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    सम्पादकीय: मजदूरों के लिए बढ़ रही मुश्किलें

    Editorial Increasing difficulties for laborers

    आप पिछले वर्ष के इन दिनों को याद करें। हर ओर लॉकडाउन था। अप्रैल, 2020 में कोरोना को लेकर देश में इतना खौफ था कि लोग पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर स्थित अपने गांवों की ओर लौट चले थे। उन गांवों की ओर, जिन्हें वे कभी रोजी-रोटी की तलाश में कहीं पीछे छोड़ आए थे। मुंबई और दिल्ली के रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर फिर से मजदूरों की भीड़ होने लगी है। कई स्थानों पर पुलिस द्वारा मजदूरों से मारपीट करने की भी रिपोर्टें आ रही हैं। दिल्ली व अन्य राज्यों में वीकैंड लॉकडाउन लगने के कारण प्रवासियों को अपनी रोजी-रोटी का डर सता रहा है।

    विगत वर्ष लॉकडाउन के कारण सैकड़ों मजदूर सड़क दुर्घटनाओं, भुखमरी, बीमारी व पैदल चलने के कारण ही रास्ते में दम तोड़ गए थे, उस वक्त पूर्ण लॉकडाउन था और मजदूर ज्यादा भय में थे। पिछले साल रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर सैनेटाइजेशन, स्क्रीनिंग की व्यवस्था थी। इस बार ऐसा कुछ नहीं है। सरकारों का ध्यान बाहर से आने वाले मजदूरों की तरफ शायद है ही नहीं। अपना घर बार छोड़कर फिर से ये लोग महानगरों की तरफ गए थे लेकिन इस बार महानगरों की हालात पहले से बदतर है। तो ये लोग फिर से अपने घरों का रुख कर रहे हैं।

    कोई चार महीने पहले दिल्ली गया था तो कोई 6 महीने पहले और अब उन्हें फिर लौटना पड़ रहा है। पहले केंद्र व राज्य सरकारें अचानक पैदा हुई स्थिति को संभालने में नाकाम रही थीं लेकिन इस बार तो सरकारों के पास मंथन करने का पूरा समय व क्षमता है। राज्य सरकारों को मजदूरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। सबसे पहले तो यह आवश्यक है कि मजदूरों को बेरोजगारी की अवस्था में वित्तीय मदद, राशन व मेडिकल सुविधाओं का प्रबंध करना चाहिए, ताकि वे अपने रोजगार स्थल पर रहकर कार्यों में जुटे रहें। फिर भी यदि मजदूर वापिस जाना चाहते हैं तब उनकी सुरक्षित वापिसी का उचित प्रबंध किया जाए।

    विगत वर्ष कई मजदूर साइकिल पर एक हजार किलोमीटर से अधिक यात्रा कर अपने घरों तक पहुंचे थे। कई किलोमीटर तक पैदल चलने से कईयों के पैरों में छाले तक पड़ गए थे। बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग तो समस्याओं से बुरी तरह से घिर गए थे।  मजदूरों की वापिसी से जहां औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होंगे, वहीं धान की बिजाई का समय आ रहा है। लेबर की कमी के कारण किसानों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकारें मजदूरों के लिए फ्री बसों, खाने-पीने के सामान का पूर्ण पं्रबंध करें। हम उम्मीद के साथ दुआ भी करते हैं कि ये आपात स्थिति, दहशत के आलम और इस बीमारी से पूरी दुनिया को निजात मिले ताकि लोग फिर खुली हवा में सांस ले पाएं और अपनी जिंदगी दोबारा बेखौफ जी पाएं।

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