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    बिंदोरी निकाल समझाया बेटियों का महत्व

    Importance of Daughters sachkahoon

    हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। समाज के बदलते परिवेश और शिक्षा के विकास के कारण अब रूढ़िवादी परंपराओं को जनता धीरे-धीरे तिलांजलि देने लगी है। जहां पहले बेटियों को समाज में बोझ समझा जाता था, वहीं अब शिक्षा और जागरुकता की वजह से जनता की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका उदाहरण देखने को मिला जंक्शन की सिविल लाइन कॉलोनी में, जहां सिविल लाइन कॉलोनी निवासी देवीलाल कालवा ने अपनी छोटी लाडो मंजू की बिंदोरी निकाल समाज को बेटियों का महत्व (Importance of Daughters) समझाते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। बेटी को घोड़ी पर बैठा बिंदोरी निकालने की पहल की कॉलोनीवासियों ने भी सराहना की।

    मंजू को घोड़ी पर बैठाकर बैंड बाजे के साथ रस्म निभाई गईं। इस दौरान परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों ने नाच-गाकर जश्न मनाया। वहीं शादी से पहले परिवार की ओर से निभाई जा रही रस्मों को देखकर मंजू भी गदगद नजर आई। लाडो मंजू के पिता देवीलाल कालवा वर्तमान में कृषि उपज मण्डी समिति घड़साना में सचिव पद पर कार्यरत हैं। देवीलाल कालवा ने बताया कि उसकी दो बेटियां और एक बेटा (Importance of Daughters) है। उसने अपनी दोनों बेटियों की बेटों की तरह परवरिश कर उच्च शिक्षित दिलाई। उसकी छोटी बेटी मंजू ने किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली जबकि बड़ी बेटी अंजना ने जयपुर से पढ़ाई पूर्ण की।

    कालवा ने कहा कि बेटियां आज के जमाने में बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। हमें लड़का-लड़की में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्हें समान अवसर प्रदान करने चाहिएं ताकि समाज में फैली हुई धारणाओं से बचा जा सके। दुल्हन मंजू के अनुसार उनके परिवार में बेटियों को पूरा मान और सम्मान मिलता है। परिवार ने कभी भी उन बहनों और भाई के बीच कोई भेदभाव नहीं किया। उसकी शादी में लड़कों के जैसे ही पूरे रस्म-रिवाज निभाए जा रहे हैं।

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