अनु सैनी। Holi ka Dahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा की रात मनाया जाने वाला होलिका दहन आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इसके अगले दिन रंगों का पर्व होली पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में होलिका दहन की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मुख्य सवाल यह है कि दहन 2 मार्च को किया जाए या 3 मार्च को। इस भ्रम के पीछे शास्त्रीय नियम, भद्रा का प्रभाव और पूर्णिमा तिथि की स्थिति जिम्मेदार हैं।
शास्त्रीय आधार: धर्म ग्रंथों में क्या कहा गया है?
हिंदू धर्म ग्रंथ धर्म सिंधु के अनुसार होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल में, पूर्णिमा तिथि के दौरान और भद्रा रहित समय में किया जाना चाहिए। यदि इन तीनों का संयोग एक साथ मिल जाए तो वह समय सर्वोत्तम माना जाता है। शास्त्रों में भद्रा के मुख में शुभ कार्य करना निषिद्ध बताया गया है, जबकि अत्यावश्यक स्थिति में भद्रा की पूंछ में दहन की अनुमति दी गई है। यही नियम इस वर्ष तिथि निर्धारण में उलझन पैदा कर रहे हैं।
2 मार्च 2026 की स्थिति: पूर्णिमा है, लेकिन भद्रा भी | Holi ka Dahan 2026
2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि विद्यमान है और शाम को चंद्रमा का उदय भी होगा, जो शुभ संकेत माना जाता है। लेकिन इसी समय भद्रा भी लग रही है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भद्रा में शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि यदि कोई अन्य विकल्प न हो, तो भद्रा के मुख को छोड़कर उसकी पूंछ में होलिका दहन किया जा सकता है। इस आधार पर 2 मार्च को शाम के समय दहन संभव है, लेकिन इसे पूर्णतः श्रेष्ठ नहीं कहा जा रहा।
3 मार्च 2026: भद्रा रहित समय का महत्व
3 मार्च को भद्रा नहीं है, जो इस दिन का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष है। यद्यपि प्रदोष काल में पूर्णिमा समाप्ति की ओर होगी, लेकिन दिन के समय पूर्णिमा तिथि उपलब्ध रहेगी। शास्त्रीय नियमों के अनुसार यदि पूर्णिमा दिन में हो और भद्रा न हो, तो दहन किया जा सकता है। इसलिए अधिकांश विद्वान 3 मार्च को होलिका दहन के लिए अधिक उपयुक्त मान रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य की राय: किस दिन करें दहन?
हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य मनोज त्रिपाठी के अनुसार इस वर्ष भ्रम की दो वजहें हैं—पहली, 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा है लेकिन भद्रा भी है; दूसरी, 3 मार्च को भद्रा नहीं है लेकिन प्रदोष काल में पूर्णिमा का संयोग नहीं बन रहा। सभी शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए वे 3 मार्च को भद्रा रहित समय में दहन को अधिक उपयुक्त मानते हैं।
होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 3 मार्च 2026 को शाम 6 बजकर 24 मिनट से रात 8 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए शुभ माना गया है। यह प्रदोष काल के समीप का समय है और भद्रा रहित होने के कारण इसे शास्त्रसम्मत माना जा रहा है।
रंगों वाली होली कब मनाएं?
यदि 3 मार्च की शाम को होलिका दहन किया जाता है, तो परंपरा के अनुसार रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यही क्रम धार्मिक दृष्टि से उचित माना जा रहा है।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव: क्या पड़ेगा असर?
इस वर्ष 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, जिसकी अवधि दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक बताई जा रही है। हालांकि यह ग्रहण ‘गृहस्तोदय’ स्थिति में रहेगा, अर्थात जब चंद्रमा दिखाई देगा तब तक ग्रहण लगभग समाप्त हो चुका होगा। ग्रहण का प्रभाव केवल पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा, इसलिए पूरे देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा। Holi ka Dahan 2026
भद्रा और प्रदोष काल का धार्मिक महत्व
भद्रा को ज्योतिष में अशुभ काल माना गया है और उसके मुख में कोई भी शुभ कार्य वर्जित बताया गया है। वहीं प्रदोष काल दिन और रात के संधिकाल का समय है, जिसे देवताओं की कृपा का विशेष समय माना जाता है। इसी कारण होलिका दहन प्रदोष काल में करने की परंपरा प्रचलित है।
किस दिन करना रहेगा उचित?
सभी शास्त्रीय और ज्योतिषीय तथ्यों की तुलना करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि 3 मार्च 2026 को भद्रा रहित समय में होलिका दहन करना अधिक उचित और सुरक्षित माना जा रहा है। हालांकि 2 मार्च को भी विशेष परिस्थितियों में दहन संभव है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च का विकल्प अधिक श्रेष्ठ माना गया है। इस प्रकार 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को मनाना धार्मिक दृष्टि से अधिक अनुकूल रहेगा।
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