्छर बीमारी के कीटाणु आप के शरीर में डाल गया या नहीं और यदि डाल गया तो कौन सी बीमारी के डाल गया क्योंकि हम नहीं देख पाते कि किस जाति के मच्छर ने हमें काटा है क्योंकि अलग-अलग बीमारी फैलाने के अलग अलग जाति के मच्छर होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको यह जानकर और आश्चर्य होगा कि मादा मच्छर बीमारी के कीटाणु लेकर पैदा नहीं होतीं। नर मच्छर वनस्पति पर अपना पेट पाल लेता हैै। खून की आवश्यकता केवल मादा मच्छर को ही रहती है। यदि उसने केवल स्वस्थ मानव का खून पिया है तो वह मादा मच्छर किसी अन्य को बीमारी नहीं फैला पाती लेकिन यदि उसने डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया आदि से बीमार मरीज का खून चूसा है तो ऐसा मादा मच्छर कुछ ही दिन में बीमारी फैलाने वाला खतरनाक मच्छर बन जाता है और 5-10 दिन के बचे जीवनकाल में जितनों को यह काटेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उनको बीमारी के कीटाणु अपनी लार के द्वारा मानव खून में पहुंचा देगा। मच्छर के काटने के कुछ दिनों पश्चात डेंगू के लक्षण 4 से 6 दिन में और मलेरिया के 10 से 14 दिन में उत्पन्न होते हैं। इसलिए आप अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें। अपने क्षेत्र में निम्नलिखित अभियान अवश्य चलायें। निकटतम अस्पताल प्रबंधन से निवेदन करें कि बुखार के मरीजों को मच्छरदानी में ही रखने की व्यवस्था बनायें व अस्पताल को मच्छर विहीन रखें। ऐसे अस्पतालों में जाने से बचें जहां मच्छर हों।</p>
<p style="text-align:justify;">घर में बुखार के मरीज को भी मच्छरदानी में रखें और घर भी तुरंत मच्छर विहीन करें। सार्वजनिक स्थानों जैसे सिनेमाहाल, चेंजिंग रूम, नाट्यगृह, टैक्सी, सड़क, स्कूल आदि के मच्छरों को काटने न दें क्योंकि ये मच्छर बीमारी फैलाने वाले कीटाणु लिये हो सकते हैं। आप ऐसे स्थानों पर फुल बाहों के कपड़े, मोजे पहनें और शेष खुले अंगों पर मच्छर रोधी क्रीम या नारियल या सरसों तेल में नीम तेल मिलाकर लगाकर ही निकलें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें अथवा मच्छररोधी क्रीम लगायें। मच्छर खत्म करने के जो भी तरीके आप अपना सकते हों, अपनायें लेकिन कोई भी मच्छर, कहीं का भी मच्छर आप को न काट पाये, ऐसे तरीके अवश्य आजमायें क्योंकि अपनी और अपने प्रिय की सुरक्षा हम सभी को करनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार पुन: जान लें कि डाक्टरों की मेहनत, मरीज की रोगों से लड़ने की शक्ति और मरीज का अच्छा भाग्य ही इस बीमारी से रोगी को मौत के मुंह से निकाल पाता है, अत: मच्छरों को किसी भी हाल में काटने न दें। मच्छरों से वैसे ही डरें जैसे आप कुत्ते के काटने से डरते हैं या उसे देखते ही भगा देते हैं। ये संदेश अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाये, तभी भारत जैसे विकासशील देश में इस बीमारी का फैलाव रोका जा सकता है। 5 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए मच्छर काटना ज्यादा घातक हो सकता है, अत: मच्छर न काट पाये, इस बात का विशेष ध्यान सभी रखें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक प्रहलाद अग्रवाल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 04:38:54 +0530</pubDate>
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                <title>वातावरण में फैला धुआं घोषित हो राष्ट्रीय आपदा</title>
                                    <description><![CDATA[दीपावली की रात से उत्तर भारत में जहरीले धूएं ने आमजन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। बच्चे, बूढ़े, बीमार बेहद परेशान हैं। आम नागरिक को भी धूएं से आंखों व गले में जलन हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सिवाय अभी तक सरकार ने इस दिशा में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/smoke-spread-into-the-environment-to-be-declared-a-national-disaster/article-254"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दीपावली की रात से उत्तर भारत में जहरीले धूएं ने आमजन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। बच्चे, बूढ़े, बीमार बेहद परेशान हैं। आम नागरिक को भी धूएं से आंखों व गले में जलन हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सिवाय अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई राहत की बात नहीं की है। वातावरण में फैला यह धुआं सिर्फ दीपावली के पटाखों की वजह से नहीं है, बल्कि इन दिनों किसान खेतों में लाखों टन धान की पुआल जलाते हैं। इस वजह से यह धुआं फैला हुआ है। दिल्ली राज्य महानगर है, जिसमें प्रतिदिन लाखों वाहन दौड़ रहे हैं व पेड़ों की संख्या बहुत कम है, अत: दिल्ली की हालत बेहद बुरी हो गई है। प्रतिवर्ष दीवाली के आसपास फैलने वाले इस धूएं को अब राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया जाना चाहिए। इस दौरान प्रभावित क्षेत्र में धुआं छोड़ने वाली भट्ठा इकाईयां, फैक्ट्रियां पूर्णत बन्द हो जानी चाहिए। साथ में वाहनों मे निजी वाहनों के प्रयोग को सीमित कर देना चाहिए। ताकि प्रतिपल वातावरण में घुलने वाले धूएं को रोका जा सके। किसानों द्वारा खेतों में पुआल जलाने को तो कठोरता से रोका जाना चाहिए। देश में सदियों से किसान धान व गेहूं की फसल बोते आ रहे हैं। पहले किसानों के पास आधुनिक मशीनें भी नहीं थी, तब भी किसान धान का पुआल को जलाते नहीं थे। लेकिन जिस गति से कृषि का आधुनिकीकरण हुआ, किसानों के पास हर तरह की मशीनरी आ गई है और खेत भी छोटे-छोटे हो गए हैं, उसकी तुलना में किसान उतने ही ज्यादा आलसी व लापरवाह हो गए हैं। स्वयं किसानों को भी पता है कि पुआल जलाने से जहां खेत की मिट्टी खराब होती है, खेत में खाद ज्यादा डालनी पड़ती है व वातावरण गंदा होता है, फिर भी किसान आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। नतीजा, पूरी आबादी को संकट का सामना करना पड़ रहा है। अत: अब सरकार को इस दिशा में उतनी ही कठोरता लागू करनी होगी, जैसा कि फसल होते हुए भी हर किसान अफीम नहीं बो सकता। ठीक ऐसे ही धान होने पर भी किसान आग न लगा सकें, सरकार को आदेश देने होंगे। आबादी बढ़ने के साथ ही पटाखों की खपत भी बढ़ गई है फिर पटाखों में जहरीला धुआं फैलाने वाली सामग्री भी उपयोग हो रही है, जिस कारण दीपावली पर धुआं प्रदूषण बहुत ज्यादा हो रहा है। केन्द्र सरकार व संबंधित राज्य सरकारों को प्रति वर्ष विकराल हो रही इस समस्या पर काबू पाने के लिए अब उदासीन नहीं बने रहना चाहिए। जब तक सरकार कठोरता से पेश नहीं आएगी धुएं की यह आपदा दूर नहीं होने वाली।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/smoke-spread-into-the-environment-to-be-declared-a-national-disaster/article-254</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Nov 2016 17:07:23 +0530</pubDate>
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