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Sunday, March 1, 2026
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    Naxal Encounter: भारत का ‘मोस्ट-वांटेड’ नक्सल कमांडर माडवी हिडमा एनकाउंटर में ढेर

    Naxal Encounter

    अमरावती/इंफाल। नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले के घने मारेदुमिली जंगलों में हुए एक मुठभेड़ में कुख्यात माओवादी नेता माडवी हिडमा को ढेर कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 51 वर्षीय हिडमा- जिसे संतोष नाम से भी जाना जाता था- लंबे समय से CPI (माओवादी) की सैन्य गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। मुठभेड़ स्थल से उसकी पत्नी मदकम राजे सहित चार अन्य माओवादी भी मृत पाए गए। Naxal Encounter

    सूत्रों ने बताया कि यह पूरा दल छत्तीसगढ़ की सीमा से निकलकर आंध्र प्रदेश के जंगलों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, तभी सुबह करीब छह से सात बजे के बीच ऑपरेशन में उनका सामना सुरक्षा बलों से हो गया। हाल के दिनों में मिले इनपुट्स के आधार पर आंध्र प्रदेश पुलिस, ग्रेहाउंड दस्ता और पड़ोसी राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से इस क्षेत्र में घेराबंदी की थी।

    माडवी हिडमा कौन था?

    छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पुरवती गांव में जन्मा हिडमा दसवीं कक्षा तक पढ़ा था। कम उम्र में ही उसने माओवादी संगठन का रुख किया और अपने कठोर प्रशिक्षण, गुरिल्ला युद्धकौशल व जंगल परिचालन की क्षमता की वजह से संगठन में तीव्र गति से ऊपर पहुंचा। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर–1 का नेतृत्व उसके हाथ में था और वह दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति का अहम सदस्य था। बस्तर संभाग में होने वाली कई नक्सली कार्रवाइयों की कमान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसी के पास रहती थी।

    रिपोर्टों के अनुसार, हिडमा कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था — जिनमें दंतेवाड़ा, दरभा घाटी और सुकमा के विनाशकारी हमले शामिल हैं। वर्ष 2010 के ताड़मेटला नरसंहार में CRPF के 76 जवानों की शहादत के पीछे भी उसका हाथ माना जाता रहा है।

    वांछित सूची में था नाम

    नक्सल हिंसा में उसकी भूमिका को देखते हुए उसके सिर पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था और NIA की मोस्ट वांटेड सूची में उसका नाम शीर्ष पर था। कुछ वर्ष पहले कम स्तर पर गिरफ्तार होने के बावजूद वह दोबारा संगठित होकर संगठन में शीर्ष कमांडरों में गिना जाने लगा था।

    माडवी हिडमा का खात्मा ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अगले कुछ महीनों में अभियान तेज करने का संकल्प लिया है। सुरक्षा बलों का मानना है कि हिडमा की मौत माओवादी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगी। Naxal Encounter