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                <title>चीन में नया नियम: टैक्स नहीं चुकाया तो नहीं छोड़ पाएंगे देश</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग (एजेंसी)। नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-major-tax-evaders-can-not-leave-country/article-7152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/tax.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग (एजेंसी)।</strong> नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा किया जाएगा। ये सभी विभाग इन बकायदारों पर नजर रखेंगे। ऐसे लोगों को देश छोड़ने की इजाजत भी नहीं होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शुरू में 10 लाख से ज्यादा टैक्स के बकाएदारों पर होगी कार्रवाई</h2>
<p style="text-align:justify;">नए नियम के दायरे में शुरुआत में ऐसे कारोबारी, कंपनियां और नौकरीपेशा लोग आएंगे, जिन पर 1 लाख युआन (10.26 लाख भारतीय रुपये) का टैक्स बाकी है। ऐसे बकायदारों की सभी जानकारी मसलन आई कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर और पासपोर्ट डिटेल्स को टैक्स अथॉरिटी अपने ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में डाल देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विदेशी कर्मचारियों और विदेश में काम कर रहे चीनी नागरिक भी दायरे में</h3>
<p style="text-align:justify;">नए कानून के तहत अगर कोई विदेशी नागरिक अपने कारोबार या फिर नौकरी के सिलसिले में चीन में 183 दिन से ज्यादा ठहरता है तो वो उसकी पूरी कमाई टैक्स के दायरे में होगी। हालांकि इस प्रावधान पर अमेरिका और हॉन्गकॉन्ग ने विरोध जताया है। इनके अलावा विदेश में नौकरी कर रहे चीनी नागरिकों को भी चीन में इनकम टैक्स देना होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चीन में सिर्फ 2 फीसदी लोग देते हैं टैक्स</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन की आबादी 138 करोड़ है। इनमें से 2.8 करोड़ लोग ही टैक्स देते हैं। अब टैक्स डिपार्टमेंट सरकारी आय बढ़ाने के लिए टैक्स दरें बढ़ाने की बजाय टैक्स कलेक्शन बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 09:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>गांगुली और सचिन को पीछे छोड़ सकते हैं रोहित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। हिटमैन के नाम से मशहूर और वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वनडे सीरीज़ में सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ सकते हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में लंबे लंबे छक्के मारने के महारथी रोहित के पास सर्वाधिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/rohit-can-leave-behind-ganguly-and-sachin/article-6310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/rohit-can-leave-behind-ganguly-and-sachin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली (एजेंसी)।</p>
<p style="text-align:justify;">हिटमैन के नाम से मशहूर और वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक का विश्व रिकार्ड अपने नाम रखने वाले भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा वेस्टइंडीज़ के खिलाफ वनडे सीरीज़ में सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ सकते हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में लंबे लंबे छक्के मारने के महारथी रोहित के पास सर्वाधिक छक्के उड़ाने के मामले में गांगुली और सचिन को पीछे छोड़ने का मौका रहेगा। रोहित ने अब तक 188 मैचों में 186 छक्के मारे हैं जबकि गांगुली ने 311 मैचों में 190 और सचिन ने 463 मैचों में 195 छक्के मारे हैं। रोहित को सचिन को पीछे छोड़ने के लिए 10 छक्कों की जरुरत है। भारत ने वनडे में सर्वाधिक छक्के मारने का रिकार्ड पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम है जिन्होंने 327 मैचों में 217 छक्के मारे हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 17 Oct 2018 13:20:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>छुट्टी