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    जाधव मामला: किसी भी हद तक गिर सकता है पाक

    Jadhav case: Pak can fall to any extent

    नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी आईसीजे ने पाकिस्तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में न केवल जाधव की फांसी की सजा पर रोक को बरकरार रखा बल्कि इस पर पाकिस्तान को पुनर्विचार करने के लिए भी कहा। आईसीजे के इस फैसले के बाद भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों से लेकर विपक्ष के नेताओं ने फैसले का स्वागत किया। फैसले से देशभर में खुशी का माहौल है। वहीं अब इस मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का बयान भी आ गया है। इमरान खान ने ट्विट करके कहा है कि ‘‘आईसीजे का फैसला बरी करने, रिहा करने और कुलभूषण को वापस भारत भेजने का नहीं है। वह पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ अपराधों के लिए दोषी है। पाकिस्तान कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा।’’ वहीं पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को ‘‘पाकिस्तान की जीत’’ बताया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बयान दिया कि, हम एक बार फिर पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वह कुलभूषण को रिहा करे।

    कथित जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां की 25 दिसंबर 2018 को को पाकिस्तान में मुलाकात के दौरान पाक के अमानवीय रवैये की जितनी भर्त्सना की जाए वो कम है। जाधव के परिवार की मुलाकात के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस मुलाकात के दौरान भारतीय संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का ख्याल नहीं रखा गया। मुलाकात से पहले कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां की चूड़ियां, बिंदी और मंगलसूत्र उतरवाए गए, उनके कपड़े बदलवाए गए और उनके जूते भी वापस नहीं हुए। पाकिस्तान मानवता का दुश्मन कैसे है, यह दुनिया को इस मुलाकात के तरीके से अब अच्छी तरह से पता चल गया जो मानवता के दुश्मन हैं, उनसे मानवता की अपेक्षा करना ही भूल है।

    10 अप्रैल, 2017 को पाकिस्तानी सैन्य अदालत यानी एफजीसीएम ने जिस तरह से कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई, और हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने उसी साल 18 मई को स्टे दिया था। वह पाकिस्तान के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के दोहरे रवैये पर गहरे सवाल खड़े करता है। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से कुलभूषण की फांसी रुकवाकर भले ही भारत ने बड़ी कामयाबी हासिल कर ली हो लेकिन उससे उसकी प्राणरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।

    पाकिस्तान ने इस मामले को इतना पेचीदा बना दिया है कि कुलभूषण की रिहाई बहुत मुश्किल होगी क्योंकि ऐसा होने पर उसके झूठ का पुलिंदा पूरी दुनिया के सामने खुल जायेगा। भारत सरकार के हाथ इस प्रकरण में काफी बंधे हुए हैं। किसी शत्रु राष्ट्र के व्यक्ति को जासूस बताकर पकड़ने के बाद कोई देश आसानी से नहीं छोड़ता, फिर पाकिस्तान का रिकार्ड ऐसे मामलों में बहुतही दागदार रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का ताजा फैसला काफी हद भारत के पक्ष में है। ऐसे में अंदर ही अंदर पाकिस्तान काफी भन्नाया हुआ है। आईसीजे के आदेश उसे कुलभूषण की फांसी तो रोकनी पड़ी किन्तु ये मान लेना कि वह अपने रुख में नरमी लाएगा, गलत है।

