”यह नगर नाम वालों का नया रिकॉर्ड कायम करेगा।’’

Shah Satnam Ji
Shah Satnam Singh Ji Maharaj

21 जनवरी 1968, परम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपनी रहमत बरसाते हुए गांव कोटली खुर्द (प्रेम कोटली) तहसील तलवंडी साबो जिला बठिंडा में सत्संग फरमाया। प्यारे सतगुरू जी ने ऊंचे-ऊंचे रेत के टीलों पर बसे इस गांव पर रहमत की बरसात की। पूजनीय परम पिता जी ने स्टेज पर विराजमान होते ही फरमाया, ‘‘साध-संगत की गिनती व नगर के प्रेम को देखकर अनुभव होता है कि यह नगर नाम वालों का नया रिकॉर्ड कायम करेगा।’’ फिर पंडित धनीराम नसीबपुरा वाले से बातचीत करते हुए प्यारे सतगुरू जी ने फरमाया, ‘‘धनी राम, ऐसा लगता है कि गांव कोटली वाले आपके गांव के रिकॉर्ड को पार कर लेंगे’’। Shah Satnam Ji

इस पर धनी राम ने खुश होकर कहा, ‘‘पिता जी! हम बेहद खुश होेंगे अगर कोटली में नए नाम शब्द लेने वालों की संख्या हमारे गांव से अधिक होगी।’’ परम पिता जी ने उस समय दिन रात दो सत्संग करने उपरांत नाम शब्द की अनमोल दात नाम अभिलाषी जीवों को प्रदान की। प्यारे मुर्शिद जी की ऐसी मेहर हुई कि इस छोटे से नगर में पहले सत्संग में ही 629 जीवों ने नाम की अनमोल दात प्राप्त की। इस खुशी में पूज्य परम पिता जी ने अपनी मौज में आकर रात के सत्संग में गांव का नाम कोटली खुर्द से बदलकर ‘प्रेम कोटली’ रख दिया। प्यारे सतगुरू जी ने फरमाया, ‘‘भाई आपका भवसागर से पार हो गया प्रेम कोटली सारा, गुरू के साथ तार जुड़ गई।’’

सत्संग की समाप्ति के बाद पूजनीय परम पिता जी ने समूह सेवादारों को आराम करने वाले घर में बुलाया व अपनी रहमत भरा प्रसाद प्रदान किया। परोपकारी दातार जी ने अपनी मौज में आकर वचन फरमाए, ‘‘आपके गांव का पे्रम देखकर हमारा दिल तो यहां से जाने का नहीं करता।’’ प्रेम कोटली में हुए चौथे सत्संग में पूजनीय परम पिता जी ने अपने मधुर वचनों की बरसात करते फरमाया, ‘‘भाई! यह गांव प्रेम कोटली, प्रेम की पोटली, प्रेम की कोठड़ी है।’’ इस गांव का प्रेम काबिले तारीफ है। इनके प्रेम के आगे तो भाई! सूरज देवता भी हाथ बांधकर खड़ा हो गया है। Shah Satnam Ji

उस समय रबी की फसल गेहूं, चने, जौ, सरसों आदि खलिहानों में रखी हुई थी। साध-संगत ने पूरे गांव के आसपास व जिस मार्ग पर प्यारे गुरू जी का आगमन होना था, उस मार्ग पर पानी का इतना अधिक छिड़काव कर दिया कि रोड पर रेत का नामों निशान तक दिखाई नहीं दे रहा था।

जब मालिक के साथ ही तार जुड़ गई तो पीछे क्या रह गया | Shah Satnam Ji

17 जून 1967 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव केले बांदर (आजकल नसीबपुरा) जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के लिए पधारे। पूरा गांव सत्संग की खुशी में फूले नहीं समा रहा था। इस गांव में उस समय 317 व्यक्तियों को आप जी ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। साध-संगत के प्रेम व नाम शब्द लेने वालों का उत्साह देखकर पूजनीय परम पिता जी बेअंत खुश हुए व वचन फरमाए ‘‘बेटा, आपके गांव का पहला नंबर है।’’

परम पिता जी ने गांव के बारे में वचन फरमाए, ‘‘बेटा, यह तो नसीबों वाला नगर है।’’ परम पिता जी ने सत्संग में चल रही कव्वाली में एक और तुक जोड़ दी-‘‘पिंड तर गिया नसीबपुरा सारा, गुरू दे नाल तार जोड़ के।’’ एक प्रेमी भाई ने परम पिता जी के आगे बेनती की कि, ‘‘पिता जी’’ हमारी प्रेम रूपी तार ही आप जी के चरणों के साथ हमेशा जुड़ी रहे तब परम पिता जी फरमाया, ‘‘बेटा। आप तो सबकुछ पा गए जब तार ही मालिक से जुड़ गई तो पीछे क्या रह गया।’’ यह वचन सुनकर सारी साध-संगत खुशी से नाच उठी। Shah Satnam Ji

‘इंसानियत’ के प्रति इतनी ‘निष्ठा’ देखी है कहीं!

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