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    लोक सभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की कमी

    Lok Sabha, Elections

    यूं तो पार्टियां जब पद बांटती हैं तो चाहवानों की लंबी कतार लग जाती है। मंत्री बनने की जद्दोजहद के बाद हाईकमान के चहेते नेता बोर्डों/ निगमों/ मार्किट कमेटी की समितियों के अध्यक्ष पद के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। पार्टियां भी चहेते नेताओं की नाराजगी से बचने के लिए नया रास्ता निकालती हंै और चार सालों तक पद खाली रखे जाते हैं। अंतिम वर्ष पद देकर नाराजगी को दूर किया जाता है। पंजाब-हरियाणा और दिल्ली में मुख्य संसदीय सचिवों के गैर-संवैधानिक पद के द्वारा भी सत्ताधारी पार्टियों ने अपने चहेतों को खुश करने का प्रयास किया है।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के कारण अमरिन्दर सरकार ने अपने प्रत्येक विधायक को एडजस्ट करने के लिए मुख्य संसदीय सचिव के पद का रास्ता निकाला। हैरत की बात है कि नेताओं की भरमार के बावजूद लोक सभा चुनाव के लिए लगभग हर पार्टी के पास योग्य उम्मीदवारों की कमी है। दरअसल राजनेताओं की जनता में घट रही लोकप्रियता कहें कि चुनाव के समय पार्टियों को उम्मीदवारों की कमी पड़ रही है। पार्टी पूरा जोर इस बात पर लगाती है कि उम्मीदवार जीतने में समर्थ हो। कई-कई बैठकों की माथापच्ची के बाद भी उम्मीदवार तय नहीं होता लेकिन नेताओं की भरमार के बावजूद मजबूत उम्मीदवार नहीं मिलता।

    अधिकतर लोक सभा सीटों पर उम्मीदवार की काबलियत का पेच फंसा हुआ है। नि:संदेह इस बात से इंकार करना कठिन है कि मेहनती, ईमानदार, लोगों की सेवा भावना वाले नेताओं की कमी है। यदि पंजाब के लोक सभा हलका बठिंडा की बात करें तब अकाली दल दो बार एमपी व मौजूदा केंद्रीय मंत्री हरसिमरत का नाम घोषित करने से झिझक रहा है। इसी तरह लुधियाना सीट से भी अकाली दल असमंजस्य में है और पार्टी प्रधान द्वारा उम्मीदवारों की कमी के कारण खुद चुनाव लड़ने की भी चर्चा है। इसी तरह पंजाब कांग्रेस भी बठिंडा से असमंजस्य में है, अमृतसर से मौजूदा सांसद कांग्रेस का होने के बावजूद डॉ. मनमोहन सिंह के नाम की चर्चा है।

    भाजपा होशियारपुर केंद्रीय मंत्री विजय सांपला को टिकट देने के लिए तैयार नहीं दिख रही। कई अन्य राज्यों में दल बदलू नेताओं को टिकटें दी गई हैं। यदि लोकप्रिय नेता ज्यादा हों, तब चुनाव पांच साल पहले ही टिकट तय हो जाती है। अमृतसर से लगातार तीन बार जीतने वाली भाजपा को कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं मिल रहा। इसी तरह हरियाणा में भाजपा को सिरसा, हिसार, कुरूक्षेत्र, रोहतक से उम्मीदवारों की कमी खल रही है। हरियाणा में कांग्रेस की भी हिसार, फरीदाबाद, गुरुग्राम से किसी मजबूत उम्मीदवार की तलाश है।

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