हमसे जुड़े

Follow us

29.3 C
Chandigarh
Thursday, February 26, 2026
More
    Home कृषि संक्रमित टिश्...

    संक्रमित टिश्यू कल्चर पौधे फैला रहे हैं केले में महामारी

    Plant Tissue Culture

    नयी दिल्ली। टिश्यू कल्चर से तैयार केले के पौधों से इसकी व्यावसायिक खेती करना अधिकांश जगहों पर किसानों के लिए वरदान साबित हुआ लेकिन कई स्थानों पर इसे घातक पनामा विल्ट रोग फैलाने का जिम्मेदार भी पाया गया है जिससे जी -9 किस्म को भारी नुकसान हुआ है। पहले परंपरागत ढंग से केले के पुत्तिओं द्वारा नए बाग़ लगा कर शायद हज़ारों हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती करना असंभव था लेकिन टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों का उपयोग कर इसकी व्यावसायिक खेती करने का दायरा अब दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है लेकिन किसानों की जरा सी असावधानी से केले की पनामा विल्ट महामारी उन स्थानों पर फैलने के लिए काफी हैं जहां इस रोग का नामोनिशान नहीं था।

    Plant Tissue Culture

    टिश्यू कल्चर पौधे से रोग के फैलने की संभावना बढ़ी

    केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) लखनऊ के निदेशक शैलेन्द्र राजन के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की करोड़ों रुपए की जी – 9 , मालभोग और कई अन्य किस्म की केले की फसल इस बीमारी से नष्ट हो रही है। अधिकतर स्थानों पर सिंचाई के पानी के साथ इस बीमारी के जीवाणु एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैल गए और किसानों को कई वर्षों बाद ज्ञात हुआ कि उनके खेत में यह भयानक बीमारी घर कर चुकी है । नहर एवं बाढ़ के पानी ने इस बीमारी को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाई है।

    जहां पर यह बीमारी नहीं थी, वहां पर भी टिश्यू कल्चर पौधे से इस रोग के फैलने की संभावना बढ़ गई है। डाॅ. राजन ने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के केला उत्पादकों के लिए टिश्यू कल्चर पौधे एक वरदान के समान हैं। इतने बड़े क्षेत्र में केला उत्पादन के लिए परंपरागत तरीके से कम समय में नए बाग लगाने की संभावनाएं बहुत कम है। उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रतिवर्ष करोड़ों टिश्यू कल्चर पौधों की आवश्यकता होती है।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।