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                <title>Ego - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>प्रेरक प्रसंग : अहंकार</title>
                                    <description><![CDATA[ए क गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है। वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी। वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। घबराई हुई गाय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/motivational-context-ego/article-20176"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/story-womb-loan-1.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">ए क गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है। वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी। वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई। वह बाघ भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर घुस गया। तब उन्होंने देखा कि वह तालाब बहुत गहरा नहीं था। उसमें पानी कम था और वह कीचड़ से भरा हुआ था। उन दोनों के बीच की दूरी काफी कम थी। लेकिन अब वह कुछ नहीं कर पा रहे थे। वह गाय उस कीचड़ के अंदर धीरे-धीरे धंसने लगी। वह बाघ भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका। वह भी धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगा। दोनों ही करीब करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर फंस गए। दोनों हिल भी नहीं पा रहे थे। गाय के करीब होने के बावजूद वह बाघ उसे पकड़ नहीं पा रहा था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">थोड़ी देर बाद गाय ने उस बाघ से पूछा, क्या तुम्हारा कोई गुरु या मालिक है? बाघ ने गुरार्ते हुए कहा, मैं तो जंगल का राजा हूं। मेरा कोई मालिक नहीं। मैं खुद ही जंगल का मालिक हूं। गाय ने कहा, लेकिन तुम्हारी उस शक्ति का यहां पर क्या उपयोग है? उस बाघ ने कहा, तुम भी तो फंस गई हो और मरने के करीब हो। तुम्हारी भी तो हालत मेरे जैसी ही है। गाय ने मुस्कुराते हुए कहा,…. बिलकुल नहीं। मेरा मालिक जब शाम को घर आएगा और मुझे वहां पर नहीं पाएगा तो वह ढूंढते हुए यहां जरूर आएगा और मुझे इस कीचड़ से निकाल कर अपने घर ले जाएगा। तुम्हें कौन ले जाएगा? थोड़ी ही देर में सच में ही एक आदमी वहां पर आया और गाय को कीचड़ से निकालकर अपने घर ले गया।जाते समय गाय और उसका मालिक दोनों एक दूसरे की तरफ कृतज्ञता पूर्वक देख रहे थे। वे चाहते हुए भी उस बाघ को कीचड़ से नहीं निकाल सकते थे, क्योंकि उनकी जान के लिए वह खतरा था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">गाय: समर्पित ह्रदय का प्रतीक है। बाघ: अहंकारी मन है। मालिक: ईश्वर का प्रतीक है। कीचड़: यह संसार है। यह संघर्ष: अस्तित्व की लड़ाई है। किसी पर निर्भर नहीं होना अच्छी बात है, लेकिन मैं ही सब कुछ हूं, मुझे किसी के सहयोग की आवश्यकता नहीं है यही अहंकार है, और यहीं से विनाश का बीजारोपण हो जाता है। ईश्वर से बड़ा इस दुनिया में सच्चा हितैषी कोई नहीं होता, क्योंकि वही अनेक रूपों में हमारी रक्षा करता है।</h6>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Nov 2020 16:22:59 +0530</pubDate>
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                <title>प्रभु से दूर कर देता है अहंकार</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक मुरीद अपने परमपिता परमात्मा को तभी हासिल कर सकता है, जब वह अपनी खुदी को मिटा देता है। जब तक इन्सान के अंदर खुदी, अहंकार रहता है तब तक वह अपने सतगुरु, मौला से दूर ही दूर रहता है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/ego-truns-away-from-the-god/article-3435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/guruji-9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक मुरीद अपने परमपिता परमात्मा को तभी हासिल कर सकता है, जब वह अपनी खुदी को मिटा देता है। जब तक इन्सान के अंदर खुदी, अहंकार रहता है तब तक वह अपने सतगुरु, मौला से दूर ही दूर रहता है, क्योंकि जहां अहंकार होता है वहां मालिक का प्यार नहीं और जहां मालिक का प्यार है वहां अहंकार नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि बेपरवाह जी के वचनों में आता है कि आदमी मालिक के प्यार-मोहब्बत के रास्ते पर चलता है तो उसे सिर कटवाना पड़ता है। सिर कटवाने का मतलब है कि अपनी खुदी को मिटा डालो। गुरमुखता से चलो और मनमुखता को बीच में आने ही न दो। आपका मन कभी भी हावी होता है तो उसके आगे हथियार न फेंको, क्योंकि मन बहुत तरह की चालें चलेगा। यह ऐसा सब्जबाग दिखाएगा कि आप खुश हैं, आपको बहुत कुछ मिला है, क्योंकि मन ने तो निंदा-बुराई की तरफ ही आपको सब्जबाग