का बना रहे हैं शेड्यूल तो ट्रेन जाओ भूल</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। स्कूलों का ग्रीष्म अवकाश एक जून से शुरू हो रहा है। ऐसे में बच्चों एवं उनके अभिभावकों का गर्मियों की छुट्टियों में सैर सपाटे के प्रति रूझान बढ़ जाता है। अभिभावक भी बच्चों को तरोताजा करने के लिए किसी पवर्तिय प्रर्यटक स्थल या फिर धार्मिक स्थलों के दर्शन को ले जाना चाहते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/do-not-forget-to-leave-the-schedule-if-the-vacation-is-being-made/article-3864"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/train-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। </strong>स्कूलों का ग्रीष्म अवकाश एक जून से शुरू हो रहा है। ऐसे में बच्चों एवं उनके अभिभावकों का गर्मियों की छुट्टियों में सैर सपाटे के प्रति रूझान बढ़ जाता है। अभिभावक भी बच्चों को तरोताजा करने के लिए किसी पवर्तिय प्रर्यटक स्थल या फिर धार्मिक स्थलों के दर्शन को ले जाना चाहते हैं। लेकिन इस बार ट्रेन में सफर कर सैर सपाटा करने के इच्छुक लोगों को रेलगाड़ी ने निराश कर दिया हैं, क्योंकि हिल स्टेशन तक जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में महीनों पहले ही सभी सीटें बुक हो चुकी हैं। बुकिंग में फूल चल रही इन ट्रेनों में अब ताजा टूर प्रोग्राम बनाने वाले अभिभावकों को हवाई एवं सड़क का महंगा सफर करना पड़ेगा। जो लोग रेलगाड़ी से अपने पसंद के स्थानों पर पहुंचना चाहते हैं उनकी परेशानी इस बार कुछ अधिक ही बढ़ी हुई नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भूवनेश्वर को जाने वाली 22812, 22824 राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में प्रतीक्षा सूची 22 जून तक 300 से ऊपर है। इसी प्रकार पुरी को जाने वाली 12802 पुरूषोत्तम एक्सप्रेस ट्रेन, 12816 नंदन कामन एक्सप्रेस, 12876 निलांचल एक्सप्रेस में भी 19 जून तक प्रतीक्षा सूची ढाई सौ से अधिक दिखाई दे रही है। उज्जैन को जाने वाली 14310 उज्जैनी एक्सप्रेस की प्रतीक्षा सूची भी 142 से ऊपर है। पुरी को जाने वाली 18478 कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की प्रतीक्षा सूची भी 200 से अधिक है। हिसार से जम्मूतवी को जाने वाली 19027 विवेक एक्सप्रेस सप्ताह में एक दिन रविवार को चलती है। इस गाड़ी में तो प्रतीक्षा सूची इतनी लम्बी है कि उसमें स्थान पाना असंभव है। 19415 अहमदाबाद कटरा एक्सप्रेस साप्ताहिक गाड़ी है, इसमें भी प्रतीक्षा सूची 200 से अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश के उना को जाने वाली उना हिमाचल जन शताब्दी में भी प्रतीक्षा सूची काफी लम्बी है। पर्वतीय क्षेत्र में जाने वाली 14041 मंसूरी एक्स्रपेस, 12017 देहरादून शताब्दी, 12055 जन शताब्दी एक्सप्रेस में भी 25 जून तक कोई स्थान नहीं है। प्रतीक्षा सूची इतनी लम्बी है कि यदि अब कोई टिकट लेता है तो पूरा जून माह समाप्त होने के बाद भी सीट मिलना मुश्किल है। विवेक एक्सप्रेस को छोड़कर सभी गाड़ियां दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन व नई दिल्ली से ही चलती हैं। इसके अलावा इलाहाबाद को जाने वाली 12418 प्रयाग राज एक्सप्रेस, 14218 उचाहार एक्सप्रेस में भी प्रतीक्षा सूची काफी लम्बी है। दिल्ली से जम्मू कटरा, पटानकोट आदि को जाने वाली रेलगाड़ियों में भी प्रतीक्षा सूची काफी लम्बी है। इस बार अन्य सालों की तुलना में गर्मी का रूप प्रचंड है। इसलिए भी ठंडे इलाकों की तरफ जाने वाली रेलगाड़ियों में प्रतीक्षा सूची काफी लम्बी हो गई हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अगले 10 दिन तक नहीं राहत की उम्मीद</h3>
<p style="text-align:justify;">मौसम के जानकारों का मानना है कि अगले दस दिनों तक किसी प्रकार की राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती। अभिभावकों की सोच शायद यह है कि मानसून आने तक वे अपने लाडलों को पहाड़ी क्षेत्रों में घुमा लाएं, ताकि गर्मी का अधिकांश दौर गुजर जाए और जब लौटे तब बारिश की रिमझिम फुहार किसी हद तक लगाम लगा चुकी होगी। लेकिन ऐसा फिलहाल रेल यात्रा करने वालों के लिए केवल स्वप्र बन गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हवाई सफर भी 30 से 45 फीसद तक महंगा</h4>
