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    भीषण गर्मी के बीच गंभीर ‘जल संकट’, सुप्रीम कोर्ट पहुँची ‘आप’!

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    भीषण गर्मी के बीच गंभीर 'जल संकट', सुप्रीम कोर्ट पहुँची ‘आप’!

    मुश्किल वक्त में पड़ोसी राज्यों से सहयोग करने का आग्रह

    नई दिल्ली (एजेंसी)। भीषण गर्मी के बीच गंभीर जल संकेट से जूझ रहे दिल्ली के लोगों की दिक्कतों को देखते हुए अब केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आम आदमी पार्टी सरकार ने शीर्ष न्यायालय से गुहार लगाई कि वह हरियाणा को अधिक पानी देने के आदेश दें। दिल्ली सरकार ने न्यायालय को बताया है कि शहर में पानी की मांग भीषण गर्मी के चलते बढ़ गई है और पड़ोसी राज्य हरियाणा को यह निर्देश दिया जाए कि वह एक महीने के लिए पानी की अतिरिक्त सप्लाई हमें कर दें। Delhi News

    सरकार ने यह भी कहा है कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि दिल्ली के पानी की मांग की पूर्ति हो। इसके साथ ही शुक्रवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी एक ट्वीट के माध्यम से यूपी और हरियाणा दोनों राज्यों को सहयोग के लिए कहा है। दिल्ली की जल मंत्री आतिशी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पानी की किल्लत इसलिए जूझ रही है, क्योंकि हरियाणा उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है। वहीं अब हरियाणा के मंत्री अभय सिंह यादव ने दिल्ली सरकार को वॉटर मैनेजमेंट सही करने की सलाह दी है।

    तीन-चार दिन में एक बार मिल रही सप्लाई

    मंगोलपुरी इलाके के लोगों ने कहा कि तीन से चार दिन में एक बार पानी आता है और वो भी अक्सर गंदा आता है, जिससे कई बीमारियों से ग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। जल बोर्ड में कई बार मौखिक व लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। Delhi News

    200 टीमों ने संभाला मोर्चा

    जल संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने वाटर टैंकर वार रूम बनाया है, जहां से दिल्लीवासी 1916 पर कॉल कर टैंकर मंगवा सकते हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए जल बोर्ड की 200 टीमें बनाई गई हैं। निर्माण साइटों, कार वाशिंग और कार रिपेयर सेंटर पर जल बोर्ड के पोर्टेबल पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। आदेश का पालन न करने पर साइट सील की जाएगी।

    आगे बिगड़ेंगे हालात

    नीति आयोग का कहना है कि हो सकता है कि 2030 तक 40 फीसदी भारतीयों को पीने का पानी भी न मिले। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ये भी अनुमान लगाया था कि भारत के 21 बड़े शहरों में ग्राउंडवाटर खत्म होने की कगार पर है, जिससे लगभग 10 करोड़ आबादी प्रभावित होगी। Delhi News

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