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Monday, March 2, 2026
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    दुनिया ने था ठुकराया, पूज्य गुरु जी ने अपनी बेटी बनाया …

    पूज्य गुरु जी ने रखा ख्याल, अब समाज में कर रही हैं कमाल –

    बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने यूटयूब पर करोड़ों साध-संगत को दर्शन दिए। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज हम और हमारी बेटी दोनो मिलके आपको उन बच्चों से मिलवाने जा रहे हैं जो हमारी बेटियां है। वो बेटियां जिनको समाज ने ठुकरा दिया था।

    वो बेटियां जिनको समाज ने ये सोच के कि ये बेटियां हैनहीं अपनाया था। हमने उन्हें अपनाया आज वो हमारी 21 बेटियां यहां पर आई हुई है और FDD के साथ बैठी हुई है। और ये आज अपनी बात भी सुनाएगी और चर्चा करेंगे हम आपस में। आपका कोई भी सवाल आएगा तो एफ बात कर ही रहा है और DD रूह दी आपके सवाल को हमतक पहुंचाएगी। शुरूआत करते हैं एक बेटी से जिसने देखा है बचपन और फिर अब तक वो बड़ी हुई। क्या-क्या उसके साथ हुआ इन सारे बच्चों की कहानी एक बच्चे की जुबानी आप तक आ रही है। वो बेटी आपको बताएगी कैसे समाज में उसके साथ व्यवहार हुआ और आज कैसे समाज में इज्जत के साथ अपनी जिंदगी जी रही है।

    दिलप्रीत इन्सां ने बताया कि मैं बहुत ही छोटी सी थी जब डेरा सच्चा सौदा आई। मैं तो ये ही कहूंगी कि इतनी गंदगी भरी दुनिया से आप जी ही लेकर आए। पापा जी 3-4 साल की थी जब आप जी ने अपनी बेटी बना लिया था। पापा जी जब मैं पैदा हुई थी मेरे घर वालो की सोच ये थी कि हम इसका करेेंगे क्या। बेटी हो गई है हमें नहीं रखना है। पर पापा जी उन्होंने कुछ ना कुछ करके मुझे रख लिया। तो मुझे ये लगा कि चलो मुझे रख तो रहे हैं,मारा तो नहीं पर पापा जी उसके बाद की जिंदगी बहुत पत्थर थी। बेटी थी तो उन्हें ये होता था कि घर के काम करे। घर में खाना बनता था तो मुझे नहीं देते थे। मुझे बाहर भेज देते थे भीख मांगने के लिए। पूरा दिन घर के बाहर भीख मांगना और फिर रात को घर आती थी तो मेरे लिए घर के दरवाजे बंद कर दिए जाते कहते कि बाहर ही सौ।

    पापा जी रोड के किनारे सौ जाती। समझ में नहीं आता था। पर धीरे-धीरे घरों में से चुन्नियां चोरी कर बिछाती उनका घर बनाती फिर वहां सोती और पापा जी मेरा भाई भी था उसके लिए सब सुविधा थी। उसके बाद मैं थोड़ी बड़ी हुई फिर मेरे घर वाले कहने लगे कि इसको बेच देते है पैसे आएंगे। पापा जी आप जी ने बचा लिया और आप जी की रहमत रही कि मेरे फैमली में से एक दो प्रश्न थे जो डेरे से लिंक था जो डेरे में आते थे। इन्होंने किसी को कहा कि अगर तुम्हें नहीं रखनी बेटी को गुरु जी को दे दो वो संभाल लेंगे। पर पापा जी एक बार तो उनका मन बना फिर उन्होंने मना कर दिया। उनके दिमाग में चल रहा था कि उन्हें पैसा मिलेगा। पर आप जी की रहमत हुई और आप जी ने पंजाब में सत्संग किया था तो आप जी की जब गाड़ियां जा रही थी तो आप जी ने मेरे बारे में पूछा था कि ये बेटी कौन है और यहां पर कैसे फिर आप जी ने ही कहा कि इसका पता करो और इसको हमारे पास लेकर आना। आज मैं जो भी हूं आप जी की वजह से हूं।

    आप जी ने मेरी जिंदगी बदल दी। आप जी ने स्पोर्ट्स से लेकर पढ़ाई सबमें टॉप पर रखा। अकेली मेरी ही नहीं सब बच्चों की ही कहानी ऐसी है सबके साथ ऐसा ही हुआ है। कोई जंगल से मिला तो कहीं से मिला। कहीं तो ऐसे है कि पैदा होते ही अस्पताल में जहर दे दिया गया चुन्नियों से बांध दिया गया जिससे दम घुटकर मर जाए। किसी को वहीं छोड़ दिया गया। पापा जी आज हम जो भी है आप जी की वजह से ही है।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमें अच्छे से याद है कि हम सत्संग करके आ रहे थे और ये बेटी रोड के किनारे पर बैठी हुई थी जैसे कोई भीख मांगता है बिल्कुल छोटी सी उम्र। हमने वहां गाड़ी धीमी करके कहा था कि भई इस बच्ची के बारे में पूछो, फटेहाल कपड़े थे। फिर पता चला और आज ये बेटी बहुत सारे मैडल जीत चुकी है। और ये सारो की कहानी बच्चो की आपके सामने है। इसलिए हम कहते हैं कि बेटी को कभी मत मारो ना बल्कि बेटी को पढ़ाओ, लिखाओ, बड़े करो । फिर ये बेटियां बड़ी भी हुई और इनकी शादियां भी हो गई है। इनमें से बहुत सारे बच्चों की।

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