Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को (गुरुगद्दी से पहले) यह संदेश भिजवाया कि हरबंस सिंह (पूजनीय परम पिता जी का बचपन का नाम) अपना मकान ढहा दें और घर का सारा सामान डेरे में लेकर आ जाएँ। आप जी तो पहली बार दर्शन करते ही अपने प्यारे सतगुरु जी पर न्यौछावर हो चुके थे। MSG Maha Rahmokaram Month
जैसे ही आप जी को अपने प्यारे सतगुरु का हुक्म मिला, आपने बिना कोई देरी किए तुरंत ही कुदाल उठाई और ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा लगाकर अपने मकान को अपने ही हाथों से ढहाना शुरू कर दिया। आप जी के पूजनीय माता जी ने भी आपका साथ देते हुए कहा कि साईं जी के किसी भी आदेश को नहीं टालना चाहिए। जैसे भी वे कहें, वैसा ही करना है।
पूजनीय माता जी भी आप जी के साथ मकान ढहाने लग गईं। उसी दौरान एक प्रेमी ने आकर आप जी को सतगुरु जी का वचन सुनाते हुए कहा कि एक कमरा और एक बैठक को नहीं ढहाना है। आप जी अपने प्यारे सतगुरु की कृपा और प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए उनके आदेश अनुसार खुशी-खुशी अपना मकान ढहा रहे थे, लेकिन दूसरी ओर श्री जलालआणा साहिब का हर व्यक्ति उदास था, क्योंकि गांव का प्रत्येक निवासी आप जी से बहुत प्रेम करता था।
स्त्रोत: सच्चे रूहानी रहबर, भाग-2 | MSG Maha Rahmokaram Month















