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    ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से पूज्य गुरु जी ने छुड़वाया लाखों का नशा व बुराईयां

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    MSG Business Tips | बिजनेस में कैसे करें तरक्की, Saint Dr. MSG ने दिए Tips

    सच कहूँ/सुनील वर्मा
    बरनावा/ मालिक का नाम सुखों की खान है, पर कैसे है? आम आदमी सोचता है कि मेरे पास गाड़िया है, बच्चे है, घर है, अच्छा असर है और खाने को सब कुछ है। इसलिए मैं क्यंू जपु प्रभु का नाम। मुझे क्या फायदा है राम-नाम लेने का। क्योंकि आज का इंसान फायदे के बिना कुछ बोलना नहीं चाहता, फायदे के बिना कुछ बताना नहीं चाहता। फायदे के बिना चलना नहीं चाहता और कुछ तो ऐसे भी इंसान है जो फायदे के बिना सोना भी नहीं चाहते। हालांकि सोने में इंसान को फायदा ही फायदा है। आदमी सोचता है कि अगर मैं राम का नाम लूं तो मुझे पता चलना चाहिए कि मुझे उसका क्या फायदा है। राम का नाम लेने में बहुत सारे फायदे हैं। उक्त उद्गार पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रविवार को आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से रूहानी सत्संग में फरमाये। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने उत्तर प्रदेश के सहारणपुर स्थित मेला ग्राउंड देवबंद, डीएवी इंटर कॉलेज बिजनौर, नामचर्चा घर पूर्वी मुजफ्फर नगर, मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित नामचर्चा घर जाटखेड़ा, हरियाणा के पानीपत स्थित दशहरा ग्राउंड, नामचर्चा घर तोशाम रोड भिवानी, दार्जिलिंग में श्री पंचमुखी बालाजी धाम सिलीगुड़ी, गुजरात के मेहसाणा स्थित जीआईडीसी हॉल, हैदराबाद के दिलसुख नगर स्थित भाग्यश्री फंक्शन हॉल, महाराष्ट्र के आटपाड़ी नामचर्चा घर, पंजाब के सलाबतपुरा स्थित शाह सतनाम जी रूहानी धाम राजगढ़, छत्तीसगढ़ के शाह सतनाम जी सर्वकल्याण आश्रम गतौरी बिलासपुर, राजस्थान के शाह सतनाम जी दयापुर धाम कोटा व दिल्ली के नार्दन रेलवे कॉलोनी बारात घर तुगलकाबाद सहित सभी जगहों पर लाखों लोगों का नशा व अन्य सामाजिक बुराइयां छुड़ाते हुए उन्हें गुरुमंत्र, मैथ्ड आॅफ मेडिटेशन प्रदान किया। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने राम का नाम लेने में क्या-क्या फायदा है, के बारे में भी विस्तार से समझाया।

    राम नाम से बिना फीस दिए आत्मबल बढ़ता है

    पूज्य गुरु जी ने कहा कि कोई भी बिनजेस, व्यापार तब बुलंदियों पर जाता है, जब इंसान के अंदर हौंसले बुलंद होते है। जब आदमी के अंदर आत्मबल, बिल पॉवर होता है तो हर बिजनेस में, हर व्यापार में अच्छे आइडियाज आते है और जब इंसान के अंदर अच्छे आइडियाज आ जाते है तो उनको लागू करने की हिम्मत होनी चाहिए। एक आत्मबल होना चाहिए। तो वो आइडियाज जैसे जैसे लागू होते जाएंगे तो वैसे-वैसे ही बिजनेस व्यापार बढ़ता जाएगा। पूज्य गुरु जी ने कहा कि इस प्रकार जब इंसान के अंदर आत्मबल होगा, बुलंद हौसले होंगे तो इंसान बिजनेस में तरक्की कर पाएगा। साथ में देखने का नजरिया भी बदलेगा। पूज्य गुरु जी ने बताया कि राम-नाम के जाप से बिना कोई फीस दिए आत्मबल जबरदस्त तरीके से बढ़ेगा और बिजनेस व्यापार में इससे अपने आप फायदा होगा।

