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                <title>पराली को जमीन में नष्ट कर मुनाफा कमा रहा किसान जसप्रीत</title>
                                    <description><![CDATA[लुधियाना (राम गोपाल रायकोटी)। गांव गालिब खुर्द के जंमपल जसप्रीत सिंह गिल का नाम उन प्रगतिशील किसानों में आता है, जिन्होंने गेहूं की बिजाई हैपी सीडर से कर वातावरण को संभालने के लिए कदम उठाए हैं। यह किसान धान की पराली को न जलाने के अलावा गेहूं की बिजाई हैपी सीडर से कर अपने समय, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/jaspreet-a-farmer-earning-profit-after-destroying-parli/article-6291"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/jaspreet-a-farmer-earning-profit-after-destroying-parli-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना (राम गोपाल रायकोटी)। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">गांव गालिब खुर्द के जंमपल जसप्रीत सिंह गिल का नाम उन प्रगतिशील किसानों में आता है, जिन्होंने गेहूं की बिजाई हैपी सीडर से कर वातावरण को संभालने के लिए कदम उठाए हैं। यह किसान धान की पराली को न जलाने के अलावा गेहूं की बिजाई हैपी सीडर से कर अपने समय, तेल की बचत तो करता ही है साथ ही अधिक लाभ भी कमा रहा है। मैट्रिक पास जसप्रीत सिंह ने आधुनिक कृषि अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत नहीं किया। वह क्षेत्रवासियों के लिए वरदान साबित हुआ है। जसप्रीत सिंह के अनुसार उसका वातावरण के साथ अधिक लगाव होने के कारण धान की पराली को जलाने को मन नहीं करता, जिस कारण उसने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के मशीनरी विभाग में संपर्क किया व सलाह करने के बाद हैपी सीडर का प्रयोग किया। इससे गेहूं की फसल का झाड़ भी बढ़ा है। इसी कारण वह पिछले कुछ समय से गेहूं की सीधी बिजाई कर रहा है व लोगों को प्रेरित कर रहा है। उसके मुताबिक हैपी सीडर से बिजाई की फसल का झाड़ भी ज्यादा होता है। इससे अच्छी क्वालिटी के साथ-साथ दाने भी मोटे होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हैपी सीडर के प्रयोग से संतुष्ट होकर इस साल कुछ अन्य किसानों के साथ मिलकर एक हैपी सीडर मशीन खरीदी है। जसप्रीत सिंह संत भगवान पूरी किसान क्लब गालिब खुर्द (रजि.) का अध्यक्ष है, वह पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के किसान क्लब व सपना क्लब का भी सदस्य हैै। अपनी कुशलता के कारण वह लोगों को फसल विभिन्नता के लिए भी प्रेरित करता है और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए एक मिसाल है। वह किसानों को सलाह देता है कि हैपीसीडर प्रयोग के साथ गेहूं की सीधी बिजाई आसानी से की जा सकती है। उसके मुताबिक पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित स्ट्रा मैनेजमैट सिस्टम व रीपर दोनों का प्रयोग के बाद हैपी सीडर के साथ गेहूं की बिजाई की जा सकती है लेकिन इसका प्रयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञों के साथ सलाह जरूर कर लेनी चाहिए, ताकि किसान इस तकनीक का भरपूर लाभ ले सके। उसका मानना है कि किसानों को आधुनिक खेती को अपनाना चाहिए। वातावरण को संभालने के लिए व सरकार के प्रयास को पूरा करने के लिए पराली को आग लगाने से रोका गया तो आगामी पीढ़ी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:33:04 +0530</pubDate>
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