गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई रसायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक व ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे
कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Shalgam Ki Kheti: रसायनिक खेती छोड़कर अब प्राकृतिक व ऑर्गेनिक खेती अपनाना किसानों की जरूरत बनता जा रहा है। आजमन भी यही चाहने लगा है कि रासायनिक खेती कम हो, ताकि जहरमुक्त अन्न पैदा हो सके। ऐसे ही कुरुक्षेत्र जिला के गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई किचन गार्डन ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। किसान भाईयों द्वारा 8 किलोग्राम वजनी शलगम उगाई है। इनकी शलगम सोशल मीडिया पर भी सुर्खियां बटौर रही हैं। अभिमन्युपुर गांव के किसान अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि वह खेती का शौक रखते हैं। पिछले 45 साल से वह अपने भाई के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं। करीब 30 एकड़ में वह खेती कर रहे हैं।
इसके साथ साथ अपने खेतों में उन्होंने ऑर्गेनिक किचन गार्डन बनाया हुआ है। यहां वे किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने अपने इस किचन गार्डन में 8 किलोग्राम की शलगम तैयार की है, जिसका पत्तों के साथ 15 किलोग्राम वजन है। अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती का ही कमाल है जो इतनी बड़ी शलगम उनके खेत में तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अक्टूबर महीने में शलगम की बुआई की थी। इसमें पानी की लागत भी बहुत कम होती है।
शलगम का वजन देख हर कोई रह गया दंग | Kurukshetra News
किसान अश्वनी कुमार शर्मा के भाई राजीव शर्मा ने बताया कि उन्होने इस शलगम को अपने खेत से 9 फरवरी को उखाड़ा था। उस समय इसके पत्तों के साथ वजन 15 किलोग्राम था। पत्ते काटकर इसका वजन 8 किलोग्राम रह गया। हर कोई इसको देखकर हैरान है, वह खुद भी इसको देखकर हैरान थे जब रिश्तेदारों को इसकी बात पता चली तो उन्होंने कुरुक्षेत्र शहर में इसको देखने के लिए अपने घर पर मंगवाया और वहीं पर कुछ दिन रखा। उनके रिश्तेदारों के घर पर शहर में भी बहुत लोग उसको देखने के लिए आए थे। हालांकि करीब 10 दिन पहले इसको उखाड?े के बाद अब इसका एक किलोग्राम वजन कम हो गया है।
किचन गार्डन में करते हैं अच्छी सब्जी तैयार
किसान ने बताया कि वह अपने किचन गार्डन में हर मौसम की सब्जी लगाते हैं जो शुद्ध आॅर्गेनिक होती हैं। वह मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जी लगाते हैं। उन्होने इस किचन गार्डन में पहले भी करीब चार किलोग्राम का चुकंदर, 6 किलोग्राम की मूली, 3 किलोग्राम से ऊपर पत्ता गोभी और फूलगोभी भी अपने इस किचन गार्डन से ली हुई है। लेकिन अब इस शलगम ने उनको और भी ज्यादा मशहूर कर दिया है। क्योंकि आज तक कितनी बड़ी शलगम ना ही उन्होंने कभी देखी और ना ही सुनी है। उन्होंने कहा कि वह अपने खाने के लिए इस किचन गार्डन में गन्ना, हरी सब्जियां, प्याज, फल फू्रट सभी लगाए हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में असम राज्य की एक वैरायटी का नींबू का पौधा भी लगाया हुआ है जिसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी है और वह अभी बंपर पैदावार दे रहा है।
25 सालों से कर रहे ऑर्गेनिक फार्मिंग
किसान भाईयों ने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए वह खुद के खाने के लिए आॅर्गेनिक किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। हालांकि बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं लेकिन मार्केटिंग की समस्या की वजह से वह बड़े स्तर पर इसको नहीं कर पाते। इसलिए वह अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन चला रहे हैं। उनको 25 साल हो गए इस किचन गार्डन में उन्होंने आज तक कभी रसायन नहीं डाला। Kurukshetra News
वह इसमें गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं और अब उनकी पैदावार और उत्पादन भी और रसायन खेती से काफी अच्छा मिलता है। हालांकि शुरूआती कुछ सालों में उत्पादन कुछ काम रहता है लेकिन अब वह इससे अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। किसानों ने बताया कि वह पहली बार 1995 में आॅर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए सरकारी कृषि संस्थान में गए थ। तब से ही वह इस खेती को करते आ रहे हैं। उसके लिए उनको कई बार सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किया जा चुका है।
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