    छाया: सुशील कुमार

    राम नाम का नहीं कोई साइड इफेक्ट

    पूज्य गुरु जी ने राम-नाम के बारे में बताते हुए फरमाया कि राम नाम सारी दुनिया की सभी परेशानियों का एक मात्र हल है। जो अनमोल होते हुए भी बिना मोल के संतों के दरबार में मिलता है। दुनिया में हर चीज का मोल है। अगर इंसान में कोई गुण आ जाता है तो वह दूसरों को फ्री में नही बताता। लेकिन संत एक ऐसे होते है जो वो सीख लेते है उसको सबको बताते है। क्योंकि संत भगवान के नौकर होते है, भगवान ही उन्हें भेजता है एक सेवादार बनाकर । ताकि समाज की सेवा कर सकें। राम का नाम एक ऐसी चीज है जो हर दुनिया के रोग की, हर परेशानी की, हर मुश्किल की एक मात्र ऐसा दवा है जो अनमोल होते हुए भी बिना मोल के मिलती है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि दुनिया की हर एक दवा के साइड इफेक्ट हो सकते है, लेकिन राम नाम का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

    छाया: सुशील कुमार

    रिश्ते सुधारने में काम आता है राम-नाम

    क्या आत्मबल रिश्तों पर भी असर डालता है, के बारे में बताते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि राम का नाम रिश्तों पर भी असर डालता है। जैसे-जैसे इंसान राम का नाम लेता है तो उसमें संयम आएगा, सहने की शक्ति आएगी, दिमाग में शांति आएगी। जिनके अंदर संयम होता है, मानसिक और आत्मिक शांति होती है वो कभी भी जल्दी उत्तेजित नहीं होते। जल्दी गुस्से में नहीं आते। आज के समय में रिश्तों का सबसे बड़ा दुश्मन है गुस्सा। जब इंसान का गुस्सा भड़क जाता है तो इगो भड़क जाती है और फिर रिश्ते तार-तार हो जाते है। इसलिए जब इंसान राम का नाम लेता है तो उसका दिमाग शांति से भर जाएगा और संयम आ जाएगा। इससे एक-दूसरे की कही बात पर इमिजेटली रिएक्शन नहीं करेंगे और रिश्ते बने रहेंगे।

    इंसान के सेहत की गारंटी देता है प्रभु का नाम

    मनुष्य की सेहत के लिए भी क्या प्रभु का नाम फायदेमंद है, के बारे में समझाते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इंसान दुनियावी कोईचीज लेकर आता है तो उसे उसकी कुछ न कुछ गारंटी जरूर मिलती है। लेकिन इंसान को अपने शरीर की कोई गारंटी नहीं है कि वह कब तक स्वस्थ रहेगा, कब तक तंदुरुस्त रहेगा। लेकिन अगर इंसान राम, नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा के नाम का जाप करता है तो इंसान के अंदर एक ऐसी गारंटी आ जाती है कि उसके शरीर में कोई रोग आया तो भी आत्मबल के द्वारा उसे बहुत जल्द रिकवर कर पाएंगे यानी जल्दी ठीक हो पाएंगे। यह बात अब वैज्ञानिक भी मान चुके है। मेडिटेशन अपने आप में एक बहुत बड़ी पॉवर है। मनुष्य मेडिटेशन के द्वारा अपने डीएनए को ठीक कर सकता है। मेडिटेशन के लिए इंसान को सुबह-शाम एक-एक घंटा समय लगाना होगा। लेकिन इंसान प्रभु परमात्मा का नाम लेता नही। इस प्रकार हम कह सकते है कि जो इंसान राम नाम लेता है तो वह उसके लिए सेहत की गारंटी बन जाता है।

    छाया: सुशील कुमार

    परमात्मा का नाम लेकर बनाए खाना

    मेडिटेशन से क्या आने वाली औलाद का भी फायदा हो सकता है, के बारे में बताते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अगर एक मां मेडिटेशन करते हुए खाना बनाती है तो आने वाले बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार पर पॉजिटिव असर होता है। धर्मो में कहा गया है कि जैसा खाओ अन, वैसा होए मन। वैज्ञानिक भी मनाते है कि इंसान खाना खाते समय जिस प्रकार की चीज देखता जाता है, उसके अंदर उसी प्रकार के विचार, ख्याल जरूर आते हैं। इसलिए गुरुमंत्र, मैथ्ड आॅफ मेडिटेशन इंसान की आने वाली पीढ़ियों पर भी असर डालता है। जब प्रभु के नाम का जाप करके खाना बनाया जाता है तो एक ऐसी अदृश्य किरणें घर के बाहर फैल जाती है जो इंसान को अंदर से हौंसला देती है और परिवार को हमेशा आत्मबल देती रहती है।

