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    Haryana Highway News: …जब स्टेट हाईवे पर किसान ने बना दी दीवार

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    Haryana Highway News: ...जब स्टेट हाईवे पर किसान ने बना दी दीवार

    Haryana Highway News: पिहोवा, सच कहूँ, जसविंद्र। पिहोवा में एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश मे आया है। मंगलवार सुबह एक किसान ने स्टेट हाईवे पर दीवार बना दी। जब तक प्रशासन मौके पर पहुंचा दीवार एक फुट से भी ऊंची बना दी थी। वाहन चालक रास्ता बदलकर निकले। मामला पिहोवा-कुरुक्षेत्र मार्ग पर अमृतसरी फार्म के निकट का है, जहां कुछ लोगों ने सड़क पर दीवार बनाकर स्टेट हाइवे को बंद कर दिया। इसके पीछे उनका तर्क था कि स्टेट हाइवे उनकी जमीन में बना हुआ है। जिसे लेकर उन्हें मुआवजा नहीं मिला। वे तीन बार कोर्ट से केस जीत चुके हैं। कोर्ट ने भी उन्हें जमीन का मालिक करार दिया है। लिहाजा वे अपनी जमीन पर निर्माण कर रहे हैं।

    सूचना पाकर डीएसपी निर्मल, एसएचओ सिटी जानपाल व सदर प्रभारी जगदीश पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे। जिन्होंने ट्रैफिक को खेत के रास्ते डायवर्ट करके सूचना पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारियों को दी। लेकिन जमीन मालिक नहीं माना। इसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करके रास्ता खुलवाया गया। कुछ देर के लिए दीवार बनाने वाले लोगों को हिरासत में भी लिया गया।

    निशानदेही के समय स्टेट हाइवे आया प्राइवेट जगह में | Haryana Highway News

    जमीन पर दावा जता रहे बलविंदर सिंह ने बताया कि 2006 से पहले यह जमीन पारिवारिक बंटवारे में उनके हिस्से में आई थी। जब उन्होंने निशानदेही ली तो पता चला कि स्टेट हाइवे उनकी जमीन पर बना हुआ है। हालांकि स्टेट हाइवे 1987 में बना था। लेकिन निशानदेही में पता चला कि सड़क की जगह में उसका खेत है। इसे लेकर उन्होंने पीडब्ल्यूडी एवं सरकार के विभागों से गुहार लगाई तो उन्हें अंडर प्रोटेस्ट के तहत साढ़े पांच लाख के करीब टोकन मनी तो दे दिया गया। लेकिन उसके बाद इस जगह का मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने सिविल कोर्ट में अपील दायर की फैसला उनके हक में आया। उन्होंने बताया कि 2013 में कोर्ट ने आदेश दिया कि 6 महीने के अंदर सरकार किसान को मुआवजा दे या जमीन खाली कर दे लेकिन इसके बावजूद मुआवजा नहीं दिया गया। 2018 में कोर्ट ने जमीन खाली करने का आदेश दिया जिसके फैसले के खिलाफ सरकार का पक्ष हाई कोर्ट चला गया लेकिन वहां से भी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद मामला अपील के रूप में हाईकोर्ट चला गया। अब हाईकोर्ट ने भी फैसला उनके पक्ष में सुनाया है। उन्होंने बताया कि 2006 से यह मुकदमा चल रहा है और उनकी लगभग 22 मरले करीब 665 गज जगह हाइवे में गई हुई है। बलविंदर सिंह ने बताया कि 23 जनवरी को कोर्ट से उनके हक में फैसला आने के बाद उन्होंने सरकारी विभागों से संपर्क भी किया। यहां तक कि उन्होंने डीसी कार्यालय में भी केस की जानकारी दी। लेकिन अधिकारियों ने कोर्ट के फैसले को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी बात पर कोई विचार नहीं हुआ।

    साढ़े पांच लाख के करीब दिया जा चुका है मुआवजा: एक्सईएन

    उधर, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन ऋषि सचदेवा ने बताया कि विभाग की ओर से मुआवजे के तौर पर साढ़े पांच लाख के करीब राशि मालिक पक्ष को दी गई थी। लेकिन वे इससे सहमत नहीं हुए। पूरा मामला विभाग के आला अधिकारियों के संज्ञान में है। अब दोबारा एक्ट की स्टडी कर रहे हैं ताकि प्रपोजल बनाकर मंजूरी के लिए भेजा जा सके। कब्जा लेने वाले पक्ष की ओर से बलविंदर सिंह का कहना है कि विभाग उन्हें कृषि भूमि के हिसाब से मुआवजा देना चाहता है। जबकि जमीन कमर्शियल में आती है और शहर के नजदीक है। इसलिए उन्हें प्रति गज के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।