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    लापरवाही: संगरूर में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि, 24 घंटे में 63 स्थानों पर लगी आग

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    Sangrur News: लापरवाही: संगरूर में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि, 24 घंटे में 63 स्थानों पर लगी आग

    अब तक 281 मामले दर्ज, प्रदूषण से जनजीवन प्रभावित, प्रशासन बेबस

    • किसानों की मजबूरी बनी पराली जलाना, विशेषज्ञों ने दी स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी

    संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। Stubble Burning Cases: जिला संगरूर में किसानों द्वारा धान की पराली जलाने से उठता जहरीला धुआं आम लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना रहा है। किसान मजबूरी में पराली जला रहे हैं, जबकि प्रशासन इस गंभीर स्थिति पर नियंत्रण पाने में असमर्थ नजर आ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी संगरूर पराली जलाने के मामलों में अग्रणी जिलों में शामिल है। Sangrur News

    पूरे पंजाब में संगरूर दूसरे स्थान पर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 नवम्बर 2025 तक संगरूर जिला प्रतिदिन प्रदूषण के मामले में अन्य जिलों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान बनाए हुए है। अब तक जिले में पराली जलाने के कुल 281 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बीते 24 घंटों में ही 63 से अधिक स्थानों पर पराली को आग लगाई गई। प्रशासन इस स्थिति पर पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है। विभाग द्वारा बड़ी संख्या में किसानों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं और अब तक 1 लाख 30 हजार से अधिक के जुर्माने लगाए जा चुके हैं।

    धुएं से बीमारियों का बढ़ता प्रकोप | Sangrur News

    इस जहरीले धुएं का असर शहरवासियों पर बड़े स्तर पर देखा जा रहा है। दोपहर बाद वातावरण में धुंध छा जाती है और बाजारों में सन्नाटा पसरने लगता है। खांसी, जुकाम और सांस के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडवाइजरी जारी करनी शुरू कर दी है।

    पराली से किसान कर सकते हैं अच्छी कमाई: जतिंदर कालड़ा

    समाजसेवी जतिंदर कालड़ा ने बताया कि उन्होंने पराली के मुद्दे पर एक वर्ष तक मेहनत की है और यह किसानों की किस्मत बदलने वाला साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान सहकारी समितियों के माध्यम से पराली आधारित उद्योग स्थापित करें तो सरकार 30 प्रतिशत सब्सिडी देती है। आज पंजाब के थर्मल प्लांट, ईंट भट्ठे और अन्य उद्योगों को पराली की भारी आवश्यकता है। बाहरी व्यापारी पंजाब में आकर पराली आधारित उद्योग लगा रहे हैं और पराली की गांठें 2 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को किसानों को पराली प्रबंधन की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे प्रदूषण से भी बड़े स्तर पर बचाव संभव है।

    बुजुर्ग और बच्चे शाम को घर से बाहर न निकलें: डॉ. अमनदीप अग्रवाल

    इस विषय पर बात करते हुए डॉ. अमनदीप अग्रवाल ने कहा कि विशेषकर संगरूर जिले में धुएं के कारण हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने चेहरे पर मास्क या रुमाल बांधकर रखना अनिवार्य हो गया है। शाम के समय बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि घर के आसपास पानी का छिड़काव करना चाहिए जिससे मिट्टी और धुएं से बचाव हो सके। Sangrur News

    किसानों की मजबूरी है पराली जलाना: चट्ठा

    भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के जिला महासचिव रण सिंह चट्ठा ने कहा कि पंजाब सरकार हाईकोर्ट की सख्ती से बचने के लिए पराली जलाने वाले किसानों पर मामले दर्ज कर रही है और रेड एंट्री के साथ भारी जुर्माने लगा रही है। उन्होंने कहा कि छोटे किसान जो चार-पांच एकड़ जमीन के मालिक हैं, वे करोड़ों रुपये की मशीनरी नहीं खरीद सकते। सरकार ने पराली की गांठें बांधने के लिए बैलर मशीनों की भी कोई विशेष व्यवस्था नहीं की है।

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