ट्रेन दुर्घटना में मां हथिनी की दर्दनाक मौत..घायल बच्ची चमत्कारिक ढंग से बची, जानिए डॉक्टर ने क्या कहा…

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Mathura News: ट्रेन दुर्घटना में मां हथिनी की दर्दनाक मौत..घायल बच्ची चमत्कारिक ढंग से बची, जानिए डॉक्टर ने क्या कहा...

मथुर (सच कहूँ न्यूज)। Train Accident: उत्तराखण्ड के कारबेट नेशनल पार्क के पास रेल की टक्कर से घायल हुई हथिनी की बच्ची का इलाज एलीफैन्ट कन्जरवेशन एवं केयर सेन्टर चुरमुरा, मथुरा के अस्पताल में किया जा रहा है। यह अस्पताल हिन्दुस्तान का पहला हाथी चिकित्सा करने वाला अस्पताल है। वाइल्ड लाइफ एसओएस की वेटेरिनरी सेवाओं के उप निदेशक डॉ़ इलियाराजा एस ने बताया कि नौ माह की इस हथिनी का नाम बानी दिया गया है। Mathura News

इस हथिनी के चोट लगे स्थान की सफाई एवं मालिश की जा रही है तथा चोट से घाव बने स्थान की रोज सफाई के साथ विशेष चिकित्सा की जा रही है। जोड़ो की चिकित्सा लेजर चिकित्सा प्रणाली तथा फिजियोथिरैपी विधि से की जा रही है।उनका कहना था कि यह अच्छी बात है कि इस हथिनी के आगे के दोनो पैर ठीक काम कर रहे हैं।पहले अनुमान था कि उसके स्पाइनल इंजरी भी है किंतु जिस प्रकार से उसकी पूंछ हिल रही है तथा जिस प्रकार से इसका शरीर चल रहा है तथा खाना भी पचा रही है उससे लगता है कि उसे स्पाइनल इंजरी नही है तथा उसका जो भी इलाज किया जा रहा है उससे उसे फायदा हो रहा है। Mathura News

डायरेक्टर कन्जरवेशन एवं केयर प्रोजेक्ट्स वाइल्ड लाइफ एसओएस मथुरा बैजू राज एमवी ने बताया कि लगभग दो माह पहले उत्तराखण्ड के कार्बेट नेशनल पार्क के पास एलीवेटेड रेल मार्ग को पार करते समय बानी और उसकी मां हथिनी की रेल से टक्कर हो गई थी जिसमें उसकी मां की मृत्यु हो गई थी पर बानी जमीन से ऊपर उठे रेल मार्ग से नीचे एक गडढे से स्थान पर गिर गई थी। उस समय इसका इलाज उत्तराखण्ड के पशु चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा था किंतु सुधार न होने पर हाथी संरक्षण एवं सुश्रूखा केन्द्र मथुरा को सूचना दी गई थी।

यहां से चिकित्सकों की टीम वहां गई थी किंतु उस समय बानी मथुरा लाने की स्थिति में न थी तथा यहां के चिकित्सकों ने इलाज करने के बाद जब यह पाया कि अब इसे मथुरा ले जाया जा सकता है तो वे उसे लेकर लगभग एक सप्ताह पूर्व मथुरा के हाथी अस्पताल में ले आए जिसका संचालन एलीफैन्ट कन्जरवेशन एवं केयर सेन्टर द्वारा ही किया जाता है। बैजू राज के अनुसार रेल दुर्घटनाओं से होने वाली हाथियों की मौत को रोका जा सकता है किंतु इस दिशा में अभी तक कोई कारगर प्रयास नही किया गया। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार 2010 से 2020 के बीच रेल दुर्घटना से 200 हाथियों की मौत हो चुकी है। Mathura News

उन्होंने बताया हाथियों की इस प्रकार की मौत को वाइल्ड लाइफ एसओएस के जनक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने गंभीरता से लिया और इसे रोकने के लिए एक पेटीशन वाइल्ड लाइफ एसओएस की वेबसाइट पर डाल दिया है इस समस्या के निदान में अन्य लोगों के जुड़ने की भी संभावना है। Mathura News

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