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Wednesday, March 25, 2026
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    फूटा किसानों का गुस्सा : दीवारें कूदकर मीटिंग हॉल में पहुँचे किसान

    Farmers' anger erupted sachkahoon

    नये बनने वाले नेशनल हाईवे के लिए किसानों के ऐतराज सुनने के लिए रखी थी मीटिंग

    • बठिंडा-पटियाला में से पहुँचे थे किसान, मीटिंग हॉल में गूँजे सरकार विरोधी नारे

    सच कहूँ/सुखजीत मान, बठिंडा। भारतमाला प्रोजैक्ट के अंतर्गत बनाए जा रहे नेशनल हाईवे में आने वाली जमीनों के मालिक किसान शुक्रवार को धक्के से डीसी दफ़्तर के मीटिंग हाल में पहुंच गए। किसानों का गुस्सा यह था कि आधिकारियों द्वारा हाल में कुछ नकली किसानों को बिठा कर ही हाँ-हाँ करवाई जा रही है जबकि उन्हें तो मीटिंग के नजदीक नहीं जाने दिया। पुलिस का सख़्त पहरा भी किसानों के रास्ते न रोक सका। किसान जिला प्रशासनिक कॉप्लैक्स का गेट और दीवारें कूदकर अंदर चले गए और मीटिंग हाल की मुख्य कुर्सियों समेत वहाँ लगे मेजों पर बैठकर किसानों ने सरकार विरोधी जोरदार नारेबाजी की। नेशनल हाईवे इंस्टीट्यूट के एक अधिकारी को भी किसानों ने मीटिंग हाल में ही घेर लिया। एनएचआई की तरफ से किसानों के ऐतराज सुनने के लिए रखी गई इस मीटिंग में शामिल होने के लिए बठिंडा के अलावा पटियाला जिलों के किसान भी पहुँचे हुए थे।

    जानकारी के अनुसार नेशनल हाईवे संबंधित ऐतराज सुनने के लिए आज आधिकारियों की तरफ से मीटिंग डीसी दफ़्तर मीटिंग हाल में रखी गई थी जिस सम्बन्धित बकायदा तौर पर सबंधित गाँवों में स्पीकरों के द्वारा अनाउसमेंट करवाई गई थी कि जिन किसानों की जमीन इस हाईवे में आती है वह मीटिंग में पहुँचे। आज जब मीटिंग के समय किसान रोड संघर्ष समिति के सूबा जनरल सचिव यादविन्दर सिंह और बठिंडा जिला प्रधान इन्द्रजीत सिंह और किसान यूनियनों का नेतृत्व में डीसी दफ़्तर के पास पहुँचे तो पुलिस ने मुख्य गेट को ताला लगा दिया। जिस कारण किसानों में गुस्सा पैदा हो गया किसानों का तर्क था कि यदि उन्हें अंदर ही नहीं जाएं देना फिर बुलाया किस काम के लिए था।

    लंबा समय किसानों और पुलिस के बीच होती रही बहसबाजी के बाद भी जब किसानों को अंदर न जाने दिया तो गुस्साएं किसान गेट के ऊपर से दीवारें कूदकर अंदर चले गए। किसानों के अंदर दाखिला होते ही अधिकारी मीटिंग में से खिसक गए और किसानों ने हॉल में मुख्य कुर्सियों और वहाँ लगे मेजों पर बैठकर सरकार खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान किसानों ने एनएचआई के एक अधिकारी को मीटिंग हाल में से बाहर नहीं जाने दिया और घेराव करके नारे लगाए। किसानों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन के अलावा पंजाब सरकार भी केंद्र के साथ मिलकर रोड माफिया बनी हुई है और यह माफिया सरकार का कमाऊ पुत्र है। किसानों ने कहा कि उन्हें मीटिंग से पहले ही बता दिया था कि इस सम्बन्धित जब सरकार के साथ बात चल रही है तो मीटिंग बुलाई ही क्यों गई।

    मर जाएंगे परन्तु जमीन नहीं देंगे : किसान

    मीटिंग में शामिल होने पहुँची वृद्ध महिला किसान जंगीर कौर ने कहा कि वह अपने खेतों में से सड़क नहीं निकलने देंगे क्योंकि अगर सड़क निकल गई तो जमीन दे दो टुकड़े हो जाएंगे। उन्होंने सख़्त लहजे में प्रशाशन को चेतावनी देते कहा कि वह मर जाएंगे परन्तु जमीन नहीं देंगे।

    मीटिंग रद्द करवा दी : तहसीलदार

    काफी लंबा समय जब किसान मीटिंग हाल में ही नारेबाजी करते रहे तो प्रशासन को मीटिंग रद्द करनी पड़ी। इस दौरान किसानों को शांत करन के लिए पहुँचे तहसीलदार सुखवीर सिंह बराड़ ने कहा कि नेशनल हाईवे सम्बन्धित ऐतराज सुनने के लिए जो आज दो मीटिंगें रखी गई थी उन्हें रद्द कर दिया गया। इस आश्वासन के बाद में एक किसान नेता ने मेज पर खड़े होकर कहा कि उनका 32 साल का तुजुर्बा है। यह ऐसे ही कह देते हैं जब तक लिखित नहीं देते वह यहाँ ही बैठे रहेंगे। तहसीलदार ने किसानों को मीटिंग रद्द सम्बन्धित लिखित तौर पर भी लाकर देने के लिए कहा।

    किसानों की बात सुनकर प्रशासन द्वारा माना जाना चाहिए : एनएचआई अधिकारी

    इस दौरान किसानों ने नेशनल हाईवे इंस्टीट्यूट (एनएचआई) के एक अधिकारी सरबप्रीत सिंह को मीटिंग हाल में ही घेरे रखा। इस अधिकारी के साथ सवाल-जवाब करते किसानों ने कहा कि यदि उन्हें मीटिंग में बिठाया ही नहीं जाना था तो बुलाया ही क्यों। किसानों के इन सवालों के जवाब देते अधिकारी ने कहा कि इसके लिए वह जवाबदेही नहीं है कि उन्हें अंदर क्यों नहीं आने दिया यह स्थानीय प्रसाशन का काम है। जब पत्रकारों ने अधिकारी सरबप्रीत सिंह को पूछा कि किसानों का उनका घेराव क्यों किया है तो उन्होंने कहा कि वह इसे घेराव नहीं मानते क्योंकि उन्होंने तो खुद किसानों को यहाँ बुलाया था क्योंकि यह मीटिंग ऐतराज सुनने के लिए सार्वजनिक सुनवाई के तौर पर रखी गई थी और ऐतराज ही सुने जाने थे। अधिकारी ने तर्क दिया कि किसानों द्वारा जो बात रखी जा रही है इसको प्रशासन की तरफ से सुनकर इसको माना जाना चाहिए।

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