<p style="text-align:justify;">ग्रीष्म अवकाश पर छुट्टी का प्रोग्राम बनाने वाले अभिभावकों की ट्रेन से उम्मीद छूट गई तो बाई एयर हिल स्टेशनों तक जाने का प्रोग्राम बनने लगा। लेकिन पर्यटकों की अधिक तादाद की वजह से हवाई सफर भी काफी महंगा हो गया। इस बारे में ट्रेवल एजेंसी संचालक सुनील चावला का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए हवाई यात्रा के लिए जो राहत एक पखवाड़े पहले तक थी, उसकी तुलना में टिकट अब 30 से 45 प्रतिशत महंगी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा के लिए भी लोगों ने टिकट की बुकिंग शुरू में सस्ती दरों पर करवाई थी, लेकिन जैसे जैसे समय निकट आता जा रहा हैं, ये हवाई टिकटें भी महंगी होती जा रही हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 May 2018 10:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फिल्म व समाचार को अलग ही रहने दें</title>
                                    <description><![CDATA[समाचार व फिल्म में अंतर होता है। समाचार सच्चाई, तथ्यों व सबूतों से संबंधित होते हैं। इसके विपरीत फिल्म में काल्पिनक कहानी होती है जो मनोरंजन से भरपूर होती है। समाचार शीर्षक पढ़ते ही समझ आती है लेकिन फिल्म में दर्शक की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए सच्चाई को छुपाया जाता है, फिर प्रकट किया जाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/leave-film-and-news-aside/article-3514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/channel.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">समाचार व फिल्म में अंतर होता है। समाचार सच्चाई, तथ्यों व सबूतों से संबंधित होते हैं। इसके विपरीत फिल्म में काल्पिनक कहानी होती है जो मनोरंजन से भरपूर होती है। समाचार शीर्षक पढ़ते ही समझ आती है लेकिन फिल्म में दर्शक की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए सच्चाई को छुपाया जाता है, फिर प्रकट किया जाता है। आज समाचार युग में एक नया रूझान चल पड़ा है जिसे देखकर पता ही नहीं लगता कि व्यक्ति समाचार देख रहा है या फिल्म। जिस प्रकार फिल्म का अंत अचानक हैरान करने वाला होता है। फिल्म की कहानी अंत में बिल्कुल बदल जाती है। उसी प्रकार आजकल समाचार देखने को मिल रहे हैं, जिनका अंत किसी फिल्म से कम नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार के अधिकतर कहानीनुमा समाचार सनसनीखेज होते हैं। दर्शक टीवी से जुड़कर बैठ जाते हैं व समाचार की बात को समझने का प्रयास करते दर्शक उस वक्त हैरान हो जाते हैं जब समाचार पेश करने वाला व्यक्ति यह कहता कि यह समाचार झूठा था और इस प्रकार यकीन नहीं किया जा सकता। यह सरासर समाचार के सिद्धांतों व दर्शकों की भावना से खिलवाड़ है। इस प्रकार के अनगिनत उदाहरण हैं। ताजा उदाहरण रांची की एक मुस्लिम योग अध्यापिका का है, जिसके बारे में कहा गया कि मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने उसके खिलाफ फतवा जारी किया है व धर्म बदलने की धमकी दी है। यह भी कहा गया है कि अध्यापिका के घर शरारती तत्वों ने पथराव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला सुनकर प्रदेश के डीजीपी अध्यापिका के घर गए। अध्यापिका के पिता ने अधिकारियों को बताया कि यह सारा मामला झूठा है। कोई फतवा जारी नहीं हुआ। दूसरी दिन समाचार आता है कि वायरल हुई स्टोरी गलत थी लेकिन इस अफवाह को मीडिया में समाचार बनाकर पेश किया गया था। समाचार के कई विशेषज्ञ तो वायरल वस्तुओं का विश्लेषण भी करते हैं। विश्लेषण के बाद कोई ना कोई परिणाम आता है लेकिन कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कि यह तो सारा झूठ था तो परिणाम क्या होगा। दरअसल समाचार सिद्धांतों पर आधारित होता है, जिसके लिए मेहनत, लगन, व समर्पण से तथ्यों पर आधारित सच्चाई की तलाश की जाती है। लेकिन आजकल सबसे आगे निकलने की होड़ में समाचारों को मसाला लगाकर पेश किया जाता है। जिस प्रकार सियार को शेर की खाल पहनाकर शेर नहीं बनाया जा सकता उसी तरह अफवाहों को समाचार का रंग देकर समाचार नहीं बनाया जा सकता। समाचार अपने द्वारा नहीं बनाए जाते बल्कि पत्रकारों द्वारा तथ्यों को आधार बनाकर पेश किए जाते हैं। फिर ही दर्शकों से न्याय होगा, समाचार को समाचार ही रहने दिया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/leave-film-and-news-aside/article-3514</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Nov 2017 03:36:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेल कर्मियों ने छोड़ी ड्यूटी</title>
