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    एड्स पीड़िताएं भी दे सकेंगी शिशु को जन्म

    Fiji HIV News
    Sanketik photo

    एआरटी नामक दवा से होगा संभव

    • बीच में छोड़ने पर दवाई नहीं करेगी असर

    करनाल (सच कहूँ न्यूज)। स्वास्थय विभाग द्वारा जारी की गई ए.आर.टी. नामक दवाई के इस्तेमाल से एक तरफ जहां एड्स से ग्रस्त महिलाएं भी शिशू को जन्म दे सकेंगी। वहीं इसी दवा के इस्तेमाल से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। स्वास्थय विभाग द्वारा यह दवाई पूरे भारत में सप्लाई हो रही है।
    सीएमओ डा. योगेश शर्मा ने बताया कि एआरटी तीन दवाईयों का मिश्रण है। यह दवाई केवल उन्हें दी जाती है जिनकी सी.डी संख्या 350 से कम होती है। यह दवाई दिन में 2 बार लेनी होती है। यदि बीच में छोड़ दी जाए तो असर खत्म हो जाता है। ऐसे में मरीज को नए सिरे से दवाई शुरू करनी पड़ती है। सही उपचार और समय पर दवाई लेने से इस पर कंट्रोल किया जा सकता है।

    दवाई के लगातार सेवन से बच्चा तो स्वस्थ पैदा होगा ही साथ में महिला में यह बीमारी कंट्रोल हो जाएगी आगे नहीं बढ़ेगी। इस दिशा में विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतलों में उपलब्ध करवा रहा है। विभाग द्वारा यह दवाईयां प्रदेश के सभी अस्पतालों में भेजी जा रही हैं। सी.एम.ओ योगेश शर्मा ने बताया कि अगर एड्सग्रस्त या एच.आई.वी. पॉजीटिव ए.आर.टी. दवाई नियमित लेगा तो यह बीमारी काबू पाने के साथ रोगों से लड़ने की क्षमता बढाऐगी। सी.डी.-4 की जांच करवा सकते हैं। यही नहीं डयूटी दे रहे काऊंसलर से होने वो बच्चे में एच.आई.वी. संक्रमण की भी जांच कर सकते हैं।

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