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Friday, February 27, 2026
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    अब बड़ा सवाल, लॉकडाउन बढ़ेगा या…नहीं?

    Now the big question, will the lockdown increase or not
    पहले 21 दिन फिर 19 दिन के लॉकडाउन की घोषणा। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने 40 दिन का लॉकडाउन देश में घोषित किया। दूसरे लॉकडाउन का आखिरी हफ्ता चल रहा है, ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लॉकडाउन का समय बढ़ाया जाएगा या नहीं। इस अहम सवाल के साथ सवाल यह भी है कि अभी तक लॉकडाउन से हासिल क्या हुआ है। क्या ये समय कोरोना वायरस को रोकने में सफल रहा या फिर लॉकडाउन असरकारक नहीं रहा। सवाल दर सवाल कई किये जा सकते हैं लेकिन फिलवक्त देशवासी एक ही सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि क्या आगामी 3 मई के बाद लॉकडाउन का पीरियड आगे बढ़ेगा या फिर उन्हें लॉकडाउन की बंदिशों से राहत मिलेगी।
    लॉकडाउन की समीक्षा और आगे की रणनीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो चर्चा की है। वीडियो चर्चा और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अभी लॉकडाउन का सिलसिला जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि कोरोना संक्रमितों की संख्या मेंं लगातार बढ़ोतरी हो रही है, उसके मद्देनजर पूरी तरह लॉकडाउन हटाना खतरनाक साबित हो सकता है। कोरोना वायरस दुनिया के लगभग 200 देशों में फैल चुका है और मरने वालों का आंकड़ा भी पौने दो लाख को छूने वाला है। पूरी दुनिया में 30 लाख से अधिक लोग इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हैं। पिछले लगभग एक महीने में भारत में भी इस महामारी से 29 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों का आंकड़ा भी 9 सौ से ऊपर जा चुका है। एक-दो छोटे राज्यों को छोड़कर देश के हर राज्य में इस वायरस से पीड़ित मरीज हैं। भारत में आने से पहले यह वायरस दुनिया के कई दूसरे देशों में काफी तबाही मचा चुका था, जिससे भारत को कुछ संभलने का मौका मिल गया। भारत ने इस मौके का फायदा भी उठाया और 24 मार्च को ही पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित कर दिया, जिसे बाद में 19 दिन और बढ़ा दिया। लॉकडाउन के इस समय में भारत कहीं न कहीं इस वायरस को बड़े स्तर पर फैलने से रोकने में कामयाब भी हुआ है।
    लॉकडाउन की दूसरी अवधि में सरकार ने कई रियायतें प्रदान की हैं। पिछले दिनों ही गृह मंत्रालय ने अपने आदेश कुछ शर्तों के साथ छूट का दायरा बढ़ाने का काम किया है। लेकिन जिन जिलों में उसका प्रकोप नियन्त्रण में है वहां इस तरह की छूट देना जरूरी हो गया है जिससे कारोबार भी शुरू हो तथा जनजीवन भी पटरी पर वापिस लौट सके। यद्यपि जैसे कि संकेत मिल रहे हैं उनके अनुसार अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने तो प्रधानमन्त्री से चर्चा के पूर्व ही लॉक डाउन बढ़ाने की मंशा व्यक्त कर दी है। लॉक डाउन के कारण कोरोना अभी तक सामुदायिक संक्रमण में तो नहीं बदल सका किन्तु उसकी श्रृखला चूंकि टूटने का नाम नहीं ले रही है इसलिए ऐसा रास्ता निकालने की जरूरत है जिसमें नियन्त्रण और संतुलन बना रह सके। प्रधानमंत्री से वीडियो चर्चा के दौरान ये बात साफ तौर पर सामने आयी है कि जिन राज्यों में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा अधिक है, उन राज्यों के मुख्यमंत्री अभी लॉकडाउन को खत्म करने के पक्ष में नहीं है। वो चाहते हैं कि अभी लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाया जाए। और ये सही भी है। लेकिन अनेक राज्यों में हालात तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं। वहां सावधानी रखते हुए लॉक डाउन में शर्तों के साथ छूट प्रदान की जा सकती है।
