चंडीगढ़। Shaheedi Diwas: जब आप चंडीगढ़ एयरपोर्ट के निशान-ए-इंकलाब प्लाजा से गुज़रते हैं, तो आपकी नज़र 35 फीट ऊँची एक विशाल प्रतिमा पर ठहर जाती है। यह मात्र पत्थर और धातु की कलाकृति नहीं, बल्कि भारत के सबसे युवा और प्रखर नायक शहीद भगत सिंह की उपस्थिति का अहसास है। आज 23 मार्च है—वही दिन जब वक्त ठहर गया था और इतिहास अमर हो गया।
ज़रा सोचिए, जहाँ दुनिया भर के यात्री अपनी आधुनिक उड़ानों के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं, वहीं बीच रास्ते में खड़ा यह ‘निशान-ए-इंकलाब’ हमसे कुछ कहता है। यह हमें याद दिलाता है कि आज हम जिस खुली हवा में अपनी मंज़िलों की ओर उड़ान भर रहे हैं, उसका रास्ता उस 23 साल के नौजवान की शहादत से होकर गुज़रा था।
करीब 6 करोड़ की लागत और भव्य ब्लैक ग्रेनाइट से सजा यह स्मारक यात्रियों को एक पल रुक कर खुद से यह पूछने पर मजबूर करता है कि क्या हम उस आजादी के लायक बन पा रहे हैं, जिसके लिए इन्होंने हँसते-हँसते फाँसी को चूम लिया? यहाँ की रोशनी और घास की हरियाली में छिपी गंभीरता हमें बताती है कि असली इंकलाब अपने देश के प्रति जिम्मेदारी को समझने में है।
अगली बार जब आप यहाँ से अपनी फ्लाइट पकड़ें, तो इस प्रतिमा की आँखों में ज़रूर झाँकिएगा—वहाँ आपको अपनी यात्रा के लिए एक नई दिशा और देश के लिए एक नया संकल्प मिलेगा।