    राम नाम से मनुष्य के अंदर हमेशा पॉजिटिव विचार आते रहेंगे

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि भक्ति करने से इंसान के अंदर ही शांति नहीं आती बल्कि मनुष्य की आने वाली औलाद, आने वाले परिवार, आने वाले समय का भी समाधान है प्रभु का नाम। इस प्रकार हम कह सकते है कि इंसान जो मर्जी टॉपिक चुन ले, सभी पर राम का नाम असर करता है। राम का नाम इंसान का चरित्र निर्माण करने में सहायक है। राम नाम से मनुष्य के अंदर हमेशा पॉजिटिव विचार आते रहेंगे और जो आदमी पॉजिटिव होता है वो समाज,परिवार और घर का भला जरूर करता है। जो इंसान नेगेटिव होता है, उसकी सोच छोटी यानी तंग दिली वाली हो जाती है और उसे कभी संतुष्टि आती नही। जब इंसान को संतुष्टि नहीं आती तो अगर वह अरबपति भी है तो भी वह दु:खी रहता है। अगर संतुष्टि है तो रोज दिहाड़ी करके खाने वाला इंसान भी सुखी है।

    क्या है संतुष्टि के बारे में समझाया

    छाया: सुशील कुमार

    असल में संतुष्टि किसे कहा जाता है के बारे में बताते हुए आप जी ने फरमाया कि जिस इंसान के पास जितना कुछ है, उसका सुख लो और जो उसके पास नहीं है उसको पाने के लिए कड़ी मेहनत करो तथा टेंशन ना करों, इसका नाम है संतुष्टि। हाथ पर हाथ धरके बैठने को संतुष्टि नहीं कहा जाता। पूज्य गुरु जी ने कहा कि इंसान को टेंशन फ्री होकर मेहनत करनी चाहिए और जो इंसान के पास है उसका सुख लो और दूसरों को सुख दो, दूसरों का भला करों। जब इंसान दूसरों का भला करता है तो भगवान इंसान को खुशियां व शांति देता है। जो इंसान मेहनत की करके खाते है तो उनको टेंशन नहीं लेनी चाहिए। मेहनत की करके खाना बुरा नहीं है। इसमें चाहे इंसान रेहड़ी लगाकर , चौकीदारी करके कमाता है, उसमें गलत कुछ नहीं है। मेहनत मेहनत है और जो हक हलाल की कमाई होती हैवो एक दिन रंग जरूर लाती है और बेईमानी ठगी की कमाई किसी को चैन से सोने नहीं देती। पाप जुल्म की कमाई, ठगी बेईमानी की कमाई कभी फलती-फलती नहीं है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि जब इंसान को रात को नींद और दिन में चैन नहीं आता तो क्या फायदा उस कमाई का। आप जी फरमाया कि अगर इंसान सुखी और शांति की जिदंगी जीना चाहता है तो उसे लोभ लालच के पीछे नही पड़ना चाहिए।

    महान वही जिसे इतिहास रखता है याद

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि एक महान बदा, इंसान वही होता है जिसे पूरा इतिहास याद रखता है और जो पूरे समाज के काम आ जाए। इसके अलावा उन्हें कोई याद नहीं रखता जो लोगों का खून चुस-चूसकर कर और धनाड़ होकर गुजर गए। जिनके सिक्के चला करते थे, आज उनका नामो निशान नही और उनके परिवार कही दिखाई भी नहीं देते। जो संत, भगत, महान पुरुष हुए , जिन्होंने समाज का भला किया, उन संतों का, उन पीर पैगंबरों का, उन गुरुओं का आज भी करोड़ों दिलो में वास है और आज भी करोड़ों दिलो में उनके लिए सत्कार है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि जिदंगी इंसान की है और अच्छे बुरे कर्मो के बारे में बताना हमारा काम है और मर्जी इंसान की है कि वह कैसे कर्म करता है। साथ में पूज्य गुरु जी ने कहा कि हम तो चौकीदार है। हमारा मकसद समाज का भला करना है। क्योंकि जो मालिक की औलाद होती है वो एक संत की औलाद होती है। इसलिए यही चाहते हैं कि सभी का भला हो और मालिक सभी का भला करें।

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