    पाकिस्तान की हालत तब पस्त हो जाती है, जब अमेरिका का कोई जासूस उसके यहां पकड़ा जाता है। 2011 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू क्रैग बैरेट बेनजीर भुट्टो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ा गया था। उसे कुछ दिन गेस्ट हाउस में रखने, ‘खातिर तवज्जो’ के बाद वापस अमेरिका भेज दिया गया। मैथ्यू क्रैग बैरेट इस घटना से पूर्व एक बार और पाकिस्तान में गिरफ्तार हुआ था। एक और अमेरिकी नागरिक रेमंड डेविस ने 27 जनवरी, 2011 को लाहौर में दो पाकिस्तानियों को पीछा करते समय उन्हें गोलियों से उड़ा दिया था। उसे ‘विएना कन्वेंशन’ के तहत डिप्लोमेटिक छूट का मामला बनाकर ससम्मान अमेरिका भेज दिया गया। रेमंड डेविस सीआईए का जासूस था। उसके विरुद्ध पाकिस्तान में कोर्ट मार्शल क्यों नहीं हुआ? इस प्रश्न को पूछा जाना चाहिए। जब पश्चिमी देशों के जासूस इनकी नजर में आते हैं, तब पाक सेना और खुफिया के लोग किस तरह चुप्पी साध लेते हैं, ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं।

    भारतीय को मृत्युदंड देने का काम पाकिस्तान पहले भी कर चुका है। पाकिस्तान ने सबसे पहले एक भारतीय नागरिक शेख शमीम को 1999 में फांसी पर लटका दिया था। एक और भारतीय रवीन्द्र कौशिक, जासूसी के आरोप में मुलतान जेल में सोलह साल से बंद थे, जिनकी मौत 2001 में टीबी से हो गई। सरबजीत सिंह का केस बहुचर्चित है। सरबजीत को मुलतान, फैसलाबाद, और लाहौर में विस्फोटों के मामले में फंसाया गया था, जिसमें 14 पाकिस्तानियों की मौत हो गई थी। असल में पाकिस्तान पर विश्व बिरादरी की ओर से सरबजीत को रिहा करने का दबाव बनाया जा रहा था। कोट लखपत जेल में 26 अप्रैल, 2013 को सरबजीत को उसके साथ रह रहे कैदियों ने इतना पीटा कि हफ्ते भर बाद उसकी मौत हो गई। असल में पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने की भी बहुत ज्यादा फिक्र नहीं रहती। पाकिस्तान भले ही विश्व बिरादरी का सदस्य हो लेकिन उसका आचरण किसी सभ्य देश के अनुरूप नहीं होने से वह किसी भी मामले में न तो विश्वसनीय है और न ही ईमानदार।

    जाधव मामले पर जिस तरह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के ताजा निर्णय ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया है, संसद से लेकर सड़क और, देशी व विदेशी मीडिया तक जिस तरह से इस मामले का तवज्जो दे रहा है, इनसे सबसे चिढ़कर कही पाकिस्तान सरकार सरबजीत की भांति कुलभूषण की हत्या का कोई षड्यंत्र न रच दे। फिलहाल तो भारत सरकार के सारे प्रयास कुलभूषण को किसी तरह जीवित रखने पर केंद्रित होने चाहिए क्योंकि पाकिस्तान जरा सी मोहलत मिलते ही उसे सूली पर लटकाने में नहीं हिचकेगा। फिलहाल कुलभूषण की रिहाई तो दूर की कौड़ी है

    क्योंकि जब तक कोई असाधारण अंतराष्ट्रीय दबाव न आए या कुलभूषण के बदले भारत भी किसी पाकिस्तानी कैदी को रिहा न करे तब तक उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद नहीं की जा सकेगी। पाकिस्तान में फौज हमेशा ही सरकार पर भारी रहती है। भारत के लगातार दबाव और विश्व बिरादरी के सामने उसकी पोल खोलने की लगातार कोशिशों से पाक सरकार पर वहां की फौज, कट्टरवादी संगठनों और जनता का भारी प्रेशर है। बालाकोट एयर स्ट्राइक और भारतीय पायलट अभिनंदन की वापसी के बाद यह दबाव कई गुणा बढ़ा है। पाक की तमाम नापाक हरकतों और खराब रिकार्ड के बावजूद करोड़ों देशवासियों को यह उम्मीद है कि कुलभूषण जाधव की वतन वापसी होगी। ईश्वर जाधव की रक्षा करें।

     

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    आशीष वशिष्ठ