                                    <description><![CDATA[वेतन विसंगति दूर करने के लिए मैस का बहिष्कार जेल प्रहरियों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध जयपुर/हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान की तमाम जेलों की सुरक्षा में तैनात जेलकर्मियों ने वेतन विसंगति समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का रुख इख्तियार कर लिया है। मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए सभी जेलों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/prison-personnel-leave-duty/article-1476"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/h03.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">वेतन विसंगति दूर करने के लिए मैस का बहिष्कार</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जेल प्रहरियों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर/हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान की तमाम जेलों की सुरक्षा में तैनात जेलकर्मियों ने वेतन विसंगति समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का रुख इख्तियार कर लिया है। मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए सभी जेलों के जेलकर्मी बुधवार को विरोध जताने के लिए जेल की चारदीवारी से बाहर आ गए। इस दौरान जेलकर्मियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और विरोध में जमकर नारेबाजी की। आंदोलन के इस चरण में जेलकर्मियों ने जेलों में कार्य और मैस का बहिष्कार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही बाहों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। इस तरह का विरोध अगले 15 दिनों तक चलेगा। जेलकर्मियों का कहना है कि अगर फिर भी वेतन विसंगतयों को दूर नहीं किया तो अनिश्चित कालीन कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वेतन विसंगति को दूर करने को लेकर सरकार और आला अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। हनुमानगढ़ में मैस का बहिष्कार करने वालों में मोहर सिंह, सुमन कुमारी, विनोद कुमार, गीता, सुनीता, संतोष मील आदि शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/prison-personnel-leave-duty/article-1476</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2017 07:43:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पार्किंग के वक्त कारों के शीशे थोड़े खुले छोड़ दें</title>
                                    <description><![CDATA[पटौदी में 5 साल की दो जुड़वां बच्चियां एक खड़ी कार में दम घुटने से मौत के आगोश में पहुंच गई। अभी 20 दिन पहले अमेरिका के टेक्सास में भी ऐसा ही हुआ, जब एक शॉपिंग मॉल के बाहर खड़ी कार में दो छोटे बच्चे दम घुटने से दम तोड़ गए और उनकी मां जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/leave-the-car-mirror-open-at-the-time-of-parking/article-1271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/car.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पटौदी में 5 साल की दो जुड़वां बच्चियां एक खड़ी कार में दम घुटने से मौत के आगोश में पहुंच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी 20 दिन पहले अमेरिका के टेक्सास में भी ऐसा ही हुआ, जब एक शॉपिंग मॉल के बाहर खड़ी कार में दो छोटे बच्चे दम घुटने से दम तोड़ गए और उनकी मां जो खरीददारी कर रही थी, को पता भी नहीं चला।