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    Indian Railways: रेलवे कैटरिंग नीति 2010 विवाद! विशेष समुदाय को कथित आरक्षण पर NHRC का रेलवे बोर्ड को नोटिस

    Indian Railway News

    Indian Railways Latest News: नई दिल्ली। वर्ष 2010 में रेलवे के खानपान प्रबंधन से संबंधित लागू की गई कैटरिंग नीति एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में आईआरसीटीसी की ठेका प्रक्रिया में नीतिगत परिवर्तन कर अल्पसंख्यक वर्ग, विशेषकर मुस्लिम समुदाय, को लगभग 9.5 प्रतिशत तक प्राथमिकता दी गई थी। Indian Railway News

    इस विषय को लेकर ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी’ नामक एक सामाजिक-वैधानिक संगठन ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि यह प्रावधान कथित रूप से तुष्टिकरण की सोच से प्रेरित प्रतीत होता है और संविधान की समानता की भावना के विपरीत है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था के चलते अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा तथा उनके संवैधानिक अधिकारों में अप्रत्यक्ष कटौती हुई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य पीठ, जिसकी अध्यक्षता प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं, ने रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की तथ्यों के आधार पर जांच की जाए और कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएं। Indian Railway News

    नीति वित्त और विधि निदेशालय की सहमति से तैयार की गई

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009-10 के रेल बजट भाषण में तत्कालीन रेल मंत्री ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर भोजन, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय और उच्च स्तर की स्वच्छता उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसके साथ ही जनआहार की सुविधा बढ़ाने तथा राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यंजनों को रेलवे खानपान व्यवस्था में सम्मिलित करने की बात कही गई थी।

    इन्हीं घोषणाओं के आधार पर रेलवे बोर्ड ने 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग नीति को अंतिम रूप देकर लागू किया। रेलवे बोर्ड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (पर्यटन एवं कैटरिंग) मणि आनंद द्वारा जारी पत्र में बताया गया था कि यह नीति वित्त और विधि निदेशालय की सहमति से तैयार की गई है तथा इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। इस संबंध में सभी रेलवे जोनों के महाप्रबंधकों और आईआरसीटीसी को आवश्यक निर्देश भेजे गए थे। अब, एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद, इस नीति में कथित आरक्षण प्रावधान को लेकर उठे प्रश्नों ने प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में नई बहस को जन्म दे दिया है। Indian Railway News