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    समाज को बर्बाद कर रही नंबरबाज़ी: पूज्य गुरू जी

    Maharashtra News
    Saint Dr MSG

    सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि कि आज पूरे समाज में नंबरों का चक्कर है। हर कोई नंबर बनाना चाहता है। हमें तो नहीं लगा कि कोई जगह इससे अछूती होगी। चाहे वो छोटा घर भी क्यूं ना हो और चाहे बड़ा दफ्तर ही क्यों ना हो। नंबरों का चक्कर बहुत बड़ा है। हर आदमी चाहता है कि काम करूं तो मेरा नाम होना चाहिए, इसलिए वो दूसरों को अपने साथ जोड़ता है। उनसे पूछकर अपने नंबर बनाता है और उनके नाम तक नहीं लेता। तो ये नंबरबाजी ने घरों को भी बर्बाद किया हुआ है। समाज में भी ये घातक है, क्यूंकि दूसरे के कंधे पर पैर रखकर लोग आगे निकल जाते हैं और वो अपना कंधा सहलाता रह जाता है। तो कभी भी नंबरबाजी नहीं होनी चाहिए।

    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप उस परमपिता परमात्मा को खुश करना चाहते हैं तो दिमाग में ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब, परमात्मा का ही ख्याल होना चाहिए। कहीं आप सोचते होंगे कि मैं इस आदमी को खुश कर लूंगा तो मेरा राम मेरे पर खुश हो जाएगा। ठीक है वचनों पर रहते हुए किसी की मदद करना, दीन-दुखियों का सहारा बनना, किसी भी दिव्यांग का साथ देना, ये भगवान तक जाने के रास्ते हैं, पर चापलूसी करके या आप सोचें कि किसी बंदे को खुश करके चापलूसी के दायरे में, उसकी वाह-वाह करके, उसकी बड़ाई करके, आप परमात्मा तक पहुंच जाएंगे तो आप अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाते हैं कि इंसान को भगवान ने आजाद बनाया है, गुलाम नहीं।

    इसलिए इंसान को आजादी से सोचना चाहिए और सूफियत में, रूहानियत में मुरीद गुलाम होता है सिर्फ अपने ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, सतगुरु, राम का। बीच में और किसी का नहीं। इसलिए कौन क्या है, उसके बारे में ना सोचें, वो उसके कर्म होंगे, तो आपने तो अपने कर्मों को सही करना है, आपने अपने अच्छे कर्म बनाने हैं। जो कोई भी आगे बढ़ रहा है उससे खुश हो जाओ, पर उसका मतलब ये नहीं कि आप पीछे रह जाओ। आप भी आगे बढ़ने के लिए जोर लगाओ, आगे बढ़ने की कोशिश करो। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि रूहानियत में आगे बढ़ने के लिए कभी भी सोर्स को मत ढूंढो। हालांकि सोर्स होते हैं दुनियादारी में बहुत सारे, जिसका सहारा लेकर आगे बढ़ा जाता है। लेकिन राम-नाम के यहां सिर्फ एक ही सोर्स है वो है सुमिरन और सेवा। अपने विचारों का शुद्धिकरण।

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