क्या है प्लाज्मा थेरेपी?

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Plasma Therapy

कोरोना काल में प्लाज्मा थैरेपी की खूब चर्चा रही है। इस थेरेपी का मकसद यह पता करना है कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 रोग के इलाज में कितनी असरदार है? शोधकतार्ओं का मानना है कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 संक्रमण के इलाज में उम्मीद की एक किरण हो सकती है। इस तकनीक के माध्यम से कोरोना के संक्रमण से मुक्त हो चुके व्यक्तियों के खून से प्लाज्मा निकालकर दूसरे व्यक्ति जो कोरोना वायरस से संक्रमित है को चढ़ाया जायेगा और इतना ही नहीं एक व्यक्ति के खून से निकाले गए प्लाज्मा से कोरोना वायरस के संक्रमण से पीड़ित चार अन्य लोगों का इलाज किया जा सकता है।

दरअसल इस वायरस के संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में उस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है और तीन हफ्ते बाद उसे प्लाज्मा के रूप में किसी अन्य व्यक्ति जो इस वायरस के संक्रमण से संक्रमित है को दिया जा सकता है ताकि उसके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगे। प्लाज्मा को कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के खून से अलग कर निकाला जाता है और एक बार में संक्रमण से ठीक हुए एक व्यक्ति के शरीर से 400 एमएल प्लाज्मा निकाला जा सकता है।

दरअसल प्लाज्मा थेरेपी इस धारणा पर कार्य करती है कि जो कोई भी मरीज जो कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हो जाता हैं उसके शरीर में इस वायरस के संक्रमण को खत्म करने वाले प्रतिरोधी एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं इसके बाद इस वायरस के संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा निकाल कर वायरस से पीड़ित नए मरीजों के खून में डालकर नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है। अगर प्लाज्मा थेरेपी इस वायरस से लड़ने में सक्षम हुई तो, ब्लड प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस के मरीज 3 से 7 दिनों के भीतर सही हो सकते हैं। एक डोनर प्लाज्मा का इस्तेमाल करके दो से पांच मरीजों को ठीक किया जा सकता है जो की इस वायरस के संक्रमण से संक्रमित है।

 

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