दिखाने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मन कभी यह नहीं दिखाता कि आप जीते-जी जिंदगी को नरक बना लेंगे और मरने के बाद नरक से बदतर जिंदगी आत्मा को भोगनी पड़ेगी। मन जब अपनी चालें चलता है तो बड़े-बड़े लोग भी चारों खाने चित्त हो जाते हैं। इसलिए अपने मन को मारना, मन से लड़ना ही कलियुग में सच्ची भक्ति है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को अपने अंदर आने वाले बुरे विचारों से लड़ना चाहिए और आप उन बुरे विचारों पर जीत हासिल करो, न कि आप बुरे विचारों के अनुसार चलने लग जाओ। अगर आप बुरे विचारों के अनुसार चलने लग गए तो मन की जीत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आपने बुरे विचारों को दबा लिया और गुरु, पीर-फकीर के अनुसार व आत्मिक विचारों के अनुसार आप चलने लग गए तो मन की हार हो जाती है। इसलिए यह आपके हाथ में है कि आप किन विचारों का साथ देते हैं। बेपरवाह जी ने भजन में फरमाया है कि ‘सिर है अमानत सतगुरु की’ कि मेरा जो वजूद है, वो मेरा रहबर, सतगुरु, मौला है। बस, इतनी बात जिसके दिमाग में आ गई वो जल्दी से फिसलता नहीं कि मेरा सतगुरु, मौला क्या कहता है, किन वचनों पर चलाता है, क्या करने के लिए प्रेरित करता है। जो लोग वचन सुनकर अमल करते हैं वो ही वचनों पर चल पाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2017 04:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>ताकत का अहंकार छोड़ मानवता के लिए एकजुट हों विश्व शक्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी चीन सागर में सैन्य अभियान करके चीन ने एक बार फिर वियतनाम, भारत, अमेरिका सहित कई देशों को चुनौती दी है। समुन्द्र में पहली बार बमबारी करके चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह घटना विश्व में युद्ध के बीज बोने के सामान है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/leave-the-ego-strength-to-humanity-unite-world-powers/article-546"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/handshake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दक्षिणी चीन सागर में सैन्य अभियान करके चीन ने एक बार फिर वियतनाम, भारत, अमेरिका सहित कई देशों को चुनौती दी है। समुन्द्र में पहली बार बमबारी करके चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह घटना विश्व में युद्ध के बीज बोने के सामान है। अमेरिका व अन्य देश चीन की सरगर्मियों पर संज्ञान ले रहे हैं। उधर रूस व अमेरिका के बीच राष्टÑपति चुनावों को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। विश्व की तीन महाशक्तियोंं अमेरिका, चीन व रूस का एक-दूसरे की खिलाफत करने का रूझान उस दौरान शुरू हुआ है, जब सीरिया व इराक में आईएसआईएस के खिलाफ लड़ी जा रही जंग एक निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है, पूर्वी अले΄पो में आतंकवादियों को भागना पड़ रहा है व आमजन को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सहमति जताई जा रही है। बेकफुट पर पहुंचे आईएस अपने अंत की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे जड़ से खत्म करने की आवश्यकता है। यदि इस वक्त अमेरिका व रूस एक दूसरे के खिलाफ डट जाते हैं, तब अमन-शांति बहाल करना मुश्किल हो जाएगा। जहां तक चीन का संबंध है, वह दोहरे मापदंड अपना रहा है। एक तरफ चीन भारत खिलाफ आतंकी मसूद अजहर का समर्थन कर रहा है दूसरी तरफ अमेरिका के सहयोगी दक्षिणी कोरिया को भी डरा रहा है। चीन ने दक्षिणी चीन सागर में दक्षिणी कोरिया के नजदीक बमबारी करके यह संदेश दिया है कि दक्षिणी कोरिया उसकी मार से बाहर नहीं है। इस तरह चीन सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है। चिंताजनक बात यह है कि सीरिया, इराक सहित आधी दर्जन देशों में जारी आतंकी हिंसा के बावजूद विश्व के तीन ताकतवर देश अपने-अपने स्वार्थों व गुटबाजी को मजबूत रखने का दांव खेल रहे हैं। युद्ध व आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए बनी अंतर्राष्टÑीय संस्था संयुक्त राष्टÑ पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। यू.एन.ओ. ताकतवर देशों की पिछल्लगू बनकर रह गई है। रूस, चीन व अमेरिका को नया पैंतरा चलने की बजाए उन लाखों शरणार्थियों की आंखों से बह रहे आंसूओं को देखने की जरूरत है जो हाड कंपाती ठंड के बीच खुले आसमां के नीचे जीवन यापन को मजबूर हैं। पहले व दूसरे विश्व युद्ध के निशान मानवता पर आज भी ज्यों के त्यों बरकरार हैं। चीन व पाकिस्तान जैसे देश ही आतंकियों को समर्थन कर उसे आगे बढ़ा रहे हैं। वह अपनी आर्थिकता व सैन्य ताकत के अहंकार को त्यागकर, इंसानियत के लिए आगे आएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Dec 2016 05:23:06 +0530</pubDate>
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