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    इमरान का ‘युद्ध ड्रामा’

    Imran's war drama Pakistan

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर मामले में भारत को अप्रत्यक्ष रूप से परमाणु बम की धमकी देकर ड्रामेबाजी की हदें पार कर दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई समर्थन नहीं मिलने के बाद बौखलाट में आकर खान कह रहे हैं कि कश्मीर के लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जा सकता है। इमरान यह भूल रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माहौल पाकिस्तान के खिलाफ चल रहा है। वह कश्मीर के लिए जिस संयुक्त राष्ट्र में जाने की बात कर रहे हैं वह संयुक्त राष्ट्र ही परमाणु हथियारों व परमाणु युद्ध के खिलाफ है। कोई भी देश परमाणु युद्ध की वास्तविक्ता को स्वीकार नहीं कर रहा है। खुद पाकिस्तान के शासकों का कहना है कि भारत पाक के बीच युद्ध मूर्खता होगी। सैनिक ताकत की तुलना करें तो पाक बहुत पीछे है।

    वास्तव में इमरान खान अपने देश की लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं जिस देश की अर्थव्यवस्था को पिछले 50 वर्षों से उनके शासकों ने ही खराब किया हो, भले उसे इमरान एक चुटकी में कैसे ठीक कर सकते हैं? कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान ने अपनी आर्थिकता और अमन-शांति को गंवा लिया है, लेकिन वास्तविक्ता को पहचानने का प्रयास नहीं किया। भारत में केंद्र में भले ही कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा, दोनों पार्टियां ही कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानती हैं, जहां तक कश्मीर में पाक से सप्लाई हो रहे आतंकवाद का ताल्लुक है पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ है। मामला अमन-शांति व बातचीत से ही सुलझना है। भारत ने बातचीत से पहले अमन की शर्त रखी है जिसे पाक ने यकीनी नहीं बनाया।

    पाकिस्तान में चुनावी राजनीति हावी है। इमरान की नाकामियों के कारण विपक्षी दल विशेष तौर पर पाकिस्तान पीपुल्ज पार्टी (पीपीपी) दबाव में है। दरअसल इमरान भारत को टक्कर देने की बजाय बिलावल भुट्टो को टक्कर दे रहे हैं, जो प्रधानमंत्री पत्रकारों को गुस्से में आकर कहता है कि क्या अब वे भारत पर हमला कर दें (भाव हमले के समर्थन में नहीं) और वही प्रधानमंत्री कश्मीर के लिए परमाणु हमले की धमकी दे, विश्वास नहीं आता और यह सरासर ड्रामा नजर आता है। परमाणु युद्ध से क्या नुक्सान होगा, हमलावर बचेगा या निशाना बचेंगे, इसका अंदाजा खुद इमरान खान नहीं लगा सकते। पाकिस्तान को कश्मीर के लिए अपना अस्तित्व दांव पर लगाने की बजाय मामले का शांतिपूर्वक तरीके से समाधान निकालना चाहिए। इमरान मामले को इस तरह न पेश करें कि भारत ने धारा 370 हटाकर पाक के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है।