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    Radish Farming: ऐसे करें मूली की खेती और 50-60 दिनों में फसल तैयार, बन जाओगे मालामाल!

    Radish Farming

    Radish Farming: उत्तर भारत में किसानों के लिए लाभप्रद है मूली की खेती

    डॉ. संदीप सिंहमार। उत्तर भारत में मूली की खेती किसानों के लिए बहुत लाभप्रद हो सकती है। मूली की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय भी अक्टूबर का महीना माना जाता है। कम लागत की इस खेती से किसानों को ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद रहती है सबसे खास बात यह है कि उत्तर भारत के राज्य हरियाणा पंजाब राजस्थान व उत्तर प्रदेश की मिट्टी मूली की खेती के लिए सबसे उन्नत मानी जाती है।

    हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश की मिट्टी है सबसे उपयुक्त

    विशेषकर पूसा रश्मि जैसी उन्नत प्रजातियों के उपयोग के साथ यह खेती की जाए तो किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी हो सकती है। यह किस्म अपनी लंबी जड़ों के लिए जानी जाती है, जो 30 से 35 सेंटीमीटर तक होती हैं। मूली की खेती लगभग 55 से 60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है। फसल की पैदावार के लिए किसानों को ज्यादा मेहनत में किसी भी प्रकार के कीटनाशक के प्रयोग की भी जरूरत नहीं पड़ती। अच्छे से जमीन की निराई गुड़ाई करने के बाद मूली की खेती की जाए तो पैदावार भी बंपर मिलती है। इसकी पैदावार क्षमता प्रति हेक्टेयर 315 से 350 क्विंटल होती है, जो किसानों के लिए अच्छी आमदनी का स्रोत बन सकती है।

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    जल निकासी वाली भूमि उपयुक्त : मूली की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता होती है। हल्की दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली भूमि मूली की अच्छी पैदावार के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, फसल की देखभाल के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयुक्त अनुपात में खाद डालना भी महत्वपूर्ण होता है। खाद डालने से पहले कृषि विभाग व कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी पर ध्यान देना जरूरी है।

    इन किस्मों का करें चयन | Radish Farming

    खेती की क्षेत्रीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए और बाजार की मांग के आधार पर पूसा रश्मि जैसी उन्नत किस्म का चयन करना होशियारी का परिचायक हो सकता है। मूली की उन्नत किस्मों में पूसा चेतकी, पूसा हिमानी, जापानी सफेद, पूसा रेशमी आदि शामिल हैं। इसके अलावा वाइट आइसिकल, रैपिड रेड वाइट टिप्ड, पूसा मृदुला, पूसा देसी, जापानी सफेद, पूसा हिमानी, पूसा चेतकी, पालम ह्रदय, पूसा जमुनी, पूसा गुलाबी, पूसा श्वेता, पूसा रश्मि आदि शामिल हैं, जो कम समय में काफी अच्छी पैदावार देती है।

    तीखे सवाद की मूली गुणों से भरपूर: मूली का मुख्य रूप से सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है। मूली के स्वास्थ्य लाभ भी बहुत हैं। यह पाचन को सुधारने, विटामिन सी की पूर्ति करने और एंटीआॅक्सीडेंट की अच्छी मात्रा प्रदान करती है। मूली अपनी सफेद रंग की जड़ों में हल्का हरा रंग लिए होती है और इसका स्वाद तीखा होता है।

    खरपतवार से मुक्त रखना जरूरी: | Radish Farming

    खेत को समय-समय पर खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए ताकि मूली बेहतर पोषण प्राप्त कर सके। कीट और रोगों के नियंत्रण के लिए जैविक या रासायनिक उपायों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए। वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञ सलाह का उपयोग करके किसान उत्पादन की कुशलता को काफी बढ़ा सकते हैं। किसान एप्स और कृषि संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़कर नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए गुणवत्ता और प्रकार जैसे जैविक खेती पर ध्यान देने से भी अच्छे दाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रकार, वैज्ञानिक तरीकों से खेती करके किसान बेहतर उपज और लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं।”

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