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    पूज्य गुरु जी ने बताया बरनावा का इतिहास

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    पूज्य गुरु जी ने बताया बरनावा का इतिहास, आज भी मिल रही धर्मों में लिखी निशानियां

    बेव डेस्क-विजय शर्मा
    पूज्य गुरु जी ने इतिहास और हमारे सभी धर्मों के ग्रंथों की सच्चाई बताते हुए फरमाया कि इतिहास आदमी ने लिखा है और जो वो पवित्र गीता, हमारे पवित्र ग्रंथ जो हैं, वो हमारे महापुरुषों ने लिखे, जिन्होंने सारी जिन्दगी, सारे भोगों का त्याग कर दिया।

    हमारे पवित्र वेद 12 हजार साल पुराने हैं, अगर कोई माने तो

    इतिहास सही हो सकता है, हमें नहीं पता। पर हम ये सौ प्रतिशत गारंटी दे सकते हैं, हम चेलेंस करते हैं बड़े से बड़े विज्ञानिक को कि हमारे पवित्र वेद, पवित्र रामायण, पवित्र गीता, पवित्र महाभारत, जितने भी धर्मों के पवित्र ग्रंथ है वो सच थे, सच है और सच ही रहेंगे। पूज्य गुरु जी ने कहा कि, आ जाइये, हमसे बहस कर लीजिये। अगर आपको लगता है कि सार्इंस बहुत बड़ी है, अरे कल बनी है आपकी ये सार्इंस। हमारे पवित्र वेद 12 हजार साल पुराने हैं, अगर कोई माने तो।

    छाया: सुशील कुमार

    जो हमारे महापुरुषों ने कहा, उसकी निशानियां आज भी मिल रही

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इतिहास गलत हो सकता है, उसे तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है, पर जो हमारे महापुरुषों ने कहा है उसकी निशानियां आज भी हैं, आप कुरुक्षेत्र में देख लीजिये, ये बरनावा, कभी बारना व्रत था, और वो सुरंग जहां अब शायद मंदिर बन गए हंै, हम 1809 में वहां गए थे, तब वो ज्यों की त्यों निशानियां थी, वो ही नदी पास से जा रही हैैं। तो जो वो लिखा था वो ज्यों के त्यों निशान भी मिल रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सुनने में आया कि वो जो रामसेतु बनाया गया था उसकी भी निशानियां मिल रही हैं।

    हमारे धर्मों में पहले ही बताया जा चुका ‘मंकी सिटी’ का रहस्यइतना ही नहीं हमने ये सुना व देखा है कि अगर ग्लोब में किसी ने लंका से ड्रील मारी, तो वो यूएसए में कहीं निकली होगी शायद। तो उस जगह पर तलाश किया गया तो वहां पर एक सिटी निकली है जिसका नाम रखा गया है ‘मंकी सिटी’। क्यों कि उसमें बड़े-बडेÞ बंदर, राजाओं के रूप में थे, उनकी तस्वीर है। और हमारे धर्मों में क्या है, पवित्र रामायण में, कि हनुमान जी पाताल में ले गए थे श्रीराम जी को, और वहां उन्होंने अपने बेटे मकरध्वज को राजा बनाया था। तो उनकी फोटो हैं उसमें। ये धर्मों में लिखा और वो आज निकल चुकी हैं ‘मंकी सिटी’ के नाम से यूएसए में। तो वो एक तरह का पाताल ही हो गया, यहां अगर दिन है तो वहां दिन हैं, और वहां दिन है तो यहां रात है। तो कहने का मतलब है कि भाषा का फर्क हो सकता है, लेकिन निशानियां सारी मिल रही है। तो आप इंकार कैसे कर सकते हैं।

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