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    हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए आमीर के शव को कब्र से निकालने का निर्देश

    Hyderpora Encounter

    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बनिहाल निवासी अमीर माग्रे के शव को निकालने का निर्देश जारी किया। यह व्यक्ति पिछले साल नवंबर में हैदरपोरा में विवादास्पद मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक था। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह अमीर माग्रे के शव को जम्मू के गूल रामबन में उनके गृहनगर ले जाने की सुविधा प्रदान करे और यदि शव सड़ गया है, तो सरकार पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा दे। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 15 नवंबर को पुलिस ने कहा था कि हैदरपोरा में एक मुठभेड़ के दौरान एक विदेशी आतंकवादी सहित चार लोग मारे गए। परिजनों ने हालांकि आरोप लगाया था कि इस दौरान मारे गए अल्ताफ भट, मुदस्सिर गुल और अमीर माग्रे श्रमिक और निर्दोष थे।

    चारों के शवों को सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के वाडर पाईन में दफनाया गया था। इस घटना के बाद लोगों के आक्रोश के मद्देनजर पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि एक डॉक्टर (मुदस्सिर गुल) और एक व्यवसायी (अल्ताफ भट) को या तो आतंकवादियों द्वारा मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था या मुठभेड़ के दौरान उनके द्वारा मार दिया गया था। पुलिस ने कहा था कि गुल ने आतंकियों को पनाह दी थी। एसआईटी ने हालांकि कहा था कि माग्रे गुल के कार्यालय में काम करता था मारे गए पाकिस्तानी आतंकवादी का करीबी सहयोगी था। विरोध प्रदर्शन के के बाद, भट और गुल के शवों को कब्र से निकाल कर परिवार वालों को सौंप दिया गया था। आमिर के पिता मोहम्मद लतीफ माग्रे ने बाद में अपने पुत्र के शव की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।

    न्यायाधीश संजीव कुमार ने याचिका की अनुमति दी और सरकार को याचिकाकर्ता की उपस्थिति में वडर पाईन कब्रिस्तान से आमिर के शव को निकालने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, “प्रतिवादी परंपराओं, धार्मिक दायित्वों और धार्मिक आस्था के अनुसार अपने मूल कब्रिस्तान में दफनाने के लिए याचिकाकर्ता के गांव में शव के परिवहन के लिए उचित व्यवस्था भी करेंगे …”

    न्यायालय ने कहा कि सरकार शव को निकालने, परिवहन और दफनाने के संबंध में कोई भी उचित नियम और शर्तें लागू करने के लिए स्वतंत्र है। न्यायालय ने कहा, “चूंकि मृतक का शरीर सड़न के अग्रिम चरण में होना चाहिए, इसलिए यह वांछनीय होगा कि प्रतिवादी तत्परता के साथ कार्य करें तथा समय बर्बाद न करें। यदि शरीर अत्यधिक सड़ा हुआ है और वितरण योग्य स्थिति में नहीं है या सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए खतरा पैदा करने की संभावना है, तो याचिकाकर्ता और उसके करीबी रिश्तेदारों को वाडर पाईन कब्रिस्तान में ही उनकी परंपरा और धार्मिक विश्वास के अनुसार अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी जाएगी।” न्यायालय ने निर्देश दिया “इस स्थिति में सरकार याचिकाकर्ता को उसके पुत्र का शव रखने के उसके अधिकार से वंचित करने के लिए पांच लाख रुपये का मुआवजा देगी और उसे पारिवारिक परंपराओं, धार्मिक दायित्वों और विश्वास के अनुसार सभ्य अंत्येष्टि करने की अनुमति देगी।”

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