JNU Campus Controversy: नई दिल्ली। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध लगाए गए कथित आपत्तिजनक और उकसावे वाले नारों के वीडियो को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय ने इन वीडियो का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन हैं। JNU News
विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि साबरमती परिसर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा ऐसे नारे लगाए गए, जो अत्यंत आपत्तिजनक, भड़काऊ और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाले हैं। प्रशासन के अनुसार, इस तरह की भाषा न केवल परिसर में सौहार्दपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि विश्वविद्यालय और देश की सुरक्षा संबंधी भावनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
जेएनयू प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों और संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण विरोध और अपशब्दों अथवा घृणा फैलाने वाली भाषा के बीच अंतर को समझें। बयान में कहा गया कि असहमति प्रकट करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार और उकसावे वाले वक्तव्य स्वीकार्य नहीं हैं। JNU News
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की अनुचित गतिविधियाँ दोहराई जाती हैं, तो विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी से परिसर में शांति, अनुशासन और सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करने का आग्रह किया गया है। इससे पहले, जेएनयू प्रशासन ने वसंत कुंज (उत्तर) थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर को पत्र लिखकर संबंधित छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध भी किया था।
क्या है विवाद? | JNU News
यह विवाद उस समय सामने आया, जब सोमवार की रात 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में हुई हिंसा की छठी बरसी के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय के आधिकारिक पत्र के अनुसार, ‘गुरिल्ला ढाबा के साथ प्रतिरोध की एक रात’ नामक कार्यक्रम के दौरान छात्रावास के बाहर लगभग 30 से 35 छात्र एकत्र हुए थे।
बताया गया कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया, उसके बाद भीड़ के एक हिस्से ने कथित रूप से आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाने शुरू कर दिए। ये नारे बार-बार लगाए गए और उन्हें विश्वविद्यालय की आचार संहिता के उल्लंघन के साथ-साथ न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में भी माना गया।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं। भारतीय जनता पार्टी ने घटना की निंदा करते हुए विपक्ष पर ऐसे कृत्यों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि न्यायालय के फैसलों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन भड़काऊ भाषा का प्रयोग निंदनीय है। JNU News















