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Tuesday, March 24, 2026
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    मकान की गिरी छत, बाल-बाल बचा परिवार

    House, Roof, Family

    सच कहूँ-अमित गुलाटी/ कलायत।

    कलायत के वार्ड-10 में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भारतीय सेना का हिस्सा रहे स्वर्गीय प्रेम सिंह बैरागी के आशियाने की छत अचानक ध्वस्त हो गई। घटना में सैनिक की पत्नी धनपति, अजय, मयंक और एक मासूम लड़की राखी बाल-बाल बच गई। घर पूरी तरह मलबे में तबदील हो गया। इसके अलावा घर का सारा सामान भी मलबे में दबने से नष्ट हो गया।

    प्रभावित धनपति ने बताया कि सभी रसोई में थे। तेज धमाके के साथ पूरा घर हिल गया। धूल और धमाके के बीच वे सहम गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ है? हड़बड़ाहट में बाहर निकलने के बाद उन्हें मंजर समझ आया। सैनिक आश्रित परिवार ने बताया कि वर्ष 2000 में आशियाने का निर्माण करवाया था। इसी के अंदर विधवा धनपति और उसके पौत्र-पौत्री रह रहे थे।

    गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले इस परिवार के पास आय का अन्य कोई साधन नहीं है। सिर छिपाने के लिए जो छत थी अब वह भी नहीं रही। हादसे से व्यथित सैनिक की पत्नी और अन्य सदस्य काफी समय घटना स्थल से कुछ दूरी पर खुले आसमान के तले बैठे रहे।

    महिला पार्षद पूजा धीमान और विश्वकर्मा समाज संगठन प्रधान धर्मपाल धीमान ने प्रभावित परिवार को हिम्मत बंधाई। संकट में परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि अब वे क्या करे? घटना की सूचना एस.डी.एम. जगदीप सिंह के पास पहुंची। प्रशासनिक अधिकारी ने तत्काल राजस्व विभाग को मौका मुआयना के निर्देश दिए। उधर परिवार ने अन्य स्थान पर वैकल्पिक रूप से शरण ली है।

    पीएम और सीएम से मद्द की गुहार

    प्रभावित धनपति ने बताया कि मकान ढह जाने के बाद बड़ी विपदाएं उसके समक्ष खड़ी हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से सैनिक परिवार को सहारा देने की अपील की है। इस घटना को लेकर महिला नगर पार्षद पूजा धीमान, शशी बाला कौशिक और सुरेश वाल्मीकि सहित कुछ दूसरे प्रतिनिधियों ने प्रशासन से सैनिक परिवार को मदद देने का आग्रह किया है।

    शहीद प्रेम सिंह के परिवार को आज तक नहीं मिली सरकारी सहायता

    प्रेम सिंह बैरागी को भारतीय सेना के जांबाज सिपाही थे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए 25 सितम्बर 1965 से 1 मार्च 1966 तक, 1971 और 20 अगस्त 1971 से 9 जून 1972 तक दुश्मन देशों से लड़ाईयां लड़ी। इस साहस के परिचय से खुश होकर उन्हें सरकार ने संग्राम मैडल, दीर्घ राष्ट्र सेवा और सैन्य सेवा सहित कई मैडल दिए। हैरानी का विषय है कि इस प्रकार की कुबार्नी के बाद भी आज तक सरकार से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली? परिवार लंबे अरसे से गरीबी में जीवन जी रहा है।

     

     

     

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