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    वन विभाग सख्त, फिर भी नहीं थम रही खैर तस्करी की घटनाएं

    Pratap Nagar News
    Pratap Nagar News वन विभाग सख्त, फिर भी नहीं थम रही खैर तस्करी की घटनाएं

    प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: यमुनानगर की छछरौली और कलेसर रेंज में खैर की तस्करी एक गंभीर समस्या रही है क्योंकि यहाँ की भौगोलिक स्थिति हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा से सटा होना तस्करों के लिए अनुकूल है। हरियाणा वन विभाग और वाइल्डलाइफ टीम के आधिकारिक रिकॉर्ड्स और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2020 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार खैर तस्करी के मामलों में वन विभाग ने पिछले 6 वर्षों में सैकड़ो मामले दर्ज किए है जिनमें अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की संख्या।

    • 2020-2021- 22 =130
    • 2021 – 2022     =225
    • 2022 – 2023  = 177
    • 2023 – 2025 लगभग 350

    2026 जनवरी से मार्च तक लगभग 200 | Pratap Nagar News

    मार्च 2026 की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यमुनानगर के जाटोवाला और चिकन जैसे गांवों में खैर तस्करी के 100 से अधिक मामले वर्तमान में विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।

    जनवरी से मार्च 2026 तक के शुरुआती तीन महीनों में विभाग ने अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाया है। मार्च 2026 में जाटोवाला गांव में दो घरों पर छापेमारी कर 200 क्विंटल खैर की लकड़ी बरामद की गई।

    फरवरी 2026 छछरौली रेंज में 20 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद एक पिकअप पकड़ी गई जिसमें 99 पीस खैर के लदे थे।

    जनवरी 2026 प्रताप नगर और चिकन गांव से भारी मात्रा में लकड़ी बरामद हुई और 6-7 मुख्य तस्करों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।

    तस्करी के मुख्य हॉटस्पॉट

    यमुनानगर में इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मामले पकड़े गए हैं जिनमें कलेसर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी शामिल है। यहाँ के ऊंचे दाम वाले खैर के पेड़ों पर तस्करों की नजर रहती है। छछरौली और प्रताप नगर रेंज से हिमाचल की ओर लकड़ी ले जाने के प्रयास अधिक होते हैं। चिन्हांकित जिनमें गांव जाटोवाला, चिकन,खिल्लनवाला और फतेहगढ़ खोल तस्करी के मुख्य केंद्र के रूप में उभरे है। 2026 में तस्करों ने वन विभाग के दरोगा और कर्मचारियों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की, जिससे विभाग अब पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन कर रहा है। अब तस्कर लग्जरी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं ताकि नाकों पर शक ना हो।

    इसके साथ ही यमुनानगर में खैर तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की जब्ती की संख्या में पिछले 6 वर्षों में काफी वृद्धि देखी गई है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ टीम द्वारा दी गई सूचनाओं के अनुसार, 2020 से मार्च 2026 तक यमुनानगर जिले में लगभग 85 से 110 वाहनों को खैर तस्करी के मामले में जब्त किया गया है। Pratap Nagar News

    मिले आंकड़ों के अनुसार 2020 से मार्च 2026 तक

    • पिकअप और यूटिलिटी वाहन लगभग 45
    • लकड़ी को जंगल से बाहर निकालने और सप्लाई करने के लिए लग्जरी गाड़ियाँ लगभग 20
    • पुलिस और नाकों से बचने के लिए ‘एस्कॉर्ट’ या गुप्त तस्करी के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली लगभग 15
    • दुर्गम रास्तों और खेतों से लकड़ी ढोने के लिए ट्रक और बड़े कैंटर और दूसरे राज्यों जैसे पंजाब और यूपी में बड़ी खेप भेजने के लिए
      दोपहिया वाहन लगभग 10
    • रेकी करने और छोटे टुकड़ों की तस्करी के लिए बाइक आदि लगभग 10

    2025-2026 के

    वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में विभाग ने अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे जिसके कारण तस्करों के कई वाहन पकड़े गए है। मार्च 2026 में मुजाफत कलां के पास एक यूटिलिटी वाहन पकड़ा गया जिसमें भारी मात्रा में खैर लदा था। चालक मौके से फरार हो गया।

    फरवरी 2026 में छछरौली रेंज में 20 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद 99 पीस खैर से भरी महिंद्रा पिकअप को पकड़ा गया।
    जनवरी 2026 में खिल्लनवाला और चिकन बीट से दो स्कॉर्पियो गाड़ियाँ जब्त की गईं, जिनमें लकड़ी भरकर ले जाई जा रही थी।
    अक्टूबर 2025 में एक बड़ा ट्रक और तीन मोटरसाइकिलें एक साथ पकड़ी गईं, जिनसे करीब 80 क्विंटल लकड़ी बरामद हुई।

    यमुनानगर के शिवालिक बेल्ट और कलेसर नेशनल पार्क के पास खैर की लकड़ी की तस्करी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। समय-समय पर पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई में कई नाम सामने आते रहते हैं। अधिकतर मामले ऐसे हैं जिनमें एक व्यक्ति बार बार आरोपी के रूप में शामिल रहते है। पुलिस रिकॉर्ड और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रताप नगर खैर तस्करी का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहाँ के कई “लकड़ी माफियाओं” पर पुलिस ने नकेल कसी हुई है। इसके साथ  छछरौली में अक्सर अवैध कटान की खबरें हमेशा समाचार पत्र की प्रमुख खबरें रहती है। जिला यमुनानगर उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा से लगे होने के कारण यहाँ तस्कर काफी सक्रिय रहते हैं।

    पुलिस की जांच में बार-बार यह बात सामने आती है कि यह कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक गठजोड़ है जो खैर तस्करी के मामलों को अंजाम देते रहते है। स्थानीय ग्रामीण जिन्हें थोड़े पैसों का लालच देकर पेड़ों की कटाई करवाई जाती है। ट्रांसपोर्टर्स जो रात के अंधेरे में छोटी गाड़ियों या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए लकड़ी को बाहर निकालते हैं। फैक्ट्री मालिक यमुनानगर की कई प्लाईवुड और कत्था फैक्ट्रियों पर भी समय-समय पर छापेमारी होती है, क्योंकि अवैध खैर की खपत यहीं होती है।
    हरियाणा पुलिस और वन विभाग ने हाल ही में कई बड़े कदम उठाए हैं जिसमें हिस्ट्रीशीट खोलना जिसमें बार-बार पकड़े जाने वाले तस्करों की लिस्ट तैयार की गई है। इसके साथ ही सरकार ने अब तस्करों की अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। कलेसर के जंगलों में अब ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है ताकि अवैध कटान को तुरंत पकड़ा जा सके। Pratap Nagar News

    इस बारे में वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि खैर तस्करी को रोकने के लिए टीम दिन रात क्षेत्र में गश्त करती रहती है। इसके साथ ही टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर खैर तस्करी को रोका है। स्थानीय पुलिस के सहयोग से बार बार खैर तस्करी में शामिल आरोपियों के ठिकानों पर भी छापामारी की गई और लकड़ी बरामद की गई। जंगलों की गश्त भी दिन रात की जा रही है।

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