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    91 साल के जवान ईलम चंद इन्सां ने बेंगलुरु में स्वर्ण सहित दो पदक जीते

    Sirsa News

    सरसा (सच कहूँ न्यूज)। रुहानी प्रेरणा व दृढ़ विश्वास के साथ मनुष्य हर मंजिल पर जीत पा सकता है। यह सिद्ध करके दिखाया है 91 वर्षीय ईलम चंद इन्सां ने, जो बढ़ती उम्र और बीमारियों को मात देकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय योग व एथलीट प्रतियोगिताओं (International yoga and athletics competitions) में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। Sirsa News

    मेडल मशीन के नाम से मशहूर ईलम चंद इन्सां ने इस बार 4 से 9 मार्च 2025 तककर्नाटक के बेंगलुरु शहर स्थित कांटेरावा इंडोर स्टेडियम और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मैदान में करवाई गई 45वीं राष्ट्रीय मॉस्टर्स चैम्पियनशिप में 85 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की पोल वाल्ट स्पर्धा में स्वर्ण और ऊंची कूद में रजत पदक जीता। हरियाणा की ओर से खेलते हुए 91 वर्षीय वयोवृद्ध खिलाड़ी ने ध्वजवाहक की भूमिका भी निभाई। इस चैम्पियनशिप में हरियाणा राज्य से 27 महिला खिलाड़ियों सहित 114 खिलाड़ियों ने भाग लिया और पदक अपने नाम किए। योगा कोच ईलम चंद ने अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय डेरा सच्चा सौदा सरसा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं और रहमत को दिया।

    अब तक जीत चुके 530 से ज्यादा पदक | Sirsa News

    वयोवृद्ध एथलीट ईलम चंद इन्सां अब तक वह 530 से भी अधिक पदक जीत चुके हैं जिसमें 113 अंतर्राष्ट्रीय, 240 राष्ट्रीय तथा अन्य जिला, ग्रामीण स्तर पर पदक अपने नाम कर चुके हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा लाइफ अचीवमेंट अवार्ड, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा सम्मान और महामहिम उप राष्टÑपति वैंकेया नायडू स्पोर्ट्समैन एडवेंचर में वयोवृद्ध सम्मान से पुस्कृत हैं।

    यू बदली जिंदगी | Sirsa News

    सन 2000 में ईलमचंद शुगर और खांसी जैसी बीमारियों के साथ बुरी तरह परेशान हो गए थे। उन्होंने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से एक मुलाकात के दौरान अपनी शारीरिक परेशानियों के बारे में चर्चा की तो पूज्य गुरु जी ने उन्हें कसरत व योग करने की सलाह दी।

    मूल रुप से उत्तरप्रदेश के बागपत जिले के गांव रणछाड़ के रहने वाले ईलम चंद इन्सां वर्तमान में डेरा सच्चा सौदा में स्थित गांव शाह सतनाम जी पुरा में रहते हैं। खेलने से पूर्व वह 16 वर्ष तक स्कूल के प्रिंसीपल की सेवाएं दे चुके हैं। योग की शुरुआत उन्होंने सन् 2000 में की। तब से यह जिस भी प्रतियोगिता में खेलने जाते हैं, वहां से कई पदक जीतकर ही लौटते हैं। Sirsa News

    Bangalore News: बेंगलुरु में अनाथ बच्चों के लिए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार आगे आए

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