    लेकिन इसके साथ ही ये भी देखना होगा कि सोशल डिस्टेंसिंग को कोरोना से बचाव का सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है, के पालन के प्रति लोगों के चेतना का स्तर आने वाले समय में लगातार बढ़ाना होगा। भीड़भाड़ वाले हमारे देश में सोशल डिस्टेंसिग के प्रति लोगों को जगाए रखना कोई आसान बात नहीं है। ऐसे में थोड़ी सी ढील मिलते ही लोगों के स्वछन्द होने का खतरा है। पिछले दिनों मीडिया के माध्यम से ऐसी तस्वीरें सामने आई थी जिसमें छूट मिलते ही लॉकडाउन की धज्जियां उड़ती देखी गई। यह देख कर दुख होता है कि कई स्थानों पर लोग सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंस बनाए रखने में नाकाम साबित हो रहे हैं, और यह भूल जाते हैं कि सोशल डिस्टेंस को नजरअंदाज करने से वे खुद और अन्य लोग महामारी से संक्रमित हो सकते हैं। सोशल डिस्टेंस एक ऐसा सुलभ नुसखा है जिसे हम कोविड-19 का सुरक्षा कवच कह सकते हैं और हमें तनिक भी इस की लापरवाही नहीं करनी चाहिए ताकि हम अपने और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। सरकारों से भी अपेक्षा की जाती है कि वह सोशल डिस्टेंस को लागू करने के लिए और सख्ती बरतें। समस्त जनता से भी अपेक्षा की जाती है कि वह सामाजिक दूरी के नियम पर पूरी तरह अमल करती रहे।
    किसी की भी लापरवाही और गलती कोरोना को बढ़ा सकती है। खास तौर पर कोरोना के कारण जो क्षेत्र रेड जोन में हैं, वहां के लोगों के लिए तो यह खतरे की घंटी है।जिन शहरों में कोरोना का फैलाव होता जा रहा है उनमें भी कुछ इलाके ही हॉट स्पॉट के तौर पर चिन्हित हुए हैं जो कि घनी बस्तियों में हैं। उन्हें पूरी तरह से सील करने के उपरांत शहर के बाकी हिस्सों में संक्रमण रोकने में सफलता मिली है। लेकिन अभी तक ये समझ में नहीं आ रहा कि आखिर कोरोना कब तक चलेगा और यही सरकार तथा जनता दोनों के लिये बड़ा सिरदर्द है। अभी भी कोरोना को लेकर भ्रम व संश्य की स्थिति बनी हुई है। जिन स्थानों पर संक्रमितों की संख्या काफी कम हैं वहां लॉक डाउन को जारी रखे जाने पर बवाल मचाया जा रहा है। खास तौर पर व्यापारी वर्ग चाहता है कि बाजार खुले जिससे उसका कारोबार चल सके। जनता भी यही चाह रही है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लॉकडाउन तभी कामयाब होगा जब आम लोग इसके प्रति गंभीर होंगे, नहीं तो सरकारों को आगे और लॉकडाउन बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जो देश के बहुत से क्षेत्रों और विकास के कामों के लिए नुकसानदेह होगा।
    स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब देश लॉकडाउन में बंधा हुआ है। देशवासी एक अग्निपरीक्षा से गुजर रहे हैं। कुछ अपवादों को छोड़ दें और कोरोना योद्धाओं पर हुए हमले के मामलों को ज्यादा तूल न दें, तो कमोबेश देश का जनमानस लॉकडाउन की बंदिशों का पालन करता नजर आया है। मगर उसमें अब अधीरता जन्म लेने लगी है कि आखिर कब तक? हालांकि, सोमवार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि आर्थिक स्थिति की चिंता न करें, लोगों की जान बचानी प्राथमिकता है। मगर देश में आर्थिक विषमताओं का दंश झेलने वाले तथा रोज कमाकर घर चलाने वाला तबका अधिक इंतजार नहीं कर सकता। वहीं दूसरी ओर शारीरिक निष्क्रियता से जहां कई तरह के शारीरिक व मानसिक रोग हो सकते हैं, वहीं अवसाद का सिलसिला भी शुरू हो सकता है। जानकारों की मानें तो लॉक डाउन को लम्बे समय तक जारी रखना संभव नहीं है और उसे पूरी तरह से हटा लेना भी घातक होगा। इस उहापोह के बीच मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक का क्या नतीजा निकलता है इस पर देशवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। देश पर कोई भी आपदा या संकट आए तो देशवासियों का फर्ज बनता है कि वे एकजुट होकर मुकाबला करें और सरकार के इसके लिए किए जा रहे प्रयासों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
    राजेश माहेश्वरी
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