शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक एवं गतिशील बनाना उद्देश्य: नन्द किशोर कलाल
- महायोजना-2031 के अनुरूप आवासीय, व्यावसायिक व संस्थागत गतिविधियों का समेकित विकास
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: राजधानी दिल्ली से सटे हॉट सिटी में शुमार शहर गजियबायद में तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य और बढ़ती आबादी के दबाव को देखते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने ‘मिश्रित उपयोग’ (मिक्स यूज ) विकास अवधारणा को लागू कर दिया है। प्राधिकरण के अनुसार यह नीति एक ही भूखंड, भवन या क्षेत्र में आवासीय, वाणिज्यिक, कार्यालय, संस्थागत एवं मनोरंजन संबंधी उपयोगों को समन्वित रूप से विकसित करने की अनुमति देती है।
जीडीए वीसी नंदकिशोर का कहना है कि मिश्रित उपयोग का उद्देश्य सीमित भूमि संसाधनों का संतुलित एवं अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, अनावश्यक आवागमन को कम करना और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक एवं गतिशील बनाना है। इससे ईंधन की बचत, यातायात दबाव में कमी और पर्यावरणीय प्रदूषण में नियंत्रण संभव होगा, वहीं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। मधुबन आवासीय योजना के मिश्रित उपयोग भूखंडों के पंजीकरण हेतु 25 फरवरी 2026 से 13 मार्च 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त आवेदनों का आवंटन 18 मार्च 2026 को नीलामी के माध्यम से किया जाएगा।
इन स्थलों पर होगा अनुमन्य मिश्रित उपयोग | Ghaziabad News
-जीडीए के अनुसार मिश्रित उपयोग निम्न श्रेणियों में अनुमन्य होगा, – महायोजना के अंतर्गत चिन्हांकित क्षेत्र,स्वीकृत ले-आउट में चिन्हित भूखंड, -जैसे प्राधिकरण द्वारा विकसित मधुबन आवासीय योजना के पॉकेट ए एवं बी, -18 मीटर से कम चौड़ी अधिसूचित बाजार स्ट्रीट (निर्धारित प्रतिबंधों सहित)
-24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर स्थित भूखंड
– टीओडी (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) जोन में मिश्रित उपयोग मान्य होगा।
विकास के मानक भी हुए तय
प्राधिकरण ने मिश्रित उपयोग विकास के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं। सामान्यतः मुख्य उपयोग (जैसे आवासीय) न्यूनतम 33 प्रतिशत से अधिक तथा अन्य उपयोग 66 प्रतिशत से कम होगा और सहायक उपयोग का क्षेत्रफल मुख्य उपयोग से अधिक नहीं होगा।
भूखंड के न्यूनतम क्षेत्रफल पर कोई प्रतिबंध नहीं रखा गया है और भवन ऊंचाई पर भी सामान्यतः रोक नहीं होगी। पार्किंग, सैट-बैक, भू-आच्छादन तथा एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) महायोजना-2031 एवं भवन उपविधियों के अनुरूप निर्धारित किए जाएंगे।
प्राधिकरण का मानना है कि यह नीति गाजियाबाद को अधिक सुव्यवस्थित, आत्मनिर्भर और जीवंत शहरी स्वरूप प्रदान करेगी, जहां नागरिकों को आवास, रोजगार, शिक्षा और खरीदारी जैसी सुविधाएं एक ही परिसर या निकटवर्ती क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।
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