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के किसी न किसी शहर में आए माह कोई न कोई ऐसी दु:खद घटना सामने आ ही जाती है। इस तरह की दुर्घटना का शिकार ज्यादातर 10 वर्ष से छोटी आयु के बच्चे हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">या बहुत छोटे बच्चे जोकि माता-पिता की लापरवाही से गाड़ी में रह जाते हैं। खेलने-कूदने की आयु के बच्चे थोड़े चंचल स्वभाव के होते हैं, जिन्हें व्हीकल पर बैठना, उनमें चढ़ना, हॉर्न बजाना, स्टेरिंग घुमाना जैसे खेल बहुत लुभाते हैं। ये खेल भी बच्चे अक्सर माता-पिता या बड़ों की आंख चुराकर खेलते हैं। बस यही इनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल गर्मी का मौसम है, तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। ऐसे में किसी व्हीकल में बंद हो जाने पर बहुत जल्द दम घुटने लगता है। कारों की बनावट भी ऐसी बना दी गई है कि उनमें बंद बच्चे की चीख-पुकार भी बाहर सुनाई नहीं पड़ती। कारों में दम घुटकर मरने वाले बच्चों की बढ़ रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मां-बाप, कार-कंपनियों एवं सरकार को शीघ्र कोई उपाय खोजना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले तो समस्या का हल कंपनीज करें। वह कारों में ऐसी व्यवस्था कर दें कि उनमें किसी का दम नहीं घुट पाए और अंदर बंद होने पर भी पीड़ित को ताजी हवा मिलती रहे। जब तक कार कंपनीज कोई उपाय नहीं करती, तब बड़ों को चाहिए कि वह अपने व्हीकल को खड़ा करते वक्त खिड़की के शीशे एक-आध सेंटीमीटर खुला छोड़ दें।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे जहां वाहन चोरी होने का भी डर नहीं रहेगा, वहीं भूलवश यदि उनमें कोई छोटा बच्चा फंस भी जाए, तब उसका दम नहीं घुटेगा और उसकी रोने व चीखने की आवाज भी बाहर सुनाई पड़ सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को चाहिए कि वह इस विषय में अभिभावकों एवं कार निर्माता कंपनियों के लिए निर्देश जारी करे कि वह अपने वाहनों को इस तरह रखें कि कोई दुर्घटना का शिकार नहीं हो। चूंकि कारों में बच्चों के दम घुट जाने की समस्या ज्यादा बड़ी नहीं है, अत: माता-पिता एवं कार निर्माता कम्पनीज जरा-सी सावधानी व उपायों से इस विपत्ति को टाल सकती हैं, जिसे कि हर संभव बहुत जल्द टाला जाए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 22:45:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेज में पढ़ने वाली विवाहिता को मिलेगा 45 दिन का मातृत्व अवकाश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दी मंजूरी, हजारों विवाहिताओं को मिलेगा फायदा सिलेबस पूरा करने के लिए छुट्टियों के बाद लगानी होंगी एक्सट्रा क्लास चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली विवाहिताओं को अब 45 दिनों तक का मातृत्व अवकाश मिलेगा, ताकि वे बिना किसी रूकावट या बाधा के अपनी शिक्षा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/45-days-maternity-leave-will-be-available-for-married-women/article-1193"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/woman.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दी मंजूरी, हजारों विवाहिताओं को मिलेगा फायदा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सिलेबस पूरा करने के लिए छुट्टियों के बाद लगानी होंगी एक्सट्रा क्लास</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली विवाहिताओं को अब 45 दिनों तक का मातृत्व अवकाश मिलेगा, ताकि वे बिना किसी रूकावट या बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस संबंध में मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिशा-निदेर्शों के अनुसार महिला विद्यार्थी वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र के प्रस्तुत करने पर संबंधित विभागाध्यक्ष की पूर्व अनुमति से, एक बार में निरंतर 45 दिन तक का मातृत्व अवकाश लेने की पात्र होंगी। शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने बताया कि महिला विद्यार्थियों को 45 दिनों का अवकाश इस नियम के साथ दिया जाएगा कि उसे अपनी कक्षा से संबंधित सिलेबस पूरा करने के लिए वह अतिरिक्त कक्षाएं लगानी होंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आवश्यता अनुसार एक पूरा सेमेस्टर छोड़ सकती हैं महिला छात्रा</h3>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने