अनुकरणीय: मैडिकल रिसर्च के लिए दान किया शरीर
नरवाना (सच कहूँ न्यूज)। जीते जी रक्तदान व मानवता की भलाई के कार्यों में हमेशा बढचढ कर भाग लेने वाली हरिनगर नरवाना वासी बाला इन्सां पत्नी जगरूप इन्सां ने मरणोपरांत भी अपना शरीर दान कर समाज के सामने मिसाल पेश की है।
32 वर्षीय बाला इन्सां का कहना था कि क्या लेकर आए थे, क्या लेकर जाना है। खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है। जीते जी मानवता भलाई करो, यही असली खजाना है। उन्होंने इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए जीते जी रक्तदान व मरणोपरांत शरीरदान कर एक मिशाल कायम कर दी।
उनका शरीर मैडिकल रिसर्च के लिए दान किया गया है। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा से नामदान प्राप्त किया हुआ था और तभी से मानवता भलाई कार्यों में जी जान से जुट गई।
सोमवार ज्यों ही उनकी मृत्यु की खबर सुनी तो उसी समय सगे-संबंधी, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार, डेरा प्रेमी व आस-पास के गांवों के लोग हजारोें की तादाद में उनके निवास स्थान पर जमा हो गए।
उनके ससुर बचना राम इन्सां व पति जगरूप इन्सां ने बताया कि उन्होंने शरीर दान का प्रण लिया हुआ था और उनकी इच्छा अनुसार ही शरीरदान किया गया है। जब लोगों को बाला इन्सां के शरीरदान का पता चला तो पूरे शहर व आस-पास के लोगों ने उसकी व परिवार के लोगों की खूब सराहना की।
जब उनकी देह को लेने के लिए गाड़ी आई तो पूरा गांव-बाला इन्सां अमर रहे, के नारों से गूंज उठा। हर किसी के मुख पर मानवता के सच्चे प्रहरी का नाम था और हर किसी का हाथ अपने आप ही सलामी के लिए उठ रहा था। बाला इन्सां अपने पीछे एक 12 वर्षीय बेटा सुमित व एक बेटी 9 वर्षीय शिवानी को छोड़ कर प्रभु के चरणों में जा समाई।
बेटियों ने दिया अर्थी को कंधा
जहां हमारे समाज मे लड़कियों को लड़कों के मुकाबले हीन भावना से देखा जाता है वहीं नरवाना की हरिनगर कालोनी में यह साबित कर दिया कि लड़कियां भी किसी प्रकार से कम नहीं हैं।
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए बचना इन्सां की बेटी नीलम इन्सां, शीला इन्सां व पूजा इन्सां ने अर्थी को कंधा देकर समाज में बेटा-बेटी एक समान होने का संदेश दिया।
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