प्रभु-परमात्मा के प्यार में छुपी हैं बेइंतहा खुशियां

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Anmol Vachan

सरसा। मालिक के प्यार में एक अनोखा नशा है, उसकी मोहब्बत में बेइंतहा खुशियां हैं। जिनके अच्छे भाग्य हैं, अच्छे कर्म हैं या अपने भाग्य को जो अच्छा बना लिया करते हैं, मालिक का प्यार-मोहब्बत उन्हें मूसलाधार बरसता हुआ महसूस होता है और वह तमाम खुशियां दे जाता है। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को अनमोल वचनों से लाभांवित करते हुए फरमाया कि मालिक का रहमो करम हर समय मूसलाधार बरस रहा है। ऐसा कोई समय नहीं होता जब उसका रहमो करम न बरस रहा हो। जबरदस्त बरस रहा है, हर पल बरस रहा है और कोई जगह ऐसी नहीं जहां वो न बरस रहा हो। पर जिनके भाग्य अच्छे हैं, कर्मों वाले, नसीबों वाले जीव, उस मालिक की कृपा दृष्टि को पाते हैं।

आप जी ने फरमाया कि अगर आप मालिक की तमाम खुशियां हासिल करना चाहते हैं, उसकी दया-मेहर, रहमत के काबिल बनना चाहते हैं तो सुमिरन करो, अपने अंत:करण को मालिक के लिए तैयार करो। जो भी बुरी आदते हैं, जो भी गुनाह आपसे हो चुके हैं, सुमिरन और सेवा के द्वारा उनका खात्मा हो सकता है और आप मालिक की दया-मेहर के काबिल बन सकते हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम कभी किसी का बाहरी दिखावा नहीं देखता।

जिनकी भावना शुद्ध है, चाहे वो गरीब है या सारी दुनिया का राजा है उसको ही मालिक मिला करते हैं। गरीब, आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों ने परमात्मा को पाया तो राजा-महाराज भी मालिक के भक्त कहलाए। इससे साफ जाहिर होता है कि मालिक किसी भी तरह के दिखावे से खुश नहीं होता। वो उनको मिलता है जिनकी भावना शुद्ध होती है। जो मालिक के लिए वैराग्य से तड़पा करते हैं। उनको वो दर्श-दीदार से जरूर नवाजा करता है। आप जी ने फरमाया कि जब आदमी आपनी औकात भूल जाता है, जब इन्सान सब कुछ भूल जाता है, फिर उसको मालिक का दर्श-दीदार, दया-मेहर, रहमत का अहसास नहीं होता। वरना कदम-कदम पर उसका रहमो करम इतना बरसता है कि आदमी अंदर-बाहर से मालामाल होता है, खुशियों से लवरेज हो जाता है।

 

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