बताया कि हालांकि, यदि आवश्यकता हो, तो विद्यार्थी एक पूरा सेमेस्टर छोड़ सकता है, लेकिन अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में भाग लेने के बाद उसे छोड़े गए उस सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करने होगी और सम तथा विषम सेमेस्टर नीति के अनुसार छोड़ी गई सेमेस्टर परीक्षाओं में भाग लेना होगा। ऐसे मामलों में, यदि वह छोड़े गए सेमेस्टर शुल्क का भुगतान पहले ही कर चुका है तो उसे उस सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करने के लिए दोबारा दाखिला शुल्क और पूरे सेमेस्टर शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2017 09:25:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ताकत का अहंकार छोड़ मानवता के लिए एकजुट हों विश्व शक्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी चीन सागर में सैन्य अभियान करके चीन ने एक बार फिर वियतनाम, भारत, अमेरिका सहित कई देशों को चुनौती दी है। समुन्द्र में पहली बार बमबारी करके चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह घटना विश्व में युद्ध के बीज बोने के सामान है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/leave-the-ego-strength-to-humanity-unite-world-powers/article-546"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/handshake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दक्षिणी चीन सागर में सैन्य अभियान करके चीन ने एक बार फिर वियतनाम, भारत, अमेरिका सहित कई देशों को चुनौती दी है। समुन्द्र में पहली बार बमबारी करके चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह घटना विश्व में युद्ध के बीज बोने के सामान है। अमेरिका व अन्य देश चीन की सरगर्मियों पर संज्ञान ले रहे हैं। उधर रूस व अमेरिका के बीच राष्टÑपति चुनावों को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। विश्व की तीन महाशक्तियोंं अमेरिका, चीन व रूस का एक-दूसरे की खिलाफत करने का रूझान उस दौरान शुरू हुआ है, जब सीरिया व इराक में आईएसआईएस के खिलाफ लड़ी जा रही जंग एक निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है, पूर्वी अले΄पो में आतंकवादियों को भागना पड़ रहा है व आमजन को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सहमति जताई जा रही है। बेकफुट पर पहुंचे आईएस अपने अंत की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे जड़ से खत्म करने की आवश्यकता है। यदि इस वक्त अमेरिका व रूस एक दूसरे के खिलाफ डट जाते हैं, तब अमन-शांति बहाल करना मुश्किल हो जाएगा। जहां तक चीन का संबंध है, वह दोहरे मापदंड अपना रहा है। एक तरफ चीन भारत खिलाफ आतंकी मसूद अजहर का समर्थन कर रहा है दूसरी तरफ अमेरिका के सहयोगी दक्षिणी कोरिया को भी डरा रहा है। चीन ने दक्षिणी चीन सागर में दक्षिणी कोरिया के नजदीक बमबारी करके यह संदेश दिया है कि दक्षिणी कोरिया उसकी मार से बाहर नहीं है। इस तरह चीन सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है। चिंताजनक बात यह है कि सीरिया, इराक सहित आधी दर्जन देशों में जारी आतंकी हिंसा के बावजूद विश्व के तीन ताकतवर देश अपने-अपने स्वार्थों व गुटबाजी को मजबूत रखने का दांव खेल रहे हैं। युद्ध व आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए बनी अंतर्राष्टÑीय संस्था संयुक्त राष्टÑ पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। यू.एन.ओ. ताकतवर देशों की पिछल्लगू बनकर रह गई है। रूस, चीन व अमेरिका को नया पैंतरा चलने की बजाए उन लाखों शरणार्थियों की आंखों से बह रहे आंसूओं को देखने की जरूरत है जो हाड कंपाती ठंड के बीच खुले आसमां के नीचे जीवन यापन को मजबूर हैं। पहले व दूसरे विश्व युद्ध के निशान मानवता पर आज भी ज्यों के त्यों बरकरार हैं। चीन व पाकिस्तान जैसे देश ही आतंकियों को समर्थन कर उसे आगे बढ़ा रहे हैं। वह अपनी आर्थिकता व सैन्य ताकत के अहंकार को त्यागकर, इंसानियत के लिए आगे आएं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Dec 2016 05:23:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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